बस में मिली आंटी जवान लड़के के साथ जंगली हुई

ही फ्रेंड्स मैं विवेक फिर हाज़िर हु छूटो के रस में सराबोर अपनी कहानी के अगले पार्ट के साथ. पिछले भाग में बात एक पतली सूनी गली के कोने तक पहुँच गयी थी.

वो मेरी तरफ देख कर बोलने लगी: तुझे इतनी पसंद आयी मैं की बस में ही मेरे पर चढ़ने लगा?

मैं: अब क्या बताऊ कितनी पसंद आयी तुम. वैसे तुम्हारा नाम क्या है? और तुमने मेरे से सीधा हिंदी में बात क्यों की?

वो बोली: मेरा नाम उमा है और मैंने सुना था तुझे बस टिकट के लिए हिंदी में बात कतरे हुए. तो मैं समझ गयी की तमिल नहीं आती है तुझे.

मैं: तुम्हारी हिंदी तो बहुत अछि है.

उमा: हां मैं १० साल तक दिल्ली में रहती थी बचपन में तो सीख गयी.

मैं: बहुत सेक्सी हो आप.

उमा: हां तभी भरी बस में चिपक रहा था.

मैं: चिपकना तो अभी भी है पर ऐसे खुले में कैसे?

उमा: तुझे क्या लगता है मैं तेरे से ऐसे ही चिपक जाउंगी?

मैं: बस में तुमने अस्स तो खुद भी चिपका दी थी.

उमा: बस में तो झटके की वजह से चिपकी थी. मैंने नहीं चिपकायी थी.

मैं: ाचा तो फिर मुझे कान में उतरने के लिए क्यों कहा?

उमा अचानक से हसने लगी. फिर रुक कर बोली-

उमा: ोयो सर्च कर सबसे पास कोनसा है यहाँ और चल.

मैंने देख तो एक ोयो नेक्स्ट गली में ही था. जब मैंने ये बात उसको बताई तो वो मुस्कुराते हुए बोली-

उमा: चल चले फिर.

और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींच के ले जाने लगी. मैं तेज़ी से चल कर उसके बराबर पर आया तो देखा की उसके बूब्स उछाल रहे थे उसकी चाल के साथ. जब मैंने पीछे नज़र डाली तो गांड भी क्या मस्त लहरा रही थी उसकी.

फिर हम ोयो पहुंचे तो उसने पहले मुझे साइड में रोक कर अपना और मेरा पसीना पोंछा. उसके बाद हम रिसेप्शन पर गए. उस बन्दे ने आंटी का बदन देखा तो मानो मैं में ही छोड़ने लगा हो उसको. उसने रूम के लिए ३००० रूपए मांगे.

फिर आंटी ने झुक कर उसको क्लीवेज दिखते हुए तमिल में कहा कुछ और उसने वो रूम हमें ५०० में ही दे दिया. रूम में जा कर उमा ने एक और फैन दोनों चालु कर दिए जो मैंने फटाक से बंद कर दिया.

फिर उमा ने पुछा-

उमा: बंद क्यों किया बहुत गर्मी है.

मैं: हां आज मेरा गर्मी में ही करने का मैं है. पता नहीं क्यों.

उमा: हां पर बहुत पसीना आ रहा है मुझे. पंखा तो चला दे काम से काम.

मैं: यही तो नहीं चाहता हु मैं की पसीना सूखे तुम्हारा. बल्कि मैं तो ये चाहता हु की तुम्हे और बहुत ज़्यादा पसीना आये.

उमा: पसीने का क्या करना है अब तुझे?

मैं: क्यों तुम्हे क्या लगता है मुझे बस तुम्हारी छूट का रस पीना है?

ये सुन कर उमा के मुँह पर एक नॉटी स्माइल आ गयी और वो सलौली मेरी तरफ आते हुए बोली

उमा: तो फिर और कहा का पियेगा?

मैं: आज तो मैं तेरे रोम-रोम से निकला रस पी जाऊंगा.

और ये कह कर मैंने उसको कमर से पकड़ कर उसको अपनी तरफ झटके से खींचा और उससे चिपक गया.

उमा: काश मेरा पति मुझे इतना प्यार करता.

मैं: क्यों तुम्हारा पति तुमसे प्यार नहीं करता?

उमा: नहीं उसको तो बस पैसे कमाने से मतलब रहता है सारा दिन. और मैं तुम नहीं तू हु. तुम बोलेगा तो सेक्स के बीच में डर्टी बाते कैसे करेगा?

मैं: ठीक है तुम नहीं तू. तो तुझे सेक्स के बीच में गन्दी बाते करना पसंद है?

उमा: पता नहीं मेरा पति तो करता नहीं है. मैंने बस पोर्न में देखा है. इसलिए मैं है तरय करने का.

मैं: ये सब तो ठीक है. पर अगर मैंने गलती से तुझे छोड़ते टाइम रंडी या कुटिया या और कोई गाली देदी तो?

अब हमारे बदन चिपके-चिपके पसीने से टर्र हो गए थे. और पूरा कमरा हम दोनों की महक से भर चूका था. उसने मुझे और कस लिया अपनी बाहों में और बोली-

उमा: अगर रंडी बोलना है तो फिर मुझे छोड़ना भी रंडी की तरह.

ये सुनते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया और मैं उसके गले को ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा. उसका पसीना मेरे लिए वियाग्रा का काम कर रहा था. मैंने उसका पल्लू सरका के नीचे गिरा दिया. फिर ब्लाउज को कंधे से नीचे सरका कर उसका शोल्डर चाटने लगा.

वो भी अब हल्का सा कराहने लगी थी मेरी बाहों में. मैंने उसको पीछे किया और उसके ब्लाउज के हुक्स खोल दिए. फिर ब्लाउज निकाल कर फेंक दिया और उसको फिरसे बाहों में लेकर चाटने लगा. पीछे से मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी और निकाल कर साइड में फेंक दी. फिर मैं उसको बाहों में लेकर उसका गाला बहुत ज़ोर से चूसने लगा.

मैंने उसको चूमते-चूमते उसका पूरा मुँह चाट डाला और फिर उसके होंठों को चूसने लगा. उसने भी मेरी टी-शर्ट निकाल कर फेंक दी और मुझे बाहों में ले लिया. उसके भीगे हुए बूब्स मेरी गीली छाती से चाप करके चिपक गए और फिसलने लगे. मैं उसके होंठ चूस रहा था और अपने भीगा बदन उसके बदन पर रगड़ रहा था.

उसका मुँह अब पसीने की जगह मेरे थूक जैसा महक रहा था. मैं इस सब का मज़ा ले ही रहा था की मेरे मुँह में उसने अपनी थूक से भरी हु जीभ सीधा अंदर तक दाल दी. मुझे कुछ समझ आता तब तक उसने अपना हाथ मेरे सर पर रखा और मेरे मुँह को और कस के अपने मुँह से चिपका लिया.

उसने अपनी जीभ को पूरा ज़ोर लगा कर मेरे मुँह के और अंदर ठूस दिया. उसकी जीभ नार्मल से बड़ी थी और सीधा मेरे गले तक पहुँच गयी और मुझे उलटी जैसा लगने लगा. मैंने उसको पीछे धकेल कर मुँह अलग करने की कोशिश की तो उसने मुझे और कस कर जकड लिया.

फिर वो और जीभ मेरे मुँह में और अंदर ठूसने की कोशिश करने लगी. मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं था तो उलटी नहीं आ रही थी. पर लग रहा था की आ जाएगी मेरे गले तक ठूसी हुई उसकी जीभ के कारण. मुझे अब मज़ा नहीं आ रहा था और मैं उससे अलग होने के लिए चटपटा रहा था.

पर मैं जितना छटपटाता वो मुझे उतना ही और ज़ोर से कस लेती. मेरा लुंड भी अब खड़ा नहीं था. पर शायद उसकी छूट का पानी भी बह रहा था पसीने के साथ क्युकी वो रुकने की जगह और जोश में आती जा रही थी. मैंने थोड़ी देर में स्ट्रगल करना छोड़ दिया और उसका जो दिल करे वो करने दिया.

उसकी जीभ अभी भी मेरे गले में उत्तरी हुई थी और वो एक हाथ मेरी पीठ पे मॉल रही थी और एक हाथ से मेरा सर पकड़ के कस के अपने मुँह से दबा रखा था.

मैं अब बस उस औरत से छूट कर जाना चाहता था. उसने जीभ निकली फाइनली मेरे मुँह से काम से काम १० मिनट के बाद. हम दोनों का मुँह उसकी थूक से इतना भर चूका था की वो जब होंठ रगड़ रही थी मेरे होंठो पे तो काफी देर तक थूक टपक रहा था.

हम दोनों के मुँह के बीच से हमारी चिपकी हुई छातियों पर थूक और भरता जा रहा था एक कप की तरह हम दोनों के पसीने के साथ मिल कर. और जैसे ही उसने अपने होंठ मेरे होंठो से अलग किये तो ढेर सारा थूक हमारे मुँह से निकल कर गिरा. ये देख कर वो हल्का सा हस्सी और फिर मेरा सर पकड़ कर अपने बूब्स के बीच में ले लिया.

उसने कस के दबा कर मेरे मुँह की दोनों साइड्स को अपने बूब्स से पैक कर दिया. उसकी थूक और हमारे पसीने से उसकी छाती इतनी गीली थी की मुझे सांस आणि बंद हो गयी थी. मुँह से बहुत ज़ोर लगाने पर भी सांस हलकी सी आ रही थी. वो फिर मेरे मुँह को अपने स्टैनो के बीच में घुसा कर हिलाये जा रही थी और हस्स रही थी हल्का-हल्का एन्जॉय करते-करते.

क्लेअर्ल्य उसको बहुत मज़ा आ रहा था और मेरी जान पर बन आयी थी. मैं काफी देर तक ऐसे ही उसकी छाती से लिप्त जान बचने के लिए छटपटाता रहा.

थोड़ी देर के बाद जब उसने मेरा मुँह बाहर निकला तो मेरी जान में जान आयी. ऐसा लगा ज़िन्दगी में पहली बार सांस ली हो. मैं कुछ सोच पता उससे पहले उसने मुझे धक्का देकर बीएड पर फेंक दिया. फिर वो साड़ी ऊपर करके सीधा मेरे मुँह पर आके बैठ गयी.

उसने पंतय नहीं पहनी हुई थी. बस पेटीकोट और साड़ी थी सिल्की सी जो अब मेरे सर के चारो तरफ पड़े थी. अब मेरी आँखों के सामने अँधेरा था. वो छूट मेरे मुँह पर कस कर रगड़ रही थी पर मैंने मुँह बंद कर रखा था.

पहले तो मैंने सर एक साइड को घुमा भी लिया था. पर फिर उसने कस के दबा लिया मेरा सर अपने दोनों पैरों के बीच. दिखाई तो कुछ दे नहीं रहा था पर उसकी छूट बुरी तरह पसीने और छूट के इतने रस से महक रही थी की उसका रस उसकी दोनों टांगो पर बह रहा था.

मेरे मुँह पर उसकी छूट रगड़ते हुए ऐसे लग रही थी जैसे कोई पानी से भरी हुई झींगा मछली रगड़ रहा हो. शेव भी नहीं की थी तो उसकी बहुत ज़्यादा घनी और पसीने और पानी से लथपथ झांटे मुँह पर पोछे सी फिर रही थी.

पर अब मुझे ये महक रास नहीं आ रही थी. मैं काफी देर तक इंतज़ार करता रहा की वो उठे मेरे मुँह से. अब तो उसका रस और पसीना मेरी आँखों में भी जा रहा था और मैंने कस के आँखें बंद कर राखी थी.

पर वो उठने का नाम ही नहीं ले रही थी. और मुझे अपना पंखा और एक बंद रखना अब बहुत आखर रहा था. अब वो मंद-मंद हस्ती हुई अपने रोम-रोम से रस सीधा मेरे मुँह पर ही गिरा रही थी.

फिर मैंने सोचा की शायद ये बिना चटवाये नहीं उठेगी. तो मैंने मुँह खोल कर उसकी छूट को चाटना शुरू कर दिया. वो बहुत मज़े लेने लगी. इसके बाद वो मेरे चेहरे पर छूट रगड़ कर मसल-मसल कर चुसवाने में लग गयी.

थोड़ी ही देर में वो अचानक से मेरे मुँह पर कस कर पूरे वज़न के साथ बैठी और ऊंची आवाज़ में बोली-

उमा: ज़ोर से चाट और चूस.

मेरी सांस उसके वज़न के नीचे बंद हो चुकी थी और मैं डर गया की अगर ये जल्दी नहीं झड़ी तो मैं मर्डर जाऊंगा. तो मैंने साड़ी जान लगा कर उसकी छूट को चाटना और चूसना शुरू किया.

२५-३० सेकण्ड्स ही हुए होंगे की उसने मेरा सर कस के अपनी टांगो में दबा कर अपना सारा वेट अपनी छूट पर रख दिया. मेरी जीभ अभी भी उसकी छूट में ही थी और मेरा मुँह पूरा खुला हुआ था. उसकी छूट मेरे मुँह में इतनी अंदर घुसी हुई थी की मुँह बंद करना तो दूर मैं जीभ भी पीछे नहीं ले पा रहा था.

इतना हुआ ही था की अचानक से ढेर सारा पानी मेरे मुँह में आ गया. जैसे किसी ने कोक की बोतल में मेन्टोस दाल कर मुँह में ठूस दी हो. अब उसकी छूट मेरे मुँह में फैलने और सिकुड़ने लगी. मुझे अचानक आये ढेर सारे छूट के रस से लगा की कही मैं डूब के मर्डर न जाऊ.

फिर मैंने जीभ को पीछे खींचना छोड़ कर उसके रस को जल्दी-जल्दी पीने लगा. स्वाद कैसा था याद नहीं पर एक आधा लीटर तो निकला ही होगा काम से काम. मैं वो लगभग सारा का सारा पी गया.

फिर वो थोड़ी रिलैक्स हुई और थोड़ा वज़न उसने वापस अपनी टांगो पर ले लिया. इससे मुझे सांस आने लगी पर उसने छूट अभी भी मेरे मुँह में ही ठूस राखी थी. वो काफी देर तक मेरे मुँह पर ही बैठी झटके खाती रही.

मैं बस यही सोचता रहा की वो कब उठेगी. फिर वो हस्ते हुए मेरे मुँह से उठी और बोली-

उमा: मज़ा आ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में. वैसे तो ये मेरी लाइफ की रियल स्टोरी है तो रिव्यु से फरक नहीं पड़ता है. कब तक अकेले पछताओगे जाओ किसी से जाके प्यास बुझाओ. खूब सेक्स करो नहीं तो जवानी निकल गयी फिर क्या. [email protected]

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