बेहन की चूत की ताबाद-तोड़ चुदाई की कहानी

पिछला पार्ट नही पढ़ा तो पढ़ लीजिए. चुदाई से तक कर हम दोनो निढाल पड़े हुए थे. कुछ टाइम में जब हमारी साँसे नॉर्मल हुई, और थोड़ी जान आई, तो मैने करवट लेकर शिखा की तरफ देखा. वो आँखें बंद किए हुए अपनी छूट को अपने हाथो से महसूस कर रही थी, और मुस्कुरा रही थी.

मैने उसके हाथ के उपर हाथ रखा, और उसकी छूट में मेरी और उसकी एक उंगली डाल दी, और अपने चेहरे को उसके करीब ले गया. फिर मैने उसके गाल पे एक किस की. उसने मुझे देखा और मुस्कुरा कर बोली-

शिखा: लगता है अभी हज़्बेंड का मॅन भरा नही. अभी सुहग्रात पूरी हुई नही क्या हज़्बेंड जी?

विवेक: तुम्हारे जैसी बीवी हो जिसकी उसकी तो सारी उमर ही सुहग्रात होती है जान.

शिखा: अछा जी, मैं इतनी पसंद आ गयी क्या?

विवेक: अर्रे तुम्हारे जैसा माल आज तक नही खाया लंड ने शिखा.

इतना कह कर मैने उसकी छूट को अपने हाथ में भर कर तोड़ा दबा दिया.

शिखा: आअहह हज़्बेंड उफ़फ्फ़, प्लीज़ दर्द होता है यार. अभी लंड डाल कर फादी थी. अब क्या इरादा है? प्लीज़ अब कुछ नही करना. मेरी छूट बेचारी से नही पाएगी अब कुछ भी हज़्बेंड जी.

विवेक: ये तो तुमने लंड लेने से पहले भी कहा था की ‘नही-नही मेरी छ्होटी सी छूट इतना बड़ा लंड नही ले पाएगी’. और फिर कैसे चिल्ला रही थी, ‘और तेज़ भैया, और अंदर तक छोड़ो भैया, प्लीज़ हज़्बेंड, प्लीज़ फक मे डीपर’.

मेरी बातें सुन कर वो शर्मा गयी, और अपना चेहरा च्छुपाने लगी अपने हाथो से. मैने एक बार फिरसे उसकी छूट पर हाथो से दबा दिया.

शिखा: आहह मा, प्लीज़ यार भैया, अब परेशन मत करो. मेरे में बिल्कुल जान नही बची अब कुछ भी करने को. पर मुझे लग रहा है आपके इरादे सही नही है.

विवेक: यार अपनी सुहग्रत पर किस हज़्बेंड के इरादे सही होते है? आज की पूरी रात मेरी है, और मैं जो चाहूँगा वो करूँगा. तुमने पर्मिशन दी थी भूल गयी?

शिखा: अर्रे पर पर्मिशन पूरी हो तो गयी यार भैया. अब क्या बाकी रह गया. मूह छोड़ दिया, बूब्स छोड़ दिए, छूट छोड़ दी. अब क्या?

विवेक: मेरी जान, अभी तुम्हारी गांद बाकी है.

शिखा: नही-नही, प्लीज़ भैया गांद नही, गांद नही प्लीज़. वो सच में बहुत छ्होटा होल है. फटत जाएगी आपके लंड से भैया. आप चाहो तो छूट मूह बूब्स फिरसे छोड़ लो, पर गांद नही प्लीज़.

विवेक: सोच लो, फिर माना मत करना की भैया छूट फटत रही है वग़ैरा-वग़ैरा मुझे. फिर खुल कर छोड़ने की पर्मिशन चाहिए वरना फिर गांद दो.

शिखा: जी-जी हज़्बेंड जी, दी खुल कर छोड़ने की पर्मिशन दी. छूट आप चाहे जैसे भी छोड़ो, बस गांद नही.

विवेक: चलो ठीक है. फिलहाल मैं तुम्हारी छूट मार कर ही काम चला लूँगा. पर गांद भी देनी ही पड़ेगी बाद में.

इतना कह कर मैने शिखा की करवट बदली, और उसका एक पैर उपर किया, और साइड से अपना लंड आराम से उसकी छूट में उतार दिया. छूट इतनी टाइट थी उसकी, की लंड एक-दूं दबा हुआ उसकी छूट में घुस रहा था, और एक-एक इंच अंदर जाते हुए फील हो रहा था.

शिखा: आ हा भैया, बहुत धीमे से छोड़ना. छूट पूरी फटत चुकी है प्लीज़. मुझे आपका लंड अपने अंदर जाते और बाहर आते फील करना है भैया. धीरे से डालना और धीरे से निकालना.

मैने उसका हाथ पकड़ा, और उसकी छूट पर रख कर तोड़ा दबाव बनाया, जिससे उसे लंड फील होने लगा. फिर मैने धक्के लगाने शुरू किए.

शिखा: आहह भैया एस, ऐसे ही धीरे-धीरे से छोड़ो. आपका पूरा लंड अंदर जाते हुए फील हो रहा है. ऊ मा, एस भैया, बहुत म्ज़ा आ रहा है आपके लंड को खा कर. प्लीज़ छोड़ते रहो ऐसे ही. मा हा हा, और अंदर तक पेलो ओह गोद एस, हज़्बेंड फक मे, फक मे डीप.

मैने धक्के लगाना जारी रखा, और उसके चेहरे पर किस करते हुए उसके होंठ चूसने लगा. उफ़फ्फ़ क्या बतौ यार कितना मज़ा आ रहा था. नीचे मेरा लंड उसकी गीली छूट में अंदर-बाहर हो रहा था, और उपर मेरी और उसकी जीभ एक-दूसरे से लड़ाई कर रही थी. लंड पूरा अंदर जाता तो उसकी आ निकल जाती, और बाहर निकलते ही वो रिलॅक्स हो जाती.

ऐसे ही धीरे-धीरे डीप स्ट्रोक्स मार कर उसे छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था. यार लंड पूरा उसकी छूट के एंड तक पेलता, और फिर धीरे-धीरे बाहर निकलता.

छूट की गर्मी लंड पर महसूस होती और उसकी छूट बहुत आचे से जाकड़ के रखी थी लंड को, और उपर से हाथ का दबाव मज़ा ही अलग आ रहा था यार. लगभग 15 मिनिट उसे ऐसे ही धीरे-धीरे छोड़ा, और वो झड़ने को रेडी थी.

शिखा: आअहह भैया, मेरा पेशाब निकालने को है. एस, रुकना मत भैया. बहुत मज़ा दिया है आज आपके लंड ने. प्लीज़ डालते रहो इसे छूट में. निकाल दो मेरा पेशाब भैया. एस फक एयाया उउम्म्म्म भैया निकला मेरा मा.

वो झड़ने लगी तो मैने धक्के देना बंद किया, और उसके बूब्स को चूसने लगा. नरम नरम बूब्स मूह में भर कर काट-काट कर चूसने में मज़ा आ रहा था.

शिखा: उम्म्म एम्म भैया थॅंक्स यार, बहुत मज़ा आया इस बार. आपका पूरा लंड अंदर और बाहर होते हुए छूट को मस्त छोड़ा.

विवेक: तेरा तो हो गया शिखा, पर मेरा अभी नही हुआ. देख लंड अभी भी सलामी दे रहा है.

शिखा: अर्रे भैया ये बहनचोड़ तो मेरी छूट से थकने वाला नही है. पर मेरी छूट बहुत जल रही है. अब नही झेल पाएगी इस हरामी के झटके भैया.

विवेक: तो फिर गांद दे दे.

शिखा: अर्रे-अर्रे मेरी गांद के ही पीछे पढ़ कर रह गये हो भैया आप तो. दे दूँगी गांद भी, पर तोड़ा तो सबर करो यार. अभी आप ऐसा करो की मेरा मूह छोड़ लो आप.

मुझे उसकी बात ठीक लगी, तो मैं उठा और उसके मूह के सामने लंड कर दिया.

शिखा: सला हरामी कालू, 2 घंटे से मेरी चीखे निकाल कर भी कैसे खड़ा है. रुक अभी बताती हू तुझे.

और ये कह कर उसने मेरा कालू अपने मूह में लिया और आचे से चूसने लगी.

विवेक: अफ यार शिखा, साली रॅंड क्या मस्त माल है साली तू. तेरी छूट, तेरे बूब्स, तेरे मूह का कोई जवाब नही साली. पहले ही दिन तू एक-दूं मस्त एक्सपीरियेन्स्ड रंडी की तरह ब्लोवजोब देने लगी है.

शिखा: अछा भैया, अब मैं रंडी हो गयी? ठीक है फिर जब रंडी बना ही दिया है, तो फिर रंडी की छूट, बूब्स, मूह, और गांद की कीमत होती है, जो अब आपको देनी होगी. अब से अगर आपको मेरी लेनी है, तो मेरी कीमत देनी होगी.

विवेक: क्या बोली बेहन की लोदी? मदारचोड़, मुझसे कीमत लेगी.

शिखा: बिल्कुल मेरे बहनचोड़, सही सुना है आपने.

विवेक: अछा ठीक है दे दूँगा. पर अभी ये सेशन तो पूरा कर, चूस मेरा लोड्‍ा, मेरा निकालने वाला है. ज़ोर लगा मेरी रंडी, मेरी कुटिया, चूस अयाया ह्म. एस सक मे शिखा, ई’म कमिंग आअहह एससस्स चूस ले पूरा माल साली आआहह एम्म.

और वो ज़ोर-ज़ोर से चूस कर मेरे लंड का सारा माल पी गयी साली.

शिखा: अया, मज़ा आ गया भाई तुम्हारा माल पी कर. कसम से एक-दूं मलाई जैसा गाढ़ा-गाढ़ा गरम-गरम अब से रोज़ पिलाओगे मुझे? और अब मुझे सोने दो. कल घर भी जाना है सुबा भैया. पूरी बॉडी तोड़ दी है आपने.

विवेक: अर्रे पर अभी एक और…

शिखा: बस-बस हो गया. अब कोई और रौंद नही. अब कल से रंडी की कीमत दो, और उसकी छूट लो.

फिर हम दोनो कड्ड्ल करके सो गये, और दूसरे दिन सुबा बस से घर को रवाना हुए.

इस पार्ट में इतना ही. आयेज के पार्ट्स में बतौँगा कैसे मेरी रंडी मुझसे पैसे ले कर अपनी छूट देती है, और कैसे उसे पॉर्न दिखा कर अपनी फॅंटसीस पूरी करने के लिए राज़ी किया मैने.

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