बहन गयी तो गर्लफ्रेंड को चोद कर टाइम पास किया

तो जिस-जिस ने मेरी स्टोरी के पहले पार्ट्स नही पढ़े, वो पद कर ही आयेज के पार्ट्स एंजाय करे.

मैं शिखा की छूट बजा कर अपने फ्लॅट पर आया, और कल उसकी गांद बजाने को मिलेगी, ये सोच सोच कर मॅन ही मॅन बहुत खुश हो रहा था. सोच रहा था, कॉलेज की छुट्टी चल रही थी, तो मस्त सुबह जल्दी से उसके रूम पर जया करूँगा, और सारा-सारा दिन उसकी चुदाई किया करूँगा. कभी छूट तो कभी गांद. मज़ा ही आ जाएगा.

मैं ये सब सोच-सोच कर खुश हो रहा था. तभी मेरा फोन बजा. देखा तो शिखा की कॉल थी.

शिखा: हेलो, क्या कर रहे हो मेरी छूट के मलिक?

विवेक: कुछ नही, बस तेरी छूट की पिलाई को याद कर-कर के तेरी गांद छोड़ने की तायारी कर रहा हू. अपने लंड को आज पूरी रात आचे से तेल में डुबो कर मालिश करूँगा. ताकि कल वो तेरी पीछे की गुफा फाड़ कर उस पर अनपा राज जमा सके.

शिखा: ओह हो भैया, क्या बात है. इतनी तायारी मेरी गांद के लिए? पर आपको कुछ बताना था.

विवेक: हा बोल, कोई स्पेशल डिमॅंड है क्या?

शिखा: अर्रे पहले सुनो तो. अभी मम्मी का कॉल आया था. हम कल सुबह मथुरा जेया रहे है 4 दीनो के लिए (और ये कह कर वो हासणे लगी). तो अब आप अपने लंड को 4 दिन तक आचे से तेल पिलाओ. उसके बाद मेरी गांद पिलाई करना भैया हाहहहा.

विवेक: अर्रे पर अचानक क्यूँ यार? नही, तू माना कर दे. तू नही जाएगी. कोई बहाना ब्ना दे यार, धोखा मत कर शिखा. मुझे तेरी गांद चाहिए कल, मैं कुछ नही जानता. प्लीज़ यार, मेरा लंड तड़प रहा है तेरी गांद बजाने को यार.

शिखा: अले ले मेला बच्चा देखो कैसे रोने लग गया हाहाहा. सबर करो भैया, मिल जाएगी कल, नही तो 4 दिन बाद सही. और मैं जानती हू जितना आप का लंड तड़प रहा है, आप उतना ही मुझे तड़पावगे जब मेरी बज़ाओगे. मेरी तो वैसे ही फटत रही है, ये सोच-सोच कर, की आप का मूसल जो मेरी छूट की मा छोड़ देता है आज भी, वो जब गांद में पहली बार जाएगा तब क्या हाल करेगा.

विवेक: यार नही, मुझसे इतना वेट नही होगा. मैं आ रहा हू, फिर अभी मुझे तेरी गांद मारनी है. तैयार हो जेया तू, अभी गांद फतवाने को.

शिखा: अर्रे पर अभी मम्मी पा….

मैने उसकी बात नही सुनी, और फोन कट किया. फिर जल्दी से वॅसलीन की डिब्बी उठाई, कॉंडम का पॅकेट लिया, और फटत से निकला शिखा के फ्लॅट की तरफ. उसके फ्लॅट के नीचे पहुचा ही था की उसकी मों की कार आ कर रुकी मेरी आयेज.

फक यार, सब गड़बड़ हो गया बीसी. उसकी गांद आज रह गयी और अब सच में 4 दिन वेट करना पड़ेगा यार, फक बहनचोड़.

मैं उसकी मों को नमस्ते किया और वापस अपने फ्लॅट पर आ गया उदास मूह और उससे भी ज़्यादा उदास लंड लिए. रात का खाना खा कर सोने जेया रहा था तो मा का कॉल आया.

वो बोली: बेटा बहुत दीनो से घर नही आया, और अब एग्ज़ॅम्स ख़तम हुए है तो छुट्टी के लिए घर नही आएगा?

तो मैने सोचा चलो क्यूँ ना मैं भी घर घूम अओ 4 दीनो के लिए. मैने बस सर्च की तो सीट अवेलबल थी, और मेरे पास टाइम भी था. तो बस में सीट बुक करके पॅकिंग की, और निकल आया घर के लिए. सुबह घर पहुँचा और सबसे मिला तो पता चला के मेरे चाचा की शादी फिक्स हो गयी थी.

पर मुझे तोड़ा अजीब लगा क्यूंकी मेरा ये चाचा लड़कियों में बिल्कुल भी इंट्रेस्टेड नही था. अची ख़ासी बॉडी का मलिक था, पर लड़कों में इंट्रेस्टेड था. वो हमारे घर में ही रहता था, पर उससे मेरी इतनी बनती नही थी. तो मैने ज़्यादा दिमाग़ नही लगाया और गाओं घूम कर यार-दोस्तों से मिला.

गाओं में जो मेरी माल (रजनी) थी, उससे मिला, और फिर उसे छोड़ने का प्लान किया. रजनी दुबली-पतली थी, पर यार उसके बूब्स बहुत सही थे. मतलब बड़े थे, पर पर्फेक्ट्ली रौंद और मुलायम. हाए, देखते ही लंड तंन से खड़ा हो जाता है.

उसकी सील भी मैने ही खोली थी, और फिर छोड़-छोड़ कर उसकी छूट भी खोल चुका था. तो अब उसे छोड़ने में इतना मज़ा नही आता था. पर जब कही कोई जुगाड़ नही होती है तो रजनी काम आती है.

अब हाथ से हिलने से तो अछा है ना की उसकी छूट पेलो और ब्लोवजोब ले लो. तो 3 दिन यही सब चला. घर पर आराम किया, रजनी की छूट पेली, यार दोस्तों से गुप-शुप की, और फिर 4त दे बस पकड़ कर वापस आ गया फ्लॅट पर. शिखा को फोन किया तो पता चला वो भी शाम को वापस आ रही थी. बस फिर तो तायारी शुरू कर दी मैने. वो रास्ते में थी, उसने मेसेज में बताया मुझे-

विवेक: जल्दी आजा, साली तेरी गांद फाड़ दूँगा मैं. मुझे धोखा दे कर गयी है ना. कल तेरी मा ना छोड़ी तो कहना.

शिखा: अर्रे रे, इतना गुस्सा क्यूँ भाई? मेरे हाथ में नही था कुछ भी. मैं अब मम्मी-पापा को अचानक क्या बोल देती? और वैसे भी मेरे कॉलेज जाने से पहले मंदिर जाना था उनको, मुझे साथ इसलिए ले आए.

विवेक: मैं कुछ नही सुनने वाला. अब तू बस वेट कर कल की. फिर तुझे मज़ा चखता हू मेरी रॅंड साली.

शिखा: अफ भैया, ऐसे मत बोलो यार अभी. वरना छूट गीली हो जाएगी, और कार में ही फिंगरिंग करने लग जौंगी. पता है छूट कितनी प्यासी है. 4 दिन से आपको नही खाया है जो. आप तो मस्त गाओं में किसी ना किसी की लेते रहे होगे. तो आपका मूसल तो मस्त होगा. मेरी छूट का सोचो.

विवेक: अर्रे नही मेरी जान शिखा. तेरे अलावा अब किसी की छूट नही पेलता मेरा लंड. अब तो इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी शिखा की छूट ही बजानी होती है.

शिखा: अर्रे चलो झूते. मैं मान ही नही सकती की आप गाओं गये, और किसी की छूट नही पेली.

विवेक: मत मान, पर जो सच है वो सच है. अब नही खड़ा होता मेरा लंड जब तक की छूट मेरी शिखा की ना हो.

अब तो मेरे लंड को सिर्फ़ तेरी ही गुफ़ाओं में घुसना होता है. ई लोवे योउ मेरी रंडी.

शिखा: अवव भैया, ई लोवे योउ टू मेरे छोड़ू-राम. अछा चलो अब बाइ. कल मिलते है पलंग पर.

विवेक: कॅन’त वेट तो फक युवर आस बेबी. आज की रात कैसे कटेगी यार?

शिखा: काटो-काटो भाई, कल फिर गांद भी मिलेगी फाड़ने को.

अछा मूठ मत मारने लग जाना अब. अब जो भी निकलेगा लंड से कल ही निकलेगा मेरी बॉडी पर.

विवेक: ओक बेबी, जैसा तू बोले. बाइ-बाइ.

शिखा: बाइ-बाइ भैया, लोवे योउ.

आयेज के पार्ट्स में बतौँगा कैसे बेरेहमी से शिखा की गांद की चुदाई हुई. एमाइल मे अट

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