सेक्स स्टोरी अब आयेज-
क्या रिया ने दीपक के मॅन में उसकी मा के लिए काम वासना के भाव जगा दिए थे?
अब सॅटर्डे का दिन ऐसे ही बीट गया. रात में हमने रोल-प्ले किया. रोल-प्ले की स्टार्ट उसके नील बन के मुझे छोड़ने से हुई आंड कुछ समय बाद जब मैने सोचा की मैं सास बन के उससे चुड़ूँ, तो वो बहुत एग्ज़ाइटेड हो गया.
आपको पता ही होगा मैं पहले भी इन्सेस्ट कर चुकी थी. पर दीपक के लिए ये न्यू टेरिटरी थी. अपनी मा के बारे में सुन के मुझे ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगा और अपना सारा माल मेरे चेहरे में गिरा दिया.
सुबह हुई, मैने देखा की मेरी सास को फीवर हुआ था. ज़्यादा नही, माइल्ड फीवर था. वो तो आज सनडे था तो सब लोग घर में थे. इस सोसाइटी में म्र्स मिश्रा डॉक्टर थी तो उनको बुलाया. उन्होने चेक-उप किया और बोला-
म्र्स मिश्रा: ज़्यादा कुछ नही, बस माइल्ड फीवर है, तोड़ा परहेज़ करना. बाकी मैने दवाई लिख दी है. एक काम करो मनीषा, तुम मेरे साथ चलो. शर्मा जी माइल्ड फीवर की मेडिसिन उनके घर में रखते है.
तो टेल योउ, शर्मा जी का खुद का मेडिकल स्टोर था. हम दोनो उनके घर के पास आए और बेल रिंग की. कुछ देर बाद डोर ओपन हुआ, देखा रोहन था. पूरा नंगा. वो तो अपने आप को च्छुपाने की कोशिश भी नही कर रहा था. रोहन ने हुमको देखा और बोला-
रोहन: सासू मा, आज सुबह-सुबह आपके दीदार!
म्र्स मिश्रा (रोहन का लंड पकड़ते हुए): दामाद जी, बस एक छ्होटी सी एमर्जेन्सी थी. वैसे पापा कहाँ है?
रोहन: पापा तो काम पे चले गये.
मैं सोच रही थी की ये रोहन क्या पहुँची हुई चीज़ है. लेकिन मुझे जानना था रोहन नंगा था तो प्रिया भी आस-पास होगी. प्रिया दिखने में हॉट थी. अब मेरी आँखें प्रिया को ढूँढने लगी. तभी मैने देखा, किचन से मधु आंटी एप्रन में हमारी तरफ आई.
मैने जो देखा वो मेरी सोच से पूरा उल्टा निकला. अब शॉक जैसा रहा नही था कुछ. मधु आंटी एप्रन में थी, सिर्फ़ एप्रन में. जो महिला सार, मंगलसूत्रा, चूड़ी पहन एक आदर्श ग्रहनी का प्रतीक लगती थी, उनका ये वाइल्ड रूप वो वाकाई सोच से परे था.
मधु आंटी: अर्रे देखो कौन आया है!
म्र्स मिश्रा: अर्रे दीदी, कैसे है आप?
मधु आंटी: कितनी बार बोला है दीदी नही, मधु बोला करो.
म्र्स मिश्रा: ठीक है. वैसे शर्मा जी, एसेन्षियल मेडिसिन्स कहाँ रखते है?
मधु आंटी: क्या हुआ?
मैं: अर्रे आंटी, मेरी सास जी की तबीयत खराब है.
बात-चीत चल रही थी, मेरी नज़र आंटी के हाथ में गयी. वो रोहन का लंड हिला रही थी और रोहन का हाथ उनकी आस चीक्स में था. फिर हमने वहाँ से मेडिसिन ली. जाते समय मधु आंटी मेरे पास आई, मुझे हग किया और कान में बोली-
मधु आंटी: वेलकम तो थे सोसाइटी.
इतना बोलते ही उन्होने मेरी आस ग्रोप की. जाते समय भी वो मेरे को स्माइल दे रही थी. अब मुझे याद आया, मेरी सास इनके और सुमन आंटी के साथ ज़्यादा रहती थी. मेरी सास… फिर मैने सोचा की मैं ज़्यादा ही सोच रही थी. रूम में आई तो रिया ने खाना बनाया था. खाना खाने के बाद मैं सास के रूम में गयी, उनको दवाई दी.
फिर मैने देखा उनको पसीना आया हुआ था. तो मैने उनको बोला की मैं उनका शरीर गीले कपड़े से सॉफ कर डू. फिर मुझे ध्यान आया, क्यूँ ना दीपक को टीज़ किया जाए. मैं एक बाल्टी वॉर्म वॉटर आंड एक कपड़ा लाई. ये लाते समय मैने दीपक को बोला की वो मेरे साथ आए और रूम के बाहर से देखे.
वो कन्फ्यूज़ था पर फिर भी मेरे पीछे-पीछे आ गया. मैं सास के लिए चेंज ऑफ क्लोद्स भी लाई थी. मैं जब उनके कपड़े ला रही थी तो मैने उसमे अपनी सेक्सी-सेक्सी ब्रा-पनटी डाल दी. फिर उन्होने अपने कपड़े उतरे.
देखो वो मेरे सामने नंगी थी, क्यूंकी उनके टाइम में गर्ल ओं गर्ल उतना नही था. शायद उनको पता ना हो. लेकिन उनका ये बदन देख के मैं भी एग्ज़ाइटेड हो गयी थी. मेरा ये हाल था तो बाहर दीपक का क्या हो रहा होगा? मैने पहले उनकी पीठ से पसीना सॉफ किया. उनकी कमर का वो कर्व बहुत सेक्सी लग रहा था.
अब आयेज की बारी आई. आयेज मैने चेस्ट से स्टार्ट किया. मैने कपड़ा ऐसे पकड़ा था की थोड़े हाथ से मैं उनके बूब्स महसूस कर साकु. वो भी इससे तोड़ा उत्तेजित हो रही थी पर बोल नही सकती थी. उनके बड़े-बड़े बूब्स क्या लग रहे थे! मैने एक आँख से बाहर देखा तो पता चला की दीपक हमको देख के अपना लंड हिलने लग गया था.
ये देख के मुझे लगा की जो काम मैं कर रही थी, वो सक्सेस्फुल हुआ. फिर मैने उनके बाकी के शरीर से भी पसीना सॉफ किया. सॉफ करते-करते मेरी नज़र उनकी छूट में गयी. उनकी छूट के बाल ट्रिम्म्ड थे. जो इंसान सेक्षुयली इनॅक्टिव है या तो वो वहाँ के बाल हाइजीन के वजह से पुर रिमूव कर देता है, या पुर वैसे ही होते है. पर ट्रिम्म्ड ये इशारा कर रहा था की कुछ आड्वेंचर्स यहाँ भी चल रहे थे.
तभी वो अपने कपड़े पहनने लगी तो उन्होने मेरी वाली ब्रा-पनटी देखी, बोली-
सास: बेटा, ये तुम ग़लती से ले आई हो.
मैं: सॉरी मा जी, मैं ग़लती से अपने ले आई.
सास: बेटा, तू ये सब पहनती है?
मैं: हा मा जी, ये आपके बेटे को ऐसे ही पसंद आते है.
सास (स्माइल करते हुए): अछा, ये बात है. सुन बेटा, ये मुझे ये फिट नही आएँगे तो मेरे वाले ले आ.
मैं: ठीक है.
मैं उनके रूम से बाहर आई. देखा दीपक एक बार झाड़ चुका था, उपर अभी भी हिला रहा था.
मैं: तो पति देव, कैसा लगा आज का प्रोग्राम?
दीपक: प्रोग्राम ख़तम कहाँ हुआ? 2 मिनिट रुक के जाना लेने के लिए, तब तक मैं जी-भर के देख लू.
सास (अंदर से छूट में हाथ लगते हुए): यार, आज मनीषा बेटी ने तो मुझे गरम कर दिया. सुमन और मधु को बताना पड़ेगा. वैसे आज कुछ सर्प्राइज़ देने वाले थे. अब वो सर्प्राइज़ ठीक होने के बाद ही मिलेगा.
ये बात हम दोनो ने भी सुन ली.
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