शीला आंटी और उनकी दो बेटियाँ – 1

Sheela Aunty or Unki do Betiya ki chudai यह कहानी एक सत्य घटना पर आधारित है। आप इसका पूरा मज़ा उठा सकें इसलिए इसमें कुछ काल्पनिक घटनाएं भी जोड़ी हैं लेकिन पात्र उतने ही हैं। अधिकतर दृश्य ज्यूँ के त्यूं है। बस आप यह समझ लें कि लगभग नब्बे प्रतिशत कहानी सत्य है.

जी हाँ. मैं आज से लगभग दो महीने पहले मुंबई पी एच डी करने के लिए आया था. मैं बीस साल का हूँ और दिखने में इतना खुबसूरत नहीं लेकिन मेरा जिस्म काफी भरा हुआ है. मेरे एक दूर के रिश्ते के चाचा यहाँ रहते हैं. मैं उन्ही के यहाँ रह रहा हूँ. उनके तीन बेडरूम का फ्लैट है बांद्रा में. उनकी पत्नी शीला की उम्र चालीस की है लेकिन बहुत ही खुबसूरत हैं और जिस्म भी अभी तक मजबूत है. उसके स्तनों का उभार जबरदस्त है. उनकी दो बेटियाँ है अंजना और मंजुला. अंजना बीस की है और मंजुला अठारह साल की. दोनों भी अपनी मां की तरह बला की खुबसूरत है. जिस तरह शीला आंटी की खासियत उसके स्तन है; अंजना की टांगें और जांघें बहुत ही सेक्सी है. मंजुला के होंठ तो जैसे नारंगी की फांक है.

अंजना और मंजुला मुझे छुप छुप कर कई बार देखती रहती है और मुस्कुराती रहती है. कभी कभी दोनों अपने जिस्म के हिस्सों को मुझे दिखने का प्रयास भी करती रहती है.. कई बार मैं भी उन्हें देखकर मुस्कुरा उठता हूँ. मैं इन तीनों को हर रोज नजर बचाकर देखता रहता हूँ.

शीला आंटी अपनी उम्र के हिसाब से काफी तजरुबेकार है. एक दिन उसने मेरी चोरी पकड़ ली. मैंने तुरंत नजरें झुका ली. शीला आंटी ने कुछ नहीं कहा. एक दो दिन शांत रहने के बाद मैंने फिर से उन्हें ताकना शुरू कर दिया. एक दिन मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ रहा था. मुझे प्यास लगी तो मैं रसोई में पानी लेने चला गया. शीला आंटी उस वक्त नहाकर बाथरूम से बाहर ही आई थी. उनके कमरे का दरवाजा खुला था. उन्होंने एक तौलिया लपेटा हुआ था. तौलिया उनके स्तनों के आधे भाग को ढंकते हुए शुरू हो रहा था और उनकी जाँघों के उपरी भाग पर ख़त्म हो रहा था. मैं शीला आंटी को देखता ही रह गया. मन ही मन बोला ” कौन कहता है ये चालीस साल की है. ये तो पच्चीस की जवान से भी ज्यादा खुबसूरत और गरम है.” मैं दरवाजे की ओट से शीला आंटी को ललचाई नज़रों से देखने लगा. अचानक शीला आंटी ने अपना चेहर घुमाया और वो मेरे सामने थी और मैं उनके. मैं तैयार नहीं था की खुद को संभालता. शीला आंटी ने मुझे देखते ही अपनी आँखों में गुस्सा भर लिया और बोली ” तुम मानोगे नहीं. तुम्हारी शिकायत तुम्हारे चाचा से करनी पड़ेगी.” मैं घबरा गया. मैं जैसे ही पलता शीला आंटी ने मुझे कहा ” इधर आओ. कहाँ जा रहे हो.” मैं डरते हुए उनके पास गया. मैं जैसे ही उनके करीब पहुंचा उनके स्तनों के उभार ने मुझे भीतर तक हिला दिया. उनके बदन से आ रही खुशबु ने मेरे होश छीन लिए. शीला आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा ” तुम्हें इस तरह से देखना अच्चा लगता है ना. लो अब अच्छे से देख लो.” शीला आंटी ने तौलिया हटा लिया. उनका गदराया जिस्म मेरे सामने थे. उनके भरी भरकम स्तन जैसे अपने पास आने का निमंत्रण दे रहे थे. उनकी भरी हुई कमर जैसे रस टपका रही थी. उनकी मजबूत जांघें और टाँगे जैसे यह कह रही थी कि इंतज़ार किस बात का . किसी मिठाई की तरह खा जाओ. मैं पागल हो गया. शीला ने तौलिये को वापस लपेटा और बोली ” जाओ आज के लिए इतना ही काफी है.” मैं चुपचाप वापस अपने कमरे में आ गया.

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सारी रात मैं सो नहीं पाया. बार बार शीला आंटी का शारीर मेरे सामने आता रहा. मेरी अंडरवेअर अचानक ही गीला हो गया.

अगले दिन मैं शाम को जब कॉलेज से घर लौटा तो शीला आंटी घर पर अकेली ही थी. अंजना और मंजुला की कॉलेज देर शाम को छुटती है. मैं शीला आंटी से नजरें नहीं मिला पाया और अपने कमरे में आ गया. कुछ ही देर बाद शीला आंटी मेरे कमरे में आई. वो मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गई और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी. मैं घबरा उठा. शीला आंटी बोली ” क्या हुआ? इस तरह उदास क्यूँ हो? आज तुम्हरी इच्छा पूरी नहीं हुई इसलिए?” मैं कुछ ना बोल सका और अब तो ज्यादा घबराने लगा. तभी मैंने देखा की शीला आंटी ने अपनी साड़ी के पल्लू की अपने सीने से हटा इया और अपने ब्लाउस के बटन खोलने लगी. कुछ ही पलों में उनके स्तन उनकी चोली में से बाहर झाँकने लगे. मेरी आँखें विश्वास नहीं कर पा रही थी. शीला आंटी ने फिर कहा ” इतना ही देखोगे ! आओ इधर आओ.” मैं घबराते हुए उठा और उनके करीब चला गया. मेरी साँसें तेज चलने लगी. शीला आंटी ने मुझे अपनी चोली के हुक दिखाते हुए कहा ” इन्हें खोलो.” मैंने दोनों हुक खोल दिए. एक बार फिर शीला आंटी के दोनों स्तन मेरे सामने थे. इस बार वो मेरे बहुत ही करीब थे. शीला आंटी मेरे एकदम करीब आ गई और मुझे अपने सीने से लगा लिया. उनके स्तनों के उभार को मैं अब महसूस कर रहा था. मुझे लगा जैसे मैं किसी रबर के गद्दे को दबा रहा हूँ. शीला आंटी ने मुझे करीब दो मिनट तक भींचे रखा. मैं नशे में आ गया. अचनका शीला ने मुझे अपने से अलग करते हुए कहा ” चलो तुम बाहर चले जाओ. अंजू और मंजू आती ही होगी. आज बस इतना ही.” मैं बेकाबू हो गया था लेकिन मेरे पास और कोई दुसरा रास्ता नहीं था. मैं अनमने मन से बाहर आ गया.

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