मेरी कुंवारी बहन की बुर की चुदाई

अपने दोस्त की बहन की चुदाई का कोई मौक़ा मुझे नहीं मिल रहा था तो मैं चूत का प्यासा हो रहा था. इसी बीच मुझे अपनी कुंवारी छोटी बहन की बुर की चुदाई का मौक़ा कैसे मिला?

नमस्कार दोस्तो, मैं राज आज एक नई कहानी को लेकर हाजिर हूँ।

मेरी पिछली सेक्सी कहानी
दोस्त की मम्मी की अन्तर्वासना
में आपने पढ़ा कि कैसे मेरे दोस्त की मम्मी ने मेरे से अपनी चूत चुदाई करवायी.

दोस्तो, पिछले महीने की उन्नीस तारीख को एक दोस्त की शादी में मैं और मनीष दोनों गांव आये हुए थे।
पड़ोस में ही शादी हो रही थी और मनीष घर पर था तो मुझे पीहू को चोदने का कोई मौका नहीं मिल रहा था। इसलिए खाना खाकर मैं छत पर जाकर पीहू से फोन पर बात करने लगा।

मैं उससे बातें कर रहा तभी मेरी बहन ज्योति छत पर आ गयी और उसने मुझे रोमांटिक बातें करते हुए सुन लिया।
वो मेरे पास आकर बोली- किससे बात कर रहे हो?
मैंने कहा- किसी से नहीं!
तो उसने कहा कि मैंने सुना है तुम किसी से बात कर रहे थे।
मैंने अपना बड़ा वाला फोन उसे देते हुए बोला- देखो किसी से बात नहीं कर रहा था।
मेरी बहन ने कहा- ज्यादा चालाकी मत करो भैय्या, तुम किसी से तो बात कर रहे थे।

इतना कहकर वो मुझसे मेरा छोटा वाला फोन झटके से छीन लिया.
उससे मैंने अपना फोन छीनने का प्रयास किया तो फोन को वो दोनों हाथों से कसकर दबाकर घुटनों के बल बैठ गयी उसके हाथ उसकी गोद में उसके घुटनों और सीने के बीच में था।

मैंने उससे कहा- प्लीज फोन दे दो!
तो मेरी बहन ने कहा- पहले बताओ?
मैंने कहा- यार कुछ बातें पर्सनल होती हैं.
और उससे फ़ोन छीनने के लिए उसके पीछे आकर उसके दोनों हाथों को बाहर खींचने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाया।

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उसके बाद मैंने उसके दोनों हाथों के कंधे के नीचे थोड़ी जगह जो बची थी उसमें से अपने हाथ झटके से अंदर डाल दिया मेरे हाथ अंदर जाते ही वो और कसकर चिपक गयी और मेरे हाथों के पंजे उसकी दोनों चूचियों पर लग गए।

चूंकि वो कसकर चिपक कर बैठी थी तो मेरे हाथों के पंजे उसकी नर्म चूचियों का अहसाह पा रहे थे। उसकी चूचियों का अहसास होते ही मेरे अंदर वासना जागने लगी।

अंधेरा काफी हो चुका था इसलिए मैं भी निश्चिन्त था कि कोई हमें देख नहीं पायेगा और वासना के वशीभूत होकर मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा।

मैं उससे सट कर उसकी चूचियों पर हाथों का दबाब बढ़ाते हुए उससे बोला- ज्योति प्लीज दे दो.
तो वो हँसती हुई बोली- नहीं भैय्या, मैं नहीं दूंगी।
मैंने अपने हाथों का दबाब उसकी चूचियों पर थोड़ा और बढ़ाते हुए, जिससे उसे पता चल जाये कि मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा हूँ, और अपने होंठों को उसके गर्दन से सटाते हुए बोला- ज्योति दे दो।

ज्योति हँसती हुई बोली- भइया, मैं नहीं दूंगी.
अब तक उसकी सांसें तेज़ चलने लगी थी जिन्हें मैं महसूस कर रहा था।

अब तक मैं भी समझ गया था कि जो मैं कर रहा हूँ ज्योति भी उसका मज़ा ले रही है इसलिए डर मेरे मन से निकल गया। मैंने ज्योति की चूचियाँ दबाते हुए उसे खड़ा कर दिया। उसकी दोनों चूचियों को दबाए हुए ही मैं अपने होंठों को उसके कानों के पास ले जा कर उससे कहा रहा था- ज्योति प्लीज दे दो!
और वो कह रही थी- नहीं दूंगी।

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ज्योति अपने चूचियों पर से मेरे हाथों को हटाने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी बस उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और हंसकर वो कह रही थी- नहीं दूंगी।
बहन का कोई प्रतिरोध नहीं देख कर मैं समझ गया कि रास्ता क्लियर है और खुलकर बहन की दोनों चूचियाँ दबाने लगा.

तब भी वो कुछ नहीं बोली।

तब मैं बहन की गर्दन पर अपने होंठों से किस करने लगा।
अपने दोनों हाथों को मैंने उसकी टीशर्ट के नीचे डालकर उसकी ब्रा के ऊपर से बहन की चूचियाँ दबाने लगा.

इस पर ज्योति बोली- भइया क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं … बस तुमसे प्यार कर रहा हूँ। क्या तुम्हारा मन नहीं करता है कि कोई तुमसे प्यार करे … अपनी बांहों में भरकर तुम्हें जिंदगी का सबसे हसीन सुख दे दे।
ज्योति ने कहा- भइया, आप मेरे भाई हैं. किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी होगी।
मैंने कहा- मैं तो किसी से नहीं बताऊंगा. क्या तुम बताओगी?
तो उसने कहा- नहीं।

तब मैंने कहा- बस तो जिंदगी के मज़े लो! क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है?
तो बहन ने कहा- भाई, बहुत मज़ा आ रहा है।

तब तक मम्मी ने नीचे से आवाज दी और ज्योति ने मुझसे कहा- भैया मुझे जाना होगा.
तो मैंने कहा- सबके सोने के बाद छत के ऊपर वाले मेरे रूम में आ जाना.
बहन ने कहा- दरवाजा खुला रखना।

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