बाप ने गुस्से में की बेटी की दर्द भारी चुदाई

नमस्ते दोस्तों! इतने दीनो तक स्टोरी ना डालने के लिए माफी चाहूँगी. ज़िंदगी की कुछ काश-मा-काश में फ़ससी हुई थी. मगर अब से स्टोरीस रेग्युलर आएँगी. तो बिना वक़्त बर्बाद किए स्टोरी शुरू करते है.

तो भाई की शादी में तो मेरी जाम कर विभिं-विभिं लोगों से चुदाई के बाद आख़िर-कार हम घर पहुँचे. शुरू के कुछ दिन तो हम सब थके हुए थे, और घर सेट्ल करने में लगे हुए थे.

पापा इतने बिज़ी चल रहे थे की मुझे छोड़ने का उनके पास वक़्त ही नही था. एक दिन रात में पापा के कमरे से कुछ आवाज़े आ रही थी. ऐसे तो कुछ सॉफ सुनाई नही दे रहा था, मगर दरवाज़े पे कान लगाने पर सब सॉफ सुनाई दे रहा था.

पापा: इतने दिन बाद कर रहे है, ठीक से करो ना बेबी.

मम्मी: ठीक से क्या होता है? मैं ऐसे ही करती हू.

पापा: कम से कम चूज़ ही लो.

मम्मी: ची! ये सब गंदे काम मैं नही करती.

मे (मॅन में): वेर्मा अंकल से तो कुटिया की तरह चुड्ती है, और पापा के सामने नाटक करती हो.

ऐसे ही पापा और मम्मी में बहस होने लगी. पापा गुस्से में बाहर आने लगे. उनकी आने की आहत सुन कर मैं अपने कमरे में चली गयी. मगर मैने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नही किया. मुझे पता था पापा मेरे पास ही आएँगे और वैसा ही हुआ.

थोड़ी ही देर में पापा मेरे कमरे में आ गये, और मैं भी उनके पास जेया कर बैठ गयी. मुझे पता था की अभी पापा मेरे पास बेटी के लिए नही, उनकी रखैल के लिए आए थे.

पापा: साली वो समझती क्या है खुद को. एक बात नही मानती मेरी.

मे: कोई बात नही पापा. मैं हू ना, मैं आपकी सारी बात मानूँगी.

मैं पापा के करीब आ कर उन्हे सिड्यूस करने की कोशिश करने लगी. फिर मैं अपने चुचे पापा की पीठ पर सहलाने लगी, और अपने हाथो को पापा के शरीर पर फेरने लगी. जैसे ही मैं अपने हाथ पापा के लंड के तरफ ले जेया रही थी की पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया.

पापा: तू हमारी बातें सुन रही थी?

मे: नही पापा वो मैने ग़लती से सुन ली.

पापा ने गुस्से में आ कर मेरा गला पकड़ लिया और बोले: तेरी हिम्मत कैसे हुई हुमारी बातें सुनने की.

फिर एक ज़ोर का थप्पड़ लगाया मुझे. मैं वही बेड पर गिर गयी. फिर पापा मुझ पर चढ़ गये और मुझे दो-टीन ज़ोर-ज़ोर के थप्पड़ और लगाए. मेरे दोनो गाल लाल हो गये थे. फिर मेरी त-शर्ट पकड़ी और उसे भी फाड़ दिया. पापा का ये जानवरो वाला रूप मैने पहली बार देखा था.

फिर पापा ने वही पड़ी मेरी चुनरी को लिया, और उसमे गाँठ मार दी, और उसे मेरे मूह पर बाँध दिया. वो गाँठ एक गॅग बॉल की तरह काम कर रहा था, जिससे मेरी आवाज़ ना निकले. फिर पापा ने मेरी चुचियों को दोनो हाथो से पकड़ा और उन्हे चूसने लगे. साथ ही साथ जाम कर मसालने लगे. मुझे बहुत दर्द हो रहा था. मगर वो चुनरी मेरे मूह पर इतनी टाइट बँधी थी, की मेरी बिल्कुल भी आवाज़ नही निकल पा रही थी.

वैसे भी मेरे निपल्स काफ़ी सेन्सिटिव है. उपर से पापा कभी-कभी उनको छबया करते है. मैं दर्द से ज़रा भी मचलती तो पापा थप्पड़ लगा देते थे. मैं वैसे ही पड़े-पड़े दर्द सहती गयी. ये पहली बार था जो मैं चुदाई एंजाय नही कर रही थी.

फिर पापा ने मेरी फाटती हुई त-शर्ट को मेरे बदन पर से निकाल लिया, और मेरे हाथो को उपर करके उन्हे आपस में बाँध दिए. फिर मुझे पलताया और मेरे पाजामे को उतार दिया. मैं पापा को बोलना चाहती थी की “पापा आराम से करो. मैं माना नही कर रही”. मगर मेरी आवाज़ बिल्कुल ही बंद थी. फिर पापा ने मेरी गांद पर थप्पड़ मारने शुरू किए.

थप्पड़ की आवाज़ पुर रूम में गूँज रही थी, और मैं दर्द से तिलमिला रही थी. पापा मानो अपना सारा गुस्सा मुझ पर निकाल रहे हो. थोड़ी देर बाद मैने मचलना भी बंद कर दिया, और मेरा शरीर मानो सुन्न सा पद गया. मैं बस वैसे ही पड़ी रही. मेरी गांद पापा ने मार-मार कर लाल कर दी.

जब पापा का गुस्सा तोड़ा शांत हुआ तो उन्होने मेरी हालत देखी. तब पापा को शायद उनकी ग़लती का एहसास हुआ और उन्होने मेरा हाथ और मूह खोला. मेरी बुरी हालत हो गयी थी. पापा मेरे बगल में बैठ कर अफ़सोस करने लगे. मैने पापा को देखा, उनके चेहरे पे मायूसी थी.

पापा उठ कर कमरे से निकालने लगे. मैने आवाज़ दे कर उनको रुकने को कहा. फिर जैसे-तैसे उठ कर उनके पास गयी और हाथ पकड़ लिया, और उन्हे रुकने का इशारा किया और दरवाज़ा फिरसे बंद कर दिया.

मे: पापा जैसा मैने बोला, आप जो बोलॉगे मैं करूँगी. मैं सिर्फ़ आपकी हू. आप जो चाहो मुझसे करवा लो.

पापा की आँखों में पहली बार मैने खुद के लिए प्यार देखा. पापा ने मुझे बाहों में भरा और मेरे आँसुओ को चूमने लगे. फिर वो मेरे बूब्स को आराम-आराम से सहलाने लगे, और मुझे किस भी करने लगे.

मेरा सारा दर्द धीरे-धीरे गायब होने लगा. फिर पापा ने मुझे बेड पर लिटाया, और मेरे पुर बदन को चूमने लगे. मेरी आर्म्पाइट को भी चाटने लगे, जिन्हे मैने रीसेंट्ली शेव भी नही किया था. मेरा सारा दर्द गायब हो गया, और मैं मोन करने लगी.

मे: आअहह अहह अहह. आपके लिए मैं हमेशा कभी भी किसी से भी चुड सकती हू.

पापा: मैं जो बनाना चाहता था, तू आज वो बन गयी है.

पापा फिर मेरी छूट से टपकता रस्स चाटने लगे, और मैं आहें भरने लगी. मुझे ध्यान था की मम्मी घर पर ही थी. मगर मैं इतनी मदहोश थी की मुझसे मोनिंग रुक ही नही रही थी.

फिर पापा ने अपनी पंत उतरी, और बेड पे चढ़ कर अपना लंड मेरे मूह पे दे दिया. हम दोनो 69 पोज़िशन में थे. मैं पापा का लंड चूस रही थी, और पापा मेरी छूट चाट रहे थे. पापा ने मेरी गांद दबाना चाहा, मगर मैं दर्द से मचल गयी. उनकी मार से मेरी गांद सूज कर लाल हो गयी थी.

पापा फिर भी धीरे-धीरे मेरी गांद मसालने लगे, और मैं दर्द को सहते हुए पापा का लंड चूस्टी रही. पापा का लंड सीधा गले तक जेया रहा था, मगर मैं और अंदर लेने की कोशिश कर रही थी. उनकी ज़ुबान मेरी छूट को ऐसे चाट रही थी, जैसे कोई बच्चा आइस्क्रीम चाट रहा हो.

बीच-बीच में पापा मेरी छूट के होंठो को चबा रहे थे, जिससे मुझमे आनंद की लेहायर सी दौड़ जेया रही थी. फिर पापा सीधे हुए, और मेरी टाँगो को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा. फिर मेरी दोनो टाँगो को अपने कंधो पर चढ़ाया, और लंड को पकड़ कर मेरी छूट पे थपथपाया. मैं पापा का लंड लेने को बेकरार थी.

मे: पापा और मत तड़पाव, मैं से नही पौँगी. जल्दी से लंड मेरी छूट में डालो. मेरी छूट आपके लंड की प्यासी है.

पापा तोड़ा मुस्कुराए, और झुक के मेरे चुचो को चूसने लगे. फिर अचानक से लंड मेरी छूट में डाल दिए. मुझमे आनंद की लेहायर दौड़ गयी. पापा से मिशनरी पोज़िशन में में काई दीनो बाद चुड रही थी. उनका एक-एक झटका मेरी छूट को फाड़ कर अंदर घुसे चला जेया रहा था. मैं दर्द के साथ साथ मोन भी कर रही थी.

मे: आअहह आअहह पापा, पापा.

मुझे पता ही नही चला कब मेरी आवाज़ तेज़ हो गयी. पापा ने एक हाथ से मेरे मूह को दबोच लिया ताकि मेरी आवाज़ बाहर ना जाए. मगर उन्होने छोड़ने की गति में कुछ कमी नही की. लगभग 10-15 मिनिट ऐसे ही चूड़ने के बाद, पापा ने मुझे घोड़ी बनने को कहा. मुझे लगा अब डॉगी स्टाइल में छोड़ेंगे. मैं जल्दी से घोड़ी बन गयी.

पापा मेरे पीछे आए. मेरे बालों को हाथो में फसाया, और अपना लंड मेरी गांद में च्छेद पर रखा. मैं समझ गयी की अब मेरी गांद की चुदाई होगी.

मे: पापा मेरी गांद आपकी मार से सूजी हुई है. प्लीज़ आज के लिए मेरी गांद छ्चोढ़ दे.

पापा ने मेरी एक नही सुनी, बल्कि फिरसे मेरे मूह को उसी दुपट्टे से बाँध दिए, और फिर मेरी गांद को छोड़ना शुरू किए. वो दर्द मेरी सहन शक्ति से बाहर थी. मगर पापा को रोक भी नही सकती थी. पापा मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस्स कर लपेटे हुए थे, और मेरी गांद छोड़े जेया रहे थे. मैं चीख भी नही पा रही थी.

मुझे तो लगा मैं बेहोश हो जौंगी. फिर पापा ने मेरे बालों को छ्चोढ़ दिया और मेरे फेस पर पावं रख कर उसे बेड पे दबाते हुए मेरी गांद छोड़ने लगे. जब पापा का मॅन भर गया तो उन्होने अपने लंड का सारा माल मेरे फेस पर ही झाड़ दिया.

पापा तब जेया कर कही शांत हुए. मैने भी खुद को दुपट्टे से आज़ाद किया. मेरे पुर फेस पर पापा का माल लगा था. मैने उसे उंगलियों से चाट कर सॉफ किया. मुझसे उठने तक की हिम्मत नही हो रही थी. थोड़ी देर बाद पापा भी उठ कर चले गये. मैं पूरी रात उसी तरह पड़ी रही. गांद में और पूरी बॉडी में दर्द हो रहा था. सुबा तक तो फेस भी सूज गया था, पापा के ठप्पाड़ों की वजह से.

तो दोस्तों कैसी लगी पापा ने जो मेरी इतनी रफ चुदाई की? मैं हर कॉमेंट पढ़ती हू, और रिप्लाइ भी करती हू. तो अगर कोई फॅंटेसी हो या मुझे और किसी तरह से चूड़ते देखना चाहते हो, तो कॉमेंट में ज़रूर बताए.

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