ये कहानी है मेरे ब्स्क 2न्ड एअर के वक़्त की. मैं कॉलेज के आस-पास एक सिंगल रूम रेंट पर लेके रहता था. ये सेप्टेंबर का महीना चल रहा था, तो शाम को जब थोड़ी बारिश रुकी थी, मैं मार्केट गया था. तभी मुझे हमारे स्कूल की एक माँ दिखी, जिनके पास मैं 5त स्टॅंडर्ड में इंग्लीश पढ़ा था.
उनका नाम था बंदिता माँ, हाइट में मुझसे थोड़ी लंबी और सावला रंग था. दिखने में मिलफ लगती थी, लेकिन बॉडी पूरी फिट थी. बूब्स और गांद भी बड़े थे. वो अपनी स्कूटी को रास्ते में लेके चल रही थी, शायद खराब हो गयी थी.
मैं देखने के बाद उन्हें गुड ईव्निंग बोला. फिर उन्होने भी गुड ईव्निंग बोल कर पूछा-
माँ: तुम तोड़ा जाने-पहचाने लग रहा हो. स्कूल में शायद पढ़ते थे ना?
मैं हा बोला. और फिर उन्होने मेरा हाल-चाल पूछा. उन्होने बाकी दोस्तों के बारे में भी पूछा. लेकिन अजीब बात ये थी की उनके हाथो में चूड़ियाँ और माथे पर सिंदूर ना देख कर मैने पूच लिया-
मैं: सॉरी माँ, ग़लत मत समझिएगा. सिर को क्या हुआ?
तो उन्होने बोला: कुछ साल पहले आक्सिडेंट में चल बससे.
मैं फिर बोला: आप कहीं जेया रही थी क्या?
माँ: वो स्कूटी खराब हो गयी है, मुझे घर तक ड्रॉप कर दोगे? लेकिन उससे पहले मेकॅनिक के दुकान में स्कूटी देनी पड़ेगी.
मैं: ठीक है.
फिर हम दोनो मेकॅनिक के पास स्कूटी देकर जेया रहे थे.
माँ: तुम मार्केट कुछ काम से आए थे क्या?
मैं: हा वो कुछ खाने के लिए आया था.
माँ: अछा ठीक है, मेरे घर पे नाश्ता कर लेना.
मैं: कोई बात नही, आपको ड्रॉप करके मैं आ कर खा लूँगा.
तभी बिजली कदकी और माँ ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया. तभी फिर से बारिश भी शुरू हो गयी. धीरे-धीरे बारिश ज़ोर से होने लगी. कपड़े भीग रहे थे, तो मैने माँ से पूछा की-
मैं: माँ कहीं रुक जाते है.
माँ: रहने दो, और कुछ देर में ही घर आ जाएगा.
फिर 5 मिनिट की दूरी के बाद माँ के घर भी पहुँच गये. माँ ने मेरी बिके से उतार कर गाते खोला, और बिके रख कर हम दोनो अंदर गये. बारिश के कारण हम दोनो पुर भीग चुके थे. माँ की सारी गीली होने के कारण उनकी छ्चाटी से चिपक चुकी थी, और उनके बड़े-बड़े दूध उपर से ही पता चल रहे थे.
माँ बोली: रूको, तुम्हारे लिए टवल लेके आती है.
उनका फ्लोर कपड़ों से गिरे पानी से भीग चुका था. माँ रूम से टवल ला कर मुझे देते वक़्त फिसल कर गिरने वाली थी. उस वक़्त उन्हें पकड़ते-पकड़ते उनके दूध मेरे हाथ में आ गये. अछा हुआ की माँ बच गयी गिरने से.
फिर वो कुछ नही बोली और सीधा पीछे मूड कर रूम में चली गयी. मैं टवल से अपने पुर शरीर को पोंछ के अपने कपड़े बदल लिया.
और तभी माँ बोली: रूको, मेरे बेटे के कपड़े देती हू, वही पहन लेना.
फिर माँ रूम से एक पिंक गावन् पहन के आई जिसमे उनके निपल्स पता चल रहे थे. वो मेरी बॉडी को देखती रह गयी, खाली टवल पहना था इसलिए. फिर उनके बेटे का एक शर्ट और एक शॉट्स दिया. मैं जल्दी से बदल लिया. फिर हम दोनो बैठ गये और मैने उन्हे पूछा-
मैं: आपके बेटा और बेटी का क्या हाल है?
माँ: मेरे बेटे की विदेश में नौकरी लगी है, और बेटी की शादी हो चुकी है.
मैं: अछा.
उनके पिंक गावन् से उनकी क्लेवगे पूरी दिख रही थी और इस तरफ उनके निपल्स भी पता चल रहे थे. उन्हे देख मेरा खड़ा हो चुका था.
माँ: अछा क्या खाओगे बताओ?
मैं कुछ जवाब नही दिया तो माँ ने मेरी और देखा. मैं कहीं खो गया था, तो माँ की नज़र मेरी पंत पे पड़ी. माँ बस मुझे शॉट्स पहनने दी थी, तो खड़ा होने से पूरा पता चल रहा था. उन्होने मेरी आँखों के सामने एक चुटकी मारी और बोली-
माँ: बताओ क्या खाना है?
मैं: सॉरी, जो आपकी मर्ज़ी.
माँ: ठीक है.
फिर किचन चली गयी. मेरा लंड खड़ा था तो मुझे कुछ सूझा नही. तभी माँ मुझे बुलाई. मैं पंत पर हाथ रख कर जेया रहा था, और उनके पास पहुँचा.
वो बोली: फ्रिड्ज में जूस है, निकाल के पी सकते हो.
उष वक़्त जो उनके दूध हाथ में थे, तब से मुझे उनके दूध फिर पकड़ने का मॅन हो रहा था. फिर मैने अकेले होने का मौका देख के पीछे से माँ का दूध ही जाकड़ लिया.
माँ मेरे हाथ को हटते हुए बोली: ये क्या कर रहे हो?
मैं: माँ जूस में क्या रखा है? आपका दूध पीना चाहता हू.
मेरा खड़ा लंड माँ की गांद से टकरा रहा था.
माँ बोली: अर्रे वो गिरते हुए मुझे पकड़ लिया, इसलिए कुछ नही बोली.
मैं: माँ किस्मत चाहती है की फिर से आपको वो सुख मिले, जो की आप खो दी है.
मैं पंत खोल के लंड निकाल कर गावन् के उपर से ही गांद में डाल रहा था. तभी माँ ने हाथ पीछे करके मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया. उनके दोनो दूध को दबाते-दबाते मैने उनके गले को काट लिया.
माँ बोली: यहाँ नही, बेडरूम चलो.
और मेरे लंड को पकड़ के बेडरूम की और चल पड़े. बेडरूम जेया कर गाते लॉक करके सीधा मुझे चिपक कर बोली-
माँ: बस मौका ढूँढ रहे थे. मिल गया तो छ्चोढोगे नही ना.
और बोलते-बोलते ही उनके होंठ को चूम लिया. कुछ देर बाद माँ बोली-
माँ: कितने सालों बाद मेरे होंठो को कोई चूम रहा है.
मैं बोला: वही तो मज़ा है, किसी विधवा की चुदाई करना. पता नही अपनी छूट की गर्मी से आज मेरा लंड ना जला दे.
माँ बोली: गर्मी तो बहुत भारी पड़ी है. तुमने ग़लत जगह हाथ मारा है. अब रोज़ प्यास बुझानी पड़ेगी.
मैं बोला: उसमे क्या है? यहाँ मैं भी अपना समान शिफ्ट कर देता हू, ताकि रोज़ छोड़ साकु आपको.
माँ बोली: सुनो ना, क्यूँ ना फ्रेश-फ्रेश चुदाई करें?
मैं: मतलब?
माँ: ज़रा बातरूम जेया कर नहा ले?
मैं: ठीक है, तब तो नहाते हुए भी छोड़ूँगा.
माँ मुझे नंगा कर दी. मैं भी माँ को नंगा कर दिया. हम दोनो बातरूम चले गये. माँ ने शवर ओं किया. हम दोनो शवर के नीचे भीग रहे थे. माँ ने साबुन लिया और भीगा कर शवर ऑफ कर दिया. और फिर मेरी बॉडी पे साबुन लगाना शुरू किया.
पहले हाथ में लगाया. हाथ में लगते वक़्त उनके दूध में टच हो रहा था, और मेरा लंड सलामी थोक रहा था.
माँ: तुम्हारा छ्होतू कितना शरारती है.
मैं: माँ उसे ठंड लग रही है, गरम होना है.
माँ: उसे समझाओ की नहा लो पहले.
मैं: आप ही समझा दो.
माँ: ठीक है.
दोस्तों आज की कहानी यहीं तक. आयेज की कहानी अगले पट्ट में.