जब काम पूरा हो गया तो मैं अब रानी के साथ मस्ती के मूड में था पर कोई सिग्नल रानी ने नहीं दिया तो मैं उसे एम्ब्रस नहीं करना चाहता था। रानी से मैने पूछा आज जब अनिल तुमको छोड़ कर गये तो उसने ये क्यों बोला की राजु शरीफ़ आदमी है। तब रानी बोली कल अनिल मुझसे बोल रहे थे कि राजू बहुत ही बेवकूफ़ है अगर उसे मौका मिलता (किसी की वाइफ़ के साथ अकेले रहने का) तो वह जरूर मौके का फ़ायदा उठाता। फ़िर रानी बोली, जब मैने कहा कि अगर औरत ने गड़बड़ कर दी तो वह बोल रहे थे कि अगर वह किसी औरत को एक्साइट करे तो वह मना कर ही नहीं सकती है। रानी फ़िर बोली इसीलिये मुझे भी उनकी बात सुनकर मरदों की मानसिकता के बारे में पता चल गया और वह कोई गलती नहीं कर रही है और मैं भी ऐसा न करूं। अब मैने कहा ये बात तो ठीक है पर आपको तो मालूम है न मैं भी बड़ा कमीना हूं और आज तो मैं अब तुमको इस समय नहीं छोड़ सकता हूं जब दोनो फ़्री हैं। रानी कुछ ज्यादा नहीं बोली तो मैने कहा पर आज मैं तुमको पूरी तरह से प्यार करना चाहता हूं क्योंकि आज हमारे पास टाइम काफ़ी है।
फ़िर मैं रानी का हाथ पकड़ कर उसे बेड पर ले आया, और उसे आराम से चूमते हुए उसकी इच्छा जानने की कोशिश करने लगा रानी बोली हां राज आज मैं चाहती हूं कि तुम मुझे ऐसे प्यार करो जैसे अनिल पहले पहले किया करते थे। मैं बोला चलो पहले ऐसा करते हें एक दूसरे के कपड़े उतारते हैं मुझे महाभारत की दरौपदी की तरह अपनी पार्टनर के कपड़े उतारने में बड़ा मज़ा आता है और अगर वह विरोध करे तो और मज़ा आता है। क्या मैं स्टार्ट करूं, रानी बोली नहीं पहले मैं तुम्हारे कपड़े उतारुंगी, अगर मेरे कपड़े पहले उतर गये तो तुम मुझे मौका ही कहां दोगे, मैं मर्दों की आदत जानती हूँ।

मैने कुरता पायजामा पहना था और रानी ने एक झटके मेरे कुरता और बनियान खींचकर मेरे पायजामे का नाड़ा खोल दिया और तब तक मैने भी अपना अंडरवियर नीचे कर दिया। रानी ने मेरे लंड को देखकर थोड़ा हैरान सी हुई मैं जानता था कि उसे तो अनिल के लम्बे लंड की आदत थी न और फ़िर मेरा लंड उस समय खड़ा भी नहीं था। फ़िर मैने रानी के साड़ी के पल्लू को खींचना शुरु किया और रानी घूम घूम कर अपनी साड़ी उतारने लगी। जब साड़ी उतर गयी तो मैने रानी को पकड़ कर उसके ब्लाउज़ के हुक एक एक करके खोलकर उसका ब्लाउज़ भी उतार दिया।
उसी समय अनिल का फोन आया तो मैं समझा कि आज तो काम का सत्यानाश हो गया पर अनिल ने पूछा कितना काम बाकी है तो मैने कहा आधे से थोड़ा कम तो अनिल बोला आराम से काम कर लो मुझे अभी एक घंटा और लगेगा मैं ११:०० बजे तक आउंगा। रानी ने कहा ठीक है पर जल्दी की कोशिश करना ज्यादा लेट से सभी परेशान होंगे। अब तो हम और भी रिलेक्स हो गये रानी ने अंदर सफ़ेद ब्रा पहन रखी थी उसकी ब्रा एकदम टाइट थी और उसके बूब्स उसके अंदर कैद हो गये थे। मैने एकदम से रानी को पकड़ कर उसकी टांगों को पेटीकोट सहित अपनी टांगों के बीच फ़ंसाकर उसे जकड़ लिया और फ़िर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया जैसे ही उसकी ब्रा से उसके बूब्स आज़ाद हुए ऐसा लगा जैसे कोई धमाका हुआ उसके बूब उछलकर मेरे सामने आ गये।
क्या टाइट गोल एकदम क्रिकेट बाल की तरह ही लाल, मन तो कर रहा था कि एक झटके में दोनो को मसल दूं
पेर मैं उसे पूरा नंगा करना चाहता था। उसके बाद मैने रानी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया पर उसका पेटीकोट नीचे नहीं आया। उसके पेटीकोट में इलास्टिक लगी हुई थी इसलिये वो नीचे नहीं गिरा तो मैने उसके पेटीकोट को नीचे को जोर से खींचा तो उसका काले रंग का पेटीकोट एकदम नीचे आ गया। जैसे ही रानी का पेटीकोट नीचे हुआ मेरी तो मस्ती का ठिकाना ही नहीं रहा जब मैने देखा कि रानी ने तो पैंटी पहनी ही नहीं थी। अब हम दोनो एकदम नंगे हो गये थे, रानी ने आज शायद अपनी चूत साफ़ की थी इसीलिये उसके पूरी बोडी पर सर के सिवा कहीं एक बाल भी नज़र नहीं आ रहा था।
जब तक मैं रानी के बदन पर नज़रें फ़ेर पाता रानी मेरे लंड को देखकर बोली अरे ये तो बहुत छोटा है चलो मैं अभी इसे तैयार करती हूं और उन्होने उसको धीरे से पकड़ा और उसके टोपे (टोप) पर अपनी जीभ से लिक करने लगी। मुझे बड़ी सरसराहट सी होने लगी, रानी बीच में मेरे लंड के टोपे को अपने लिप्स से भी दबा देती। इससे मेरे लंड का साइज़ अब बढ़ने लगा तो रानी ने भी उसे अपने मुंह के अंदर लेना शुरु कर दिया और मुझे ये बड़ा अजीब लग रहा था। ऐसा मैने केवल कुछ ब्लू फिल्म्स में ही देखा था और मैं ये नहीं सोच सकता था कि किसी दिन मेरे साथ भी ऐसा होगा। मैं ये भी विश्वास नहीं कर पा रहा था कि एक सीधी साधी औरत रानी ऐसा कर सकती है, पर उसका पति अनिल बड़ा स्मार्ट, हैंडसम और हरामी भी है उसने उसको ट्रैंड कर रखा था। मैं तो सेक्स का मतलब बस चुदायी तक ही समझता था और जब ऐसा सीन मैने एक ब्लू फ़िल्म में देखा था तो मुझे उल्टी सी आने लगी थी। पर आज जब मेरे साथ ये हो रहा था तो बड़ा मज़ा आ रहा था यहां तक कि मुझे इस में अब रानी की चुदायी से ज्यादा आनंद आ रहा था बेसौसे इसमे मुझे कोई ताकत नहीं लगानी पड़ रही थी।
जैसे जैसे मेरे लंड का साइज़ बढ़हा गया रानी ज्यादा मस्त होने लगी और अब जब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया तो वह मेरे लंड को लेमन जूस वाली टोफ़ी की तरह से चूसने लगी। दोस्तों जब वह मेरे लंड को मुंह में लेकर आगे पीछे करती तो मुझे तो उसमें अब तक की गयी चुदायी से ज्यादा मज़ा आने लगा था। मैं जोश में कभी कभी रानी के मुंह को उसकी चूत समझ कर चुदायी वाले एक्शन में अपना लंड उसके मुंह में डाल देता था। रानी मेरे लंड को पूरा खाने वाली स्टाइल में मुंह में लिये हुए थी और कभी मुंह से बाहर निकाल देती और फ़िर पूरा मुंह में ले लेती। मस्ती में वह कभी कभी मेरे लंड को दांतों से भी दबता देती ऐसे में मेरी तो चीख ही निकल गयी तो घबरा कर रानी थोड़ा ढीली हो गयी।
फ़िर रानी ने मेरे लंड को जड़ से पकड़ कर कभी चाटना और कभी मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरु कर दिया। थोड़ी देर में रानी ने मेरे लंड को मुंह में लेकर उसको गुब्बारे की तरह से फुलाना शुरु कर दिया और कभी उसे अंदर को चूसने लगी। कभी वह अपने मुंह से मेरा लंड निकाल कर
मेरे लंड के टोपे पर लिप्स रखकर उसे चूसने लगी। ऐसे में तो मुझे ऐसा लगता जैसे मेरी सांसें ही बंद हो जायेंगी। पर रानी मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगती। मेरे लिये सेक्स का ये अलग एक्सपेरिएंस था पर था बड़ा मज़ेदार एक्सपेरिएंस । रानी की मस्ती बढ़ती ही जा रही थी और वह मेरे लंड को कैंडी आइस क्रीम की तरह उसे कर रही थी मुझे भी थोड़ा बहुत डर के बावजूद बड़ा मज़ा आ रहा था। यारों, सेक्स में पता नहीं क्यों दर्द में ही मज़ा आता है जैसे किसी कड़वी दवा से ही आराम मिलता है। रानी की मस्ती तो बढ़ रही थी पर अब मेरे लंड के अंदर से फ़्लो बाहर को होने का अहसास सा हुआ तो मैने चिल्लाकर कहा रानी अब नहीं रुका जरा है, रुको। रानी तो पुरानी खिलाड़ी थी उसने लंड से मुंह हटा लिया और मेरे लंड के टोपे को हाथ से दबाकर बोली लल्ला चिंता न करिये मैं तो तुम्हारा ये आइस क्रीम खाने के लिये पूरी तरह तैयार हूं और इसके बाद उसने मेरे लंड को पूरा मुंह के अंदर ले लिया।
इसके तुरंत बाद मेरे लंड से हुई सारी बरसात रानी के मुंह के रास्ते उसके पेट में चली गयी। जब मेरा पूरा क्रीम झड़ गया तो रानी फ़िर से मेरे लंड को अच्छी तरह से चूसने लगी। रानी ने मेरे लंड को सावधानी से चाटना शुरु कर दिया और मेरे लंड के माल का एक एक कतरा भी वह चूस लेना चाहती थी। मेरा लंड दुबारा से सिकुड़ कर छोटा हो गया था पर उतना नहीं जितना रानी की चुदायी के बाद। रानी को जब ये लगा कि अब मेरे लंड का सरा माल वो चाट चुकी है तो उसने अपना मुंह मेरे लंड से हटा लिया। रानी को शायद बड़ा मज़ा आया था मेरी तरह से ही वह बड़ी खुश थी जैसे कोई अच्छी चीज़ बहुत दिनो के बाद मिली हो। रानी बोली लल्ला ये मेरा भी पहला तज़ुर्बा है ऐसे केरने पर बड़ा मज़ा दिया राजु तूने।
मैने तो एक बार टीवी में तेरे भैया के साथ देखी थी तो तेरे भैया मुझे छेड़ते हुए बोले थे कि उनका चूसेगी तो मैने मना कर दिया था। पर आज तेरा लंड देखते ही मैं मचल रही थी एक बार ऐसा करके देखूं, आज़ राजु बड़ा मज़ा आया। मैं बोला हां रानी मुझे बड़ा अच्छा लगा पर अब बहुत देर हो गयी है अब हमें चलना चाहिये। फ़िर रानी ने मेरे लंड को कभी चाटना और कभी मुंह के अंदर लेकर चूसना शुरु कर दिया और कभी रानी मेरे लंड को मुंह में लेकर उसको गुब्बारे की तरह से फुलाना शुरु कर दिया और कभी उसे अंदर को चूसने लगी। फ़िर वह अपने मुंह से मेरा लंड निकाल कर मेरे लंड के ऊपर लिप्स रखकर उसे चाटने लगी। ऐसे में तो मुझे ऐसा लगता जैसे कोई मेरे लंड को सहला रहा हो और उसका साइज़ बढ़ने लगा। पर अगले पल रानी मेरे लंड को पूरा मुंह में लेकर चाटने और चूसने लगती और मेरा लंड एकदम लोहे की तरह कड़ा और चुदायी के लिये तैयार होता चला गया। रानी ने मुझसे लंड को पकड़ कर लेट जाने को कहा मैने वैसा ही किया तो रानी ने खड़े खड़े ही अपनी नंगी गोरी टांगें, चमकती हुई गोरी गुलाबी जांघें, मस्त चूतड़ और उनकी जांघों के बीच से झांकती हुइ उसकी मस्त गंजी चूत देखकर मैं तो पागल हो गया। मेरा लंड तो और भी खींचा जा रहा था और मेरे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा था कि उसकी चूत का रस चूसते हुए उसके जांघों को खा जाऊं। रानी के गुलाबी बूब मुझको बेचैन कर रहे थे, इसी बीच उसने अपने दोनो हाथ ऊपर को कर दिये तो उसके बूब्स और बगल मुझे और उत्तेजित करने लगे। मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ और उसके बूब्स देखकर तो मैं एकदम बेचैन सा हो गया और मैने रानी के बूब्स को मुंह में लेकर उनको चूमना और चाटना शुरु कर दिया। रानी कभी अपने बूब्स को ज़ोर से दबाने को कहती और जब मैं ज़ोर से दबाता तो कहती अरे धीरे से क्या मार डालोगे मुझे।
रानी के चूचियों पर मालिश करने में बड़ा मज़ा आ रहा था पर मैं आज उसे इतनी जल्दी छोड़ने वाला नहीं था आज मैं उसके बदन का एक एक पुर्ज़ा मसल देना चाहता था जिससे साली रानी मेरी चुदाई को याद रखे। मैं साइए में उसकी बगल और कंधे पर भी मालिश कर रहा था। फ़िर मेरा ध्यान रानी की पतली कमर पर गया वह इतनी पतली थी कि जितनी शायद १५ साल की कन्या की भी नहीं होगी। मैने रानी के नाभि के नीचे के हिस्से में मसाज करने लगा। इस एरिआ में मासाज करने पर रानी की उत्तेजना बढ़ गयी थी और वह जोर से अपने पैर पटकने लगी तो मुझे अपने लंड को कंट्रोल करना पड़ रहा था जो मेरे लिये थोड़ा मुश्किल हो रहा था। मैने उसकी चूत के आस पास अब्दोमेन का एरिया तक जब उसकी नंगी थाईस पर जोर से मसाज किया तो उसने अपनी दोनो थाईज़ को बंद करके चिपका दिया। मैने भी जल्दी से उसकी चूत पर हाथ डालकर वहां पर उंगली करने लगा तो रानी का तो बुरा हाल हो गया था वह मस्ती में छटपटाने लगी और उसने अपनी दोनो थाईज को खोल दिया तो मेरे तो मज़े ही आ गये अब मैं उसकी चूत, थाईज़ या अबदोमेन जहां चाहे वहां मसलने लगा।
मेरी उंगलियों के हमले से रानी की हालत अब खराब हो गयी थी वह अब मेरे एक्शन का विरोध नहीं कर पा रही थी। मैं जैसे मर्जी आये उसके हर पार्ट को मसलता, रगड़ता और मसाज कर रहा था। जब मेरी मस्ती और बढ़ी तो मैने रानी की चूत पर उंगली डालकर अंदर तक उंगली से उसकी चूत के छेद के अंदर तक मसाज करने लगा। मेरे इस एक्शन से तो रानी पूरी तरह से चित हो गयी और बोली राजू प्लीज़ अब बस करो और एकदम से पलट गयी। अब रानी के नंगे चूतड़ मेरे सामने थे जिसके बीच में उसका गांड तो नज़र नहीं आ रहा था पर पीचे से भी रानी की चूत मुझको फ़िर नज़र आने
लगी तो मैं फ़िर अपनी उंगली से उसकी चूत पर हमला कर दिया और दूसरे हाथ से उसकी जांघों को पीछे से मसलने लगा।
जब रानी की चूत मेरी उंगलियों के हमले को नहीं बरदाश्त कर पायी तो रानी बोली राज प्लीज़ ऐसा मत करो मुझे ऐसे ही गीली कर दोगे क्या। मैं उसके बड़े बड़े चूतड़ और उसके नीचे मोटी मोटी जांघों को सारा का सारा एक बार में ही मसल देना चाहता था पर मेरे दोनो हाथों में इनता एरिया एक बार में कवर नहीं हो रहा था। रानी एकदम नंगी थी तो मेरे को अपने लंड पर कंट्रोल नहीं हो रहा था, मैने अपना ध्यान रानी के चूचियों पर दिया पर वह उल्टी लेटी हुई थी और उसके बूब्स साइड से ही नज़र आ रहे थे। फ़िर भी मैने साइड से ही उसके दोनो बूब्स को जोर से दबाया और सहलाना शुरु कर दिया। रानी को तो मेरा हर एक्शन एंजोयमेंट दे रहा था और अब वह मेरे हर एक्शन पर बस आहें भर रही थी। मैं रानी के चूतड़ पर मसाज करने लगा तो उसके चूतड़ बहुत बड़े बड़े थे और उनको दबाने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
पर मैं और मज़ा लेने के लिये उसके चूतडों पर जोर से स्लाप भी कर देता जिससे चटाक! की आवाज आती और रानी को बड़ा मज़ा आता था और वह अपने चूतड़ ऊपर उठा कर जैसे और स्लाप करने को कहती। रानी की जांघें मुझे सबसे ज्यादा उत्तेजित कर रही थी, मैं वहां पर प्रेस, मसाज, किस, रब कर सकता था। और मैं ये सोच रहा था कि जब मैं उसकी चुदाई करुंगा तो उसकी थाईज़ जब मेरी थाई के साथ रब
होंगी तो कितना मज़ा आयेगा। अगर रानी की जैसी स्मूथ बॉडी हो तो ऐसा लगता है कि जैसे लिनेन पर स्लिप हो रहा हो। जब मैं उसके चूतडों पर मसाज कर रहा था तो मुझे बिल्कुल ऐसा ही लग रहा था। रानी को डबल मज़ा आ रहा था एक तो उसकी मसाज हो रही थी दूसरा एक मर्द के हाथों उसके बॉडी के पार्ट्स का स्पर्श दे रहा था और जिसे वह फुल्ली एन्जॉय कर रही थी।
मैने रानी के दोनो चूतड़ को चोडा करके उसकी गांड को देखने लगा और मुझे रानी की चूत पीछे से दिखायी देने लगी और मेरा लंड फ़िर जोर मारने लगा। इधर मेरा लंड अब पूरी तरह बेकाबू हो गया था और उसको कंट्रोल करना मेरे लिये पोस्सिब्ल नहीं था। वह अब रानी की चूत में जाये बगैर मानने वाला नहीं था।। रानी की चूत का बुरा हाल हो गया था। मैने अपने अंगूठे से को रानी की चूत के आस पास रब करना शुरु कर दिया और मौका पाते ही उसकी चूत के अंदर पूरा अंगूठा डाल दिया। मेरा अंगूठा पूरा उसकी चूत में गया तो रानी की खुजली जरा कम हुई और वह अब थोड़ा मज़ा लेने लगी। मेरा अंगूठा लंड की तरह रानी की चूत में अंदर बाहर फ़िसलने लगा, रानी को मज़ा तो आ रहा था पर उसकी चूत की खुजली पूरी तरह से दूर नहीं हो रही थी। वह मस्ती मेरे से चिपट गयी जैसे कहना चाहती हो कि कब चोदोगे पर वह बोली कुछ नहीं।
पहले रानी के नंगे बदन की गरमी से मेरा लंड तो तना हुआ था मैने जल्दी से रानी को दाब लिया। रानी की चूत में तो पहले से ही खुजली थी पर वह झूठा गुस्सा दिखा रही थी और मना कर रही थी। मैने उसको कमर से पकड़ा और उसके चूचियों को अपने लिप्स से किस करने लगा जैसे ही रानी ने मुंह खोला तो मैने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिया और नीचे से दूसरे हाथ को उसकी थाईज़ पर मसाज करने लगा। उसकी थाईज़ बड़ी टाइट थी, बच्चों वाली औरतों की तरह ढीली नहीं थी। मैं थाई पर हाथ फ़ेरते हुए उसकी चूत की तरफ़ बढ़ना चाह रहा था। रानी के बूब्स भी एकदम टाइट हो गये थे जिसका मतलब था कि उसको पूरी उत्तेजना हो रही थी। मैने कैइ बर रानी के बूब्स के निप्पल को लिप्स में लेकर जोर से प्रेस किया जिससे दोनो को बड़ा मज़ा आया।
जब मुझे ज्यादा मज़ा आने लगा तो मैने एक दो बार रानी के निप्पल को अपने दांत से हल्का सा काट भी दिया जिससे रानी चीख पड़ी और मुझे बड़ा मज़ा आया। नीचे से मेरा हाथ रानी की थाईज़ से होता हुआ उसके चूतडों और रानो पर मसाज करने लगा। ऊपर से मैने रानी की बैक, नेक, वेस्ट और नाभि के आस पास लिप्स और जीभ से किस और लिक करना चालु रखा था। जब मेरा एक हाथ रानी की रानो पर फ़िसल रहा था तो रानी की मस्ती कंट्रोल से बाहर हो गयी तब मैने रानी को बेड पर लिटा दिया और अपने आप भी साइड बी साइड लेट गया। मैं आराम से अपने दोनो हाथों और लिप्स से रानी के पूरे बदन से खेलने लगा। अब दोनो एकदम गरम हो गये थे रानी की भी सारी शरम दूर हो गयी थी और उसका बदन की एक एक हरकत
मुझे महसूस हो रही थी उसकी गरम सांसें मुझे बेचैन कर रही थी। मैने रानी की चूत के ठीक पास अपनी उंगली से रब करना शुरु कर दिया जिससे मस्ती के मारे रानी ने अपनी दोनो टांगें फ़ैला दी और मुझे उसकी चूत पर अटैक का एक मौका मिल गया। मैने अपने आप को रानी की दोनो टांगों के बीच फ़िक्स कर लिया और उसकी दोनो टांगों को और फ़ैलाकर उसकी चूत को और चौड़ा कर दिया मुझे उसकी चूत का छेद साफ़ इतना बड़ा दिख रहा था कि उसमे में अपने थम्ब को सीधा डाल सकता था। पर मैने बिना टाइम गंवाये किये अपने लंड को सीधा उसकी चूत के छेद में झोंक दिया और मेरा लंड रानी की चूत में आधा धंस गया। ये शायद ऐसा मौका था जब चुदाई में मुझे इतनी आसानी लंड डालने का मौका मिला हो। मैने एक और जोर का धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड रानी की चूत में ठुक गया।
आज उसकी चूत पहले ही गीली हो रखी थी इसलिये अब मैं अपने लंड को ऊपर नीचे रगड़ने लगा तो रानी की चूत में सरसराहट होने लगी। रानी ने भी नीचे से हमला कर दिया और अपनी गांड का एरिया ऊपर को उठा कर खुद भी चुदायी करवाने के लिये मुझे इनवाईट करने लगी। आज मुझे और रानी को चुदायी में दर्द नही हो रहा था और दोनो ही मस्त थे वह आज बड़ी मस्ती में लग रही थी। मैने रानी की चूत में ऊपर नीचे रगड़म परेड शुरु कर दी और रानी भी अपनी चुदायी करवाने लगी। धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ गयी तो गन्ने के खेत में जैसे तूफ़ान सा आ गया। मैने चुदायी के साथ साथ रानी के पूरे
बदन को चूमना, चाटना, मसलना और रगड़ना भी चालू रखा था। मेरा ऐसा करने पर रानी भी जवाब दे रही थी बस जवाब के लिये उसके पास लंड नहीं था नहीं तो वह भी पूरे जोर से हमारी चुदायी की गाड़ी को धकेल रही थी।
मैं पहले की तरह बेड पर लेट गया और रानी मेरे ऊपर आ गयी। मुझे तो इससे बड़ा फ़ायदा हुआ, मैं पूरी ताकत से चोदने के चक्कर में अपनी काफ़ी एनर्जी वास्ट कर चुका था और इस पोसिशन में मुझे रानी की दुबारा चुदायी के लिये रिचार्ज होने का मौका मिल गया। रानी ने अब ऊपर से धक्का लगाना शुरु कर दिया और मैं आराम से उसके चूचियों और निप्पलों को मसलने लगा।। पर उसके बूब्स ही मेरे हाथों के में टार्गेट थे, जब मुझे ज्यादा मज़ा आता तो मैं उसके चूतड़ पर जोर जोर से स्लाप कर देता जिससे रानी और मुझे दोनो को मज़ा आता। मैं जैसे ही रानी की गांड के आस पास स्लाप करता रानी और जोर से अपनी चूत को मेरे लंड की तरफ़ उठा देती और दोनो का मज़ा दोगुना हो जाता।
अचानक रानी बोली राजु अब जल्दी करो मैं गीली हो गयी हूं तो मैने रानी को फ़िर पहले वाली पोसिशन में करके अपने आप को उसके ऊपर ले आया। अब मैने ऊपर से अपनी स्पीड बड़ाकर रानी की चूत को अपने लंड से पूरी ताकत के साथ ठोंकना शुरु कर दिया। रानी अब जोर जोर से आवाजें निकाल रही थी पर अब वह पहले की तरह खुश नज़र नहीं आ रही थी पर उसकी आहें मुझे और उत्तेजित कर रही थी और मैने और जोर से उसकी चुदाई करने लगा। मुझे रानी की चीख में एक अलग ही मज़े का आने लगा और में और जोर से उसकी चूत को अपने लंड से ठोंक रहा था। करीब २-३ मिनट बाद ही मेरी भी हालत कुछ ढीली होने लगी और में थकने लगा तो मैने स्पीड थोड़ा कम कर दी तो रानी भी थोड़ा रिलेक्स लगने लगी। अचानक मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरे लंड के जड़ से अंदर नसों में पानी निकलने को बेताब है मैं समझ गया कि अब मेरा भी झड़ने वाला है रानी तो शायद पहले ही झड़ चुकी थी।
मैने रानी की चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक ठोंक कर अपने को रोक दिया। और मेरे लंड के अंदर से सारा क्रीम धीरे धीरे होता हुआ रानी की चूत में जाता सा लगने लगा। उधर रानी भी शायद अपनी चूत में मेरे लंड का क्रीम फ़ील कर रही थी वह हलकी सी आहें भरते हुए रिलेक्स और खुश नज़र आ रही थी। कुछ पलों के बाद मेरे लंड का सारा क्रीम रानी की चूत की गेहराई में कहीं गुम हो गया। मैं एकदम सुस्त हो गया था ऐसा लग रहा था जैसे किसी लम्बी रेस दौड़ी हो और मेरा लंड भी एकदम सिकुड़ गया था में इतना सुस्त हो गया कि वैसे हो रानी के ऊपर लेट गया और रानी ने भी कोई जावब नहीं दिया और हम दोनो ऐसे ही लेटे रहे मतलब रानी नीचे बेड पर लेटी हुई थी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर ही था।
५ मिनट बाद ही अलग हुए और बाथरूम जाकर पहले साफ़ किया और अपने अपने कपड़े पहन लिये। इसके बाद रानी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट ठीक किया और फ़िर हम दोनो बेडरूम से
दुबारा कम्प्यूटर टेबल पर आ गये। इस समय करीब १०:५० का टाइम हुआ था में बोला चलो चाय पीते हैं तभी अनिल का भी फोन आया कि वह ५ मिनट में पहुंच रहा है। फ़िर ५ मिनट में चाय भी तैयार हो गयी और फ़िर तीनो ने चाय पी, आज अनिल ने ड्रिंक भी नहीं किया था शायद उसे मौका नहीं मिला पर मैं रानी को देखकर उसके बारे में सोचने लगा और शायद अनिल के इरादे ही आज कुछ वैसे ही थे। मैं रानी को देख रहा था पर रानी शायद हम दोनो का मतलब समझ गयी थी पर दोनो को ही कुछ बताना नहीं चाहती थी।