अनाड़ी लंड चूत का नशा

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा अपनी एक और कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो ये कहानी उस समय की है जब मैं 20-21 साल का था शहर मे कमरा लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था.
और जिनके बारे मे बताने जा रहा हूँ वह एक शादीशुदा मेरी पड़ोसन है और उनका नाम ललिता है. उनकी एज 25 थी और शादी होके 4 साल हुए थे. और उनके 2 बच्चे थे. हज़्बेंड उनका काफ़ी टाइम बाहर रहता था और जब भी आता था तो पीके आता था. घर पे भी उनका इन-लॉस होने के कारण उनको सब परेशान करते थे क्यू कि वह ग़रीब फॅमिली मे से थी और उनका हज़्बेंड घर मे कुछ कमा के देता नही था. तो घरवाले सोचते थे कि वो सब कुछ इनके पास ही देता है और ये अपनी माँ को भेज देती है. यह सब देख के अच्छा नही लगता था. वो उसके घर मे बिल्कुल अकेली पड़ती थी. और उनके बच्चे भी दिनभर मेरे यहाँ पर ही खेलते थे तो वो भी मोस्ट ऑफ टाइम वो मेरे घर मे ही टाइम पास करती थी.

मैं घर पर अकेला ही रहता था. बातचीत के कारण वो मुझे मन ही मन मे चाहने लगी थी और मैं भी. ललिता मुझको बहुत चाहती थी, क्योंकि एक मैं ही तो था जिससे कि ललिता बातचीत कर सकती थी. खास कर जब कोई उनके घर पे नही होता और उनका हज़्बेंड बाहर जाता.

ललिता बहुत प्यार से मेरा ख्याल रखती थे और कभी एह अहसास नही होने देती कि मैं घर पर अकेला हूँ. वो मुझे प्यार से राज कहकर पुकरती थी और मैं हमेशा उनके पास पास रहना पसंद करता था. वो बहुत ही सुंदर थी, एकदम गोरी चिट्टी लंबे लंबे काले बाल करीब 5′3″ और फिगर 38-28-40 था. मैं उनकी स्माइल और चुची पर फिदा था और हमेशा उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब रहता था. जब-भी काम करते वक़्त उनका आँचल उनकी छाती पर से फिसल कर नीचे गिरता था या वो नीचे झुकती, मैं उनकी चूंची की एक झलक पाने की कोशिश करता था. ललिता को इस-बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपनी चूंची का जलबा दिखा देती थी.

ये बात तब हुआ जब उसके हज़्बेंड काम के सिलसिले मे शादी के बाद बाहर गये और उनके घरवाले भी पहले से ही उनके गाओं गये थे और करीब एक महीने बाद लौटने वाले थे. ललिता पर ही घर सम्हालने की ज़िम्मेदारी थी. मेरा उस समय टाइम खराब चल रहा था और साथ ही मे ललिता को भी अकेलापन महसूस हो रहा था.

ललिता उस्दिन बहुत ही खुश थी. जब हम लोग घर पे थे तो उन्होने मुझे अपने कमरे मे बुलाया और कहा कि उन्हे अकेले सोने की आदत नही है और बच्चे भी अकले है तो जब तक वो वापस नही आते, मैं उनके घर मे सोया करूँ. मैं तो खुशी से झूम उठा था

ललिता ने खाना पकाया और हम दोनो ने साथ साथ खाना खाया. आज वो मुझपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी और बार बार किसी ना किसी बहाने से अपनी चूंची का जलवा दिखा रही थी. खाने के बाद ललिता ने मुझे फल खाने को दिए. फल देते वक़्त उन्होने मेरा हाथ मसल दिया और बड़ी ही मादक अदा से मुस्कुरा दिया. मैं शरमा गया क्यूंकी ये मुस्कान कुछ अलग किस्म की थी और उसमे शरारत झलक रही थी. खाने के बाद मैं तो पेपर पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपड़े चेंज करने लगी. गर्मी के दिन थे और गर्मी कुछ ज़यादा ही थी. मैं अपनी शर्ट उतार कर केवल बनियान और पॅंट पहन कर पढ़ने बैठ गया. मेरे सामने की टेबल के उपर दीवार पर एक शीशा टंगा था और ललिता को मैं उस शीशे मे देख रहा था. वो मेरी तरफ देख रही थी और अपने कपड़े उतार रही थे. वो सोच भी नही सकती थे कि मैं उनको शीशे के अंदर से देख रहा था. उन्होने अपना ब्लाउज खोल कर उतार दिया. है क्या मदमस्त चूंची थी. मैं पहली बार लेस वाली ब्रा मे बँधी उनकी चुचियों को देख रहा था. उनकी चूंचियाँ काफ़ी बड़ी थी. और वो ब्रा मे समा नही रही थी. आधी चूंची ब्रा के उपर से झलक रही थी. .
कपड़े उतार कर वो बिस्तेर पर चित लेट गयी और अपने सीने मे एक झीनी से चुन्नी ढक लिया. एक पल के लिए तो मेरा मन किया कि मैं उनके पास जा कर उनकी चूंची को देखु, फिर सोचा ये ठीक नही होगा और मैं पढ़ने लग गया. तुरंत ही वो सो गयी और कुछ ही देर मे उनका दुपट्टा उनकी छाती से सरक गया और साँसों के साथ उठती बैठती उनकी मस्त रसीली चूंची साफ साफ दिख रही थी.

रात के बारह बाज चुके थे. मैने पढ़ाई बंद की और बत्ती बुझाने ही वाला था कि ललिता की सुरीली आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी, “राज यहाँ आओ ना “ मैं उनकी तरफ बढ़ा, अब उन्होने अपनी चूंची को फिरसे दुपट्टे से ढँक लिया था. मैने पूछा, “क्या है ललिता?’ उन्होने कहा, “राज ज़रा मेरे पास ही लेट जाओ ना, थोड़ी देर बात करेंगे फिर तुम अपने बिस्तेर पर जा कर सो जाना.”

पहले तो मैं हिचकिचाया लेकिन फिर मान गया. मैं रात को शॉर्ट्स पहन कर सोता था और अब मुझको जीन्स पहन कर सोने मे दिक्कत हो रही थी. वो मेरी परेशानी समझ गयी और बोली, “राज कोई बात नही, तुम अपनी पॅंट उतार दो और रोज घर मे जैसे सोते हो वैसे ही मेरे पास सो जाओ. शरमाओ मत. आओ ना.” मुझे अपने कानों पर यकीन नही हो रहा था. जीन्स उतारकर मैने लाइट बंद कर दी और नाइट लॅंप जला कर मैं बिस्तेर पर उनके पास लेट गया. जिस बदन को महीनो से निहारता था आज मैं उसी के पास लेटा हुआ था. ललिता का अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था. मैं ऐसे लेटा था कि उनकी चूंचियाँ बिल्कुल नंगी मालूम दे रही थीं, क्यू कि थोड़ा सा हिस्सा ही ब्रा मे छुपा था. क्या हसीन नज़ारा था. तब ललिता बोली, “इतने महीने से अकेले नही सोई हूँ और अब आदत नही है अकेले सोने की.

” मैने कहा , “मैं भी कभी किसी के साथ नही सोया.” वो ज़ोर से हँसी और बोली “अनुभव ले लेना चाहिए जब भी मौका मिले, बाद मे टाइम लगेगा ” उन्होने मेरा हाथ पकड़ कर धीरे से खींच कर अपनी उभरी हुए चूंची पर रख दिया और मैं कुछ नही बोल पाया लेकिन अपना हाथ उनके चूंची पर रखे रहने दिया.

“मुझे यहाँ कुछ खुजा रहा है, ज़रा देखो ना ” मैने ब्रा के उपर से ही उनकी चूंची को दबाना शुरू किया. ललिता ने मेरा हाथ ब्रा के अंदर डाल के सहलाने को कहा और मेरा हाथ ब्रा के अंदर कर दिया.

मैने अपना पूरा हाथ अंदर घुसा कर ज़ोर ज़ोर से उनकी चूंची को रगड़ना शुरू कर दिया. मेरी हथेली की रगड़ पा कर ललिता के निपल खड़े हो गये. मुलायम माँस के स्पर्श से मुझे बहुत अक्च्छा लग रहा था लेकिन ब्रा के अंदर हाथ करके मसल्ने मे मुझे दिक्कत हो रही थी.

अचानक वो अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर बोली, “राज यह ब्रा का हूक्क खोल दो और ठीक से करो .”
मैने काँपते हुए हाथों से ललिता की ब्रा की हूक्स को खोल दिया और उन्होने अपने बदन से उसे उतार कर नीचे डाल दिया.

मेरे दोनो हाथों को अपनी नंगी छाती पर ले जा कर वो बोली, “थोड़ा कस कर करो ना ”
मैं भी काफ़ी एग्ज़ाइट हो गया और जोश मे आकर उनकी रसीली चूंची से जम कर खेलने लगा. क्या बड़ी बड़ी चूंचियाँ थी. ब्राउन कलर की चुचियाँ और काले काले निपल. पहली बार मैं किसी औरत की चूंची को छु रहा था. ललिता को भी मुझसे अपने चूंची की मालिश करवाने मे मज़ा अरहा था. मेरा लंड अब खड़ा होने लगा था और अंडरवेर से बाहर निकलने के लिए ज़ोर लगा रहा था. मेरा 7″ का लंड पूरे जोश मे आ गया था. ललिता की चूंची मसल्ते मसल्ते हुए मैं उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जाँघो मे घूमने लगा था.
अचानक वो बोली, “राज ये मेरी टाँगो मे क्या कुछ हिल रहा है?” मैने हिम्मत करके जबाब दिया, “ये मेरा पेनिस है. तुमने अपने उनका तो देखा होगा ना?” मैं हाथ लगा कर देखूं? उन्होने पूछा और मेरे जबाब देने से पहले अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसको सहलाने लगी. अपनी मुट्ठी मेरे लंड पर कस के बंद कर ली और बोली,
“बाप रे, बहुत कड़क है.” वो मेरी तरफ घूमी और अपना हाथ मेरे अंडरवेर मे घुसा कर मेरे फड़-फडाते हुए लंड को एलास्टिक के उपर निकाल लिया. लंड को कस कर पकड़ते हुए वो अपना हाथ लंड की जड़ तक ले गयी जिस से सुपाडा बाहर आ गया. सुपाडे की साइज़ और आकर देख कर वो बहुत हैरान हो गयी. “राज कहाँ छुपा रखा था इतने दिन” उन्होने पूछा.

मैने कहा, “यहीं पर तो था आपके सामने लेकिन आपने कभी ध्यान ही नही दिया.

ललिता बोली, “मुझे क्या पता था कि तुम्हारा लंड इतना बड़ा होगा, छोटे हो तो छोटा ही रहेगा, मैं तो सोच भी नही सकती थी.”
मुझे उनकी बिंदास बोली पर आश्चर्य हुआ जब उन्होने “लंड” कहा और साथ ही मे बड़ा मज़ा आया. वो मेरे लंड को अपने हाथ मे लेकर खीच रही थी और कस कर दबा रही थी. फिर ललिता ने अपना पेटिकोट अपनी कमर के उपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जाँघो के बीच ले कर रगड़ने लगी. वो मेरी तरफ करवट ले कर लेट गयी ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके. उनकी चूंची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हे कस कस कर दबा रहा था.

अचानक उन्होने अपनी एक चूंची मेरे मुँह मे देते हुए कहा, “चूसो इनको मुँह मे लेकर.”
मैने इनकी लेफ्ट चूंची अपने मुँह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. थोरे देर के लिए मैने उनकी चूंची को मुँह से निकाला और बोला, “मैं हमेशा तुम्हारे ब्लाउज मे कसी चूंची को देखता था और हैरान होता था. इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे मुँह मे लेकर चुसू और इनका रूस पी लूँ. पर डरता था पता नही तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ ना हो जाओ. तुम नही जानती ललिता कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है?”

अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ जैसा चाहे वैसा ही करो ललिता ने कहा.

फिर क्या था, ललिता की हरी झंडी पाकर मैं टूट पड़ा ललिता की चूंची पर. मेरी जीब उनके काले निपल को महसूस कर रही थी. मैने अपनीजीब ललिता के उठे हुए काले निपल पर घुमाई. मैं दोनो अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हे चूस रहा था. मैं ऐसे कस कर चूंचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रूस निचोड़ लूँगा. ललिता भी पूरा साथ दे रही थी. उनके मुहह से “ओह! ओह! आह! स, स! की आवाज़ निकल रही थी. मेरा पूरी तरफ से साथ देते हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी. उन्होने अपनी लेफ्ट टाँग को मेरे उपर उपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को को अपनी जाँघो के बीच रख लिया. मुझे उनकी जाँघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ. वो उनकी चूत थी. ललिता ने पैंटी नही पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाडा उनकी झान्टो मे घूम रहा था. मेरा सब्र का बाँध टूट रहा था. मैं ललिता से बोला, “ललिता मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे मे नही हूँ, प्लीज़ मुझे बताओ मैं क्या करूँ?”
ललिता बोली, “तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है आज तक?”
मैने बोला, “नही.”

कितने दुख की बात है. कोई भी लड़की इसे देख कर कैसे मना कर सकती है. शादी तक ऐसे ही रहने का इरादा है क्या?

मैं क्या बोलता. मेरे मुँह मे कोई शब्द नही था. मैं चुपचाप उनके चेहरे को देखते हुए चूंची मसलता रहा. उन्होने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, “अपनी ललिता को चोदोगे?’

“हाँ क्यू नही” मैं बड़ी मुश्किल से कह पाया. मेरा गला सुख रहा था.

वो बड़े मजाकिया अंदाज़ मे मुस्कुरा दी और मेरे लंड को आज़ाद करते हुए बोली, “ठीक है, लगता है अपने अनाड़ी राज को मुझे ही सब कुछ सिखाना पड़ेगा. पर गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना. चलो अपनी शॉर्ट्स उतार कर पूरे नंगे हो जाओ.”

मैं बेड पर से उतर गया और अपना अंडरवेर उतार दिया. मैं अपने तने हुए लंड को लेकर नंगा होकर ललिता के सामने खड़ा हो गया.. ललिता अपने रसीले होंठों को अपने दाँतों मे दबा कर देखती रही और अपने पेटीकोट का नाडा खींच कर ढीला कर दिया.
“तुम भी इसको उतार कर नंगी हो जाओ” कहते हुए मैने उनके पेटिकोट को खींचा. ललिता ने अपने चूतड़ को उपर कर दिया जिससे कि पेटिकोट उनकी टाँगो से उतर कर अलग हो गया. ललिता अब पूरी तरह नंगी हो कर मेरे सामने खड़ी थी. ललिता ने अपनी टाँगो को फैला दिया और मुझे रेशमी झान्टो के जंगल के बीच छुपी हुए उनकी रसीली गुलाबी चूत का नज़ारा देखने को मिला. नाइट लॅंप की हल्की रोशनी मे चमकते हुए नंगे जिस्म को देखकर मैं उत्तेजित हो गया और मेरा लंड मारे खुशी के झूमने लगा. ललिता ने अब मुझसे अपने उपर चढ़ने को कहा. मैं तुरंत उनके उपर लेट गया और उनकी चूंची को दबाते हुए उनके रसीले होन्ट चूसने लगा. ललिता ने भी मुझे कस कर अपने आलिंगन मे कस कर जाकड़ लिया और चुम्मो का जवाब देते हुए मेरे मुँह मे अपनी जीब को डाल दिया. है क्या स्वादिष्ट और रसीली जीब थी. मैं भी उनकी जीव को ज़ोर शोर से चूसने लगा. हमारा चुम्मा पहले प्यार के साथ हल्के मे था और फिर पूरे जोश के साथ.

कुछ देर तक तो हम ऐसे ही चिपके रहे, फिर मैं अपने लिप्स ललिता के नाज़ुक गालों पर रगड़ रगड़ कर चूमने लगा. फिर ललिता ने मेरी पीठ पर से हाथ उपर ला कर मेरा सर पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ धकेला. मैं अपने होंठ उनके होंटो से उनकी चिन पर लाया और कंधो को चूमता हुआ चूंची पर पहुँचा. मैं एक बार फिर उनकी चूंची को मसलता हुआ और खेलता हुआ काटने और चूसने लगा. उन्होने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और हमारी टाँगे एक-दूसरे से दूर हो गयी. अपने दाएँ हाथ से वो मेरा लंड पकड़ कर उसे मुट्ठी मे बंद कर सहलाने लगी और अपने बाएँ हाथ से मेरा दाहिना हाथ पकड़ कर अपनी टाँगो के बीच ले गयी. जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँचा उन्होने अपनी चूत के दाने को उपर से रगड़ दिया. समझदार को इशारा काफ़ी था. मैं उनकी चूंची को चूस्ता हुआ उनकी चूत को रगड़ने लगा.

 

“राज अपनी उंगली अंदर डालो ना?” कहती हुए ललिता ने मेरी उंगली को अपनी चूत के मुँह पर दबा दिया.
मैने अपनी उंगली उनकी चूत की दरार मे घुसा दी और वो पूरी तरह अंदर चली गयी. जैसे जैसे मैने उनकी चूत के अंदर मुआयना करता मेरा मज़ा बढ़ता गया. जैसे ही मेरी उंगली उनकी चूत के दाने से टकराई तो उन्होने ज़ोर से सिसकारी ले कर अपनी जाँघो को कस कर बंद कर लिया और चूत उठा उठा कर मेरे हाथ को चोदने लगी. उनकी चूत से पानी बह रहा था. थोड़ी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैने अपनी उंगली को उनकी चूत से बाहर निकाल लिया और सीधा हो कर उनके उपर लेट गया. ललिता ने अपनी टाँगे फैला दी और मेरे फडफडाते हुए लंड को पकड़ कर सुपाडा चूत के मुहाने पर रख लिया. उनकी झान्टो का स्पर्श मुझे पागल बना रहा था,

फिर ललिता ने मुझे बोला, “अब अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दो, प्यार से घुसाना नहितो मुझे दर्द होगा, अहह!”

इट वाज़ माइ फर्स्ट टाइम सो शुरू शुरू मे मुझे अपना लंड उनकी टाइट चूत मे घुसाने मे काफ़ी परेशानी हुए. मैने जब ज़ोर लगा कर लंड अंदर डालना चाहा तो उन्हे दर्द भी हुआ. लेकिन पहले से उंगली से चुदवा कर उनकी चूत काफ़ी गीली हो गयी थी. ललिता भी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा एक ही धक्के मे सुपाडा अंदर चला गया. इससे पहले कि ललिता संभले ये आसान बदले, मैने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत मे दाखिल हो गया.

ललिता चिल्लाई, “उईईईईईईईईईईईईईई माआआ उहुहुहह ओह राज, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नही, हाई! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड. मार ही डाला मुझे तुमने जानू ” ललिता को काफ़ी दर्द हो रहा लगता था. पहली बार जो इतना मोटा और लंबा लंड उनकी बुर मे घुसा था. मैं अपना लंड उनकी चूत मे घुसा कर चुप चाप पड़ा था. ललिता की चूत फडक रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लंड को मसल रही थी. उनकी उठी उठी चूंचियाँ काफ़ी तेज़ी से उपर नीचे हो रहे थी. मैने हाथ बढ़ा कर दोनो चूंची को पकड़ लिया और मुँह मे लेकर चूसने लगा.

ललिता को कुछ राहत मिली और उन्होने कमर हिलानी शुरू कर दी.
ललिता मुझसे बोली, “राज शुरू करो, करो मुझे. लेलो मज़ा जवानी का मेरे स्वीट जानू,” और अपनी गान्ड हिलाने लगी. मैं तो था अनाड़ी . समझ नही पाया कि कैसे शुरू करूँ. पहले अपनी कमर उपर कर ही रहा था तो लंड चूत से बाहर आ गया. फिर जब नीचे किया तो ठीक निशाने पर नही बैठा और ललिता की चूत को रगड़ता हुआ नीचे फिसल कर गान्ड मे जाकर फँस गया. मैने दो तीन धक्के लगाए पर लंड चूत मे वापस जाने बदले फिसल कर गान्ड मे चला जाता.

ललिता से रहा नही गया और तिलमिला कर कर ताना देती हुई बोले, “अनाड़ी लंड चूत का नाश , अरे मेरे भोले राज ज़रा ठीक से निशाना लगा करके डालो नही तो चूत के उपर लंड रगड़ रगड़ कर झड जाओगे.”

मैने कहा, “ललिता अपने इस अनाड़ी आशिक़ को कुछ सिख़ाओ, जिंदगी भर तुम्हे गुरु मानूँगा और लंड की दक्षिणा दूँगा.”

ललिता लूंबी सांस लेती हुए बोली, “हम राज, मुझे ही कुछ करना होगा नही तो शादी के बाद तुम्हे कुछ नही आएगा .” मेरा हाथ अपनी चूंची पर से हटाया और मेरे लंड पर रखती हुई बोली, “इसको पकड़ कर मेरी चूत के मुँह पर रखो और लगाओ धक्का ज़ोर से.”

मैने वैसे ही किया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया.

फिर ललिता बोली, “अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन पूरा नही. सुपाड़ा अंदर ही रहने देना और फिर वापस पूरा लंड अंदर डाल देना, बस इसी तरह से करते रहो.”

मैने वैसे ही करना शुरू किया और मेरा लंड धीरे धीरे उनकी चूत मे अंदर-बाहर होने लगा. फिर ललिता ने स्पीड बढ़ा देने को कहा. मैने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा. ललिता को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी . लेकिन ज़्यादा स्पीड होने से बार बार मेरा लंड बाहर निकल जाता था. इससे चुदाई का सिलसिला टूट जाता.

आख़िर ललिता से रहा नही गया और करवट ले कर मुझे अपने उपर से उतार दिया और मुझको लेट ने को कहा और मेरे उपर चढ़ गयी. अपनी जाँघो को फैला कर बगल कर के अपने गद्देदार चूतड़ रखकर बैठ गयी. उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थे और बोली, “मैं दिखाती हूँ कि कैसे चोदते है,” और मेरे उपर लेट कर धक्का लगाया.
मेरा लंड घप से चूत के अंदर दाखिल हो गया. ललिता ने अपनी रसीली चूंची मेरी छाती पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिए और मेरे मुँह मे जीब डाल दी. फिर ललिता ने मज़े से कमर हिला हिला कर शॉट लगाना शुरू किया. बड़े कस कस कर शॉट लगा रही थी मेरी प्यारी ललिता. चूत मेरे लंड को अपने मे समाए हुए तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुँच गया हूँ. अब पोज़िशन उल्टी हो गयी थी. ललिता मानो मर्द थी जो कि अपनी माशुका को कस कस कर चोद रही थी. जैसे जैसे ललिता की मस्ती बढ़ रही थी उनके शॉट भी तेज़ होते जा रहे थे. अब ललिता मेरे उपर मेरे कंधो को पकड़ कर घुटने के बल बैठ गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिला कर लंड को तेज़ी से अंदर-बाहर लेने लगी. उनका सारा बदन हिल रहा था और साँसे तेज़ तेज़ चल रही थी. ललिता की चूंचियाँ तेज़ी से उपर नीचे हो रही थी. मुझसे रहा नही गया और हाथ बढ़ा कर दोनो चूंचियों को पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा. ललिता एक सधे हुए खिलाड़ी की तरह कमान अपने हाथों मे लिए हुए थी. और कस कस कर शॉट लगा रही थी. जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उनकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. कमरे मे फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. जब उनकी साँस फूल गयी तो खुद नीचे आकर मुझे अपने उपर खींच लिया और टाँगो को फैला कर उपर उठा लिया और बोली, “मैं थक गयी मेरे राज , अब तुम मोर्चा सम्भालो.”

मैं झट उनकी जाँघो के बीच बैठ गया और निशाना लगा कर झटके से लंड अंदर डाल दिया और उनके उपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा. ललिता ने अपनी टाँग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जाकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई मे साथ देने लगी. मैं भी अब उतना अनाड़ी नही रहा और उनकी चूंची को मसल्ते हुए धका धक शॉट लगा रहा था. कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से भरा पड़ा था. ललिता अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुद रही थी और बोले जा रही थी, “आह आअहह उनह ऊओह ऊऊहह हाआआं हााआ मीईरए राज, माआआअर गाययययययए रीईए, कक्चूऊओद रे चूऊओद. उईईईईईई मीईईरीईई माआअ, फ़ाआआअत गाआआईई रीईई आआआज तो मेरी चूत. मीईएरा तो दुउऊऊँ निकककककल तुउुउउने टूऊ आाज. बड़ा जााअलीएम हााऐरे तुउउउंहाआआरा लंड्ड्ड, एकदुउऊऊँ माहीईं मस्स्स्स्स्सला पीईएसस दीययययया रीईई.”

मैं भी बोल रहा था, “लीईए मेरिइई सोनीीईईईईईईईईईईई, लीई लीईए मेरा लंड अपणीईीई ओखलीईए मीईए. बड़ााा तडपयययययया है तुनीई मुझीई. लीईए लीई, लीई मेरिइई विमालिइीइ यह लंड आब्ब्ब्बब तेराा हीईिइ है. अहह! उहह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखाय्ाआअ तुनीईए. मैं तो तेरााा गुलाम हूऊऊ गय्ाआ.”

ललिता गान्ड उछाल उछाल कर मेरा लंड अपनी चूत मे ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूंचियों को मसल मसल कर अपनी ललिता को चोदे जा रहा था. ललिता मुझको ललकार कर कहती, लगाओ शॉट मेरे राजा”,

और मैं जवाब देता, “यह ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत मे”.

“ज़रा और ज़ोर से सरकाओ अपना लंड मेरी छूट मे मेरे राजा”,

“यह ले मेरी रानी, यह लंड तो तेरे लिए ही है.”

“देखो राज्ज्ज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दीवानी हो गयी, और ज़ोर से और ज़ोर से आआईईईई मेरे राज्ज्जज्ज्ज्जा. मैं गइईईईई रीई,” कहते हुए मेरी ललिता ने मुझको कस कर अपनी बाहों मे जाकड़ लिया और उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया.

अब मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, “मैं भी आय्ाआआ मेरी जाआअँ,” और मैने भी अपने लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हान्फते हुए उनकी चूंची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया. यह मेरी पहली चुदाई थी. इसीलिए मुझे काफ़ी थकान महसूस हो रही थी. मैं ललिता के सीने पर सर रख कर सो गया. ललिता भी एक हाथ से मेरे सिर को धीरे धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थी. कुछ देर बाद होश आया तो मैने ललिता के रसीले होंठो के चुंबन लेकर उन्हे जगाया.

शादी शुदा मोटी आंटी की गान्ड मारी.
ललिता ने करवट लेकर मुझे अपने उपर से हटाया और मुझे अपनी बाहों मे कस कर कान मे फूस-फूसा कर बोली, “राज तुमने तो कमाल कर दिया, क्या गजब की ताक़त है तुम्हारे लंड मे.”

मैने बोला , “कमाल तो आपने कर दिया है ललिता, आजतक तो मुझे मालूम ही नही था कि अपने लंड का कैसे इस्तीमल करना है. यह तो आपकी महरबानी है जो कि आज मेरे लंड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला.” अबतक मेरा लंड उनकी चूत के बाहर झान्टो के जंगल मे राउंड मार रहा था. ललिता ने अपनी मुलायम हथेलिओं मे मेरा लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया. उनकी उंगली मेरे आंडो से खेल रही थी.

उनकी नाज़ुक उंगलिओ का स्पर्श पाकर मेरा लंड भी जाग गया और एक अंगड़ाई लेकर ललिता की चूत पर ठोकर मारने लगा. ललिता ने कस कर मेरे लंड को क़ैद कर लिया और बोली, “बहुत जान है तुम्हारे लंड मे, देखो फिर से फड़-फडाने लगा, अब मैं इसको छोड़ूँगी नही.”

हम दोनो अगल बगल लेटे हुए थे. ललिता ने मुझको चित लिटा दिया, और मेरी टाँग पर अपनी टाँग चढ़ा कर लंड को हाथ से मूठ मारने लगी. साथ ही साथ ललिता अपनी कमर हिलाते हुए अपनी झांट और चूत मेरी जाँघ पर रगड़ने लगी. उनकी चूत पिछली चुदाई से अभीतक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था. अब मुझसे रहा नही गया और करवट लेकर ललिता की तरफ मुँह करके लेट गया. उनकी चूंची को मुँह मे दबा कर चूस्ते हुए अपनी उंगली चूत मे घुसा कर सहलाने लगा. ललिता एक सिसकारी लेकर मुझसे कस कर चिपट गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए मेरी उंगली से चुदवाने लगी. अपने हाथ से मेरे लंड को कस कर ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आकर लोहे की तरह सख़्त हो गया था. अब ललिता की बेताबी हद से ज़्यादा बढ़ गयी थी और खुद चित हो कर मुझे अपने उपर खींच लिया. मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोले, “आओ मेरे राजा, सेकेंड राउंड हो जाए.”

मैने झट से कमर उठा कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया. ललिता चिल्ला उठी और बोले, “जीओ मेरे राजा, क्या शॉट मारा है . अब मेरे सिखाए हुए तरीके से शॉट पर शॉट मारो और फाड़ दो मेरी चूत को.” ललिता का आदेश पाकर मैं दुगुने जोश मे आ गया और उनकी चूंची को पकड़ कर ललिता की चूत मे लंड डालने लगा. उंगली की चुदाई से ललिता की चूत गीली हो गयी थी और मेरा लंड सतसट अंदर-बाहर हो रहा था. ललिता नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब पूरे जोश के साथ दे रही थी. ललिता ने दोनो हाथो से मेरी कमर को पकड़ रखा था और ज़ोर ज़ोर से अपने चूत मे लंड घुस्वा रही थी. वो मुझे इतना उठाती थी कि बस लंड का सुपाड़ा अंदर रहता और फिर ज़ोर नीचे खींचती हुई घप से लंड चूत मे घुस्वा लेती थीं. पूरे कमरे मे हमारी सांस और घपा-घाप, फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी.

जब हम दोनो की ताल से ताल मिल गयी तब ललिता ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरे चूतड़ को पकड़ लिया और कस कस कर दबोचते हुए मज़ा लेने लगी. कुछ देर बाद ललिता ने कहा, “आओ एक नया आसन सिखाती हूँ,” और मुझे अपने उपर से हटा कर किनारे कर दिया. मेरा लंड ‘पक’ की आवाज़ साथ बाहर निकल आया. मैं चित लेता हुआ था और मेरा लंड पूरे जोश के साथ सीधा खड़ा था. ललिता उठ कर घुटनो और हथेलिओं पर मेरे बगल मे बैठ गयी. मैं लंड को हाथ मे पकड़ कर उनकी हरकत देखता रहा. ललिता ने मेरे लंड पर से हाथ हटा कर मुझे खीच कर उठाते हुए कहा, “ऐसे पड़े पड़े क्या देख रहे हो, चलो अब उठ कर पीछे से मेरी चूत मे अपनी लंड को घुसाओ.”

मैं भी उठ कर ललिता के पीछे आकर घुटने के बल बैठ गया और लंड को हाथ से पकड़ कर ललिता की चूत पर रगड़ने लगा. क्या मस्त गोल गोल गद्दे दार गान्ड थी. ललिता ने जाँघ को फैला कर अपने चूतड़ उपर को उठा दिए जिससे कि उनकी रसीली चूत साफ नज़र आने लगी. ललिता का इशारा समझ कर मैने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रख कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया.

ललिता ने एक सिसकारी भर कर अपनी गान्ड पीछे कर के मेरी जाँघ से चिपका दी. मैं भी ललिता की पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनो चूंचियों को पकड़ कर मसल्ने लगा. वो भी मस्ती मे धीरे धीरे चुतड़ों को आगे-पीछे करके मज़े लेने लगी. उनके मुलायम चूतड़ मेरी मस्ती को दोगुना कर रहे थे. मेरा लंड उनकी रसीली चूत मे आराम से आगे-पीछे हो रहा था.

कुछ देर तक चुदाई का मज़ा लेने के बाद ललिता बोली, “चलो राज अब आगे उठ कर शॉट लगाओ, अब रहा नही जाता.” मैं उठ कर सीधा हो गया और ललिता के चुतड़ों को दोनो हाथों से कस कर पकड़ कर चूत मे हमला शुरू कर दिया. जैसा कि ललिता ने सिखाया था मैं पूरा लंड धीरे से बाहर निकाल कर ज़ोर से अंदर कर देता. शुरू मे तो मैने धीरे धीरे किया लेकिन जोश बढ़ता गया और धक्को की रफ़्तार बढ़ती गयी. धक्का लगाते समय मैं ललिता के चूतड़ को कस के अपनी ओर खीच लेता ताकि शॉट तगड़ा पड़े .

ललिता भी उसी रफ़्तार से अपने चूतड़ को आगे-पीछे कर रही थी. हम दोनो की साँसे तेज हो गयी थी. ललिता की मस्ती पूरे परवान पर थी. नंगे जिस्म जब आपस मे टकराते तो घप-घप की आवाज़ आती थी . काफ़ी देर तक मैं उनकी कमर पकड़ कर धक्का लगाता रहा. जब हालत बेकाबू होने लगी तब ललिता को फिर से चित लेता कर उन पर सवार हो गया और चुदाई का दौर चालू रखा. हम दोनो भी पसीने से लथपथ हो गये थे पर कोइ भी रुकने का नाम नही ले रहा था. तभी ललिता ने मुझे कस कर जाकड़ लिया और अपनी टाँगे मेरे चुतड़ों पर रख दी और कस कर ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए चिपक कर झड गयी. उनके झड़ने के बाद मैं भी ललिता की चूंचियों को मसल्ते हुए झड गया और हान्फते हुए उनके उपर लेट गया. हम दोनो की साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी और हम दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे से चिपक कर पड़े रहे.

कुछ देर बाद ललिता बोली, “क्यो राज कैसी लगी मेरी चूत ?”

मैं बोला, ” है ललिता जी करता है कि जिंदगी भर इसी तरह से तुम्हारी चूत मे लंड डाले पड़ा रहूं. ”

“जब तक मेर हज़्बेंड वापस नही आते, यह चूत तुम्हारी है, जैसे मर्ज़ी हो मज़े लो, अब थोड़े देर आराम करते है.”

“नही ललिता, कम से कम एक बार और हो जाए. देखो मेरा लंड अभी भी बेकरार है.”

ललिता ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा, “यह तो ऐसे रहेगा ही, चूत की खुसबु जो मिल गयी है. पर देखो रात के तीन बज गये है, अगर सुबह टाइम से नही उठें तो पड़ोसियों को शक हो जाएगा. अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के कितने दिन हमारे है. जी भर कर मस्ती कर लेना. मेरा कहा मनोगे तो रोज नया स्वाद चखाउन्गी.”

ललिता का कहना मान कर मैने भी ज़िद छोड़ दी और ललिता करवट ले कर लेट गयी और मुझे अपने सटा लिया. मैने भी उनकी गान्ड की दरार मे लंड फँसा कर चूंचियों को दोनो हाथों मे पकड़ लिया और ललिता के कंधे को चूमता हुआ लेट गया. नींद कब आई इसका पता ही नही चला.

इसके बाद बहुत बार हमने इस तरह से सेक्स किया… लेकिन कभी कभी मुझे डर भी लगता था और गिल्टी फील होता था कि उसके बच्चे मुझे मामा कहते है और मैं ऐसा ये सब कर रहा हूँ…. फिर बाद मे धीरे धीरे मैने उनको मिलना बंद कर दिया. बात चीत करना भी बंद कर दिया.
अभी तो हम खाली एक दूसरे को कभी कभी देखते है और बात नही होती. लेकिन स्माइल अभी भी मुझे मिलती है कभी कभी.

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