बहन की जासूसी के लिए पर्स में रेकॉर्डर डाला

आपने पिछले पार्ट में पढ़ा की कैसे मैने अपनी बुआ के लड़के प्रिन्स और मेरी दीदी को च्चत पे किस करते और हग करते देखा था.

अब आयेज-

मैं जब प्रिन्स और दीदी को साथ में देखा उसके बाद से अब मैं दोनो के पीछे ही रहता था, की दोनो कहा मिलते है, और क्या करते है.

अब रात हो गयी थी, और सारे लोग सो गये थे. तो मैं भी सो गया. जब सुबह नींद खुली तो सबसे पहले दीदी के रूम के तरफ मैं गया.

देखा तो दीदी अपने रूम में नही थी. तो मैं प्रिन्स के रूम की तरफ गया जहा प्रिन्स सोया था. प्रिन्स भी नही था रूम में. अब मेरी धड़कन बहुत तेज़ हो गयी थी. मैं पूरा घर घूम के दोनो को खोजने लगा, लेकिन मुझे कही नही दिखे.

मुझे तो एक समय के लिए लगा की कही सुबह-सुबह ही प्रिन्स भाई ने मेरी दीदी को ले करके कही मज़े नही ना ले लिए. यही सोच करके मेरे दिल की धड़कन और तेज़ हो रही थी. तब मैने बुआ से पूछा-

मैं: बुआ, दीदी कहा है? कही मिल नही रही.

बुआ: वो तो तैयार हो करके सिटी जेया रही है. उसको कुछ शॉपिंग भी करनी है और पार्लर भी जाना है.

मैं: और लेके कों जेया रहा है बुआ?

बुआ: प्रिन्स के साथ जेया रही है.

अब मैं प्रिन्स का नामे सुनते ही मेरे दिमाग़ में रात का सब कुछ चलने लगा. कैसे-कैसे दीदी और प्रिन्स च्चत पे किस और हग कर रहे थे.

अब मैं जल्दी से अपने रूम के तरफ भागा, क्यूंकी मुझे अपना ऑडियो रेकॉर्डर दीदी के पर्स में डालना था. मैं वाय्स रेकॉर्डर ले करके वापस से बाहर की तरफ भागा.

देखा तो प्रिन्स बिके निकालने गया था, और दीदी बाहर में खड़ी थी. वो प्रिन्स भाई का इंतेज़ार कर रही थी, ताकि प्रिन्स बिके ले करके आए, और वो सिटी जाए.

मैं: कहा जेया रही हो दीदी?

दीदी: तुम इतना हाँफ क्यूँ रहे हो बाबू?

मैं दीदी से छ्होटा हू, तो दीदी मुझे बाबू ही बोलती है हमेशा.

अब मैं कैसे बताता क्यूँ हाँफ रहा था.

मैं: बताओ ना दीदी, कहा जेया रही हो?

दीदी: सिटी जेया रही हू भाई. कल के लिए कुछ शॉपिंग रह गयी थी, और पार्लर भी जाना था तो.

मैं: और कों ले करके जेया रहा है दीदी आपको सिटी?

दीदी: प्रिन्स भाई के साथ जेया रही हू.

दीदी प्रिन्स को प्रिन्स भाई ही बोलती थी हमेशा.

मैं: क्या दीदी, अब तो आप चली जाओगी. मेरे से बोलती, मैं आपको नही ले करके चलता क्या? अब कितने दिन आपके सेवा ही कर पौँगा? हमसे बोलना चाहिए ना दीदी.

मैं बस दीदी का रिक्षन चेक कर रहा था, की उनकी मनोदशा क्या होती है. और हुआ भी ऐसा ही. मेरा सवाल सुन के जैसे दीदी का मूह लटक सा गया हो. फिर खुद को संभालते हुए दीदी बोली-

दीदी: अर्रे बाबू, मेरी अभी सगाई हो रही है, और शादी के बाद भी समझ लो की तुमको ही सबसे ज़्यादा मानूँगी. मैं तुमको नही भूलूंगी बाबू. इसलिए ये सब मत बोलो की सेवा कर लू.

मैं: अछा ठीक है दीदी, नही बोलता. लेकिन आप मेरे से क्यूँ नही बोली.

दीदी: तुम्हारा यहा पे काम हो सकता है, और मुझे पूरा दिन लगेगा. कही पापा गुस्सा हो जाएँगे की खुद तो गयी ही, तुमको भी पूरा दिन फ़ससा दी हू. इसलिए प्रिन्स भाई को बोल दी.

मैं: अछा ठीक है दीदी, आचे से जाना.

बुत मुझे वाय्स रेकॉर्डर रखने का मौका नही मिल रहा था. फिर मैने दीदी से बोला की-

मैं: दीदी, आपको बुआ शायद खोज रही थी.

दीदी: किस लिए?

मैं: पता नही दीदी, आप सुन लो ना. दो आपका पर्स रखा हुआ हू, जब तक प्रिन्स भाई बिके निकल रहे सुन लो.

दीदी मेरी बात पे ज़्यादा सोची नही की मैं क्यूँ बोल रहा था, और अपना पर्स मुझे दे करके अंदर चली गयी. तब तक प्रिन्स भाई बिके ले करके आ गया और दीदी को पूछा तो मैं बोल दिया आ रही है. फिर दीदी उधर से गुस्से में आ रही थी.

मैं: क्या हुआ दीदी?

दीदी: बुआ तो बोल रही है मैं कहा बुलाई. तू अभी आज के दिन भी मज़ाक कर रहा है भाई!

मैं: अर्रे दीदी आपकी सगाई हो रही है, इसलिए आपको बहुत मिस करूँगा. इसलिए तोड़ा बहुत मज़ाक कर लिया.

दीदी मेरे माथे पे हाथ रख के सहलाई और बोली: ज़्यादा मत सोचो भाई. मैं कही नही जेया रही.

और वो बिके पे बैठ गयी. मुझे पहली बार ये दीदी का टच अलग महसूस हुआ था, और बहुत अछा लगा था उसका सहलाना. अब प्रिन्स बिके से दीदी को ले करके सिटी की तरफ निकल गया. मैं बस यही सोच रहा था की ये दोनो कहा जाएँगे और क्या-क्या करेंगे.

इसलिए मैं बस वाय्स रेकॉर्डर का वेट कर रहा था. पूरा दिन मेरा मॅन नही लगा रहा था. यही सोच करके मॅन नही लग रहा था, की इस समय वो दोनो कहा होंगे, और क्या कर रहे होंगे. दीदी का ये रूप मुझे देख करके कैसा फील हो रहा था, कैसा लग रहा था, ये बताया नही जेया सकता है.

क्यूंकी मैं दीदी को बहुत मानता था शुरू से ही, और अब एक के बाद एक उसके कारनामे सुन करके और देख करके मैं भी सोच रहा था की मेरी दीदी क्या शुरू से ही ऐसा थी. या कैसे आइस बन गयी. आख़िर किसने ऐसा बनाया मेरी दीदी को?

और ये बात बस दीदी मुझे बता सकती थी. बुत मैं दीदी से पूच भी नही सकता था.

लेकिन अब मेरा दीदी के लिए एक अलग फील आना पता नही नॅचुरल था या वू पिछले कुछ दिन से दीदी को देखने का नतीजा था, जो अब दीदी का हल्का टच भी मुझे अंदर से रोमांचित कर दे रहा था.

अब अगले एपिसोड में पढ़िए की मैने वाय्स रेकॉर्डर में क्या सुना, और क्या-क्या पता चला. आपको ये मेरी कहानी कैसी लगी?

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