बेटे के सामने चूत चाट कर मुझे चोदा ननदोई ने

हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिंकी है और मै गोंडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 25 साल होगी। मै आप सभी का  में स्वागत करती हूँ। मै  कि नियमित पाठिका रही हूँ। आज मै आप सभी को अपने आवारा और लौंडियाबाज़ ननदोई से चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ। मै देखने में बहुत ही सेक्सी हूँ। मेरी बड़ी बड़ी आंखे, लाल लाल भरे हुए गाल, और मेरे होठ तो बहुत ही रसीले और काफी पतले है। एक बार जो मुझे ठीक से देख लेता है वो तो मेरा दीवाना हो जाता है। और मेरे मम्मो की बात करे तो उसकी तो बात ही अलग है, मेरी चुचियाँ बहुत ही मुलायम बिल्कुल मक्खन की तरह, और काफी सुडोल जो देखने में बहुत ही अच्छा लगता है। मेरी चूत तो देखने लगो तो मन नही करता है कि कहीं अलग देखे। क्योकि मेरी चूत बहुत ही गोरी है और साथ ही साथ मै अपने चूत को हमेसा साफ ही रखती हूँ क्योकि मेरे पति को झांटे अच्छी नही लगती है। मेरी शादी को तीन साल हो गया है और मेरे एक ढेड साल का लड़का भी है।
जब मेरी शादी हुई थी, तो मेरे पति रोज मेरी चुदाई करते थे और मेरी चूत को बड़े मजे से चोदते थे। लेकिन जब से मुझे लड़का हुआ है, ना तो ठीक से मेरी चूत को चोदते है और ना ही ज्यादा मेरी तरफ ध्यान देते है। ऐसा लगता है कि अब मेरी चूत पहले से ढीली हो गयी है और मेरे पति को ज्यादा मजा नही आता है मुझे चोदने में इसीलिए वो अब मुझे बहुत ही कम चोदते है। कभी कभी जब उनका बहुत ज्यादा मूड रहता है, तो ही मुझे चोदते है। आप ये कहानी  पर पढ़ रहें है। कभी कभी तो मै इतनी जोशीली हो जाती हूँ कि मुझे उंगलियो और सब्जियो [जैसे -बैगन , तरोई , चोटी लौकी ] और बहुत से सामान से मै अपने को शांत करना पड़ता है। एक बार तो मै अपने बच्चे को दूध पिला रही थी, वो मेरी चूची को दबा दबा के पी रहा था, कुछ ही देर में मै जोश में आने लगी थी, और बच्चे को दूध पिलाते हुए ही मै अपने बुर को मसलते हुए उसमे उंगली करने लगी थी।
बहू बार तो मै सोचती हूँ कोई दूसरे मर्द को फसा लेती हूँ, ताकि वो मेरी चुदाई ठीक से करे। मेरा तो बहुत मन करता है चुदवाने का लेकिन मुझे कोई जल्दी मिलता ही नही है। मेरे पति का कोई छोटा भाई भी नही है वरना मै उसे ही पटा लेती और उससे खूब चुदवाती। मैंने तो कभी भी नही सोचा था कि मेरे ननदोई जी मेरी चूत को चाट चाट कर चोदेंगे।
कुछ दिन पहले कि बात है, मेरी ननद प्रेग्नेंट थी और उसकी डिलेवरी होने वाली थी। तो मेरी ननद ने मेरे पास फोन किया और मुझसे कहा – “भाभी आप मेरे घर कुछ दिनों के लिये चली आईये। मेरी डिलेवरी होने वाली और आप को पता है कैसे की होता है”। मैंने अपनी ननद से कहा – “मै तुम्हारे भैया से पूछ लूँ फिर बताती हूँ”। मैंने अपने पति से पूछा – तो उन्होंने कहा ठीक है चली जाओ कुछ दिनों के लिये।
मै दूसरे ही दिन अपने ननद के घर पहुँच गयी। मुझे अपने ननदोई के बारे में पता नही था कि वो बहुत बड़े सीटीयाबाज़ आदमी है। जब मै वह पहुँच तो मेरे ननदोई जी बाहर ही बैठे थे। उन्होंने मुझसे कहा – “आप आ गयी ,मै आप ही का इंतज़ार कर रहा था”। आइये अंदर चलिए, उनकी नजर मेरे चहरे और मेरी चूची से हट ही नही रही थी। मुझे लगा कि लगता है ननदोई जी को बहुत दिनों से चूत नही मिला है इसलिए ये मेरी चूची को निहारे जा रहें थे। मै अंदर चली आई, अपनी ननद से मिली और उनके घर के सभी सदस्य से मिली। मेरे ननद ने मेरे लिये एक अलग कमरा खाली कर दिया था। मैंने अपना सामान उसी कमरे में रख दिया। और थोड़ी देर आराम किया। कुछ देर बाद मैंने अपने कपडे बदले फिर मै बाहर आई।
मैंने अपने ननद से बहुत देर तक बाते किया, और फिर मैंने उससे पूछा कोई काम हूँ तो बताओ, तो मेरी ननद ने कहा – “बस आप मेरे पास रहिये और कोई काम नही है”।
एक दिन मै अपने लड़के को लिये हुए अपनी ननद के पास बैठी हुई थी कुछ देर में मेरा बेटा रोने लगा और उसी समय वहां मेरे ननदोई जी आ गये। उन्होंने कहा – “बच्चे को लाओ मै ले लेता हूँ। जब मै उनको अपना बचा दे रही थी, तो ननदोई जी बच्चे को लेने के बहाने से मेरी चूची को चुने लगे और हल्का सा मेरी चीची को दबा भी दिया”। मै जान गई कि ये बहुत दिनों से किसी भी चूत की चुदाई नही कर पाए है, इसीलिए मुझे चोदना चाहते है। मैंने भी सोचा जब टाइम मिलेगा तो मै भी चुदवा लूँगी क्योकि बहुत दिनों से मैंने भी अपने पति नही चुदवाया था।
एक दिन मै अपने कमरे में बैठो हुई थी, और मेरे बेटे को देने के लिये मेरे ननदोई जी मेरे कमरे में आये, वो मेरे बच्चे को इसीलिए हमेसा लिये रहते थे की कभी ना कभी तो उनको टाइम मिल ही जायेगा। । वो मेरे कमरे में आये और मेरे बेटे को मुझे देने लगे, तो मेरे साडी का किनारा उनके हाथ के घड़ी में फंस गया। जिससे मेरी साडी मेरी चूची से हट गयी और मेरे ब्लाउस से थोड़ी सी बाहर निकली हुई चूची को ननदोई जी दिखने लगी। मै साडी को छुडाने लगी, मैंने देखा की ननदोई जी मेरी चूची को ही देख रहें थे। वो अपने आप को रोक नही पाए और उन्होंने मेरी चूची को दबा दिया। मैंने उनकी तरफ ध्यान नही दिया क्योकि मै भी चाहती थी की वो मेरी चुदाई करे। वो मेरी चूची को जोर जोर से दबने लगे। मै भी धीरे धीरे बेकाबू होने लगी थी। कुछ दी देर में मेरे ननदोई जी मुझे अपने बाहों में भर लिया और मुझसे कहा – “मैंने बहुत दिनो से किसी के बुर को नही चोदा है। जब से आप को देखा हो मै तो आप को चोदने के लिये पागल हो गया हूँ और सरहज जी आप है ही इतनी हॉट की कोई भी आपके मम्मो को और आप को देखने बाद अपने आप को रोक ही नही पायेगा”।
मैंने उनसे कहा – “मै आप से चुदवा भी लूँ पर मुझे क्या मिलेगा?? उन्होंने कहा – जो आप चाहे। मैंने कहा – “मै तो मजाक कर रही हूँ और मै भी किसी से चुदवाना चाहती थी इसीलिए आप को अपने चुचियो को छूने दिया। मैंने ननदोई जी से कहा – “अभी तो दिन चुदाई करना ठीक नही रहेगा। रात को तुम चुपके से मेरे कमरे में आ जाना मै अपने कमरे का दरवाज़ा खोले रहूंगी”। उन्होंने कहा – “ठीक मै रात को आऊंगा”।
रात हुई, मै अपने बेटे को सुला रही थी लेकिन वो आज पता नही क्यों सो ही नही रहा था, सायद उसको अपने मम्मी की चुदाई देखना था इसलिए वो नही सो रहा था। कुछ देर बाद मेरे ननदोई जी मेरे कमरे में आ गये। उन्होंने जल्दी से मेरे कमरे की कुण्डी को लगा दिया। मेरे बेटा अभी तक नही सोया था, मैंने उसको एक किनारे लेटा दिया और उसके मुह में सहद वाला निप्पल डाल दिया। वो चुपचाप लेट गया। फिर ननदोई जी ने बड़े ही रोमांटिक मूड में मेरे हाथो को पकड़ा और मुझे गोदी में उठा लिया। गोदी में उठाने के बाद उन्होंने ने मुझे किस करना शुरू किया। कुछ देर बाद मुझको बेड पर बिठा दिया और मेरे गाल को काटते हुए मेरे गाल पर पप्पी लेने लगे। धीरे धीरे वो मेरे रसीले होठो की तरफ बढ़ने लगे, उन्होंने मेरे होठ को किनारे से चुमते हुए धीरे धीरे मेरे पूरे होठो को अपने मुह में भर लिया और मेरे होठो को पीने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैंने भी उनको अपने पति की तरह बाहों में भर लिया और उनके थोड़े मोटे होठो को चूसने लगी। जिससे ननदोई जी बहुत खुस हो गये, वो धीरे धीरे अपने आप को रोक नही पा रहें थे क्योंकि उनका जोश धीरे धोरे बढ़ रहा था, इसलिए वो मेरे होठो को काटते हुए अपनी जीभ को मेरे मुह में डाल दिया, और मुझको कस कर बाहों में भर लिया और साथ साथ मेरे मम्मो को भी सहलाते हुए मेरे होठो को पी रहें थे।
बहुत देर तक मेरे होठ के पूरे रस को चूसने के बाद ननदोई जी ने मेरे कपडे और खुद भी कपडे निकाल दिए। मै केवल ब्रा और पैंटी में थी, और ननदोई जी तो पूरे नंगे हो गये थे। उनका 9 इंच का लंड तना हुआ था।  मैंने उनके लंड को पकड लिया और उनके लंड को सहलाते हुए अपने जीभ से चाटने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मै उनके लौड़े को मुह में जल्दी जल्दी चूस रही थी जिससे ननदोई जी को भी मजा आ रहा था।
मै बहुत देर तक उनके लौड़े को चूसा, फिर वो मेरे मम्मो को दबाते हुए मेरे ब्रा को निकाल दिया। मेरे मम्मो को ननदोई जी बड़े ध्यान से देखने लगे। फिर उन्होंने मेरे मम्मो को मसलते हुए मेरे चूची को बगल से पीने लगे और बहुत ही मदहोश होने लगी थी। वो मेरे चुचियो को दबाने लगे और साथ ही साथ वो मेरे चुचियो को पीने लगे जिससे उनके मुह में मेरी चूची का दूध आ रहा था। ननदोई जी ने कहा – “आह कितना मीठा है आप का दूध”। बहुत देर तक उन्होंने मेरे दूध को पीया और मेरी चूची में जितना भी दूध था सब पी लिया। ननदोई जी मेरे बच्चे के हिस्से का दूध पी लिया।
मेरे मीठे दूध को पीने के बाद वो मेरी कमर को चाटते हुए मेरी चूत की तरफ बढ़ने लगे। जब वो मेरी कमर को पी रहें थे तो मै भी कामोत्तेजित होने लगी थी। । धीरे धीरे वो मेरी बुर के पास पहुँच गये, उन्होंने मेरी चूत को पैंटी के ऊपर ही सहलाते हुए मेरी पैंटी निकाल दी। और मेरी चूत देखकर वो और भी चुदासे हो गये। उन्होंने पहले मेरी चूत पर अपने उंगलियो से सहलाया जिससे मै मचलने लगी। और फिर ननदोई जी ने मेरे पैरो को फैला दिया और मेरे जांघों को सहलाते हुए मेरी चूत में अपने मुह को लगाकर मेरी चूत को पीने लगे। ननदोई जी बार बर अपनी जीभ से मेरी चूत को चाट रहें थे जिससे मै धीरे धीरे सिसक रही थी। ननदोई जी मेरी नाजुक और कमसिन चूत में अपनी मोटी और खुरदरी जीभ डाल देते जो मेरी चूत में चुभ रही थी और मै धीरे धीरे .. आह अह्ह्ह हह्ह्ह ओह्ह ओह ह्ह्ह्ह हा हह्ह्ह उफ़ उफ़ करके चखने लगी।
लगभग आधे घंटे तक मेरी चूत की चाटने के बाद ननदोई जी मेरी चूत चाटना बंद कर दिया और अपने लंड को अपने हाथ में पकड कर मेरी चूत पर पटकने लगे जिससे मै पागल हो रही थी, की कब ये मुझे चोदना शुरू करे।  रहें है। अपने लंड को बार बार मेरी बुर के लाल लाल दाने में रगड़ कर मुझे और भी उत्तेजित कर रहें थे वो।
कुछ देर बाद उन्होंने पहली बार अपने लंड को मेरी चूत में डाला, मैंने महसूस किया कितना मजा आया जब उनका लंड मेरी चूत में घुसा। ननदोई जी भी आराम से मेरी चुदाई कर रहें थे , लेकिन कुछ ही देर में उनके अंदर का शैतान जाग और वो मेरी चूत को बहुत तेजी से चोदने लगे। जैसे जैसे उनकी रफ़्तार बढ़ रही थी वैसे वैसे मै भी जोर जोर . आअह अहह अह्ह्ह ह्ह्ह्ह ह्ह्ह ह्ह्हा ओह ओह्ह्ह्ह्ह ओह्ह उफ्फ़ उफ्फ़ उफ़ ..ननदोई जी आराम से .मम्मी मम्मी . उनहू उनहू उनहू ,, कह कर चीखने लगी थी। लेकिन इस तरह की चुदाई का मजा भी अलग ही होता है। ननदोई जी का मोटा लंड मेरी चूत की गहराई को नापते हुए मेरी चूत के अंदर तक जा रहा था। और कुछ देर बाद बाहर आ जाता। उनका लंड मेरी चूत में चुभते हुए अंदर तक जाता। मेरा तो बुरा हाल हो रहा था चीखते हुए। लेकिन ननदोई जी अपनी इतनी दिनों की भूख को मिटने में मेरी चूत को फाड़े जा रहे थे। वो लगातार मेरी चूत को चोद रहें थे, मै इतना उत्तेजित हो गयी थी कि मेरी चूत चुदाई के बीच में ही गीली हो गई।
ननदोई जी ने लगातार बिना आउट हुए एक घंटे तक मेरी चुदाई करते रहें। फिर उन्होंने मेरी चूत से अपना लन्ड निकाल लिया और और मेरे पैरों को ऊपर उठा दिया और अपने लंड में थोडा सा तेल लगा कर मेरी गांड में डालने लगे। जैसे ही मेरी गांड मारना शुरू किया मै तो जोर जोर से चखने लगी मेरी आंखे थोड़ी सी भर आई थी क्योकि बहुत ही दर्द हो रहा था। लेकिन ननदोई जी रुकने वालो में से नही थे वो लगातार मेरी गांड मार रहें थे और मै दर्द से .. आआआआअह्हह्हह..ईईईईईईई.ओह्ह्ह्हह्ह.अई..अई..अई..अई..मम्मी.. प्लीसससससस….प्लीसससससस, उ उ उ उ ऊऊऊ ..ऊँ..ऊँ.ऊँ.” मुझे छोड दो मेरी गांड फटी जा रही है ..ओह्ह्ह ओह्ह बहुत दर्द हो रह है, कह कर रो रही थी, लेकिन जब तक ननदोई जी का मन नही भरा उन्होंने अपना लंड नही निकाला। जब उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला ,तब मुझको थोड़ी रहत मिली। फिर उन्होंने अपने लंड को पकड कर मुठ मारने लगे। कुछ देर बाद उनका माल निकलने लगा।
चुदाई के बाद मैंने उनसे कहा – “अब मै तुम से नही चुदूंगी क्योकि तुम बहुत तेज चोदते हो और मेरी चूत और गांड अभी भी दर्द कर रही है”। मेरी दर्द भरी चुदाई मेरा बेटा देख रहा था और वो अपनी माँ कि चुदाई से हंस भी रहा था।

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