ही दोस्तों, मैं अभी फिर से वापस आया हू मेरी और मम्मी की कहानी लेकर. आप लोग ज़रूर सोच रहे होंगे की स्टोरी तो ख़तम हो गयी थी. तो फिर इतने टाइम बाद वापस क्यूँ?
सिंपल जवाब है, मेरी और मेरी हॉट मम्मी की चुदाई की लाइफ में एक नया, तीखा अड्वेंचर आया है, जो मैं आपसे शेर किए बिना रह नही सकता.
सीन सेटप कुछ ऐसे था की, कुछ दिन पहले मेरी नानी की तबीयत कुछ ज़्यादा ही बिगड़ गयी थी. पापा और भाई तो अपने काम में बिज़ी थे, तो फैंसला हुआ की मैं और मम्मी जाएँगे. सिर्फ़ 1-2 दिन की बात थी, तो कार की जगह ट्रेन से जाने का प्लान बना. सीधी बात, मेरे दिमाग़ में ट्रेन में चुदाई की फॅंटेसी चल रही थी.
मैने तुरंत ऑनलाइन चेक किया और सबसे पहले एसी 1आ (फर्स्ट क्लास एसी): की बुकिंग ढूँढ रहा था, जिसमें दो लोगों के लिए पूरी तरह प्राइवेट कूप मिलता है. पर अफ़सोस, वहाँ सीट नही मिली. मजबूरन, हूमें एक एसी 3-टीर के 4-बर्त कूप में टिकेट बुक करनी पड़ी.
अब हाल ये था की, हुमारे साथ इस छ्होटे से कॅबिन में कोई और दो लोग भी ट्रॅवेल करेंगे! मेरा सपना टूट रहा था. लेकिन मेरे मॅन में एक आखरी होप बाकी थी की, काश, वो दो सीट्स खाली रहें, और हूमें पूरी प्राइवसी मिल जाए.
हमारी ट्रेन गाँधीनगर से शाम को निकलनी थी, जिसका डेस्टिनेशन इंडोरे था, जहाँ हम सुबह तक पहुँचने वाले थे. मैं और मेरी हॉट मम्मी वक़्त पर स्टेशन पहुँचे.
मम्मी ने ट्रॅवेलिंग के लिए बहुत ही सीधा-सादा आउटफिट चुना था. एक वाइट त-शर्ट और ग्रे लेगैंग्स. लेकिन यारों, वो सिंप्लिसिटी भी किसी क़यामत से कम नही थी. यूयेसेस सिंपल आउटफिट में भी उनके किल्लर कुवर्व्स एक-दूं क्रिस्टल क्लियर दिख रहे थे.
और उनकी गांद, अर्रे बाप रे. जिम में रेग्युलर्ली जाने की वजह से उसका शेप एक-दूं पर्फेक्ट्ली रौंद और उभरा हुआ दिखता था, जो मुझे भी पागल कर देता था. सच काहु तो, उनके उस रूप को देख कर मुझसे भी सब्र नही हो रहा था.
स्टेशन पर खड़ा हर आदमी, चाहे जवान हो या बुद्धा, पलट-पलट कर एक बार उनकी गांद और फिगर को घूर रहा था. मम्मी, अपनी आदत के मुताबिक, शर्मा रही थी पर अंदर ही अंदर इस अटेन्षन को एंजाय कर रही थी.
थोड़े ही देर में हमारी ट्रेन शान से स्टेशन पर आई. हम जल्दी से अपनी सीट पर बैठ गये. मैने ट्रेन के कॉमपार्टमेंट के बाहर लगी पॅसेंजर लिस्ट पर एक तेज़ नज़र डाली. और वहाँ जो लिखा था, उससे मेरी साँसें थम गयी. मेरे और मम्मी के अलावा उस कूप में कोई और तीसरा या चौथा नाम नही था! हमारा 4-बर्त कूप- बिल्कुल खाली था.
मेरा और मम्मी का चेहरा तो खुशी से एक-दूं चमक उठा. हुँने एक-दूसरे को देख कर एक डीप, सीक्रेट स्माइल एक्सचेंज की.
अब तो हम दोनो यहाँ आराम से, बिना किसी रोक-टोक के चुदाई करने वेल थे. हमारी चलती ट्रेन में चुदाई करने की फॅंटेसी पूरी होने वाली थी.
खुश हो कर मैने तुरंत मम्मी को हल्का सा किस कर दिया. और मेरी जान, मम्मी तो मेरा फुल सपोर्ट दे रही थी.
कुछ 10-12 दिन से मौका नही मिला था, तो हुँने उपर-उपर ही सही, पर भरपूर रोमॅन्स किया.
हम बरोडा स्टेशन पर आए, तब तक रात हो चुकी थी. ट्रेन निकालने से ठीक पहले, वो तीसरा शख्स आया. मम्मी उसको देखते ही रह गयी. उसकी पर्सनॅलिटी काफ़ी सॉलिड थी. मेरी तरह उसकी भी एक अची, टोंड बॉडी थी, और दिखने में तो हॅंडसम था ही. जब मम्मी उसकी तरफ देख रही थी, तो उसने मम्मी को एक स्लो, सेडक्टिव स्माइल दिया. मम्मी ने भी हल्की सी शर्मीली हँसी में रिप्लाइ किया.
मेरा मूड तो खराब हो गया, पर मैने हिम्मत करके उससे बात की. पूछने पर पता चला की उसकी वेटिंग लिस्ट की टिकेट पंर कॉंबिनेशन के तौर पर हमारे ही कूप में कन्फर्म हो गयी है. मेरा और मम्मी का खुशी वाला मूड तो एक झटके में पूरी तरह खराब हो गया. हुमारी प्राइवसी अब ख़तरे में थी. वो अपना बाग रख कर कुछ लेने प्लॅटफॉर्म पर गया.
मैने तुरंत मम्मी से कहा: देखो मम्मी, हम दोनो मा-बेटे है, ये किसी को पता नही चलना चाहिए. हम दोनो इसके सामने स्ट्रेंजर है, ऐसे ही बिहेव करेंगे. ताकि अगर मौका मिले और हम कुछ करें और ये देख भी ले, तो हमारी असलियत बाहर ना आए.
मम्मी को मेरी ये वाली बात बहुत सही लगी. थोड़ी देर में ट्रेन फिर से चलने लगी. मम्मी मेरे सीट पर मुझसे तोड़ा डोर बैठी थी, और वो लड़का, जिसका नाम बाद में रोशन पता चला, मेरे ठीक सामने था.
बात-चीत शुरू हुई, और हमारा इंट्रो हुआ. रोशन की नज़रें मुझसे बात करते हुए भी बार-बार मम्मी की तरफ चली जाती थी, और मम्मी भी उसकी तरफ देख कर हल्का सा शर्मा रही थी, और फिर मेरी तरफ देख कर टीज़ कर रही थी. मैं समझ गया. रोशन को देख कर मम्मी का नये लंड से चूड़ने का मॅन ज़ोर से होने लगा है. आख़िर पिछली घटना के बाद मम्मी ने किसी गैर से चुदाई नही की थी.
थोड़े देर बाद मम्मी ने कहा: आप दोनो तोड़ा बाहर जाइए, मुझे चेंज करना है.
मैं हैरान था, क्यूंकी मम्मी घर से ही लेगैंग्स और त-शर्ट में आई थी, तो अब क्या चेंज करना है? मैं और रोशन टाय्लेट साइड गये. कुछ 2-3 मिनिट बाद मम्मी ने गाते खोला. हम दोनो अंदर गये तो देखा.
मम्मी ने अपना लोवर निकाल दिया था और एक-दूं छ्होटा सा शॉर्ट्स पहना था. उस छ्होटे शॉर्ट्स में से उनकी चिकनी टाँगें और थाइस इतनी सेक्सी लग रही थी की क्या बतौन.
रोशन का तो मूह खुला का खुला रह गया, और मम्मी ने उसको एक नॉटी स्माइल पास की. फिर क्या था, रोशन तो मेरी मम्मी के हुस्न के सामने क्लीन बोल्ड हो चुका था.
अगले आधे घंटे तक, मम्मी अपनी हर आडया, अपनी शॉर्ट ड्रेस और सेक्सी टाँगों से हम दोनो को खुले आम सिड्यूस कर रही थी.
रोशन तो एक तक मम्मी को घूरे जेया रहा था. उसकी नज़रें मम्मी के खूबसूरती में इतनी खो चुकी थी की जब त्क आया, तो उसको ध्यान ही नही रहा की मेरे टिकेट में ही मम्मी का नाम है. त्क भी, अपनी जॉब भूल कर, मुलेठी की तरह मम्मी को घूर रहा था. त्क के जाने के बाद, मम्मी ने मुझे एक नॉटी स्माइल दिया और टाय्लेट की तरफ चली गयी. मैने तुरंत रोशन की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा-
मैं: क्या आंटी है यार, मज़ा ही आ गया.
रोशन (ललचाई हुई आँखों से): हन, ब्रो. इनके होते तो इंडोरे स्टेशन कब आ जाएगा, पता ही नही चलेगा.
मैं (टीज़ करते हुए): क्यूँ? सोना नही है क्या, भाई?
रोशन (जल्दी से जवाब देते हुए): यार, सच काहु तो, मैं सो नही पौँगा. इतनी सेक्सी लेडी के साथ सफ़र करने मिल रहा है, कैसे नींद आएगी?
मेरे दिमाग़ में घंटी बाजी. मैने मॅन ही मॅन सोचा, ये साला अगर सोएगा नही, तो मेरी और मम्मी की चलती ट्रेन में चुदाई की फॅंटेसी कभी पूरी नही होगी. पर फिर मेरे दिमाग़ में दूसरा प्लान आया.
मैं (उसको टीज़ करते हुए): अछा? और आंटी सो गयी तो?
रोशन (आयेज झुक कर): फिर भी नींद नही आएगी. और सच काहु तो, मुझे लग रहा है की आंटी हम दोनो को लाइन दे रही है. आग तो उनके अंदर भी लगी हुई है.
मैं (तोड़ा सीरीयस होते हुए, आक्टिंग करते हुए): सही कहा, मुझे भी ऐसा तो फील हो रहा है. मैं एक बार उनसे बात करता हू. अगर वो सपोर्ट करें, तो फिर दोनो भाई मिल कर फुल मज़े करेंगे.
रोशन का चेहरा दर्र और एग्ज़ाइट्मेंट से मिक्स हो गया.
रोशन (तोड़ा घबराते हुए): पागल हो गया है क्या? अगर कुछ गड़बड़ हो गयी और हम दोनो की कंप्लेन कर दी तो, लेने के देने पद जाएँगे. जैल हो जाएगी.
मैं उसके पास बैठ कर आँखों में आँखें डाल कर कॉन्फिडेंट्ली उसको समझता हू की क्या करना है. मैने उसे प्लान बताया और भरोसा दिलाया. वो तोड़ा दर्र तो रहा था, पर मेरे कॉन्फिडेन्स के आयेज हार मान गया.
रोशन: ठीक है, तुम सेफ्ली हॅंडल करना. और अगर आंटी ज़रा सा भी रेस्पॉन्स ना करें, तो रुक जाना.
अब बेचारे रोशन को क्या पता था की उसकी सामने बैठी सेक्सी आंटी कोई और नही, मेरी खुद की चुड़क्कड़ मम्मी है! और मेरी तो एग्ज़ाइट्मेंट डबल हो चुकी थी. पहले तो मम्मी के साथ स्ट्रेंजर का रोल प्ले और फिर किसी अंजान शाकस के सामने मम्मी की चुदाई करना और हॉट होते हुए देखना. ये तो ड्रीम कम ट्रू था.
मम्मी कुछ 5-7 मिनिट बाद वापस आई और ठीक मेरे और रोशन के सामने वाली सीट पर बैठ गयी. मैने उनको एक सजेसटिव स्माइल दिया. मम्मी ने फेस वॉश किया था, और अब वो नॅपकिन निकालने के लिए बाग खूल रही थी जो उन्होने उपर की सीट पर रखा था.
और फिर मेरी नज़रों ने कॅच कर लिया. उनके हाथ में ब्रा फोल्ड करके रखा था. मैं तुरंत समझ गया की मेरी मम्मी फुल तैयारी के साथ, आज कुछ बड़ा करने के मूड में आई है.
जब मम्मी उपर की सीट पर रखे बाग की छाई खोल रही थी, तब उनके हाथ से वो ब्रा फिसल कर नीचे सीधा मेरे पैरों में गिरा.
मैने झुक कर वो ब्रा अपने हाथ में लिया. ये वाइट कलर का लेस ब्रा था, जो देखने में ही बहुत सेक्सी लग रहा था.
मैं (ब्रा को मम्मी की तरफ करते हुए): मेडम, आपका ये गिर गया.
मम्मी (हल्की सी शरम से, पर अंदर ही अंदर खुश होते हुए): ऊप्स…
जब मम्मी ने मेरे हाथ से ब्रा वापस लिया, तो उसने एक किल्लर, झुकती हुई स्माइल रोशन की तरफ भी पास की. वो शरमाते हुए बोली: थॅंक योउ.
अब पॉइंट ये था की, मम्मी चाहती तो बाग को अपनी गोदी में रख कर आराम से सब कुछ रख सकती थी. पर उन्होने जान-बूझ कर बाग को पैरों में रखा और झुक कर नॅपकिन निकाला.
उनकी त-शर्ट का गला काफ़ी लूस था, तो जब वो झुकी, उनके आधी से ज़्यादा क्लीवेज और बूब्स की झलक हम दोनो को क्लियर दिख रही थी. मम्मी को आचे से पता था की हम दोनो की नज़रें कहाँ है, पर उन्होने पहले रोशन की तरफ देखा, फिर शरमाया, और जल्दी से नॅपकिन और ब्रा उसमें रख दिया.
मम्मी ने बाग उपर रखा और पानी की बॉटल निकाल कर पानी पीने लगी. मैने रोशन की तरफ देखा और आँख मारी, और एक-दूं से खड़ा हो गया. मम्मी इस बात से अंजान थी, और ग़लती से उनकी त-शर्ट पर पानी गिर गया.
मैं: ओह ई आम रियली, रियली सॉरी, मेडम.
मम्मी (तोड़ा इरिटेटेड होने की आक्टिंग करते हुए): इट’स ओके.
उसके बाद मैं अपनी पानी की बॉटल लेकर बैठ गया. अब पानी गिरने से मम्मी की त-शर्ट एक-दूं चिपक गयी थी, और वो ट्रॅन्स्परेंट हो चुकी थी. उनके एक बूब्स की स्किन और निपल का हल्का सा शेप बिल्कुल सॉफ दिख रहा था! रोशन तो मम्मी को ऐसे घूर रहा था, जैसे अभी उठ कर उनके बूब्स पकड़ कर चूसने लगेगा.
मैं और मम्मी अपना रोल प्ले पूरी सिड्दत से कर रहे थे. मैं एक अंजान लड़का बन कर उनसे बातें कर रहा था, और मम्मी भी एक-दूं पर्फेक्ट तरीके से एक सेक्सी स्ट्रेंजर का रोल निभा रही थी. हम दोनो ऐसे केमिस्ट्री दिखा रहे थे जैसे मैं सच में किसी लेडी को इंप्रेस कर रहा हू, और मम्मी भी उस स्ट्रेंजर को सिड्यूस कर रही हो.