पापा ने बेटी चोदी भांग खा कर

ही फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी अगली बाप-बेटी सेक्स स्टोरी लेके आई हू. मेरी पहले की स्टोरीस को प्यार देने के लिए थॅंक योउ. जिन रीडर्स ने मेरी पिछली कहानियाँ नही पढ़ी है, वो उनको भी ज़रूर पढ़ ले. चलिए बढ़ते है आज की कहानी की तरफ.

पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं 24 साल की हो गयी हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. मैं पुंजब के लुधियाना शहर में रहती हू, और नौकरी करती हू. मुझे देख कर लड़के और मर्द मेरे दीवाने हो जाते है, और मेरी चुदाई करना चाहते है. लेकिन मैं इतनी आसानी से हाथ नही आती.

ये कहानी कुछ वक़्त पहले की है. मेरे चाचा फॉरिन से आए हुए थे. वो कुछ काम के सिलसिले में आए थे, इसलिए चाची और बच्चो को लेके नही आए थे. उन्हे यहाँ पर 3 दिन का काम था, और वो हमारे घर ही रुके हुए थे.

पहली रात पापा और चाचा साथ बैठे हुए थे. वो हस्स-हस्स कर बातें कर रहे थे. चाचा और पापा दोनो ड्रिंक करते है, लेकिन मम्मी ने उनको पहले से बोल दिया था की ड्रिंक नही करनी है. ना घर पर करनी है, और ना ही बाहर जेया कर. बातों-बातों में चाचा ने पापा से कहा-

चाचा: भाई यार मज़ा नही आ रहा. बोलो ना भाभी से की ड्रिंक करने की पर्मिशन दे दे. तोड़ा सुरूर तो चढ़े.

पापा: तू तो जानता है, वो नही मानेंगी.

चाचा: तो फिर कुछ और कर लेते है.

पापा: क्या करेंगे?

चाचा: यहाँ से थोड़ी डोर एक पकोडे की दुकान है. मस्त भांग के पकोडे बनता है वो. अगर तुम कहो तो थोड़ी ज़्यादा भांग वाले पकोडे लेके अओ?

पापा: हा, फिर तो मज़ा आ जाएगा. जेया ले आ जाके.

फिर चाचा गये, और आधे घंटे बाद पकोडे लेके वापस आए. मम्मी चेक करने आई, और पकोडे देख कर वापस चली गयी. वो नही जानती थी की पकोड़ो में भांग थी. लेकिन मैं जानती थी.

फिर दोनो मज़े से एक-एक करके सारे पकोडे खा गये. उसके बाद वो दोनो हर एक बात पर हासणे लगे. उनकी बेवजह हस्सी देख कर मैं समझ गयी थी की वो नशे में थे. फिर मेरा सोने का टाइम हो गया, और मैं अपने रूम में जाके सो गयी. उस वक़्त 10:30 बजे थे.

तकरीबन 2 बजे मेरे रूम में कुछ शोर हुआ. मेरी नींद खुली तो देखा पापा मेरे रूम के दरवाज़े से अंदर आ रहे थे. वो लड़खड़ा रहे थे. मैं उनको देख कर समझ गयी की नशे की वजह से वो ग़लती से मेरे रूम को अपना समझ कर अंदर आ रहे थे.

दरअसल मेरा और मम्मी-पापा का रूम दोनो बिल्कुल साथ लगते है. तो अक्सर हम एक-दूसरे के रूम में चले जाते है. इससे पहले की मैं पापा को बताती की ये मेरा रूम था, वो मेरे साथ आके बेड पर गिर पड़े. मैने पीछे घूम कर उनको आवाज़ दी, लेकिन पापा उल्टे हो कर बेसूध होके लेते रहे.

मुझे लगा वो नशे में थे, तो सो गये होंगे. इसलिए मैने उनको ज़्यादा नही जगाया, और खुद भी सोने लगी. कुछ ही मिनिट में मेरी नींद लग गयी. कुछ देर बाद मेरी नींद फिर से खुली. मुझे अपनी जांघों पर कुछ महसूस हो रहा था. मैने ध्यान से देखा, तो पापा मेरी जांघों पर हाथ फेर रहे थे.

मैं लेफ्ट साइड मूह करके लेती हुई हुई थी, और मैने पाजामा और त-शर्ट पहने हुए थे. पापा मेरे पीछे चिपक के लेते हुए थे, और मेरी जांघों पर हाथ फिरा रहे थे. इससे पहले मैं उनको कुछ कहती, वो बोले-

पापा: जानू आज बहुत मॅन कर रहा है. लेलो ना इसको अपनी छूट में.

मेरे पापा मेरी मम्मी को प्यार से जानू कहते है. ख़ास कर जब वो उनको छोड़ते है, तो जानू-जानू कह कर सब करते है. उनके मूह से जानू शब्द सुन कर मैं समझ गयी की वो मुझे मम्मी समझ रहे थे. आप सोच रहे होंगे की मुझे ये सब कैसे पता. तो जनाब मैने च्छूप कर काफ़ी बार मम्मी-पापा की चुदाई देखी हुई है.

अब मेरे पास दो रास्ते थे. या तो मैं पापा को होश में लाती, और उनको उनके कमरे में जाने के लिए कहती. या फिर उनका मोटा लंड जो मुझे मेरी गांद पर महसूस हो रहा था, उसको अपनी छूट में लेके मज़ा करती.

दोस्तों मैं कोई दूध की धूलि तो हू नही. मुझे लंड लिए को काफ़ी टाइम हो गया था, और मैं फिंगरिंग करके गुज़ारा कर रही थी. तो मैने सोचा क्यूँ ना लंड का मज़ा ले ही लू. वैसे भी पापा होश में तो थे नही, तो उनको कुछ याद तो रहने वाला नही था.

आख़िरकार मेरी वासना की आग रिश्तों के आयेज जीत गयी, और मैने पापा से चूड़ने का फैंसला किया. फिर मैने अपना हाथ पापा के हाथ पर रखा, और उनके हाथ को कपड़ों के उपर से ही अपनी छूट पर रख दिया.

मेरा ऐसा करना पापा के लिए ग्रीन सिग्नल था. पहले पापा मेरी छूट को कपड़ों के उपर से रगड़ने लगे. इससे मैं गरम होने लगी, और मेरे मूह से सिसकियाँ निकालने लगी. फिर पापा ने मेरे पाजामे में हाथ डाल लिया, और पनटी में हाथ डाल कर मेरी छूट रगड़ने लगे. इससे तो मैं पागल होने लगी.

उनके हाथो की मूव्मेंट के हिसाब से मैं अपनी गांद आयेज-पीछे करने लगी. इससे मेरी गांद उनके खड़े लंड पर बार-बार डब जाती. थोड़ी देर बाद पापा ने मेरा पाजामा पनटी समेत नीचे खींचना शुरू किया. मैने गांद उठा कर उनकी हेल्प की.

अब मैं नीचे से नंगी थी. पापा भी जल्दी से नीचे से नंगे हो गये. मुझे उनका लंड अपने चूतड़ पर टच होता महसूस हो रहा था. फिर पापा ने मेरी एक टाँग उठाई, और अपनी टाँग के उपर सेट कर ली.

फिर उन्होने अपना लंड हाथ में लिया, और मेरी छूट पर सेट किया. तभी मैने पीछे देखा, तो उनकी आँखें बंद थी. मतलब अभी भी वो सब नींद में कर रहे थे.

फिर पापा ने ज़ोर का धक्का मारा, और उनका लंड सरकता हुआ पूरा अंदर चला गया. मेरी ज़ोर की चीख निकल जाती, अगर मैं अपने मूह को दबाती नही तो. अगर चीख निकलती, तो पापा के जागने का ख़तरा था.

3-4 बार पापा ने ऐसे ही पूरा लंड बाहर निकाल कर अंदर डाला. मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन मैं बस ह्म ह्म कर रही थी. फिर पापा ने एक हाथ मेरे चुचे पर डाला, और उसको दबाने लगे. नीचे से उन्होने धक्के मारने शुरू कर दिए.

कुछ ही देर में उनका लंड छूट में अड्जस्ट हो गया, और मुझे बहुत मज़ा आने लगा. वो छोड़ते गये, और मैं आ आ करने मज़े लेती रही. मैं भी गांद रिदम में पीछे कर रही थी, ताकि लंड पूरा अंदर जाए.

कमरे में ठप-ठप और आ आ की आवाज़े आ रही थी. 20 मिनिट पापा ने मुझे टाँग उठा कर छोड़ा. इस दौरान मैं 2 बार झाड़ गयी. फिर मुझे अपनी छूट में पापा का गरम-गरम लावा महसूस हुआ. उन्होने पूरा माल मेरी छूट में खाली कर दिया, और मूह दूसरी तरफ करके सो गये.

मैने सोचा कोई बात नही, कल आंटी-प्रेग्नेन्सी पिल ले लूँगी. फिर मैं उठी, कपड़े पहने, और साथ वाले रूम में चली गयी. मम्मी ने पूछा तो मैने कहा की पापा मेरे रूम में सोए है, इसलिए आई हू. फिर मैं वहाँ सो गयी.

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