बेटे के सामने मम्मी की सामूहिक चुदाई

मम्मी अंकित और तरुण के लंड की तरफ देख रही थी, और फिर उनकी आँखों में देख रही थी. दोनो समझ रहे थे की ये रंडी अब चूड़ने के लिए तड़प रही थी.

वनिता आंटी (मेरी पंत के उपर से लंड को सहलाते हुए): देखो तुम्हारी मम्मी को कैसे दो लड़कों से एक साथ मज़ा कर रही है. ये होती है संस्कारी रंडी.

अब मम्मी बेड के कोने पर बैठ गयी, और दोनो अपने लंड को हाथ में पकड़ कर मम्मी के पास चले गये. मम्मी दोनो की तरफ मुस्कुरा कर देख रही थी. बड़े-बड़े लंड देख कर मम्मी अपने आप को रोक नही पाई. उसने दोनो के लंड को हाथ में पकड़ा और हिलने लगी.

अंकित: तरुण मैं तुझे कहता था ना ये बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है. देख कैसे हमारा लोड्‍ा देख कर फुदाक रही है.

तरुण: हा यार, तू सही कह रहा था. मैने इसको पहली बार देखा तब सोचा नही था ये इतनी बड़ी रंडी है.

मम्मी (दोनो को अपने चेहरे के सेक्सी एक्सपीरियेन्स दिखाते हुए): तुम दोनो की तगड़ी चुदाई ने रंडी होने पर मजबूर कर दिया है. नही तो मैं बहुत सीधी-सॅडी हू (मम्मी हासणे लगी).

अंकित: वाह मेरी संस्कारी रंडी. चल अब मेरा लोड्‍ा चूस कर तैयार कर. आज तुझे ऐसा छोड़ना है की ज़िंदगी भर आज का दिन भूल नही पाएँगी.

मम्मी: मैं तो कब से आप दोनो से चूड़ने के लिए मॅर रही हू.

अब मम्मी ने अंकित का लंड मूह में लिया, और उसको लॉलिपोप की तरह चूसने लगी. साथ में वो एक हाथ से तरुण का लंड हिला रही थी. थोड़े टाइम बाद उसने मूह से अंकित का लंड निकाला, और तरुण का लंड चूसने लगी. मम्मी ने दोनो के लंड को आचे से खड़ा कर दिया था.

मैं देख सकता था की दोनो के लंड मम्मी की थूक से चमक रहे थे. मुझे मम्मी को ऐसे दूसरे लड़कों के साथ देख कर बहुत गुस्सा आ रहा था. पर अंदर से मैं ये सब एंजाय भी कर रहा था. मेरा लंड ये सब देख कर अपने असली आ कर मैं आ गया था. वनिता आंटी ने मेरी पंत के उपर बना हुआ तंबू देख लिया.

वनिता आंटी (मेरा लंड पंत के उपर से सहला कर): अभी तुम तो मदारचोड़ निकले. अपनी मा को नंगा देख कर गरम हो गये हो (वो तिरछी नज़र से मुझे नॉटी स्माइल देने लगी).

मैं (उनका गला दबोच कर दीवार से सता दिया. उसको साँस लेने में भी तकलीफ़ होने लगी): साली रंडी तुमने मुझे अब मेरी मम्मी का असली चेहरा दिखा दिया है. और उसको तुमने ही बिगाड़ा है. और उसकी सज़ा तुझे मैं देकर रहूँगा.

मैने उनका गला छ्चोढा तब वो हानफते हुए साँस ले रही थी. मैं वनिता आंटी को बालों से खींच कर तोड़ा डोर लेकर गया. वो नीचे ज़मीन पर गिरी, मैं उनको आँखें निकाल कर देख रहा था. मैं वैसे भी बहुत परेशन था, और ये बेहन की लोदी मेरा दिमाग़ खराब कर रही थी.

मैं: साली रॅंड, तेरी वजह से आज मेरी मम्मी का ये हाल हुआ है. तुझे तो मैं छ्चोधुंगा नही. मदारचोड़ तू ही मम्मी को जिम के लिए लेने आई थी. साली वेश्या मेरी मम्मी को अपने जैसा बना दिया.

मैने उनको ज़मीन पर लिटा लिया था. वो मेरे आयेज हाथ जोड़ कर माफी माँग रही थी. वो बोल रही थी: मुझे माफ़ कर दे अभी. आज के बाद कभी तेरी मम्मी से बात नही करूँगी. उससे बहुत डोर चली जौंगी.

मैं: तुमने मुझे कहीं का नही छ्चोढा है. तुझे सब कुछ ठीक करना होगा. नही तो तेरी ऐसी हालत करूँगा की तुम किसी को मूह दिखाने लायक नही बचोगी.

वनिता आंटी (रोते हुए): तुम जो कहोगे वो सब कुछ करूँगी.

मैने उनके बाल पकड़ कर खड़ा किया और कहा: साली अब चुप-छाप खड़ी रहना. तेरे मूह से एक भी शब्द निकला तो तेरी मा छोड़ दूँगा.

मैं अब उनको वापस उस खिड़की के पास लेकर गया. मैने देखा की अंकित मम्मी को बेड पर सुला कर उनकी चुदाई कर रहा था. तरुण बेड पर अपना पैर फोल्ड करके बैठ गया था. मम्मी उसका लंड चूस रही थी. अंकित का लंड मुझे मम्मी की छूट से अंदर-बाहर होता हुआ दिख रहा था.

अब अंकित की जगह पर तरुण आया और वो मम्मी की छूट को छोड़ने लगा. तरुण चुदाई करने में काफ़ी होशियार था. वो मम्मी को लोटस पोज़िशन में छोड़ने लगा. मम्मी भी बहुत प्लेषर फील कर रही थी.

अब तरुण बेड पर लेट गया, और मम्मी उसके लंड के उपर उछाल-उछाल कर चूड़ने लगी. अंकित ने खड़े हो कर मम्मी के मूह की चुदाई शुरू कर दी थी. मम्मी प्रोफेशनल पोर्नस्तर की तरह छुड़वा रही थी. बहुत टाइम के बाद मम्मी को नंगा देखा था. जिम में रेग्युलर जाने से और अपनी चुदाई होते रहने से वो बहुत ज़्यादा सेक्सी हो गयी थी.

उसका सेक्सी जिस्म देख कर मेरे अंदर का शैतान जाग गया था. मेरा लंड अब फिर से खड़ा होने लगा. मैने वनिता आंटी की तरफ देखा तो वो मेरे लंड को देख रही थी. जब मैं उसकी तरफ देखा तो दर्र के मारे उनकी नज़रें घुमा रही थी. मैने उनके बालों को खींचा और उनके लिप्स पर किस करने लगा. थोड़े समय तक वो ऐसे ही खड़ी रही, पर मैने उनको सहलाना शुरू किया. तब वो मुझे किस में रेस्पॉन्स देने लगी.

मम्मी की चुदाई देख कर वो भी गरम हो गयी थी. मैने उनकी आँखों में देखा तब वो चूड़ने के लिए तड़प रही थी. लेकिन उनको मेरे से दर्र लग रहा था. मैने उनका फेस अपने दोनो हाथो से पकड़ा और उनके लिप्स पर बहुत सॉफ्ट्ली किस किया.

मैं (उनकी आँखों में देखते हुए): ई आम सॉरी बेबी. मेरा आपको ऐसे हर्ट करने का कोई इंटेनसीओं नही था. पर ये सब देख कर और आपकी बातों से मुझे गुस्सा आ गया.

वनिता आंटी (मुझे कस्स कर गले लगा कर): ऐसे करके कों रोमॅन्स करता है? लेकिन तुम मेरे साथ कुछ भी करो. मैं तुम्हे नही छ्चोढने वाली. मैं जो फील तुम्हारे साथ करती हू, वो किसी और के साथ नही करती. ई लोवे योउ.

मैं उनके मूह से ई लोवे योउ सुन कर शॉक्ड हो गया.

मैं: देखो यार. ये चुदाई तक ठीक है, पर ये लोवे मुझे नही चाहिए.

वनिता आंटी: अभी तुम बहुत आचे हो. मुझे पता है तुम मेरी सकचाई जान गये हो. और मेरी ग़लती है की मैने तुम्हारी मम्मी को चुदाई का चस्का लगा दिया है. और देखो वो कितना एंजाय कर रही है.

मैने अंदर देखा तब मम्मी तरुण के लंड के उपर से नीचे उतार गयी, और अंकित उनके पीछे जेया कर मम्मी की गांद को चाटने लगा. उसके बाद उसने मम्मी की गांद पर लंड सेट किया, और मम्मी की गांद में आधा लंड उतार दिया.

मम्मी ज़ोर से चीख पड़ी: श.. मा… मॅर गयी. प्लीज़ निकालो इसे, बहुत दर्द हो रहा है.

अंकित ने ये सब इग्नोर करके मम्मी की कमर पकड़ कर एक और बार धक्का मारा. इस बार उसका पूरा लंड गांद फाड़ कर अंदर उतार गया. मम्मी चीखती रही, पर अंकित उनकी गांद को लगातार मार रहा था. थोड़े समय बाद मम्मी खुद से पीछे धक्के लगा रहा थी.

अंकित: क्या बात है मेरी जान. अभी तो चीखें निकल रही थी. अब इतना मज़े से गांद मरवा रही है.

मम्मी: तुम्हारा लोड्‍ा इतना बड़ा है की मैं से नही पाती और तुम मेरी जान निकाल देते हो.

अंकित: हा मुझे पता है तुझे बड़े लंड से चूड़ने में मज़ा आता है. इसीलिए तो वनिता को बिना बताए मेरे से छुड़वा रही है.

मम्मी: मैं तेरे लिए नही, लेकिन तुम मुझे तरुण से मिलवा सको इसलिए तेरी बातों में आ गयी थी. तुम लास्ट टाइम ऐसा बोल बोल कर मेरी चुदाई करते रहे.

तरुण: अंकित तुम बहुत बड़े कमीने हो. अब हटो वहाँ से, मुझे भावना की गांद मारनी है.

अंकित (मुस्कुराते हुए): ठीक है मैं तो इस रंडी को बहुत बार निचोढ़ चुका हू. अब तुम जितना मर्ज़ी करे छोड़ो.

अंकित ने उसका लंड मम्मी की गांद से निकाला, और फिर तरुण ने अंदर लंड घुसा दिया. अब मम्मी सेक्सी आवाज़ निकाल कर अपनी गांद मरवा रही थी. वो अब डॉगी स्टाइल मम्मी की गांद मार रहा था. तरुण चुदाई करने में एक्सपर्ट था, ये तो मानना पड़ेगा. क्यूंकी उसका सेक्स के दौरान पोज़िशन लेने का तरीका सही था.

मैं: सॉरी यार. मम्मी ही ग़लत है, ये बात मुझे पता है. मैने फालतू में आप पर इतना गुस्सा किया.

वनिता आंटी: अभी तुम्हे पता नही है. अंकित बहुत कमीना है. उसने मुझे और भावना को ब्लॅकमेल करके रखा है.

मैं (शॉकिंग फेस): कैसे?

वनिता आंटी: उसके पास मेरी और भावना की न्यूड्स है.

मैं: कैसे हुआ ये सब?

वनिता आंटी: ये सब ग़लती मेरी है. मुझे भावना ने माना किया था, की किसी भी अंजान लड़के पर भरोसा ना करू. मेरी जब उससे दोस्ती हुई, तब मैने उसको मेरे न्यूड्स भेजे थे. उसके बाद उसने मुझे ब्लॅकमेल किया की मैं उसके साथ सेक्स करू, और उसकी नीयत भावना के लिए फिसल गयी थी.

वनिता आंटी: अंकित ने मेरे उपर दबाव बनाया की मुझे भावना के साथ यहाँ मिलने आना होगा. वो बहुत शातिर निकला. उसको पता था की भावना तरुण जैसे लड़के के साथ सेक्स करने को जल्दी रेडी होगी. और वो अपने मिशन में कामयाब हुआ. मैने सोचा चलो मेरे साथ साथ भावना ने भी बाहर सेक्स कर लिया. पर मुझे कहाँ पता था की भावना मुझे बताए बिना अंकित से दोस्ती करेगी.

वनिता आंटी: उसने मुझे पूछा होता तो मैं उसको माना कर देती, की ये लड़का भरोसे के लायक नही है. भावना अब इतनी मजबूर है की वो अंकित की हर बात मानने के अलावा उसके पास कोई रास्ता नही है.

मुझे वनिता आंटी की बात सुन कर अंकित पर बहुत गुस्सा आ रहा था. लेकिन मम्मी ने जो किया वो बहुत ग़लत था. उनकी लाइफ आचे से चल रही थी, पर उनके अंदर जो नये-नये लोगों से सेक्स करनी की जो तलब है, उसके चक्कर में आज इतनी बुरी तरह फ़ससी थी. मैने तब डिसाइड किया की मैं मम्मी और वनिता आंटी को अंकित के ब्लॅकमेल से बचा कर रहूँगा.

अब अंकित बेड पर लेट गया, और मम्मी को उसके लंड पर उछाल रहा था. मम्मी भी मदहोश हो कर चुदाई का आनंद ले रही थी. तरुण बेड के उपर चढ़ गया, और मम्मी को नीचे झुका कर उसकी गांद पर थूक लगाने लगा. मम्मी समझ गयी थी की तरुण उसकी गांद में लंड घुसने की कोशिश कर रहा था.

मम्मी ने सेक्सी स्माइल के साथ पीछे देखा और अपनी गांद बेंड करके उनको लंड डालने के लिए जगह दी. थोड़ी कोशिश के बाद तरुण ने उसके लंड का टोपा गांद में डाल लिया. मम्मी आ के साथ दोनो के लंड को छूट और गांद में फील करने लगी. दोस्तों मेरी आँखों के सामने आज भी ये नज़ारा घूम रहा है, की कैसे एक साथ 2-2 लंड मेरी मम्मी की छूट और गांद में समा रहा थे. और मेरी रंडी मम्मी दोनो से मज़े कर रही थी. अंकित ने फिर आवाज़ लगाई.

अंकित (ज़ोर से चिल्ला कर): वनिता… श मदारचोड़ रंडी. कहाँ मार गयी? जल्दी यहाँ आजा.

वनिता आंटी मेरे पास से भाग कर अंदर गयी और बोली: क्या हुआ मालिक, आपने मुझे बुलाया?

अंकित: देख ये तेरी दोस्त. तू बोल रही थी ना मेरी दोस्त बहुत सीधी और संस्कारी है. देख कैसे एक साथ 2-2 लंड ले रही है.

मम्मी ने शरम के मारे अपना मूह नीचे कर दिया. अब दोनो ने अपनी पोज़िशन को स्वाप किया. तरुण ने मम्मी को उल्टे मूह अपने लंड पर बिता दिया, और उसकी गांद छोड़ने लगा. मम्मी ने अपने दोनो हाथ पीछे किए, और आयेज से अंकित मम्मी की छूट छोड़ रहा था.

अंकित मम्मी को साथ में लिप्स किस कर रहा था. कुछ 2-4 मिनिट की चुदाई के बाद दोनो ने मम्मी को गोदी में उठा लिया, और खड़े-खड़े छोड़ने लगे. गर्मी के कारण तीनो पसीने से भीग गये थे.

मम्मी उछाल-उछाल कर चिल्ला रही थी. मम्मी की अब शरम हया डोर हो गयी थी. उसको पता चल गया था की वनिता आंटी के सामने उसका जो कॅरक्टर था, वो शो हो गया था. मम्मी अब बिंदास हो कर चुड रही थी.

मम्मी: ह्म… आह… मज़ा आ रहा है. ऐसे ही छोड़ो मुझे. मेरे कितने सालों की इक्चा आज पूरी हो रही है.

तरुण: मेरी भी थ्रीसम की फॅंटेसी पूरी हुई.

अंकित: आज तो मज़ा आ गया इस रंडी को छोड़ कर.

उसके बाद दोनो ने मम्मी को घुटनो पर बिता दिया, और वो दोनो बारी-बारी अपना लंड मम्मी से चुस्वा रहे थे. आख़िर में अंकित और तरुण ने मम्मी के फेस पर अपना स्पर्म गिराया. मम्मी की आँखों पर स्पर्म गिरा था, तो वो अपनी आँखें नही खोल पा रही थी. मुझे इतना गुस्सा आ रहा था, और इतना सब कुछ हो जाने पर भी वो मुस्कुरा रही थी.

अंकित: वनिता मेरी जान, अब एक अची कुटिया की तरह तेरी दोस्त के चेहरे पर से हमारा काम-रस्स चाट.

तरुण: अंकित ये कुछ ज़्यादा हो रहा है.

अंकित: तुम डरते क्यूँ हो ब्रो. ये दोनो मेरी रंडी है. इनको जैसे मॅन करे ऐसे ट्रीट कर सकता हू. दोनो को ऐसे टाइट किया है, मेरे खिलाफ जाने की हिम्मत नही करेगी.

तरुण: लेकिन… भाई.

अंकित (उसकी बात को काट कर): तू चुप-छाप मज़ा कर भोंसड़ी के, नही तो तुझे भी गान्डू बना दूँगा.

तरुण बिना आयेज कुछ बोले खड़ा रहा. अंकित चिल्ला कर बोला: हे रंडी, तुझे मैं अलग से इन्विटेशन डू क्या? चल यहाँ आजा, और इसके चेहरे से हमारा माल सॉफ कर.

वनिता आंटी भाग कर मम्मी के पास बैठ गयी, और दोनो का माल चाट कर सॉफ करने लगी. मैं चाहता तो अंकित की मा बेहन एक कर सकता था. लेकिन जब मेरी खुद की मम्मी मज़े से छुड़वा रही हो, तो मेरा ऐसा आक्षन लेना भी सही नही था.

दोनो ने तोड़ा टाइम रिलॅक्स किया. उसके बाद वनिता आंटी का बाजा बजाया. उस टाइम पर अंकित ने मम्मी को नंगा रखा था. मम्मी वनिता आंटी को चूड्ता देख एंजाय कर रही थी. लेकिन वनिता आंटी अपने आप को बहुत ज़लील होता महसूस कर रही थी.

लास्ट में मम्मी ने तरुण से रिक्वेस्ट की और एक और बार उससे चूड़ी. उस टाइम अंकित और वनिता आंटी नंगे चिपक कर सोए थे, और लिव चुदाई का मज़ा ले रहे थे. ये सब देखते हुए मैने खड़े-खड़े 2 बार मूठ मार ली थी. उसके बाद मैं घर आ गया.

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