बेहन की हार्डकोर चुदाई की कहानी

बेहन की चुदाई कहानी अब आयेज-

शिखा बेसूध पड़ी थी अपनी छूट का रस्स टपकाने के बाद.

विवेक: चल अब नाटक बंद और इधर आ मेरा लोड्‍ा चूस. फिर बजता हू तेरी छूट को.

शिखा: भैया यार प्लीज़ मत करो ना ये सब अब. आंटी को बाहर भेज दो प्लीज़ ना भैया.

विवेक: अर्रे पर अब तो वो भी नंगी खड़ी है यार. अब क्या शरम? देख ज़रा कितनी प्यारी लग रही है तेरी आंटी मेरे बच्चे के साथ.

मैने शिखा को उठाया और बेड के कॉर्नर पर लाया. फिर अपने कपड़े निकाले और लंड हिलाते हुए उसके मूह के पास ले गया.

रोहिणी: बेटू आप जानते हो ये नही मानेगा कमीना. जो इसके मॅन में होता है वो करके ही मानता है. मेरा दूध पीने के चक्कर में कुत्ते ने मुझे प्रेग्नेंट होने के लिए माना ही लिया ना. तो तुम भी टाइम वेस्ट मत करो, और एंजाय करो.

शिखा शरमाते हुए आयेज बढ़ी और मेरा लंड पकड़ा. फिर मुझे स्माइल करते हुए मूह बनाया और एक हाथ से फिर से मूह च्छुपाने लगी.

विवेक: आबे यार, बस भी कर अब. शर्मीली जितना ज़्यादा तडपाएगी, फिर उतना ही ज़ोर का बजेगी. वैसे भी दुल्हन बनी बहुत क़ातिल लग रही है कुट्टी.

रोहिणी भाभी हासणे लगी और शिखा ने फिर दोनो हाथो से लंड पकड़ा और शरमाते हुए मूह में लिया. पहले उसने टोपे को आचे से चूसा और मेरी आ निकाल दी.

विवेक: उफ़फ्फ़ कमीनी, ग़ज़ब चूस्टी है यार तू. तेरे जैसा ब्लोवजोब आज तक कोई नही दे पाया, तेरी रोहिणी आंटी भी नही.

रोहिणी: हा बेटू, ये बहुत तारीफ करते है तुम्हारे चूसने के स्टाइल की, की शिखा जैसा चूसो भाभी.

शिखा ने आँखें बंद कर ली और बस फिर वो फुल जोश में आ कर लंड चूसने लगी. वो पूरा लंड अंदर लेती और जीभ से चाटने लगती. फिर बाहर निकालती. लंड को उसने एंड पर पकड़ कर रखा था, और मूह में अंदर ले जाती तो लंड और स्ट्रेट हो जाता. इससे और लंबा महसूस होता तो और अंदर तक लेने लगती फुल गले तक पहुँच रहा था उसके मेरा लंड.

वो आज कुछ ज़्यादा ही आचे से चूस रही थी. शायद रोहिणी को दिखाने के लिए. पर जो भी हो, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, और मैने रोहिणी को अपने पास खींच कर उसे किस करना स्टार्ट कर दिया. मैं उसके बूब्स दबाने लगा. क्या बतौ मैं कों से आसमान में था यार मज़े में.

शिखा इतना अंदर तक और इतनी ज़ोर-ज़ोर से चूस रही थी की उसके मूह से लार टपकने लगी. मेरा पूरा लंड उसके लार से चिपचिपा हो गया.

विवेक: आअहह रंडी, बस कर वरना मूह में ही झाड़ जौंगा. शिखा बस मेरी जान अब छूट देदे. उफफफ्फ़ कुट्टी क्या चूस्टी है साली. रुक जेया मदारचोड़, अब छोड़ने दे छूट.

शिखा रुकने का नाम ही नही ले रही थी. फिर मैने ही उसका मूह पकड़ कर उसे रोका और उसे पलट कर उसका लहंगा कमर तक किया. अब शिखा मेरे सामने पड़ी थी खुले ब्लाउस के साथ, अपने लहँगे को कमर तक लिए हुए, और छूट खोले हुए.

विवेक: भाभी मैं बता नही सकता कितना खुश हू मैं आज. थॅंक योउ, थॅंक योउ सो मच भाभी शिखा को ऐसे तैयार करने के लिए. कितनी अची लग रही थी है ये साली मेरी दुल्हन बन कर. उफ़फ्फ़, मॅन करता है बस खा जौ तुझे शिखा यार. आज तेरी खैर नही. आज तो तुझे ऐसे छोड़ूँगा जैसे पहली बार छोड़ूँगा.

फिर मैने शिखा की टाँगें पकड़ी और उन्हे उठा कर, शिखा के सिर की तरफ करके उसे पकड़ा दी. अब उसकी कमर थोड़ी उठ गयी थी, तो उसके नीचे तकिया लगाया. शिखा अपनी टाँगें अपने सिर के पीच्चे पकड़े हुए थी. अब उसके बूब्स और उसकी छूट मेरे सामने थे, और मुझे उकसा रहे थे.

मैने पहले झुक कर उसके बूब्स पिए, और उन पर थप्पड़ मार कर लाल कर दिया. फिर छूट पर मूह रखा, और ज़ोर-ज़ोर से घुसा-घुसा कर छूट को चूसा. मैने उसे भी मार-मार कर लाल कर दिया.

शिखा से बर्दाश्त नही हुआ और थप्पड़ मारते वक़्त ही उसकी छूट से पेशाब निकल गया. मैं और रोहिणी हासणे लगे तो शिखा ने अपना चेहरा एक तरफ करके च्छुपाने का ट्राइ किया.

रोहिणी: अर्रे-अर्रे इसमे शरमाने की क्या बात है बेटू? ये तो सब के साथ हो जाता है मज़े में.

शिखा: आंटी मुझे बहुत शरम आ रही है आपके सामने ये सब करने में और ऐसे नंगे पड़े रहने में. पर मुझे पता है ये कमीना भाई मेरा इसे बहुत मज़े आ रहे होंगे ऐसे मुझे शर्मिंदा करके और ऐसे तडपा कर पेलने में. भैया अब जब इतनी बेशर्मी करवा ही ली है, तो बस अब और मत तड़पाव मुझे. प्लीज़ पूरा करो अब काम मेरा. छोड़ डालो मुझे प्लीज़ भैया.

रोहिणी: अछा विवेक बस हुआ. अब मत तड़पाव बेचारी को. डाल दो अपना लंड मेरी बेटू की प्यारी छूट में और बस छोड़ डालो आज इसे आचे से, क्यूँ बेटू?

शिखा: आंटी आप भी ना (और उसने फिर से अपना मूह एक साइड करके च्छूपा लिया).

मैने मौका देखा और बेड पर चढ़ कर घुटने मोड, और एक झटके में पूरा लंड पेल दिया शिखा की छूट में. मेरे आधे खड़े होने की वजह से लंड नीचे की साइड हो कर छूट में उतरा, तो सीधा होने की वजह से तोड़ा ज़्यादा अंदर तक जेया रहा था.

शिखा: आहह मा कुट्टी, उफ़फ्फ़ उफ़फ्फ़ भैया यार, मा छोड़ दी एम्म.

अब मैं धक्के पेलने लगा घचा घच और शिखा अपना सिर उपर उठा कर चिल्लाए जेया रही थी.

शिखा: एम्म मुम्मा रीए भैया धीरे प्लीज़ हाए मॅर गयी एम्म आ आ आहह कुत्ते सुनो तो एम्म.

मैं कहा उसकी सुनने वाला था. रोहिणी ने भी मुझे एक बार मार कर इशारा किया की धीरे से छोड़ू, पर उसकी भी नही सुनी. फिर रोहिणी शिखा की सिर की तरफ बैठ कर उसके माथे पर हाथ फिरने लगी.

रोहिणी: विवेक प्लीज़ धीरे से छोड़ो. बेटू को परेशानी हो रही है. बेटू ज़्यादा अंदर तक पेल रहा है तो दर्द हो रहा है क्या?

शिखा: आंटी एमेम ये कुत्ता हमेशा ऐसे ही करता है. आ म्‍म्मा मेरी एक नही हाए, मेरी एक नही सुनता है. बस अपना छोड़ने में लगा ह्म रहता है.

शिखा को फिर कुछ समझ आया और उसने अपनी टाँगें छ्चोढ़ कर अपना मूह च्छूपा लिया हाथो से.

रोहिणी ने हेस्ट हुए उसकी टाँगें पकड़ ली.

रोहिणी: ग़लत बात है विवेक. क्यूँ नही सुनते तुम मेरी बेटू की कभी? देखो बेचारी को कितना दर्द दे कर छोड़ रहे हो. आराम से प्यार से छोड़ो ना.

विवेक: मैं क्या करू भाभी, ये साली है इतनी ग़ज़ब माल की कंट्रोल नही होता है. और फिर साली उपर से ऐसी-ऐसी बातें बोलती है, जिससे मेरा जोश बढ़ जाता है. तो फिर इसकी और बजता हू ज़ोर-ज़ोर से. और आज तो ये क़यामत लग रही है. आज मुझे मत रोको.

अब मैने अपने पैर पुर स्ट्रेट किए, और हाथ को शिखा की कमर की साइड में रख कर छोड़ना शुरू किया. धक्के बहुत अंदर तक पद रहे थे. शिखा की पूरी कमर हिल जाती थी और उसके बूब्स उपर नीचे झूल जाते थे. कमरे में पाट पाट पाट पाट और शिखा की आ आ आ गूँज रही थी.

रोहिणी शिखा की टाँगें पकड़े हुए बैठी थी और शिखा बस अपना चेहरा च्छुपाए मूह इधर-उधर घुमा कर आहें भर कर चुदाई के मज़े ले रही थी. मैने फिर शिखा के हाथो को हटाने की कोशिश की, पर उसने और मज़बूती से च्छूपा लिया चेहरा.

शिखा: भैया, प्लीज़ मत करो, आप बस वही करो जो कर रहे हो. मुझे शरम आ रही है, प्लीज़ भैया.

मैने ताक़त से उसके हाथो को पकड़ा और एक झटके में खींच कर नीचे कर दिए. अब उसके हाथो को पकड़ कर आचे से पेलने लगा उसकी छूट. वो आँखें ज़ोर से बंद कर करके मज़े ले रही थी.

शिखा: आहह आंटी बचा लो प्लीज़. ये आह अहम्म ये कुत्ता मेरी जान ले लेगा वरना एम्म फुक्ककक हाए रे, धीरे से मारो भैया प्लीज़.

अब मैं अपने घुटनो पर आ गया और उसके हाथो को खींच कर उसे तोड़ा अपनी तरफ उठाया. फिर आचे से ग्रिप बना कर पेलने लगा. अब मेरे गोते उसकी गांद पर पड़ने लगे, इतनी अंदर तक पेल रहा था उसकी छूट. शिखा ने भी आँखें खोल कर मुझे देखा और गिड़गिदने लगी.

शिखा: भैया क्यूँ फाड़ने पर तुले हो यार? आंटी को दिखा रहे हो क्या की आप मर्द हो बड़े और कैसे मुझे छोड़ते हो? आअहह आहह भैया.

उसने मेरे हाथो पर मारना शुरू कर दिया.

शिखा: आंटी रोको ना आप इसको एम्म फुक्ककक कुत्ते.

फिर मैने तोड़ा आराम से छोड़ना शुरू किया. अब मैं लंबे-लंबे धक्के लगा कर छोड़ रहा था, जिससे शिखा को भी मज़ा आ रहा था, और वो अब भारी-भारी सिसकारियाँ लेने लगी.

शिखा: उम्म एसस्स भैया, ऐसे ही एम्म और अंदर तक पेलो आहह. एसस्स उफ़फ्फ़ क्या लंड है मेरे पति का हाए एम्म छोड़ो छोड़ो छोड़ो भैया एस्स एस्स जस्ट लीके तट. एम्म फक मे फक मे डीपर भैया, एस कम ओं एस, गिव इट तो मे हार्डर एम्म.

मैने लंड उसकी छूट से निकाल कर उसकी गांद पर रखा, और छूट से तोड़ा रस्स निकाल कर हाथ में लिया, और गांद के च्छेद पर माल दिया. लंड तो चुदाई से गीला था ही, तो धक्का मारा और लंड धीरे-धीरे अंदर धकेल दिया. अब शिखा अपने गांद पकड़ कर खोलने लगी, और मैं उसकी गांद पेलने लगा.

रोहिणी भाभी उसकी टाँगें पकड़ कर उसकी चुदाई देख रही थी. वो अपने होंठो को दबा रही थी दांतो से-

रोहिणी: विवेक यार क्या छोड़ते हो बेरहम सेयेल. हाए जल्दी से शिखा की छूट का रस्स निकालो. फिर मेरी बजाओ, मुझसे भी कंट्रोल नही हो रहा है.

शिखा: हा आंटी बहुत बेरहम है ये मेरा मर्द. सला ज़रा भी तरस नही आता है अपनी बीवी पर हाए. कुत्ते छोड़ एम्म छोड़ और ज़ोर लगा के.

फिर मैने फाटक से गांद से लंड निकाला, और वापस छूट में डाल दिया, और फुल स्पीड में धक्का पेल चुदाई की. 2 मिनिट में ही छूट से मूट की धार निकालने लगी, और शिखा ने गांद छ्चोढ़ कर मेरा लंड निकाला छूट से. फिर अपनी छूट पर हाथ से मालिश करने लगी, जिससे उसकी छूट का मूट बेड पर गिरने लगा और उसकी कमर और गांद पर भी.

शिखा: आआहह आअहह फुक्कककक उफ़फ्फ़ कितने टाइम बाद आज छूट से रस्स निकल रहा है भैया.

जैसे ही छूट से मूट बंद हुआ, मैने फिर से लंड पेल दिया और फिर से पेलने लगा. पर इस बार शिखा रोक-टोक नही कर रही थी, और वो सुस्त हो कर गिरी भी नही. फुल सपोर्ट दे रही थी, और मुझे जोश दिला रही थी, जिससे पता चल रहा था की अब उस पर हवस भारी हो रही थी, और फुल जोश में थी वो.

अब वो रोहिणी भाभी के बूब्स को लपकने लगी और स्माइल करते हुए भाभी को देखती.

विवेक: भाभी देखो अपनी बेचारी बेटू को. साली कितनी चुड़क्कड़ है. शिखा मेरी जान इसी वजह से तो तू मेरी फेवोवरिट रांड़ है साली. भाभी शिखा को अपने होंठो का टेस्ट दो ना ज़रा.

रोहिणी भाभी ने मेरी तरफ देखा ही था की इतने में शिखा ने उनका चेहरा पकड़ा और उनके होंठ चूसने लगी. मैं तो डांग रह गया उसकी ये हरकत देख कर. वो दोनो फुल जोश में एक-दूसरे को किस कर रहे थे. मैं फिर शिखा की गांद छोड़ने लगा, और शिखा बीच-बीच में अपनी छूट पर एक हाथ से मसल देती और किस करती रहती.

अब चुदाई को लगभग 35 मिनिट होने को थे. शिखा एक बार और झाड़ चुकी थी, और अब मुझे भी लंड में अकड़न महसूस होने लगी.

विवेक: मेरा माल निकालने वाला है मेरी शिखा, बता कहाँ लेगी?

शिखा: भैया आज सुहग्रात है तो आप मेरी छूट में ही डाल दो. आज तो अपने पति का बीज अंदर ही लूँगी, चाहे मा ही क्यूँ ना बन जौ.

रोहिणी: ये हुई ना बात बेटू!

विवेक: कमीनी, कुटिया साली, ले बन जेया मेरे बच्चे की मा साली. फिर रोहिणी और तेरा दोनो का दूध मिक्स करके पीने को मिला करेगा.

शिखा ने अपनी टाँगें मेरी कमर पर लपेटी और मैने 2 मिनिट फुल स्पीड में और छोड़ा होगा. फिर मैने उसकी छूट में ही सारा माल निकाल दिया. काफ़ी टाइम बाद चुदाई की थी, तो माल भी खूब निकला.

फिर शिखा के बगल में ही लेट गया और दोनो हाँफ रहे थे.
रोहिणी कभी शिखा के माथे पर हाथ फेरती, कभी मेरे.

शिखा: आंटी बस एक रौंद और मुझे अकेले चूड़ने दो. फिर आप चुड जाना प्लीज़. बहुत प्यासी हू मैं. इस बार भैया का माल पीना है मुझे.

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