बेहन ने भाई को चुदाई के लिए मनाया

पिछली स्टोरी को लीके और कॉमेंट करने के लिए बहुत थॅंक्स. चलिए, अब आयेज की कहानी शुरू करते है.

गाते पे दस्तक हुई, ‘नॉक-नॉक’ और मैने गाते बाहें फैलाते हुए खोला,

मे: अर्रे प्रिया डार्लिंग, तुम तो थोड़ी जल्दी ही आ गयी. (फिर दी को देखते हुए सर्प्राइज़ होने की आक्टिंग करते हुए) अर्रे दी आप, और इस वक़्त?

दी: क्यूँ, तुझसे मिलने के लिए अपायंटमेंट लेना पड़ेगा क्या?

मे: अर्रे ऐसी बात नही है दीदी. आप अचानक बिना बताए ऐसे मिलने को आई इसलिए. सब ठीक तो है ना?

दी: है भी, और नही भी. (दी की आवाज़ कुछ लड़खड़ाई सी थी, और उसकी आँखों में भी तोड़ा नशा सा छाया था. शायद वो ड्रिंक करके आई थी)

मे: क्या मतलब?

दी: मतलब छ्चोढ़, तू मेहमान को कुछ पूछता नही, छाई पानी वग़ैरा?

मे: ओह सॉरी दी. मैं तो भूल ही गया. बोलो आप क्या लॉगी?

दी: फिलहाल तो तू तोड़ा पानी ही पीला दे.

मे: ठीक है, अभी लता हू (और मैं किचन में चला गया).

जब मैं पानी लेकर वापस आया, तो दी मैं हॉल में नही थी. मुझे लगा की वो मेरे बेडरूम में होगी. मैने झट से मैं डोर पे ‘डॉन’त डिस्टर्ब’ वाला साइन लटकाते हुए उसको लॉक कर दिया. और ‘दीदी-दीदी’ चिल्लाते हुए बेडरूम में चला गया.

मे: अर्रे तुम यहा क्या कर रही हो?

दी: बस ऐसे ही देखने आई थी, की तूने घर को कैसे मेनटेन कर रखा है. पर यहा का नज़ारा तो कुछ और ही बयान कर रहा है.

मे: क्या? (तोड़ा डरने जैसा फेस बनाते हुए)

दी: तेरे रूम पार्ट्नर्स घर पे नही है. तूने रूम को आचे से डेकरेट किया है. और तूने जब गाते खोला था, तो तूने प्रिया डार्लिंग कहते हुए ओपन किया था. कों है वो? कुछ प्लॅनिंग था क्या आज उसके साथ?

मे: अर्रे ऐसा कुछ नही है.

दी: च्छूपा मत, बता भी दे. तुझे पता है ना की हम बचपन में एक-दूसरे के कितने क्लोज़ थे. सभी बात शेर करते थे. ये तो फॉरिन की वजह से कॉंटॅक्ट कट सा हो गया. वरना आज मुझे पता होता की कों आने वाली है. और तू मुझसे गाइडेन्स भी लेता की कैसे उसको हॅपी करना है.

मे: क्या बोल रही हो दी आप? और च्छूपा तो आप भी कुछ रही हो ना? आपकी आँखों से और बातों से पता चल रहा है की आप ड्रिंक करके आई हो. माना की फॉरिन कल्चर में ये सब नॉर्मल है. पर दिन में ड्रिंक कों करता है भला?

दी: तो तूने पकड़ ही लिया. बस थोड़ी सी ही ड्रिंक ली है. क्यूंकी यहा जिस चीज़ के लिए आई हू, उसके लिए मुझे हिम्मत और ड्रिंक दोनो की ज़रूरत थी. पर तू ये बता, ये प्रियंका कों है?

दी बातों में टाइम निकाल रही थी, और मेरा ध्यान दो चीज़ो की और था. एक घड़ी, और दूसरा कॅमरा. घड़ी इसलिए की कही टाइम हो गया और कायरा ने अपना मोबाइल ओं करके दी को कॉल लगा दी. और दूसरा मुझे कॅमरा की चिंता थी, की कही उसकी बॅटरी ख़तम ना हो जाए. तो अब मैने टाइम वेस्ट ना करते हुए दी को डाइरेक्ट अप्रोच करने का सोचा.

मे: ठीक है दी, तो सीधा बताता हू आपको. फिर आप भी सीधा बताईएएगा. प्रियंका मेरे साथ जॉब करती है. हम कुछ महीनो से रिलेशन्षिप में है. बहुत दीनो बाद आज वो अग्री हुई थी, और हमने आज ये प्लान बनाया था?

दी: सेक्स के लिए? (दी हल्का मुस्कुरा रही थी. शायद उसको अपना रास्ता सॉफ नज़र आने लगा)

मे (सर को झुकते हुए, और तोड़ा शरमाते हुए): हा दी.

दी: ओह सॉरी, मैं आज कबाब में हड्डी बन गयी. फर्स्ट टाइम है तेरा? मतलब तूने इससे पहले किसी के साथ किया है सेक्स?

मे: नही दी. आज फर्स्ट टाइम है. वैसे टीवी मोबाइल में देखा तो है, पर कभी किया नही.

दी: एक काम कर. तू प्रियंका को कॉल करके बोल, की आज तुम्हारा प्रोग्राम कॅन्सल है. तुम उसको फिर कभी बुला लेना. मुझे तुझसे जो काम है, उसको बहुत टाइम लगने वाला है.

मे: क्या बोल रही हो दी? बहुत पापद बेलने के बाद आज ये चान्स मिला है. फिर ये चान्स मिलेगा के नही, ये मुझे नही पता.

दी(तोड़ा सा गुस्सा होते हुए): अर्रे मैं कह रही हू ना, तू इतना नही समझता. अपनी दी की बात नही मानेगा? तू उसको अभी कॉल लगा के माना कर दे. अभी के अभी.

मैं तोड़ा गुस्सा होने का दिखावा करते हुए कॉल मिलने की आक्टिंग करता हू.

मे: हेलो, जानू कहा पहुँची? (कुछ देर वेट करते हुए) यार, मुझे कुछ फॅमिली एमर्जेन्सी की वजह से गाओं के लिए निकलना है. हम ये दोबारा प्लान करते है, नेक्स्ट वीक? अर्रे, पर मेरी बात तो सुनो, हेलो, हेलो. (और ऐसे आक्टिंग करने लगा की जैसे सामने से कॉल कट हो गयी हो)

दी: लगता है, तूने इसको बहुत सर पे चढ़ा के रखा है?

मे: आपको क्या इससे? मेरा तो काम तमाम हो गया ना. अब आपको जो कहना है वो कहिए, और प्लीज़ जाइए यहा से.

दी: अर्रे, कितनी बेरूख़ी से तू बात कर रहा है मेरे साथ? उस कल की लड़की के लिए तू मेरे साथ ऐसे बिहेव करेगा? ऐसा क्या है उसमे?

मे: दी इतनी सी बात समझ में नही आती? वो मुझे आज देने वाली थी, आप थोड़ी ना? (मैने जान-बूझ कर सेंटेन्स आधा छ्चोढ़ दिया) सॉरी दी, वो मूह से निकल गया.

दी: क्या बोल रहा था, पूरा बोल? की मैं तुझे क्या नही देने वाली थी?

मे: सॉरी दी, वो मूह से निकल गया.

दी: ह्म, और तुझे वो मैं आज दे डू तो? जो तुझे आज मिलने वाला था?

मे: क्या? (सर्प्राइज़्ड होते हुए) क्या बोल रही हो तुम?

दी: एस, तुमने सही सुना. ई वॉंट योउ तो फक मे, रिघ्त नाउ.

मे: पर कैसे? मैं तुम्हे कैसे छोड़ सकता हू? (मैने जान-बूझ कर फक या सेक्स की जगह छोड़ना बोला, जिससे दी को और ओपन कर साकु. )

दी: वैसे ही, जैसे तुम अपनी गफ़ को छोड़ने वाले थे. (दी ने छोड़ने वर्ड पे भार देते हुए बोला) अपने इससे (मेरे लंड की और इशारा करते हुए).

मे: वो तो मुझे पता है की कैसे करना है? पर तुम मेरी सग़ी बेहन हो, वो भी शादी-शुदा, और एक बच्चे की मों भी हो.

दी: तुम्हे प्राब्लम किस चीज़ से है. माना की हम भाई-बेहन है, पर उससे पहले हम एक लड़का और लड़की नही है क्या? क्या अगर मैं अपने कपड़े निकालूंगी (और उसने फाटाक से अपना टॉप निकाल दिया और अपनी ब्रा से बाहर झाँकते हुए बूब्स की तरफ इशारा करते हुए), तो मेरे नंगे बदन को देख कर तेरा लंड खड़ा नही होगा क्या?

दी: या फिर मेरी छूट तेरा लंड अंदर लेने से माना कर देगी क्या? और रही बात मेरे मॅरीड या मों होने की, योउ डॉन’त वरी. तेरी गफ़ से भी ज़्यादा मज़ा दूँगी. ट्रस्ट मे, एक्सपीरियेन्स होल्डर हू मैं. तेरे जीजू तो हर वक़्त मौका ही तलाशते है मुझे छोड़ने का. और आज ये मौका मैं तुझे दे रही हू.

मे: ह्म, वो सब तो ठीक है, पर इसका रीज़न क्या है?

दी: इसका रीज़न ये है की. (अपनी ही बात को बीच में कट करते हुए) तुम्हे रीज़न चाहिए, या मेरी छूट? इससे कुछ फराक पड़ेगा? रीज़न तो बाद में भी जान सकता है ना?

मे: रिघ्त दी. जब हम दोनो को जो चाहिए वो एक-दूसरे से मिल रहा है, तो बाकी सब क्यू सोचना.

दी: तो फिर हो जाओ शुरू, अपनी बेहन को एंजाय करने के लिए.

और दी ने मेरे हाथ को अपने बूब्स के पर रखा, और मुझे अपनी तरफ खीचने लगी. मैने वाहा से खड़ा हो कर, गाते के पास जेया कर, बेडरूम को अंदर से लॉक कर दिया. और फिर मैने कमरे की सारी लाइट्स ओं कर दी, जिससे वीडियो आचे से रेकॉर्ड हो.

मैने फिर दी के पास जेया कर उनको खड़ा किया, और उनको स्मूच करने लगा. मेरा आईं तो जल्द से जल्द दी को नंगा करके उनकी छूट में एक बार लंड डालने का था. ताकि एक बार दी की पूरी चुदाई कॅमरा में रेकॉर्ड हो पाए.

मैने दी को भी खड़ा करके कॅमरा के ठीक सामने की पोज़िशन में रखा, जिससे दी का फेस आचे से दिख सके, और उनको मैं कॅमरा के ठीक सामने नंगा कर साकु.

फिर मैने दी को स्मूच करना स्टार्ट किया, और वो भी साथ दे रही थी. जैसे की हम दोनो एक-दूसरे के होंठो को खा रहे हो, ऐसे किस कर रहे थे.

दी भी पूरा मज़ा ले रही थी. शायद उसको भी कुछ चेंज चाहिए होगा. मैं उसके बूब्स दबाने लगा, और वो तोड़ा सा कराह रही थी.

एक मों होते हुए भी इस आगे में दी के बूब्स टाइट थे. शायद उसने आचे से मेनटेन किया होगा, या जीजू का ध्यान सिर्फ़ दी की छूट पे होगा.

मे: वाउ दी, तुम्हारे माममे तो अभी भी टाइट है, कैसे?

दी: तेरे जीजू को फ़ुर्सत ही कहा है, और रात को तो वो अपना काम निकाल के सो जाते है. मेरा हुआ की नही, मुझे क्या चाहिए, ये उनको परवाह ही नही.

मे: ह्म, अगर मैं तुम्हारा हब्बी होता, तो मुझे तुम्हारी परवाह ज़रूर होती.

दी: अछा जी, तो ये बात है. तो आज देखते है की तुम मेरी परवाह कैसे करते हो अपने इस लंड से.

और दी ने मेरी पंत पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींचा, और मेरी पंत के अंदर हाथ डाल कर मेरे खड़े लंड को मसल दिया. मैं तो जैसे सातवे आसमान में था.

यकीन नही हो रहा था की मेरी फॉरिन रिटर्न दी के हाथो में मेरा लंड था, और वो उसको सहला रही थी. मैने भी देर ना करते हुए अपनी पंत निकाल दी. अब मैं अंडरवेर में था, और मेरा लंड बाहर आने के लिए मचल रहा था.

दी ने ही फिर मेरे लंड को क़ैद से आज़ाद किया. मेरे लंड को देख कर तो एक स्माइल दी के चेहरे पे आ गयी, जैसे की उसको भी इसकी . थी. पर उसने फिर अपने आप को नॉर्मल किया.

मे: . लगा दी?

दी: क्या?

मे: मेरा लंड और क्या? सच बताओ, कैसा है? जीजू के कंपॅरिज़न में कैसा लगा?

दी: सच काहु, तो साइज़ के हिसाब से तो उनसे बड़ा है. पर इसकी रेटिंग तो इसकी पर्फॉर्मेन्स को देख कर ही बतौँगी (और वो हासणे लगी).

दी की ये बात थोड़ी मेरे दिल को चुभ गयी. मेरे मॅन में आया “साली रंडी, तुझे दिखता हू आज मेरी पर्फॉर्मेन्स”. और मैने अपना तन्ना हुआ लंड उसके मूह के आयेज किया,

मे: तो फिर चलो शुरू करते है. इसको ज़रा सा गीला कर दो मूह में ले कर.

दी: नही, मूह में नही प्लीज़.

मे: दी, बात तो ऐसी है की मूह में तो तुम ज़रूर लॉगी. क्यूंकी इसके बिना तो मैं तुम्हे छोड़ने से रहा ( ये सुन कर वो मेरी तरफ आँखें निकाल के देख रही थी).

अब तक दी इस सिचुयेशन को कंट्रोल में कर रही थी. पर मुझे लगा की अब रिमोट कंट्रोल मुझे अपने हाथो में लेना चाहिए. क्यूंकी अगर दी इसको कंट्रोल करती, तो वो रोक लगती की ये मिलेगा और ये नही मिलेगा.

इसलिए शुरू में ही उसको मूह में लेने को बोल कर मैने उसको ये इनडाइरेक्ट्ली मेसेज दिया, की आज का लीडिंग हीरो मैं था. और वैसे भी हर्षद भाई ने कहा है की ‘रिस्क है तो इश्क़ है’. और यहा तो मुझे रिस्क लेकर दी के तीनो च्छेद आज खोलने थे.

सो, फ्रेंड्स कैसा लगा ये पार्ट. कॉमेंट्स में ज़रूर बताईएएगा. जल्द ही मिलेंगे नेक्स्ट पार्ट में.

अगर आप को कोई टिप्स चाहिए, की आप अपने रीलेशन में किसी को छोड़ना/किसी से छुड़वाना चाहते है, तो कॉमेंट्स में ज़रूर शेर करे.

स्टोरी को लीके ज़रूर कीजिएगा.

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