बाप की बेटी के लिए हवस की सेक्सी कहानी

मैं मॅन ही मॅन पापा की ये हालत देख कर अंदर ही अंदर हासणे लगी, और तिरछी नज़रों से पापा के लोवर की तरफ लोवर के अंदर लंड को फुकारे मारते हुए देखने लगी. पापा ने मुझे लोवर की तरफ तिरछी नज़रों से देखते हुए देख लिया.

पापा समझ गये, की हग करते ही पापा के लोवर के अंदर पापा के लंड की बढ़ती शेप को उनकी बेटी ने देख लिया था. इसलिए पापा झटपटाने से लगे.

मम्मी और छ्होटा भाई भी वाहा थे, तो पापा ने अपने लंड की हरकत को च्छुपाने के लिए अपनी टाँगो के उपर चादर पहन ली.

फिर जब मैने पापा की तरफ देखा, तो पापा मुझे देख रहे थे. तो मैं एक-दूं से शर्मा सी गयी, की पापा ने मुझे लोवर को और उनके लंड को तिरछी नज़रों से देखते हुए पकड़ लिया था. इसलिए मैं भी एक-दूं से हड़बड़ा गयी. मैं ऐसे रिक्ट करने लगी, जैसे मैने कुछ देखा ही ना हो.

फिर जान के ये सब इग्नोर मारते हुए जल्दी से मैं मम्मी की तरफ हुई, और मम्मी को हग किया और मम्मी से मिली.

मम्मी (मुझसे): क्या बात है, बहुत लाते आए हो? 12 बाज गये है.

मैं (मम्मी से): ये कमीना बहुत तंग करता है मुझे. इसके चक्कर में लाते हो गये. ये उठ ही नही रहा था पहले तो. इतनी मुश्किल से इस कमीने को उठाया है, और फिर तैयार किया. इसलिए लेट आए है.

मैं छ्होटे भाई के मज़े लेने लगी, और उसको चिढ़ते हुए मम्मी पापा को उसकी शिकायत लगाने लगी.

फिर थोड़ी देर तक मैं पापा को टी और खिचड़ी खाने को देने लगी.

पापा: नीलम बेटा, मुझे अभी खाना मत दो. मैं अभी थोड़ी देर में ख़ौँगा. अभी बस अपनी मम्मी के खाना डाल दो.

मैं: ओके पापा जी.

फिर मैने मम्मी को खाना और टी वग़ैरा दिया. मम्मी ने खाना खाया, और कुछ देर हम सब बातें करने लगे.

पापा (मम्मी से): हमारी बेटी नीलम अब बहुत समझदार हो गयी है. हम सब की बहुत केर करने लगी है.

मम्मी मेरी तारीफ करते हुए मेरे सर पर अपना हाथ फेरने लगे, और बोले-

मम्मी (पापा से): हा, मेरी बेटी है ही इतनी अची. आपका, मेरा, और कार्तिक का सब का ख़याल रखती है.

मम्मी-पापा मेरी तारीफ करने लगे, और मैं हल्की स्माइल करने लगी, और अंदर ही अंदर शरमाने लगी.

इतने में छ्होटा भाई मज़े लेते हुए मुझे चिढ़ते हुए मेरी शिकायत लगते हुए बोला-

छ्होटा भाई (मम्मी से): मम्मी, नीलू दीदी आपका और पापा का ही ज़्यादा ख़याल रखती है. मेरा तो बिल्कुल भी ख़याल नही रखती.

छ्होटे भाई की ये बात सुन कर मम्मी पापा बहुत हासणे लगे.

मैं (हैरानी में): आअहह, अछा कमीने? कितना झूठ बोल रहा है. रुक तुझे बताती हू. जितनी केर मैं तेरी करती हू, और जितना प्यार मैं तुझे करती हू, इतना किसी को नही करती कमीने.

(और मैं मॅन ही मॅन छ्होटे भाई को देख कर सोचने लगी. कितना कमीना है ये. आअहह कोई बात नही बेटा, तू घर चल, और अकेले में मिल, फिर तुझे मैं बतौँगी)

मम्मी (हेस्ट हुए छ्होटे भाई से): हहहे जितनी केर और प्यार नीलम तुझे करती है, किसी को नही करती.

बचपन से तुझे तेरी नीलू दीदी ने ही पाला, खिलाया-पिलाया, नहलाया, और बड़ा किया है. बचपन से ही तेरी इतनी केर की है.

मैं (छ्होटे भाई को चिढ़ते हुए): सुन ले कमीने. मम्मी क्या कह रहे है. बचपन से मैने ही तुझे पाला है.

छ्होटा भाई (हेस्ट हुए): हा-हा चलो ठीक है.

फिर मैं भाई को जीभ चिढ़ने लगी. और फिर छ्होटा भाई, मैं, मम्मी, और पापा सब हासणे लगे. काफ़ी देर तक ऐसे ही मज़ाक मस्ती की बातें करने लगे.

फिर कुछ टाइम बाद डॉक्टर भी पापा के चेक-उप और इनस्पेक्षन के लिए आ गये. उन्होने पापा का ब्लड टेस्ट वग़ैरा किया, और कुछ दवाई वग़ैरा भी लिख दी. फिर उन्होने पापा को ग्लूकोस चड़ाया, और पापा को रेस्ट करने को कहा.

मम्मी (डॉक्टर से): डॉक्टर साहब, कब तक ये पुर ठीक हो जाएँगे?

डॉक्टर (मम्मी से): डॉन’त वरी, पहले से अब ये काफ़ी ठीक है. कल शाम तक हम इन्हे हॉस्पिटल से डिसचार्ज कर देंगे. बाकी कुछ दिन घर पर रेस्ट करे. और आप इनका घर पर ही टाइम तो टाइम दवाई और खाने-पीने का ध्यान रखे. इनकी पूरी केर करे, और इनको किसी प्रकार की कोई टेन्षन ना दे.

डॉक्टर की बातें सुन कर मैं, छ्होटा भाई, मम्मी हम सभी काफ़ी खुश हो गये थे, की अब कल पापा को हम घर ले जाएँगे. और पापा अब पहले से काफ़ी ठीक थे.

मैं भी बहुत ज़्यादा खुश हुई, की पापा अब पहले से फिट आंड फाइन थे. हम सभी ही काफ़ी खुश थे.

अब दोपहर के 2 बाज गये थे.

मैं: मम्मी अब आप घर जेया कर रेस्ट करो. कल रात से यहा हो, और काफ़ी तक गये होगे.

पापा (मम्मी से): हा, और कार्तिक को भी घर ही ले जाओ. यहा क्या करेगा? छ्होटा है अभी. तंग होगा इधर हॉस्पिटल में.

मैं (मम्मी से): हा मम्मी, पापा सही कह रहे है. मिल लिया है पापा से इसने, और कल पापा घर ही आने वाले है. इसलिए भाई को भी घर ले जाओ. मैं यहा हू पापा की देख-रेख के लिए.

मम्मी: ओके नीलम बेटा, ध्यान रखना.

मम्मी शाम को हॉस्पिटल में पापा के साथ होती थी, और रात में भी, इसलिए मम्मी हॉस्पिटल में सो नही पति थी. इसलिए दोपहर में हॉस्पिटल में मैं आ जया करती थी. ताकि मम्मी घर जेया कर तोड़ा रेस्ट कर सके.

इसलिए शाम रात में पापा की देख रेख के लिए मम्मी हॉस्पिटल में होती थी, और दिन दोपहर में मैं पापा के साथ हॉस्पिटल में होती थी.

फिर मम्मी और छ्होटा भाई हॉस्पिटल से घर के लिए चले गये. फिर पापा और मैं काफ़ी देर तक बातें करने लगे. थोड़ी देर बाद पापा ने मुझे अपने पास बुलाया.

मैने पापा के पास बैठ कर पापा का एक हाथ अपने हाथो में पकड़ा, और पापा का अब आराम से बैठ कर हाल-चाल पूछा.

मैं: कैसे हो पापा? अब तबीयत कैसी है आपकी?

पापा: ठीक हू नीलम बेटा. कल से अछा महसूस कर रहा हू. मेरी बेटी अब मेरा इतना ख़याल रख रही है. मेरी इतनी केर कर रही है. तो तबीयत तो अची ही होगी.

मैं (स्माइल करते हुए): अछा जी? पापा ये तो मेरा फ़र्ज़ है. मैं आपकी बेटी हू, और एक बेटी अपने पापा की खुशी के लिए कुछ भी कर सकती है. मैं चाहती हू की आप, मम्मी और छ्होटा भाई सभी हमेशा खुश रहे. और मैं हमेशा अपनी फॅमिली की ऐसे ही केर करती राहु.

मैने फिर पापा को और खुश करने के लिए बोला-

मैं (हल्का शरमाते हुए): अब मैं आपकी बेटी के साथ-साथ आपकी गर्लफ्रेंड भी तो हू. तो अब आपकी केर मैं नही करूँगी, तो और कों करेगा? मेरी ज़िम्मेदारी अब आपके लिए बढ़ गयी है हहेहहे.

पापा (खुश होते हुए): ह्म, ये तो है. ऐसे फॅमिली को खुश रखने वाली और फॅमिली की केर करने वाली इतनी खूबसूरत और प्यारी बेटी सबको मिले. ई लोवे योउ सो मच बेटा.

मैं (प्राउड फील करते हुए): ई लोवे योउ टू पापा. अब पापा कल आप घर होंगे. मैं आपकी बहुत केर करूँगी. आपका खाना-पीना सब ध्यान रखूँगी आपका.

पापा (स्माइल करते हुए): थॅंक योउ सो मच बेटा.

ऐसे ही थोड़ी देर पापा और मैं बातें करते रहे. पापा मेरी काफ़ी तारीफ करने लगे, और काफ़ी हासी मज़ाक करने लगे, और ज़ोर-ज़ोर से हासणे लगे.

आज पापा बहुत ज़्यादा खुश थे, और मैं पापा को देख कर बहुत खुश थी.

फिर पापा ने बात करते-करते अपना हाथ मेरे हाथ के उपर से हटा कर अचानक से मेरी थाइस पर रख दिया.

मैने नीचे छ्होटी शॉर्ट्स पहनी हुई थी. पापा का हाथ मेरी लेग्स के उपर नंगी थाइस पर रखा हुआ था. मुझे लगा की पापा ने बात करते-करते नॉर्मली ही अपना हाथ मेरी थाइस पर रखा था. इसलिए मैने इग्नोर कर दिया.

पापा: आज तुम इस ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही हो तुम.

मैं: थॅंक योउ पापा.

पापा: तुम्हे पता है मैं कल पूरी रात नही सो पाया. कल पूरी रात मुझे नींद नही आई.

मैं: ऐसा क्यू पापा? आप कल सोए क्यू नही?

पापा: पता नही क्यूँ? क्यूंकी तुमने मुझे बहुत तंग और परेशन किया हुआ है.

मैं (कन्फ्यूषन में): मैने क्या किया है पापा? मैने आपको कब परेशन और तंग किया?

पापा: कल जब से तुम यहा से गयी थी, तब से तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था. कल जो तुमने मुझे प्यार दिया. पूरी रात वही सब सीन मेरी आँखों के आयेज आ रहे थे.

उन्ही सब पॅलो को मैं बार-बार सोच रहा था, और अपनी बेटी को बहुत मिस कर रहा था. और कल मैं बहुत ज़्यादा खुश था. मानो जैसे काफ़ी टाइम बाद मुझे बहुत ज़्यादा खुशी मिली हो.

मैं: ह्म पापा जी. मैं भी कल बहुत खुश थी, क्यूंकी आप जो खुश थे. और अब आप ठीक भी हो गये हो. और कल रात को तो मुझे भी नींद नही आई.

(मेरे मूह से बातों-बातों में अचानक ही निकल गया की कल रात को मुझे भी नींद नही आई)

पापा: क्यूँ, तुम्हे नींद क्यू नही आई कल?

(अब मैं पापा को क्या बताती की कल रात मुझे नींद किसलिए नही आई? की पूरी रात मेरी आँखों के आयेज अपने दोनो हाथो से पापा के लंड को ज़ोर-ज़ोर से आयेज-पीछे करके मूठ मारने के सीन आ रहे थे. और मैं अब पापा को किस मूह से बताती, की पूरी रात पापा का घोड़े जैसा मोटा लंबा लंड मेरी आँखों के आयेज बार-बार आ रहा था. इसी दर्र के मारे मैं सो नही पा रही थी. क्यूंकी मैने कभी इतना मोटा काला और लंबा लंड अपनी लाइफ में पॉर्न मूवीस में भी नही देखा था.)

(क्यूंकी पापा का लंड सच में ही घोड़े जैसा काला, लंबा, मोटा, और एक-दूं भयानक सा लंड है. जिसकी वजह से मैं काफ़ी दर्र रही थी, की इतना भयानक लंड मेरे खुद के पापा का था.)

इसलिए मैने बस एक-दूं से पापा को बस यही बोला की-

मैं: बस पापा मुझे आपकी टेन्षन हो रही थी. और यही सोच रही थी पापा, की आप जल्दी से ठीक हो जाओ. फिर आप, मैं, मम्मी, और छ्होटा भाई हम सब मिल कर एक साथ खुश रहेंगे.

मैने बस जान के एक-दूं से बात को यही ख़तम करने के लिए पापा को खाना खाने को बोला.

मैं: चलो पापा अब आप खाना खाओ. मैं आपको खाना और टी डाल देती हू. काफ़ी देर हो गयी है. खाना बिल्कुल टांडा हो जाएगा. और आपको दवाई भी खानी है.

पापा: ओके बेटा.

फिर मैने पापा का खाना डाला, और पापा को टी पकड़ाय.

मैं: पापा जी, आज मैं आपको अपने हाथो से खाना खिलौंगी. आप ये टी पाकड़ो, और साथ के साथ टी पियो.

पापा (हासणे लगे): ओके बेटा.

फिर मैं पापा को अपने हाथो से खाना खिचड़ी खिलाने लगी. खाना खिलाने के बाद पापा ने टी पी, और फिर मैने पापा को दवाई खाने को दी.

पापा ने दवाई खाई. फिर मैने पापा को लेटने को कहा. पापा आराम से बेड पर चादर डाल कर लेट गये.

मैं पापा के पास बैठ कर पापा के दोनो हाथो और शोल्डर्स को दबाने लगी.

पापा: रहने दो नीलम बेटा. इट’स ओके, मैं ठीक हू.

मैं: पापा मुझे करने दो ना आपकी सेवा. मैं आपकी बेटी हू. आप रेस्ट करो बस.

फिर मैं पापा के हाथो और शोल्डर्स को दबाने लगी. मैने पापा को रेलेक्ष फील करने के लिए सर को दबाना शुरू कर दिया. पापा को भी काफ़ी अछा फील हो रहा था, और मैं पापा के सर पर उनके बालों पर चम्पी मालिश वग़ैरा करने लगी.

फिर काफ़ी देर तक पापा के सर की चम्पी मालिश करने के बाद, मैं पापा के पैरों की पास बैठ गयी. मैं पापा की लेग्स और पैरों को अपने दोनो हाथो से दबाने लगी. मैने जैसे ही पापा की लेग्स और पैरों को दबाना शुरू किया, तो पापा एक-दूं से उठ गये, और मुझे पैर और लेग्स दबाने से माना करने लगे.

पापा: रहने दो बेटा, लेग्स, पैर वैईगारा मत दब्ाओ.

मैं: क्यू पापा, क्या हुआ? मैं दबा देती हू. आपको तोड़ा रेलेक्ष मिलेगा.

पापा: नही बेटा, इट’स ओके. बेटियाँ अपने पापा के पैरों और लेग्स को हाथ नही लगती.

मैं (हासणे लगी): क्या पापा, आप भी ना. कोई बात नही. ऐसा कुछ नही होता. मुझे करने दो.

पापा: नही बेटा, इट’स ओके. मैं ठीक हू.

लेकिन मैं कहा मानने वाली थी. तो मैने पापा को बोला-

मैं (स्माइल करते हुए): अछा चलो एक बेटी अपने पापा के पैरों और लेग्स पर हाथ नही लगा सकती. लेकिन एक गर्लफ्रेंड तो आपके पैर और लेग्स दबा सकती है? मैं आपकी बेटी के साथ-साथ आपकी गर्लफ्रेंड भी तो हू. हहेहहे.

पापा मेरी ये बात सुन कर हासणे लगे, और चुप-छाप बिना कुछ बोले लेट गये. उनके पास मेरी ये बात सुन कर बोलने के लिए कुछ रह ही नही गया था.

पापा (स्माइल करते हुए): ओके चलो ठीक है.

फिर पापा आँखें बंद करके लेट गये. मैं पापा के पैरों को दबाने लगी, और पापा की लेग्स को भी आचे से दबाने लगी.

पापा के हाथ, पैर, और शोल्डर्स दबाने पर और सर की मालिश करने पर पापा को काफ़ी आराम मिल रहा था.

मैं आराम से दोनो हाथो से पापा के पैर दबाने के बाद पापा के घुटनो के नीचे तक दोनो लेग्स को दबा रही थी. तभी पापा ने अचानक अपनी लेग्स के उपर से चादर हटा दी.

पापा ने जैसे ही अपनी लेग्स से चादर हटाई, तो मैं एक-दूं से हैरान हो गयी. वो दोनो लेग्स सीधी करके लेते थे, और पापा की दोनो लेग्स के बीच लोवर के अंदर से पापा के सोए हुए लंड की शेप सॉफ दिख रही थी.

पापा का सोया हुआ लंड भी लोवर के उपर से इतना मोटा और लंबा दिख रहा था. मैं पापा के लोवर के उपर से ही पापा के सोए हुए लंड की शेप देख कर ही दर्र गयी. फिर पापा की लेग्स दबाते-दबाते एक-दूं से अपने आप ही मेरे हाथ रुक गये.

पापा: क्या हुआ नीलम बेटा, रुक क्यू गयी?

मैं (हड़बड़ते हुए): वो कुछ नही पापा, कुछ नही.

और मैं फिर से पापा के घुटनो के नीचे तक पापा की लेग्स को दबाने लगी. पापा के पैर दबाते-दबाते बार-बार मेरी नज़रे पापा के लोवर की तरफ पापा के सोए हुए लंड पर जेया रही थी.

फिर थोड़ी देर में ही पापा ने बोला-

पापा (आँखें बंद करके सोते हुए): थॅंक योउ बेटा. तुम्हारे हाथो में जादू है. काफ़ी रेलेक्ष मिल रहा है. तोड़ा उपर से मेरी थाइस भी थोड़ी दबा दो बेटा.

पापा की ये बात सुनते ही मैं घबरा सी गयी. क्यूंकी पापा का सोया हुआ भारी लंड दोनो पापा की दोनो थाइस के बीच में बिल्कुल चिपका हुआ था. पापा के सोए हुए लंड की शेप लोवर के उपर से काफ़ी उपर की और उठी-उठी दिख रही थी.

मैं जैसे-तैसे पापा की बात मान कर पापा के घुटनो के उपर से पापा की थाइस आराम-आराम से दबाने लगी.

मुझे दर्र था की कही पापा की थाइस दबाते-दबाते मेरा हाथ या उंगलियाँ पापा के लंड पर ना टच हो जाए.

मैं पहले दर्र-दर्र के आराम-आराम से पापा की थाइस को दबाने लगी.

थोड़ी देर में ही पापा बोले-

पापा: बेटा तोड़ा ज़ोर-ज़ोर से दब्ाओ.

मैं: ओके पापा.

फिर मैं तोड़ा और ज़ोर-ज़ोर से पापा की थाइस को दबाने लगी. पापा काफ़ी रेलेक्ष हो कर सो रहे थे.

मैं थोड़ी देर पापा की थाइस को दबाते-दबाते पापा की तरफ देखने लगी, की अचानक वही हुआ जिसका मुझे दर्र था.

एक-दूं से मेरे हाथो की उंगलियाँ पापा के लंड पर टच होने लगी. पापा का लंड दोनो टाँगो के बीच बिल्कुल चिपका हुआ था.

मेरी नज़र बार-बार ही पापा के लोवर की तरफ जेया रही थी. मुझे दर्र था की मेरे बार-बार हाथ लगने पर पापा का सोया हुआ लंड खड़ा ना हो जाए.

(जब मेरे पापा के हग करने पर ही मेरे जिस्म की खुश्बू लेते ही पापा का लंड लोवर के अंदर फुकारे मार रहा था, तो मैं सोचने लगी की मेरे हाथ लगने पर पापा का सोया हुआ लंड खड़ा हो जाएगा)

मैं सोचने लगी की पापा के लंड की जो कल मैने अपने हाथो से मूठ मारी थी. और कल वाले पापा के साथ जो सीन हुआ, वही सब सीन्स मेरी आँखों के आयेज चलने लगे. यही सब सोचते-सोचते मेरा ध्यान एक-दूं से पता नही कहा चला गया. फिर एक-दूं पापा की थाइस दबाते हुए इस बार मेरा काफ़ी हाथ पापा के लंड पर लग गया.

जैसे ही मेरा हाथ पापा के सोए हुए लंड पर लगा, मैं एक-दूं से दर्र गयी, और वही रुक गयी.

मैने पापा की थाइस दबाना एक-दूं से बंद कर दिया. और मेरे हाथ पापा की थाइस दबाते-दबाते वहीं रुक गये. मैं काफ़ी घबरा सी गयी थी.

जैसे ही मेरा हाथ रुका, तो पापा उठ कर मेरे पास बैठ गये.

पापा ने मुझे देखा की मैं घबरा रही थी, और तोड़ा दररी हुई सी लग रही थी, जिससे मेरी साँसे काफ़ी तेज़ हो गयी थी. मैं काफ़ी तेज़-तेज़ साँसे लेने लगी थी.

(शायद पापा को भी महसूस हो गया था की मैं क्यू घबरा रही थी. पापा को भी पता चल गया था, की मेरा हाथ पापा के लंड पर टच होने की वजह से मैं एक-दूं दर्र गयी थी)

तभी पापा ने मेरा एक हाथ अपने हाथ में लिया, और मेरे को हग करके मेरे सर पर हाथ फेरते हुए बोले.

पापा: क्या हुआ बेटा?

मैं(हड़बड़ते हुए): कुछ नही पापा.

पापा: इट’स ओके बेटा. घबरा क्यू रही हो? इट’स नॉर्मल. कोई बात नही. ई नो की तुम क्यू दर्र रही हो. इसमे डरने की क्या बात है?रेलेक्ष, कुछ भी नही है.

पापा जान के मेरे साथ हस्सी-मज़ाक करने लगे ताकि मैं नॉर्मल हो ..

पापा(हेस्ट हुए): क्या हुआ मेरी गर्लफ्रेंड?

मैं (हल्का शरमाते हुए): पापा, क्या है?

पापा मुझे प्यार से समझने लगे: तू तो मेरी गर्लफ्रेंड है, और कल ही तो तूने मुझे इतना प्यार दिया है. और आज हल्का सा हाथ टच होने पर तू दर्र गयी पागल.

पापा मुझे रेलेक्ष फील करने की कोशिश कर रहे थे, और मैं पापा के सामने आराम से आँखें नीचे करके बिना कुछ बोले चुप-छाप बैठी रही.

पापा मेरे साथ हस्सी मज़ाक करने लगे, और जोक्स सुनने लगे. वो बहुत सी बातें करने लगे. पापा की मज़ाक मस्ती में काफ़ी देर बाद मैं कब नॉर्मल हो गयी मुझे पता ही नही चला. पापा मुझे गर्लफ्रेंड-गर्लफ्रेंड बुला कर चिढ़ने लगे. फिर मैं भी पापा को अछा महसूस करने के लिए पापा के साथ मस्ती करने लगी.

मैं: आपने ही तो गर्लफ्रेंड बनाया है मुझे. तो वो तो मैं हू ही आपकी गर्लफ्रेंड.

पापा और मैं फिर से नॉर्मल बातें और मज़ाक मस्ती करने लगे. फिर थोड़ी देर में पापा ने मुझे काफ़ी कंफर्टब्ली बोला-

पापा: अगर तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो, तो मैं चाहता हू की मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे जैसे कल प्यार किया था, आज भी वैसे करे.

मैं पापा की ये बात सुन कर एक-दूं से शोकेड हो गयी.

मैं: पापा, आप क्या कह रहे हो?

पापा: तुमने ही तो कहा था की तुम मुझे डेली अपने हाथो से प्यार करोगी.

मैं (हड़बड़ते हुए): हा पापा, लेकिन वो तो मैने बस आपकी खुशी के लिए ही बोला था.

पापा: कल वैसे भी मुझे हॉस्पिटल से डिसचार्ज मिल जाएगा, और कल हमने घर चले जाना है. और घर पर तेरी मम्मी और भाई सब होते है. तो वाहा तो बिल्कुल पासिबल नही है.

मैं: हा, लेकिन पापा. कल ही तो किया था आपको प्यार मैने. आज फिर कैसे पापा? मैं आपकी बेटी हू. ऐसे अछा नही लग रहा मुझे पापा.

पापा (साद फेस के साथ): इट्स ओके, तुम्हारी मर्ज़ी है. तुमने ही मुझे प्रॉमिस किया था, की जब मेरा मॅन करेगा तब तुम मुझे हाथो से प्यार करोगी.

मैं: पापा अब आप नाराज़ क्यू हो रहे हो? अब आप ऐसे मूह बना रहे हो, मुझे अछा फील नही हो रहा. एक बार आपकी खुशी के लिए अपने हाथो से किया तो मैने पापा. मैं आपकी बेटी हू पापा.

पापा: आज की ही तो बात है. फिर कभी घर पर तो पासिबल ही नही है. तेरी मम्मी आंड भाई सब होते है घर पर.

(पापा बार-बार मुझे बोलने लगे. और मैं पापा को बार-बार किसी ना किसी बहाने से माना करती जेया रही थी. लेकिन पापा मान नही रहे थे, और नाराज़ हो गये थे. उन्होने मुझसे अपना मूह बना लिया था, और बार-बार रिक्वेस्ट करने लगे और ज़िद करने लगे.

मैं: पापा प्लीज़, नाराज़ मत हो. ये हॉस्पिटल है. कल भी इतनी मुश्किल से किया दर्र-दर्र के आपकी खुशी के लिए. कोई आ जाएगा, कोई देख लेगा.

पापा: कोई नही आता बच्चा. दोपहर है, सब सो रहे होते है यहा दोपहर को. और कल तुमने जब से प्यार दिया है अपने हाथो से. तब से मैं काफ़ी अछा फील कर रहा हू और काफ़ी ठीक भी हो गया हू. क्या तुम नही चाहती की तेरे पापा जल्दी से ठीक हो?

मैं: पापा, अब आप मुझे एमोशनल ब्लॅकमेल कर रहे हो.

पापा के बार-बार कहने पर मेरा दिल पिघल गया, और मैने पापा की बात ना चाहते हुए भी मान ली. और पता नही क्यू पापा की बातें सुन कर मेरे मॅन में पापा और मेरे बीच पहले से सब सीन एक-दूं से आँखों के सामने आने लगा.

और कही ना कही मेरे दिल के एक छ्होटे से कोने में एक पल के लिए पापा के घोड़े जैसे लंड को देखने की फिर से इक्चा सी जागने लगी.

मैं: अछा ओके, चलो ठीक है. पहले मुझे प्रॉमिस करो की ये मैं लास्ट बार ही करूँगी. उसके बाद आप कभी ऐसे मुझसे ज़िद नही करोगे.

आयेज की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में जारी रहेगी.

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