बेटी को मा बना कर चोदा

तो वरुण की गांद चुदाई हो चुकी थी, और फिर शिखा को भी छोड़ कर मैने उन दोनो को अपना माल पिलाया. फिर करीब 5-10 मिनिट रेस्ट किया. उसके बाद शिखा को रेडी होने का इशारा किया.

विवेक: शिखा मेरी जान, चल जल्दी से रेडी हो जेया यार. अब मुझसे और वेट नही हो रहा.

वरुण: यार भैया अभी जस्ट आप झाडे हो, और दूसरी बार झाडे, और आपको फिरसे चुदाई करनी है?

शिखा: बस यही तो बात है वरुण बेटा मेरे हज़्बेंड की. इनका हथियार इतनी जल्दी नही तकता. देखो कैसे रेडी है फिर से मेरी छोड़ने को.

विवेक: शिखा अब देर मत कर यार. मुझे बस सिद्धि को छोड़ने दे.

वरुण: ये सिद्धि कों है?

शिखा: मेरी मा है सिद्धि.

वरुण: क्या भैया तेरी मा को भी छोड़ते है? आंटी भी यही है क्या? पहले क्यूँ नही बताया ईडियट?

शिखा: अर्रे रुक जेया, सब समझ आ जाएगा की तुझे इस लंड का सुख देने के लिए कितनी बड़ी डील की थी मैने कुत्ते. बताओ भैया कैसे रेडी होना है? मुझे तो कोई आइडिया नही है.

विवेक: तू जेया उसकी तरह सूट पहन और मेकप वग़ैरा कर. और फिर खुद को सिद्धि समझ कर मेरे लंड से मज़े लूटना, जैसे शिखा लूट-ती है वैसे ही. बस अब तुझे सिद्धि बनना है. तब तक मैं फ्रेश हो कर लंड सॉफ कर लू.

वरुण: भैया लंड तो मैं ही सॉफ कर दूँगा, अगर आप बोलो तो.

शिखा उठी, और बाल सेट किए. फिर मैं वॉशरूम गया, ब्रश किया, दोबारा शवर ओं किया और बढ़िया से नाहया. मेरी बॉडी एक-दूं फ्रेश हो गयी. बाहर निकला तो वरुण मोबाइल चला रहा था. मैं भी गया और वहीं सोफे पर बैठ गया. फिर शिखा के आने का वेट करने लगा.

विवेक: वरुण वो बाग में एक टॅबलेट पड़ा है, निकाल कर दे, और पानी भी देना.

वरुण ने ला कर वियाग्रा टॅबलेट दिया और खा लिया मैने. वो बस मेरे लंड को देख रहा था.

विवेक: चूस ले ब्स्दक, चूस ले जब तक वो नही आती. आराम से धीरे-धीरे चूस खड़ा कर इसको.

वरुण स्माइल करते हुए घुटने के बाल बैठ गया और मेरे लंड को टाइट पकड़ कर धीरे-धीरे उपर-नीचे करने लगा. 2-3 मिनिट बाद उसने मूह में ले लिया, और धीरे से चूसना शुरू किया. लंड की स्किन पूरी निकाल कर पीछे मेरे लंड का टोपा चूसने लगा, जीभ से चाटने लगा. बहुत मज़ा आ रहा था, और गुदगुदी भी हो रही थी.

साला बहनचोड़ जीभ से पता नही कैसे टोपे को पूरा रौंद दबा कर चूस्टा था. इतने में शिखा ने गाते खोला, और ब्लू सूट में बाहर आई. क्या लग रही थी मदरचोड़ साली हाए. लंबी छोटी, बिल्कुल अपनी मा की तरह.

विवेक: ऑश सिद्धि, बहुत सेक्सी लग रही है यार. इधर मेरे पास आ, उधर क्यूँ खड़ी है?

शिखा: मेरा क्या काम अब भैया? आप तो अपने यार के साथ पहले ही शुरू हो गये.

शिखा मेरे पास आई तो मैने उसे अपने पास खींचा, और गोद में बिता लिया. वरुण को साइड में बैठने को बोला.

विवेक: उफ़फ्फ़ सिद्धि मैं बता नही सकता कब से तुम्हारे होंठो को चूसने को, तुम्हारा दूध पीने को, तुम्हारी छूट पीने को तरस रहा है तुम्हारा विवेक.

शिखा मेरे गाल पर थप्पड़ मार्टी है धीरे से: ची यार भैया, मुझे बहुत अजीब लग रहा है ऐसे आपकी बातें सुन कर. बहुत गंदा बोल रहे हो यार आप मुम्मा के बारे में.

वरुण: ऑश तो रॉल्प्ले ये होता है?

विवेक: अब बस करो ना सिद्धि मेरी जान. अब मत तड़पाव, चूसने दो ना, बुझाने दो मुझे अपनी प्यास.

मैने शिखा को अपने पास खींचा, और उसके होंठो को चूसने लगा ज़ोर-शोर से भर-भर के. हाए यार, क्या बतौ ऐसे तो बहुत चूज़ है उसके होंठ, पर आज तो पता ही नही एक अलग ही मज़ा आ रहा था.

शिखा भी मेरा चेहरा पकड़ कर फुल सपोर्ट दे रही थी. साइड में बैठा वरुण हमे देख रहा था, और मेरे लंड को धीरे-धीरे हिला रहा था. मैने शिखा के बूब्स को सूट के उपर से ही ज़ोर से पकड़ा. मेरी उंगलियाँ उसके बूब्स में इतनी ज़ोर से गढ़ गयी, की उसकी आअहह निकली. उसने मेरे हाथो पर मारना स्टार्ट कर दिया. पर मैने ना तो बूब्स छ्चोढे, और ना किस तोड़ी.

फिर एक झटके में शिखा को सोफे पर नीचे किया, और मैं उपर आ गया. फिर खिसक कर घुटनो पर बैठ गया, और शिखा भी कमर तक सोफे पर थी, बाकी नीचे. एक हाथ घुमा कर मैने शिखा को पीछे से पकड़ा, और एक हाथ से बूब्स दबाना शुरू किया. उसके होंठ छ्चोढे और फिर उसके चेहरे पर गर्दन पर किस्सस की बारिश कर दी.

शिखा: आअहह भैया, चूसो मुझे.

मैने किस करते-करते उसके गाल पर एक थप्पड़ मारा धीमे से, तो उसको याद आया-

शिखा: आअहह विवेक, एस चूसो अपनी सिद्धि को. खा जाओ पूरा.

सिद्धि सुन कर और ऐसी आहों के साथ सुन कर जोश और बढ़ने लगा. लंड भी तंन से उपर होने लगा. बूब्स को सूट के उपर से ही मूह में भरने लगा, बीते करने लगा.

शिखा: श मा मेरी, एस विवेक. उफफफ्फ़ कुछ करो, मैं मॅर जौंगी वरना. बहुत मज़ा दे रहे हो यार.

मैने सूट कंधे से खींच कर उतरा, तो ज़्यादा नीचे तो नही आया, पर हा, उसके बूब्स आधे खुल गये, तो आधे मैने खींच कर बाहर निकाले. अब सूट टाइट था, तो बूब्स काससे-काससे उपर थे, और अब उन्हे चूसने में और मज़ा आ रहा था. क्यूंकी मूह में आचे से भर रहे थे.

शिखा अपने बालों में हाथ घुमा रही थी, तो कभी चेहरे पर. वो बस मज़े लिए जेया रही थी. मेरा मूह बूब्स में घुसा रही थी, और बीच-बीच में मूह पकड़ कर किस कर देती थी.

वरुण देख कर हैरान था इतना पॅशनेट सेक्स. उसके एक्सप्रेशन से पता चल रहा था, की उसने पहले कभी नही देखा ऐसा सेक्स. मैने शिखा की सलवार का नाडा खोला, और फिर सब कपड़े निकलवा दिए. फिर उसे भी पूरा नंगा कर दिया.

विवेक: हाए सिद्धि, तेरा ये जिस्म पागल कर रहा है मुझे.

मैने शिखा को सोफे के कॉर्नर पर खींचा और उसकी छूट भर ली मूह में.

शिखा: हाए रे!

मैं शिखा की छूट को मूह में भर-भर के चूस रहा था, और किसी कुत्ते की तरह जीभ से लापर-लापर चाट रहा था.

शिखा: ऊ मा, विवेक, काटो मत यार प्लीज़ छूट को.

5 मिनिट तक उसकी छूट चूसी मैने बढ़िया से खूब अंदर तक, और अब वो पूरी तरह से गरम थी. वो लंड के लिए चिल्ला रही थी. मैं उठा और लंड उसकी छूट पर रखा. फिर उसकी कमर पकड़ कर एक झटके में लंड को हचक कर पेल दिया छूट में.

शिखा: आअहह फक फक, बहनचोड़ आराम से.

मेरी उसकी कमर पर ग्रिप अची थी, और वो उपर नही जेया सकती थी, तो लंड सात सात सात पेल रहा था उसकी छूट में.

शिखा: आ आहह आहह विवेक.

विवेक: प्लीज़ मत रोको मुझे. सिद्धि छोड़ लेने दो तुम्हारी छूट को. हाए क्या छूट है सिद्धि तेरी, बहुत मज़े दे रही है साली.

शिखा: हा छोड़ो, आहह आ.

वरुण साइड में बैठा देख रहा था हम दोनो को. मैने फिर से उसको पकड़ कर खींचा, और वही शिखा के पेट पर सिर रख दिया, और शिखा की छूट पेलने लगा ज़ोर-ज़ोर से. मुझे बहुत जोश चढ़ रहा था शिखा की सिसकियाँ सुन कर, और उसको सिद्धि बना कर छोड़ने में. लंड एक-दूं कड़क हो रखा था.

विवेक: रोहित भाई देखो, ऐसे करते है चुदाई एक आचे माल की. क्या आदमी हो यार तुम! इतनी अची बीवी है तुम्हारी. इतनी ग़ज़ब छूट है साली की, छोड़-छोड़ कर फाड़ डालता मैं तो अगर सिद्धि मेरी बीवी होती.

शिखा ने सिर उपर उठा कर देखा, तो मैं ये सब वरुण से बोल रहा था. उसका सिर शिखा के पेट पर छूट के पास दबा कर.

शिखा: अर्रे ये बहनचोड़ नल्ला है साला. इसके लंड में कोई दूं नही है. विवेक तुम्हारा लंड हाए मेरी छूट को आज पहली बार रग़ाद रहा है, एक अछा तगड़ा लंड. देख साले कुत्ते, ऐसे होती है एक माल की चुदाई. सेयेल तेरी जैसी नही की 2 मिनिट में फूसस हो जाए.

विवेक: आअहह सिद्धि, तू सच में बहुत ग़ज़ब है, और तेरी छूट के क्या कहने. मेरा लंड थमने का नाम नही ले रहा है.

शिखा: थमना भी मत विवेक. बस छोड़ो मुझे. आज पहली बार एक आचे लंड से चुड रही है मेरी छूट. यार बस पेलते रहो मुझे.

शिखा की बातों से लग रहा था की अब वो झड़ने के करीब थी, और उस पर गर्मी फुल चढ़ चुकी थी. वो कुछ भी बड़बड़ा रही थी. पर जो भी हो, उसकी बातों से मुझे बहुत जोश चढ़ रहा था. सो मैने उसके बूब्स पकड़ कर, उसके उपर झुक कर, और नीचे से उठ कर ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी.

शिखा: अया आअहह आअहह छोड़ सेयेल.

फिर शिखा ने मेरा लंड बाहर निकाला, और उसकी छूट से मूट की धार निकली. शिखा अपनी कमर उपर उठा कर मूट रही थी, और अपने हाथ को अपनी छूट पर घुमा रही थी.

शिखा: भैया मज़ा आ गया आज तो. मेरी टेन्षन निकाल दी.

विवेक: पर मेरी टेन्षन तो अभी बाकी है ना.

शिखा को पलट कर उसकी गांद पर लंड टीकाया और पेल दिया.

शिखा: आहह बहनचोड़, फ्री मैं किसी और की बीवी छोड़ने को मिल रही है. तो क्या आज सारे अरमान पुर करेगा कुत्ते! गांद मारने से पहले पूच तो लेता. आज तक अपने इस कुत्ते नमार्द पति को भी नही छोड़ने दी गांद, और तूने एक झटके में लंड उतार दिया रे.

विवेक: तेरा पति ना-मर्द है ना सिद्धि. इसलिए तो तू प्यासी है. साली मैं आज तेरे पुर च्छेद खोल दूँगा जान. चिंता मत कर, आज के बाद तू कभी प्यासी नही सोएगी, और कभी अपने पति के साथ नही सोएगी.

शिखा: सौंगी तो अपने पति के ही साथ, और अब से तुझे अपना पति बना लूँगी विवेक छोड़ एयेए आआ हाए रे.

विवेक: सिद्धि दीदी, तेरा तो मैं कुछ भी बन जौंगा यार. पति बना ले, कुत्ता बना ले, बस तेरी छूट और तेरी गांद, हाए रे क्या गांद है साली तेरी. बस ये दोनो हर रोज़ पेलने दे. फिर चाहे जो बना लेना सिद्धि दीदी.

मैं शिखा के उपर झुक गया पूरा, और उसकी गर्दन पर बीते करने लगा, किस करने लगा, और ठप ठप ठप पेल रहा था उसकी गांद को. वरुण हमे देख रहा था, और उसका भी लंड खड़ा हो गया. वो हिला रहा था अपना लंड. मैने उसको पकड़ा और शिखा के मूह के आयेज कर दिया.

विवेक: सिद्धि मेरी रांड़, देख तेरे पति का लंड. तेरी छूट और गांद किसी और से बजते देख इसे भी जोश आ गया है. ज़रा चूस तो इसे.

शिखा ने मुझे देखा बड़ी-बड़ी आँखों से गुस्से से, जैसे माना कर रही हो, की वरुण का बार-बार नही चूसूंगई.

विवेक: अर्रे अब मुझे क्या देख रही हो सिद्धि जान? तुम्हारे पति का लंड है, वो जब चाहे चूसो.

शिखा: पर अब तो तू मेरा पति है ना विवेक? और तेरे अलावा किसी और का लंड नही चूसूंगई अब मैं. बस तू छोड़ मुझे.

वरुण वहीं शिखा की साइड बैठ गया, और अपना लंड हिलता रहा. मैने उसकी गांद को छोड़ना जारी रखा, और अब बहुत अंदर तक पेल रहा था लंड को. कसम से बस शिखा की बातें सुन कर ही इतना जोश आ रहा था मुझे. अगर मुझे सच में सिद्धि की छूट और गांद मिल गयी, तो कहीं मॅर ना जौ छोड़ते-छोड़ते.

शिखा: विवेक छोड़ो मुझे. मेरा रस्स निकालने को है. फक मे.

विवेक: हा सिद्धि, मैं भी झड़ने को हू सिद्धि मेरी रंडी, मेरी कुटिया, चुड ले आज मुझसे.

मैने ज़ोर-ज़ोर से लंड पेलना चालू रखा और एक झटके में पूरा लंड उसकी गांद में उतार दिया एंड तक. फिर रुक कर उसकी गांद में ही झड़ने लगा, और शिखा की छूट भी पानी छ्चोढ़ दी. झड़ने के बाद भी लंड में हल्का टाइटनेस था, तो मैं धक्के पेल रहा था गांद में.

शिखा: बस करो विवेक, तुमने तो अपनी सिद्धि की छूट और गांद दोनो फाड़ दी आज यार. अब तो रुक जाओ.

हम दोनो वहीं वैसे ही सोफे पर पड़े रहे हानफते हुए.

वरुण: यार शिखा ये चुदाई देख कर तो बहुत मज़ा आया. यार भैया क्या छोड़ते है तुझे फुल ताबड़तोड़, और तू भी साली क्या चुड्ती है. लंड पूरा ले लेती है और बनती है कितनी शरीफ साली रंडी.

शिखा ने वरुण की तरफ फेस घुमाया और उसके पैर पर मारा स्माइल करते हुए.

वरुण: भैया मुझे भी ऐसे चूड़ना है. ंतलब रॉल्प्ले करना है. आप मेरे बड़े भैया बन कर मुझे छोड़ोगे क्या प्लीज़? मुझे बहुत मॅन होता है की भैया मेरी गांद मारे. प्लीज़ भैया ये फॅंटेसी पूरी कर दो मेरी.

विवेक: शिखा तू ये सब क्या-क्या बोल रही थी चुदाई के टाइम?

शिखा: अर्रे कुछ नही भैया. मैने बहुत बार अपनी मा को उस कुत्ते मेरे बाप को गालियाँ देते हुए सुना है, की अच्छे से नही छोड़ता है, बहुत छ्होटा है तेरा, मेरी प्यास नही बुझती आंड ऑल. तो बस अभी चुदाई के टाइम वो सारा फ्रस्ट्रेशन और गुस्सा निकाल दिया.

विवेक: तेरे ब’दे वाले दिन जब मैं रुका था, तब मैने भी सुनी थी तेरी मा की सिसकियाँ और तेरे बाप को जो गालिया बाकी थी तेरी मा ने.

शिखा (शॉक्ड): क्या सच मेइज! मदरचोड़ मेरी मा को मेरे ब’दे पर भी छोड़ा? मेरे ब’दे पर भी गालियाँ पड़ी उसे मेरी वजह से?

मैने शिखा को हग किया और वरुण को भी. फिर हमने 30 मिनिट रेस्ट के बाद वरुण की चुदाई करके उसकी फॅंटेसी पूरी की. वैसे मुझे लौंदे छोड़ने में कोई मज़ा नही आता, पर वरुण साला ब्लोवजोब बहुत मज़ेदार देता है. तो बस उसी मज़े के चक्कर में उसे छोड़ देता हू.

error: Content is protected !!