जेठ-भाभी की अंतर्वसना की कहानी

मेरी चुदाई की कहानी अब आयेज-

मेरी साँस रुक गयी. आँखों में एक सेकेंड के लिए झंझनाहट सी हुई. उन्होने फोन लिया, लेकिन उनकी नज़र मेरी आँखों में थी, जैसे कुछ फील कर रहे हो. जैसे जानना चाहते हो, क्या सब देख लिया सपना ने? उन्होने तुरंत रीसेंट अप्स ओपन किया. ब्राउज़र अभी भी खुला था, टॅब्स क्लोज़ थे. हिस्टरी क्लियर थी, लेकिन स्क्रीन का एक ग्लिंप्स उन्हे सब बता गया.

मैने हल्की मुस्कान के साथ उनकी आँखों में आँखों डाली और कहा, “आपके फोन में तोड़ा बिज़ी हो गयी थी, जेठ जी…”

उनकी आँखों में कोई घबराहट नही थी, बस एक भूख थी. वो मुझे वैसा देख रहे थे जैसे अब पहली बार देख रहे हो. मेरे सीने का तेज़ उतना. मेरी हल्की सी कामपति साँस उनके चेहरे पर एक अधूरा सा सुकून लाया, जैसे कुछ मिल गया हो, पर चखना बाकी हो.

मैने फिर धीरे से कहा, “वैसे… आपका कलेक्षन काफ़ी इंट्रेस्टिंग था.” एक हल्की, टीज़िंग सी मुस्कान के साथ मैने दरवाज़ा बंद कर दिया. पर अंदर का गर्मी भरा सन्नाटा अब भी मेरे अंदर गूँज रहा था. मुझे अब यकीन हो गया था, की मैने जेठ जी के दिल का एक सीक्रेट कॉर्नर अनलॉक कर दिया है. और अब, उनकी नींद सिर्फ़ मैं हू.

एक दिन सुबह का वक़्त था. जेठानी बेज़ार गयी थी सब्ज़ी लेने, और मम्मी जी अपने रूम में पूजा में बिज़ी थी. मैं किचन में थी, एक हल्की सी येल्लो कॉटन की सारी पहने हुए, वो भी बिना लिनिंग के. बॉडी के कुवर्व्स क्लियर्ली दिख रहे थे.

ब्लाउस तोड़ा टाइट था, जिसमे बूब्स पर्फेक्ट्ली फिट हो रहे थे. बूब्स तोड़ा उपर उठे हुए थे और पल्लू कॅष्यूयली एक साइड से शोल्डर पे पड़ा था. इससे क्लीवेज हल्की-हल्की झलक दे रहा था.

मैं फ्रिड्ज से दही निकालने के लिए तोड़ा झुकी और उसी मोमेंट एक गरम सा साँस का हल्का टच मेरी पीठ पर महसूस हुआ. जेठ जी, बिना किसी आवाज़ के, मेरे बिल्कुल पीछे प्लॅटफॉर्म के पास आ गये थे, इतने करीब की उनकी बॉडी की हीट मेरे लोवर बॅक तक महसूस हो रही थी.

मेरा झुकने का पोज़ ऐसा था की मेरी गांद टाइट सारी के अंदर क्लियर्ली आउटलाइन हो रही थी. ब्लाउस तोड़ा सा उपर स्लाइड हो गया था जिससे मेरी कमर थोड़ी और एक्सपोज़्ड हो गयी थी. उनकी आँखों का प्रेशर सीधा मेरी बॉडी पर महसूस हो रहा था. वो मुझे आँखों से छ्छू रहे थे, और मुझे सब कुछ फील हो रहा था.

मैं धीरे से सीधी हुई और पल्लू अड्जस्ट करने का नाटक किया, लेकिन जान कर उसे तोड़ा और स्लाइड होने दिया. क्लीवेज और ज़्यादा दिखने लगा. जेठ जी तोड़ा और करीब आए, उनकी आँखें अब सीधा मेरे बूब्स पर टिक गयी थी, बिल्कुल ओपन डिज़ाइर के साथ.

फिर उन्होने अपनी लो, डीप वाय्स में कहा, “सपना… आज खाने में क्या बना रही हो?”

मैं हल्की सी मुस्कुराइ, आँखों से उनका सवाल पकड़ लिया… फिर स्लाइट्ली शर्मा कर, लेकिन टीज़िंग एक्सप्रेशन के साथ कहा, “आज आपको क्या खाने का मॅन है, जेठ जी?”

एक पल के लिए दोनो के बीच साइलेन्स च्चाया रहा, पर उस साइलेन्स में इतना कुछ कह दिया गया की शब्दों की ज़रूरत ही नही थी.

उस दिन के बाद, जब भी जेठानी बातरूम में होती या मम्मी जी टीवी के सामने होती, जेठ जी किसी ना किसी बहाने से पास आ जाते. कभी उनका हाथ मेरे हाथ से टकरा जाता, कभी वो छाई लेते वक़्त मेरे सीने के पास झुक जाते.

एक बार मैं ड्रॉयिंग रूम में डस्टिंग कर रही थी. झुकती तो मेरा लो-नेक कुर्ता इतना खिसक जाता की मेरे बूब्स का आधे से ज़्यादा पार्ट क्लियर्ली दिख जाता. उस दिन भी मैं झुकी थी सोफा सॉफ करते हुए, और जेठ जी सामने सोफा पर बैठ कर टीवी ओं कर लिए.

लेकिन उनकी नज़र सिर्फ़ टीवी पर नही थी. वो मेरे बूब्स पर टिकी थी, बिल्कुल बेझिझक, हवस से भारी. जैसे ही मैं उनकी आँखों का डाइरेक्षन पकड़ती, वो तुरंत टीवी की तरफ देखने का नाटक करते. लेकिन मैं समझ गयी थी, उनका फोकस सिर्फ़ मेरी बॉडी पर था.

मैने उन्हे तोड़ा और टीज़ करने के लिए एक नॉटी स्माइल दी. जैसे आँखों ही आँखों में कह रही हू, “देखो जितना देखना है, लेकिन हाथ लगाने की इजाज़त नही.”

फिर मैने हल्का सा दुपट्टा ओढ़ लिया. मॅन तो नही था, पर घर में किसी को शक हो जाए, ये भी नही चाहती थी. उसके बाद मैने एक बड़ा सा टेबल खींच के लाया और कॅष्यूयली कहा, “जेठ जी, प्लीज़ ये टेबल पाकड़ो ना ज़रा… फन सॉफ करना है.”

वो बिना कुछ बोले, खुशी-खुशी टेबल पकड़ने आ गये. अब उनका ध्यान मेरी टाइट लेगैंग्स पर था. जिसमे मेरी फूली हुई छूट और हिलती गांद क्लियर्ली आउटलाइन हो रही थी. मैं टेबल पर चढ़ के फन सॉफ कर रही थी, और जान कर तोड़ा ज़्यादा झुकती, कमर हिलती, जैसे उनकी नज़र को इन्वाइट कर रही हू. मुझे महसूस हो रहा था, मेरी अदाओं का उनपे कितना स्ट्रॉंग असर हो रहा है और ऑनेस्ट्ली, मुझे वो असर चाहिए भी था.

रात में कभी मैं बाल्कनी में अकेले हवा ले रही होती, तो कुछ ही देर में जेठ जी भी पीछे आ जाते. वो ऐसे करीब आके खड़े हो जाते, जैसे सिर्फ़ एक साँस भर की दूरी हो. उनका बदन मेरे बिल्कुल पास, लेकिन बिना टच किए. ठंडी हवा के बीच उनका यूँ पास होना मुझे अंदर तक भीगा जाता. बिना किसी फिज़िकल कॉंटॅक्ट के भी मेरी छूट गीली हो जाती थी.

ये सब छ्होटी-छ्होटी चीज़ें थी. लेकिन हर एक मोमेंट एक नयी चिंगारी जला जाता था. अब हम दोनो काम के बहाने एक-दूसरे के करीब ज़्यादा रहने लगे थे. मैं भी जान-बुझ के अपना सीना तोड़ा और उभार के रखती थी. टाइट कुर्ता, लेगैंग्स, कभी-कभी जब हम सब मिल के मोविए देखने जाते या घूमने निकलते, तो मैं जीन्स और बॉडी-हगिंग टॉप पहनती थी. सारी पहनती तो पल्लू हमेशा लूस रखती थी. मुझे मज़ा आता था जब उनकी आँखों में मेरे बूब्स और गांद के लिए टपकती हवस दिखती थी.

लेकिन… इस सब के बीच भी, जब कभी मेरे हज़्बेंड का कॉल आता, या बेडरूम में उनकी फोटो देखती थी, तो दिल का एक हिस्सा गिल्टी फील करता था. वो बेचारे समुंदर के बीच कहीं अपना फ़र्ज़ निभा रहे थे, और मैं यहाँ, जेठ जी की आँखों में अपने लिए हवस देख कर खुश हो रही थी.

पर सच काहु, मेरी छूट में जो आग लगी थी, वो गिल्ट से ज़्यादा पवरफुल थी. उस आग ने मुझे जेठ जी की और खींचना शुरू कर दिया था.

एक दोपहर का वक़्त था. घर में सब सो रहे थे. जेठानी अपने कमरे में थी, बच्चे अपने बेड्स पर, और नवीन भैया (मेरे जेठ जी) ड्रॉयिंग रूम में अकेले टीवी देख रहे थे.

मैं अपने रूम से किचन गयी. उस दिन मैने एक हल्का कॉटन का कुर्ता पहना था, तोड़ा लूस, लेकिन नेकलिन थोड़ी गहरी थी. नीचे टाइट लेगैंग्स थी, बिना दुपट्टे के. कुर्ते का एक शोल्डर हल्का सा गिरा हुआ था, और मेरी रेड ब्रा की स्ट्रॅप क्लियर्ली दिख रही थी. वाइट कुरती के नीचे से ब्रा का शेप और कलर उभर के दिख रहा था. मुझे उस मोमेंट में एक अजीब सी सेनुयल गर्मी महसूस हो रही थी.

किचन के साइड से मैने उन्हे देखा, उनकी आँखें टीवी पे थी, पर मुझे लग गया था, वो मेरी प्रेज़ेन्स महसूस कर चुके है.

उन्होने आवाज़ लगाई, “सपना… तोड़ा ठंडा पानी मिलेगा?”

मैं ट्रे में पानी लेकर ड्रॉयिंग रूम आई. जैसे ही उनके सामने झुकी, मेरी कुरती का गला और ज़्यादा खुल गया. मेरे बूब्स उनकी आँखों के बिल्कुल सामने थे, एक टेंप्टिंग नज़ारा. और मैने झुकने को तोड़ा एक्सट्रा खींच दिया.

उनकी आँखें टीवी से हॅट कर एक सेकेंड के लिए मेरी क्लीवेज पे रुकी. उस एक पल ने मुझे पूरा अंदर से सुलगा दिया. मैं कुछ नही बोली. बस एक हल्की मुस्कान के साथ ट्रे टेबल पे रखी और जाके उनसे तोड़ा डोर सोफा पर बैठ गयी. पैर फोल्ड करते ही मेरी कुरती और उपर चली गयी. टाइट लेगैंग्स के अंदर मेरी थाइस और गांद क्लियर्ली उभर के दिख रही थी. मुझे पता था, उनकी आँखों से कुछ भी च्छूपा नही था.

टीवी पर चॅनेल चेंज हुआ, और “रेस साँसों की” वाला सेडक्टिव सॉंग चलने लगा. उस बीट में एक रॉ सेक्षुवालिटी थी — जैसे स्क्रीन से निकल के हमेशा अंदर घुस जाए.
मैं कॅष्यूयली टीवी देख रही थी, लेकिन मेरी पूरी अवेर्नेस उनकी आँखों पे थी. अब वो आँखें किसी भाई की नही, एक मर्द की थी, जो मुझे पूरी तरह से स्कॅन कर रही थी.

मैं धीरे से अपना हाथ गले तक ले गयी, और नेकलिन को तोड़ा स्ट्रेच किया. स्ट्रॅप के पास तोड़ा अड्जस्ट किया, जैसे कॅष्यूयली हो रहा हो… पर असल में वो उनके लिए एक ओपन इन्विटेशन था.
बिपाशा और सैफ का अंडरवॉटर बोल्ड सीन आया, और मैने महसूस किया की उनकी नज़र अब मेरी क्लीवेज से नीचे फिसल चुकी थी, मेरी लेगैंग्स के अंदर तक, मेरे कुवर्व्स को एक्सप्लोर कर रही थी.

उनकी वो आँखों की जलन मुझे सुकून दे रही थी. मुझे लग रहा था, अब बस एक हाथ का फंसला बचा था. अगर उनका हाथ मुझे छ्छू ले, तो मैं कभी नही रुक पौँगी.

मैं चुप थी, पर अंदर से पानी-पानी. धड़कन को संभालते हुए उठ गयी. पलट कर उनकी तरफ देखा. उनकी आँखों में एक प्यासी सी बेचैनी थी. जैसे वो कुछ कहना चाहते हो, पर रोक रहे हो.

“सपना… कहाँ जेया रही हो?” उनका हल्का सा ब्रोकन सा सवाल था.

मैने धीरे से कहा, “तोड़ा रेस्ट करने.”

वो बोले, “अर्रे बैठो ना, गाने आचे चल रहे है.”

लेकिन मुझे उनकी प्यास को तोड़ा और भड़कना था. एक हल्की सी मुस्कान के साथ, जैसे उनकी नज़र मुझे छ्छू गयी हो, मैं धीरे-धीरे बेडरूम की तरफ चल दी. मेरी गांद टाइट लेगैंग्स के अंदर होते हुए भी क्लियर्ली हिल रही थी, जैसे उनकी आँखों के लिए एक सपना छ्चोढ़ के जा रही थी.

इसके आयेज की कहानी अगले पार्ट में.

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