बाप ने की बेटी की चूत चुदाई

हेलो फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी बाप-बेटी सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आप सब ने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. जिन्होने अभी तक पिछला पार्ट नही पढ़ा है, वो उसको ज़रूर पढ़ ले.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा था की मेरे घर वाले फंक्षन पर गये थे, और मैं घर पर रह कर ऑफीस का काम ख़तम कर रही थी. नींद आने की वजह से काम करने में दिक्कत आ रही थी, तो मैने सिगरेट पीनी शुरू कर दी.

तभी अचानक से पापा पीछे से आ गये, और उन्होने मुझे सिगरेट पीते देख लिया. फिर उन्होने मुझे बाकी सिगरेट्स देने को कहा, लेकिन मैने झूठ बोला की मेरे पास नही थी.

तलाशी लेते हुए उनके सामने मेरी पनटी आ गयी, जो छूट वाली जगह से गीली हुई पड़ी थी. अब आयेज बढ़ते है-

मैं घबरा रही थी की कहीं पापा मेरी गीली पनटी ना देख ले. उधर पापा का ध्यान मेरी पनटी की तरफ ही था. पनटी देखते हुए वो तोड़ा सा मुस्कुराए. मुझे लगा उन्होने देख लिए. फिर उन्होने मेरी तरफ देखा, और बोले-

पापा: और सिगरेट्स भी है तेरे पास?

मैं: नही पापा, यही थी.

पापा: तू फिर से झूठ बोल रही है.

मैं: सच बोल रही हू पापा.

पापा: मैं कैसे मानु. अभी पहले भी तू झूठ बोल कर उसको सच बता रही थी.

मैं: लेकिन इस बार सॅकी में सच बोल रही हू.

पापा: मैं तो चेक करूँगा ही.

मैं सोचने लगी की अब मैं पापा के सामने पनटी में थी, और अब वो किस चीज़ को चेक करने की बात कर रहे थे. तभी पापा ने अपना हाथ आयेज बढ़ाया, और पनटी के उपर से मेरी गांद पे रख दिए.

अब पापा मेरे छूतदों पर हाथ फेर कर चेक करने लगे. पापा के मूह पर शैतानी एक्सप्रेशन्स थे. मुझे लग रहा था की अब पापा जान-बूझ कर मुझे टच करने के लिए चेकिंग करने का नाटक कर रहे थे. लेकिन मैं उनको रोकती क्या बोल के, जब पहले ही मैं पकड़ी जेया चुकी थी.

फिर पापा पीछे से हाथ सामने ले आए, और छूट के आस-पास वाली जगह पर फेर कर चेक करने लगे. इससे मैं गरम होती जेया रही थी. मेरी साँसे तेज़ होती जेया रही थी, और छूट और पानी छ्चोढ़ रही थी.

तभी पापा ने पनटी को सामने से खींचा, और अपना हाथ अंदर डाल दिया. पापा का हाथ सीधे मेरी छूट पर पड़ा, जिससे मैं काँप गयी और बोली-

मैं: पापा ये आप क्या कर रहे हो? यहाँ कों सी जगह है च्छुपाने की?

ये सुन कर पापा ने मेरी छूट में उंगली डाल दी. छूट गीली थी, तो उंगली आराम से अंदर चली गयी, और मेरे मूह से आ निकल गयी. फिर पापा बोले-

पापा: ये देख, ये है तो सही जगह च्छुपाने के लिए. इसमे उंगली जेया सकती है, तो सिगरेट भी च्छुपाई जेया सकती है.

ये बोल कर पापा उंगली अंदर-बाहर करने लगे. मेरे मूह से आ निकली, और मैं पीछे होने लगी. तभी पापा खड़े हो गये, और अपनी दूसरी बाजू को मेरे पीछे रख दिया, जिससे मैं पीछे नही हॅट पाई. फिर वो बोले-

पापा: बेटी चेक तो कर लेने दे आचे से.

फिर पापा उंगली अंदर-बाहर करते रहे. मैं मदहोश होने लगी, और मेरी आँखें बंद हो गयी. मैं समझ गयी थी, की पापा अब मुझे छोड़े बिना छ्चोढने वाले नही थे. पापा मेरी छूट के दाने को रगड़ने लग गये. मैं जल्दी ही अपने चरम पर पहुँच गयी, और मेरी छूट ने अपना पानी छ्चोढ़ दिया. पापा फिर भी छूट रगड़ते रहे, जब तक की सारा पानी निकल नही गया.

फिर पापा ने अपना हाथ मेरी पनटी से निकाला, और उसको देखने लगे. उनका हाथ मेरी छूट के पानी से भीगा हुआ था. पापा ने मेरी तरफ देखा, और उस हाथ को चाट लिया. मेरी आँखें बड़ी हो गयी ये देख कर.

फिर पापा ने मुझे अपने पास किया, और मेरे होंठो से अपने होंठ लगा दिए. मैं भी शायद पहले से इसके लिए तैयार थी, तो मैं भी उनका साथ देने लगी. पापा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और मेरे होंठ चूस्टे हुए मेरी गांद दबाने लग गये. इससे मैं फिर से उत्तेजित होने लग गयी.

कुछ देर होंठ चूसने के बाद वो मेरी गर्दन चाटने लगे, और कान को चबाने लगे. इससे मेरी छूट में आग लगने लगी. मैं भी फिर रिश्ता भूल कर उनकी पंत के उपर से उनका लंड दबाने लगे.

फिर पापा ने मेरी त-शर्ट और ब्रा निकाल कर मुझे उपर से नंगी कर दिया. मेरे रसीले चुचे देख कर उन्होने अपने दोनो हाथो में मेरे चुचे भरे, और एक-एक करके उनको चूसने लगे. मैं पापा के सर पर प्यार से हाथ फेरने लगी.

फिर पापा ने मुझे अपनी गोद में उठाया, और बिस्तर पर लिटा दिया. उन्होने अपने कपड़े उतारे, और पुर नंगे हो गये. उनका लंड मोटा, काला, और लंबा था. उनका लंड देख कर मुझे खुशी भी हुई, और दर्र भी लगा. खुशी इस बात की, की आज काफ़ी टाइम बाद चुदाई का मज़ा मिलेगा. और दर्र इस बात का की कहीं उनका बड़ा लंड मेरी छूट फाड़ ना दे.

नंगे होके पापा मेरे उपर आए, और मेरी नाभि चाटने लगे. फिर उन्होने मेरी पनटी उतरी, और मेरी छूट को चूसने लगे. वो इतनी ज़ोर से छूट चूस रहे थे, जैसे छूट निकाल कर खा जाएँगे. मैं तो आ आ करके पागल हो रही थी.

कुछ देर छूट चूसने के बाद वो मेरी टाँगों के बीच आए, और अपना लंड मेरी छूट पर सेट किया. फिर एक ज़ोर का धक्का मारा, और लंड छूट को चीरता हुआ आधा अंदर घुस गया. मैं दर्द से चीखने लगी, तो पापा ने अपने मूह से मेरा मूह बंद कर दिया. फिर तोड़ा और पुश करके उन्होने अपना पूरा लंड मेरी छूट में उतार दिया.

मैं दर्द से तड़प रही थी, लेकिन पापा पूरा लंड अंदर डाल कर मेरे होंठ चूस रहे थे, और बूब्स दबा रहे थे. कुछ देर बाद जब मेरी तड़प कम हुई, तो पापा धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगे.

मुझे बहुत मज़ा आने लगा, तो मैं भी गांद उपर-नीचे करके धक्को को सपोर्ट करने लगी. फिर धीरे-धीरे पापा स्पीड बढ़ने लगे. मैं आ आ करने लगी, और उनको और ज़ोर से छोड़ने के लिए बोलने लगी.

फिर पापा ने मेरी टाँगें पूरी तरह से उपर की तरफ मोड़ दी, और ज़ोर के धक्के लगाने लगे. उनका लंड मेरी छूट की दीवार पर टकरा रहा था. इससे मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था.

फिर पापा ने मुझे घोड़ी बनाया, और मेरी गांद पर थप्पड़ मारने लगे. मैं दर्द से कराहने लगी. फिर उन्होने लंड छूट में डाला, और पीछे से फुल स्पीड पर छोड़ने लगे. मैं आ आ कर रही थी. मेरे बूब्स उछाल रहे थे. रूम में ठप-ठप की आवाज़े आ रही थी. मैं अब तक 2 बार झाड़ चुकी थी.

फिर पापा ने अपना लंड छूट से निकाला, और मेरी गांद पर सारा माल निकाल दिया. मैं उसी वक़्त तक कर बिस्तर पर गिर गयी. पापा जल्दी से खड़े हुए, उन्होने कपड़े पहने, और बोले-

पापा: सिगरेट पीना अची बात नही है. आज के बाद मत पीना.

ये कह कर वो चले गये, और मैं वैसे ही सो गयी. कहानी पढ़ कर कैसा लगा फीडबॅक प्रीथंकगुप्ता3@गमाल.कॉम पर बताए.

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