बड़ी साली की दबी हुई अन्तर्वासना-2

कहानी के पिछले भाग
बड़ी साली की दबी हुई अन्तर्वासना-1
में मैंने आपको बताया था कि मेरी पत्नी बीमार रहने लगी तो मैंने उसे अपने पुराने घर में छोड़ दिया था. अब मैं अकेला रहता था. मेरे नीचे वाले फ्लोर पर ही मेरी पत्नी की बड़ी बहन यानि मेरी साली अपने पति और दो साल की बेटी के साथ रहती थी. जब उससे बात हुई तो उसने अपनी व्यथा मुझे बताई. फिर एक दिन उसके पति की गैरमौजूदगी में मैं रात को उसके घर रुका हुआ था और मैंने उसके फोन में पॉर्न साइट के लिंक देख लिये थे.
अब आगे …

मैं समझ गया था कि वो बहुत परेशान है अपने पति की बेरुखी से. इसलिए मैंने दूसरा विषय छेड़ दिया. फिर कुछ यहां-वहां की बातें करने के बाद उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई.

फिर मैंने दोबारा से उसको छेड़ने के इरादे से कहा- मुझे पता चल गया था कि आज आपके चेहरे पर ये चमक कैसे आई आप इतनी खुश क्यों लग रही थीं!
वो तपाक से बोली- क्या पता लग गया आपको!

मैंने तुरंत उसका मोबाइल उठाया और उसके फोन में उन्हीं लिंक पर जाकर वो पॉर्न साइट खोल कर उसको दिखाने लगा. अपने ही फोन में वो इस तरह सी पॉर्न सामग्री देख कर शरमाने लगी. उसकी चोरी पकड़ी गई थी.

अब मैंने मौके का फायदा उठाने की सोची और उससे कहा- इसका मतलब तो आपको मेरे वाला आइडिया पसंद आ गया था! मैंने ही तो आपको बताया था कि मैं मोबाइल में पॉर्न देख कर अपने आप को संतुष्ट कर लेता हूं. क्यूं सही कहा न मैंने?

वो मेरी बात को सुन कर वहां से उठ कर चलने लगी. जब वो उठ कर चलने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
मेरे द्वारा हाथ पकड़े जाने से वो एकदम से सिहर उठी. उसी पल मैंने उसको अपनी तरफ दोबारा से खींच लिया और उसको फिर से अपने पास में ही बेड पर बिठा लिया.

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मैंने अब बेशर्म होते हुए पूछा- बताओ न भाभी, आपको मजा आया या नहीं? मैंने सही अंदाजा लगाया था न आपकी खुशी का? आपका चेहरा इसीलिये दमक रहा था आज? बोलो न भाभी, जवाब तो दो मेरी बात का?
पहले तो उसने कुछ नहीं कहा लेकिन फिर शरमाते हुए हां में अपना सिर हिला दिया. उसका चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया था. उसके गाल एकदम टमाटर की तरह लाल हो गये थे. वो अभी भी नजर नीचे किये हुए बैठी थी और मैंने उसके हाथ को ऐसे ही पकड़ रखा था.

मैंने पूछा- अच्छा ये तो बता दो कि क्या क्या देखा आपने?
वो शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए रही तो मैंने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया. वो पीछे हटने की कोशिश करने लगी तो मैंने अपने दूसरे हाथ को भी उसके कन्धे पर रख दिया. अब मेरे दोनों हाथ उसके दोनों कन्धों पर थे. वो शर्म से जैसे गड़ी जा रही थी.

मैंने उसको समझाने वाले लहजे में कहा- क्या हुआ? इतना भी क्यों हिचक रही हो, इसमें कुछ गलत थोड़ी है. ये सब तो सामान्य सी क्रिया है. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं. इन सब बातों के बारे में तो हम चर्चा कर ही सकते हैं. आपको इसमें कुछ गलत लग रहा है क्या?

फिर वो धीरे से बोली- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.
मैंने कहा- तो फिर आप बताती क्यों नहीं कि आपने क्या-क्या देखा? प्लीज बताओ न भाभी. मेरे मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं आपकी पसंद के बारे में.
वो सकुचाते हुए बोली- वही सब।

मैंने कहा- वही सब क्या?
उसने मेरी बात का कोई जवाब न दिया तो मैंने शर्म की सारी हद पार करते हुए कह दिया- वही सब जो रात में किया जाता है?
उसने मेरी बात सुन कर मेरे हाथ पर जोर से नोंच लिया और नीचे मुंह करके मुस्कराने लगी.

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अब मैंने फिर से छेड़ते हुए कहा- आपने पहली बार देखा था क्या ये सब?
उसने हां में सिर हिला दिया.
दोबारा पूछते हुए मैंने कहा- मजा आया कि नहीं?
वो धीमी सी आवाज में बोली- बहुत!

उससे इस तरह की कामुक बातें करते हुए अब मेरी जिज्ञासा और उत्तेजना दोनों बढ़ने लगी थी. मैंने फिर से पूछा- कितनी देर तक देखा आपने ये सब?
वो बोली- एक घंटे तक।
हैरान होते हुए मैंने कहा- एक घंटा! आपको इस दौरान कुछ हुआ नहीं क्या?
वो पूछने लगी- क्या नहीं हुआ?
मैंने कहा- बहुत मन किया होगा ना (सेक्स) करने का?

मेरी बात सुन कर उसकी सांसें और तेजी से चलने लगीं और मेरा दिल दिल भी जोर से धड़कने लगा था. अब मुझे मालूम हो गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है और उस पर हथौड़ा चला देने का ये बिल्कुल सही वक्त है. भाभी की सांसें तेजी के साथ चल रही थी और उसका चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था.

मुझसे भी अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. मैंने उसके लाल हो चुके तमतमाये गालों को चूम लिया. उसके मुंह से गर्म सांस भांप की तरह निकल रही थी. तभी मैंने उसके दूसरे गाल पर भी एक चुम्बन जड़ दिया. उसकी आंखें बंद ही थीं.

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