पापा और बुआ जी की चुदाई पकड़ी गयी

पिछला भाग पढ़े:- पापा की ख़ुशी के लिए उनसे चुड़ गयी-२

हेलो दोस्तों, कैसे हो आप सब? कैसी लग रही है मेरी ये स्टोरी? मजा तो आ रहा है न? तो चलते है इस काल्पनिक दुनिया में.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि मैं १ मंथ की लीव लेके अपने मायके आयी थी, क्यूंकि माँ की तबियत खराब थी. मैं जब घर आई तो बुआ जी पहले से वहीँ थी. मुझे डैड और बुआ जी का बेहेवियर कुछ अलग रहा था, जैसे वो कुछ छुपा रहे हो मुझसे. रात को मेरी अचानक आँख खुली तो देखा बुआ जी बेड पे नहीं थी और न ही पापा अपने रूम में थे. मैं उनको ढूंढते हुए अपने टेरेस पे गयी. अब आगे-

मैं जब टेरेस पे गयी तो देखा की वहां भी कोई नहीं था. पर फिर मुझे स्टोर रूम में से कोई आवाज़ आयी. मैंने सोचा की कहीं बुआ जी या पापा तो नहीं थे अन्दर. पर फिर सोचा कोई चोर भी हो सकता था. फिर मैं दबे पाव स्टोर रूम के पास गयी और अंदर देखने का कोई तरीका ढूंढ़ने लगी. मुझे डर भी लग रहा था, की कहीं ये चोर हुआ और उसके पास कोई हथियार हुआ तो क्या?

पर फिर मैंने सोचा पहले देखु तो था कोण अंदर. स्टोर रूम का डोर डबल डोर वाला था. मैंने देखा नीचे की तरफ दोनों दूर के बीच थोड़ी गैप थी. तो मैं नीचे बैठ गयी और उस गैप से अंदर देखा.

जो मैंने देखा मुझे ४४० वोल्ट का झटका लगा. वहां बुआ जी झुकी हुई थी पुराने सामान के सहारे. उनकी निघ्त्य उनकी कमर तक ऊपर थी और पंतय घुटनो तक. इससे उनकी गांड दिख रही थी और उनके बूब्स भी निघ्त्य के बाहर थे. ऐसा लग रहा था जैसे पेड़ से तरबूज़ लटक रहा हो.

बुआ जी का फिगर ४०-३४-४० था. इससे समझ सकते हो उनकी गांड और बूब्स कैसे लग रहे होंगे. उनके पीछे पापा खड़े थे. उनका पजामा और उनकी अंडरवियर दोनों घुटने के नीचे थे और ऊपर कुछ नहीं मतलब उन्होंने टी-शर्ट नहीं पहनी थी. वो पीछे से बुआ जी को छोड़ रहे थे और बुआ जी हलकी-हलकी आवाज़ कर रही थी आठ ओह्ह करके.

अब वो उनकी गांड मार रहे थे या चुत वो समझ नहीं आ रहा था. क्यूंकि उस एंगल से वो क्लियर नहीं दिख रहा था. सिर्फ पापा का लंड अंदर-बाहर हो रहा था, उतना ही दिख रहा था. फिर पापा ने अपना पूरा लंड बाहर निकाला, तब मैंने देखा कि पापा का लुंड करिबन ७.५-८ इंच का तो होगा और बहुत मोटा भी. उन्होंने थोड़ा लुंड मसाला अपने हाथ से और फिर दाल दिया अन्दर.

ये स्केन देख के कुछ मिनट्स के लिए तो मैं फ्रीज ही हो गयी थी, ख़ास कर के पापा का लुंड देख के. फिर मैंने खुद को कंट्रोल किया एंड मुझे इतना गुस्सा आया क्यूंकि मेरी माँ इतनी बीमार थी, और पापा यहाँ ये सब कर रहे थे, वो भी अपनी ही बड़ी बहिन के साथ.

बुआ जी भी उनका पूरा साथ देके उनसे मज़े से छुड़वा रही थी. फिर मुझसे रहा नहीं गया और मैं खड़ी हो गयी. मैं ज़ोर-ज़ोर से स्टोर रूम रूम का डोर पीटने लगी और बोली-

में: जल्दी से दूर खोलो, मुझे पता है आप दोनों अंदर हो.

मैं दूर पीते ही जा रही थी. करिबन २-३ मिनट बाद पापा ने दूर खोला. पापा अभी भी टॉपलेस थे, पर पाजामा ऊपर कर लिया था और बुआ जी ने भी अपनी निघ्त्य ठीक कर ली थी. उन्हें देखते ही मैं उनपे बरस पड़ी.

में: आपको शर्म नहीं आ रही ये सब करते हुए? वहां मम्मी बीमार पड़ी है और आप यहाँ ये सब की!

पापा: बीटा वैसा नहीं है जैसा तू सोच रही है.

में: अभी भी झूठ ही बोलना है आपको? सब कुछ देख लिया है मैंने. मम्मी आपसे इतना प्यार करती है और आप मम्मी को ही धोखा दे रहे हो. और बुआ जी आपको क्या इतनी गरमी चढ़ी कि अपने ही छोटे भाई के साथ करने लगी?

बुआ जी: तू पहले सुन तो ले बेटा.

में: अब सुनने के लिए बचा ही क्या है? आप दोनों से मुझे ये उम्मीद तो नहीं थी. वहां मम्मी बीमार पड़ी है और यहाँ आपकी रंगरलिया चल रही है. पापा आपने मम्मी के साथ ये अच्छा नहीं किया.

और मैंने उन दोनों को बहुत कुछ सुनाया. वो कुछ बोल रहे थे, पर मैं उनका कुछ सुन ही नहीं रही थी. दोनों को बहुत खरी खोटी सुना कि मैं वहां से नीचे अपने रूम में आके लेट गयी. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था, सोचा अभी मम्मी को जाके सब बता देती हूँ. पर फिर सोचा अभी मम्मी दवा लेके सो रही होंगी, अभी उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नहीं होगा, उन्हें सुबह सब बता दूँगी.

फिर सोचते सोचते वही स्केन वापस मेरी आँखों के सामने आ रहा था. मुझे रोज़ अपने हस्बैंड के साथ सेक्स करने की आदत है, और वो स्केन देख के मैं गरम तो हो ही गयी थी. अब गुस्सा साइड हो गया था और सेक्स की फीलिंग्स आने लग गयी थी.

मैंने अपने हस्बैंड को इमेजिन करना स्टार्ट किया की अगर वो मेरे पास होते अभी तो वो क्या करते. मैं सोच रही थी हस्बैंड का लुंड मेरे सामने है और मैं उसे सहला रही हो. पर पता नहीं क्यों मुझे हस्बैंड की जगह पापै का लुंड दिख रहा था. यही सब सोचते-सोचते मेरा हाथ मेरी चूत पे चला गया और में निघ्त्य के ऊपर से ही चुत सहलाने लग गयी.

कभी मैं अपने हस्बैंड दीपक का लुंड इमेजिन कर रही तो कभी पापा का. कब मेरी निघ्त्य ऊपर उठ गयी और मेरा हाथ मेरी पंतय के अंदर चला गया, पता ही नहीं चला. मैं यही सब इमेजिन करते हुए अपनी चूत में फिंगरिंग करने लगी. कुछ ही देर में चुत ने पानी छोड़ दिया. फिर कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नहीं चला.

सुबह मेरी आँख खुली तब भी बुआ जी रूम में नहीं थी. रात को वो लोग कब नीचे आये, बुआ जी रूम में आयी थी सोने या नहीं वो भी पता नहीं. मुझे फिर से वही सब याद आने लगा और उन दोनों पे गुस्सा आने लगा. दूसरों से सेक्स करना ठीक है. मैं भी हस्बैंड के अलावा सेक्स करती हु, पर हस्बैंड को बता के.

मुझे इस बात का गुस्सा नहीं आ रहा था की पापा और बुआ जी सेक्स कर रहे थे. मुझे तो इस बात का गुस्सा था की पापा मम्मी को धोखा दे रहे थे, वो भी तब जब वो बीमार थी. फिर मैंने दीपक (मेरे हस्बैंड) को कॉल किया और उन्हें सब बता दिया जो भी रात को हुआ. तो वो बोले-

दीपक: तुम्हे नहीं लगते बिना जाने तुमने उनको बहुत कुछ सुना दिया?

में: बिना जाने कहाँ, अपनी आँखों से सब देखा मैंने.

दीपक: अरे हां, बूत वो क्यों कर रहे थे ये तो पता करना चाहिए की नहीं?

में: दोनों को गर्मी चढ़ी होगी और क्या.

दीपक: कैसी बात कर रही हो. वो दोनों तुमसे बड़े है, और हर बात का एक रीज़न होता ही है.

में: अब इसमें क्या रीज़न होगा?

दीपक: वही तो पता करना है. देखो एक तो वो बड़े है तुमसे, तो तुमको ऐसा उल्टा-सीधा नहीं बोलना चाहिए था. और दूसरी बात, तुमने देख लिया तो ठीक था न. बूत तभी उनके सामने जाके भी गलती कर दी. चुप-चाप चली आती. आज बात करती और पूछती क्या हो रहा था और क्यों हो रहा था. ज़रा सोचो उनको कैसा फील हुआ होगा जब उस सिचुएशन में तुम उनके सामने चली गयी. एक तुम्हारे पापा है और दूसरी तुम्हारी बुआ. सोचो कितना ऐम्बर्रास्मेंट हुआ होगा उनको.

में: बात तो तुम्हारी सही है. पर क्या करूँ, उस टाइम कुछ समझ नहीं आया. मुझे गुस्सा आ गया और बोल दिया कुछ भी उनको.

दीपक: यार तुम इतनी ओपन माइंडेड हो. फिर भी ऐसा रिएक्शन? अब जाओ उनको सॉरी बोलो और रीज़न जानने की कोशिश करो.

में: ठीक है जाती हु.

फिर मैं रूम से बाहर आई तो पापा अकेले बैठे थे सोफे पे. मैं मम्मी के रूम में गयी तो मम्मी सोई थी अभी तक. मुझे बुआ जी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. फिर मैंने पापा से पुछा-

में: बुआ जी कहाँ है?

पापा: वो तो आज सुबह जल्दी ही चली गयी अपने घर. उनके घर में कुछ इमरजेंसी आ गयी थी.

मुझे लगा रात को मैंने इतना सुनाया और जो ऐम्बर्रास्मेंट हुई होगी, शायद उसी वजह से चली गयी. मैंने सोचा पापै से तो बात कर लू, और उनके पास जाके बैठ गयी. मुझे अब गुस्सा नहीं आ रहा था. दीपक की बातों ने मुझे शांत कर दिया था. पर मुझे रीज़न तो जानना था कि पापा ने ऐसा किया क्यों. फिर मैंने पापा से बात की-

में: सॉरी पापा कल रात मैं कुछ ज़्यादा ही बोल गयी.

पापा: कोई बात नहीं बेटा, वो सिचुएशन ही ऐसी हो गयी थी.

में: फिर भी पापा, मुझे आपसे और बुआ जी से वैसे बात नहीं करनी चाहिए थी.

पापा: आईटी’स ओके बीटा, तेरी इसमें कोई गलती नहीं है. कोई भी होता तो वो ऐसे ही रियेक्ट करता.

में: पर पापा आप जो कर रहे थे, वो भी सही नहीं था न.

पापा: वो सही था कि नहीं वो पता नहीं. पर मैं तेरी मम्मी कोई धोखा नहीं दे रहा हु.

में: आप बुआ जी के साथ उस हालत में थे, और बोल रहे हो की मम्मी को धोखा नहीं दे रहे हो.

पापा: हां, मैं सच बोल रहा हु. तेरी मम्मी को सब पता है. तेरी मम्मी ने ही दीदी को बुलाया था और उसे ये सब करने बोला था.

अब मुझे दूसरा ४४० वोल्ट का झटका लगा. पहला कल जब मैंने उन दोनों को चुदाई करते हुए देखा तब लगा, और अब दूसरा जब पापा बोल रहे है की मम्मी को पता था ये सब.

में: पापा आप खुद को बचने के लिए इतना बड़ा झूठ क्यों बोल रहे हो? आपको क्या लगता है मैं मम्मी से पूछूंगी नहीं?

पापा: मैं तो खुद चाहता हु की तू मम्मी से बात करे. तुझे सब पता चल जायेगा.

में: मैं सच में पुछु?

पापा: हां जा, मम्मी भी जाग गयी होगी. बात कर ले, तुझे पता चल जायेगा की तेरी मम्मी को कोई धोखा नहीं दे रहा हु.

अब में फुल कन्फूसिओं में थी. क्या सच में मम्मी को पता होगा ये सब? या पापा कोई चाल चल रहे थे? उनको लग रहा होगा मैं ये सब थोड़े ही पूछूँगी मम्मी को. बूत मैंने सोचा पापै इतना कॉन्फिडेंस से बोल रहे थे, तो मैं भी जाके मम्मी से कन्फर्म कर ही लेती हु. मैं मम्मी के रूम में गयी तो मम्मी उठ के बैठी थी. मैं जाके मम्मी के पास बैठ गयी और बात स्टार्ट की-

में: मम्मी, कैसी है तबियत अब?

मम्मी: तू आ गयी न, अब तबियत भी ठीक हो जाएगी.

में: आप दवा टाइम पे लगी तब तो ठीक होगी.

मम्मी: हां बेटा, अब तू है न मुझे याद दिलाने के लिए.

में: हां उसी के लिए तो आयी हू मैं.

मम्मी: दीदी नहीं दिखाई दे रही, सोयी है क्या अभी तक?

में: नहीं वो तो चली गयी वापस आज मॉर्निंग में ही.

मम्मी: अचानक कैसे चली गयी?

में: वो सब छोड़ो मम्मी, और ये बताओ आपको पता है घर में क्या चल रहा है?

मम्मी: क्या चल रहा है, कुछ हुआ क्या?

में: पहले आप प्रॉमिस करो की आप टेंशन नहीं लोगे और मेरी बात शांति से सुनोगे.

मम्मी: हां बाबा, तू बता क्या बात है?

में: कल रात मैंने पापा और बुआ जी को ऊपर स्टोर रूम में देखा.

मम्मी: कुछ काम से गए होंगे, उसमे क्या है?

में: मम्मी वो दोनों वो कर रहे थे जो नहीं करना चाहिए उन्हें.

मम्मी: क्यूँ पहेलियां बुझा रही है? जो बोलना है साफ़-साफ़ बोल.

में: तो सुनो, पापा और बुआ जी ऊपर स्टोर रूम में सेक्स कर रहे थे.

मम्मी: ाचा, तुझे पता चल गया?

में: मतलब आपको पता है?

मम्मी: हां, मैंने ही बुलाया था बुआ जी को और मेरे ही कहने पे वो कर रहे थे.

में: क्या बोल रही हो मम्मी! आपने खुद पापा को बोला की बुआ जी से करे? पर क्यों?

मम्मी: बेटा मैं तुझे सब बताती हु. जब से मेरी तबियत खराब हुई है तब से ही हमारा सेक्स भी पूरी तरह बंद है. पर उसके पहले हम रोज़ करते थे, तो इन्हें सेक्स की आदत सी हो गयी थी. तो जब हमारा सेक्स बंद हुआ तो इन्हें तकलीफ होने लगी, इन्हे वहां नीचे दर्द होने लगा. हाथ से उनका काम नहीं होता. मैंने उन्हें बोला कि कहीं बाहर जाके कर लो पर उनको बाहर नहीं करना था.

मम्मी: कुछ दिन बाद इनकी तकलीफ बढ़ गयी और इनकी तबियत भी खराब हो गयी. तब दीदी हमारे यहाँ आयी थी. तो मैंने दीदी से बात की, उन्हें तेरे पापा की तकलीफ के बारे में बताया. तब तेरे पापा के साथ करने को रेडी हुई. दीदी सिर्फ पापा की हेल्प करने के लिए ये सब फिर से कर रही है.

में: ओह्ह तो ये बात है, बुआ जी तो हेल्प कर रही थी पापा की और मैंने कल रात उन्हें बहुत कुछ सुना दिया.

मम्मी: पागल एक बार मुझसे बात तो कर लेती. दीदी इसिलए चली गयी क्या?

में: हां शायद.

में: ाचा मम्मी, अभी आपने बोलै की बुआ जी ने फिर से ये सब किया. इसका मतलब वो पहले भी कर चुकी है क्या पापा के साथ?

मम्मी: तेरे पापा ने मुझसे शादी से पहले किया था दीदी के साथ, पर उन्होंने मुझे शादी के पहले ही सब बता दिया था और न ही उसके बाद कुछ किया.

में: शादी के पहले उन दोनों ने सेक्स किया था? अब वो स्टोरी क्या है?

मम्मी: वो सब मुझे नहीं पता. मुझे सिर्फ इतना पता है उन्होंने किया था. अब वो कब स्टार्ट हुआ, कैसे हुआ, वो सब मुझे नहीं पता और ना ही मैंने कभी जानने की कोशिश की. क्यूंकि उसके बाद सब खत्म हो गया था.

में: अच्छा ठीक है, चलो अभी आप आराम करो. मैं ब्रेकफास्ट बनाती हु, आपको दवा भी लेनी है न.

मम्मी: ठीक है बेटा.

फिर मैं रूम से बाहर आ गयी और पापा के पास जाके बैठ गयी. अब मुझे उनकी पूरी स्टोरी जान्ने की क्यूरोसिटी हो गयी थी, पर पापा से पूछती कैसे?

इस पार्ट में इतना ही, आगे पढियेगा पापै ने और क्या बताया और कैसे पापा और मेरे बीच सेक्स स्टार्ट हुआ. ये पार्ट कैसा लगा मेल करके ज़रूर बताइएगा. मुझे आपकी मेल्स का इंतज़ार रहेगा. माय ईमेल: मनीषजैं३९९१@जीमेल.कॉम

अगला भाग पढ़े:- पापा की ख़ुशी के लिए उनसे चुड़ गयी-४

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