पिछला भाग पढ़े:- बंदिता मम और उनकी ख्वाहिशें-३
नेक्स्ट पार्ट ऑफ़ थे टीचर-स्टूडेंट सेक्स स्टोरी:-
उसके बाद दिन मैं जब सुबह उठा तो देखा मम नाहा कर कपडे पहन रही थी. मैं नंगा ही बेड पे सोया था. माम् ने लुंड को आहिस्ता से छू कर खड़ा कर दिया और बोली-
मम: उठ कर जल्दी फ्रेश हो कर आओ. खाना खा कर निकलेंगे, स्कूटी भी लेनी है.
मैं: लंड खड़ा करना ज़रूरी था क्या?
मम: नंगे सोये थे तो उसे भी उठा दिया.
मैं: रुको, खड़ा करके ऐसे कैसे चले जायेंगे? बिठा कर जाइये, मैं कुछ नहीं जानता.
फिर मैं बेड पे बैठा हुआ था और मैं नीचे घुटनों पर बैठ गयी. उन्होंने लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू किया. मज़ा ही आ गया.
मैं: मेरी प्यारी पत्नी, क्या चूसती है लुंड.
मम: आपके जैसा लम्बा मोटा लुंड मिलेगा तो कौन बिना चूसे रहेगी?
फिर उनके सर को पकडे ऐसे चुसवाया की रूम गावक-गव्क की आवाज़ से गूँज रहा था. उसके बाद वीर्य को उनके मुँह में डाल के पिलाया. फिर उनको छोड़ा. उसके बाद वो मुंह धो कर किचन गयी और मैं बाथरूम गया.
फिर मैं जा कर नाश्ता तैयार करने लगी. मैं कुछ देर बाद बाथरूम से फ्रेश होक आया. फिर अपने कपड़े पहन कर डाइनिंग गया. मैं ने खाना खिलाया और उनके भी खाने के बाद हम दोनों बाइक पे मैकेनिक गेराज से गाडी लेके गए मेरे रूम. फिर सामान पैक करने के बाद मालिक को बोल कर रूम खाली किया, और माम् के साथ उनके घर चल दिया.
उनके घर पहुँचने के बाद उन्होंने मुझे रूम दिखाया. मैं रहता तो उनके रूम में ही, बस फॉर्मेलिटी के लिए वो रूम मेरा था. रूम में अपना सामान रख दिया. फिर मां ने मुझे घर की एक स्पेयर कीय दी और बोला की दोपहर को भूख लगी तो आ कर खा लेना. फिर १० बजे मैं कॉलेज चला गया.
मम भी खाना बना कर स्कूल चली गयी. मैं २ बाजे ा कर लंच करके कॉलेज चला गया. फिर ३:३० बाजे ा कर माम् के रूम में सो गया. ४:३० बजे आंख खुली जब मैं घर आ कर अपने रूम में कपड़े बदल रही थी. मैंने पूछा कब आयी?
माम् ने बोला: अभी ही आ कर कपडे बदल रही थी.
मैं बाथरूम जा कर फ्रेश हो कर आयी. फिर ब्लाउज और पेटीकोट खोल दिया. उन्हें रेड ब्रा पंतय में देख लंड खड़ा हो गया. तभी मैं पैंट खोल के माम् को बुलाया, “मम देखिये, फिर खड़ा हो गया.” फिर मम ा कर बेड पे चढ़ी और मेरी टांगों के ऊपर आ कर दूध के बीच लुंड रगड़ने लगी.
मैं ब्रा के अन्दर से लुंड दाल के दूध के बीच रख कर छोड़ने लगा. दो बड़े मुलायम दूध मेरे लंड को कुचल रहे थे. फिर मैंने उनकी पीठ पे हाथ रखा और ब्रा का हुक खोल के ब्रा उतार दी. उनके निप्पल्स जैसे ही दिखे, माम् को मेरे ऊपर बिठाया और फिर उनके दूध मुंह में लेके चूसने लगा.
मम मेरे सर को पकडे हुए बोल रही थी: चूस लो बेटे
फिर कुछ देर बाद माम् के लिप्स को चूमने लगा, जैसे बहुत दिन हो गए चूमे हुए, वैसे ही उनके होंठ को चूस-चूस के चूम रहा था. फिर माम् ने दोनों दूध को लिया, और बीच में मेरे मुह को रख कर दबा रही थी. उनके बदन की खुशबु मुझे पागल कर रही थी.
मैं पंतय के अंदर हाथ डाल कर उनकी गांड दबा रहा था. फिर वो खड़ी हुई और मैं पंतय उतार दिया. फिर माम् मेरे मुंह के पास चुत ला कर मेरे सर को पकड़ी, और चूत चटवाने लगी. करीं १० मिनट तक चटवाने के बाद मैं घुटनों पर आई और मेरे लंड को पकड़ी. फिर थोड़ा ऊपर नीचे करके बोली-
मम: कितना मस्त लुंड लेके घूम रहे हो. कल अगर मुझे न देखा होता न, मैं इसका स्वाद न चख पाती.
मैं बोला: पता है मैं आपके नाम पे कितना वीर्य बाथरूम में बहा दिया
मम बोलि: मतलब पहले से ही इतने ठरकी थे.
मैं बोला: ठरक तो सारे लेडीज टीचर को देख कर मनन में आता था. साली इतने सेक्सी माल सारे थे.
फिर माम् के सर को पकड़ कर उनके मुँह में लुंड दाल के चुसवाने लगा. माम् के मुंह से बस गव्क गावक की आवाज़ें आ रही थी. फिर कुछ देर बाद माम् लंड बाहर निकाल के खान्स पड़ी और फिर बोली और नहीं चूस सकती.
मैं ठीक है बोल कर उनको लिटा दिया और उनके दूध के ऊपर बैठ के दबने लगा. फिर उनके दूध के बीच लुंड रख के छोड़ने लगा. फिर उठ कर माम् के पैर कंधे में लेके चूत में लन्ड सेट किया और एक ज़ोर का धक्का दिया. मैं थोड़ी चीख पड़ी. फिर ऐसे ही पोजीशन में कुछ देर चुड़ै के बाद मैं धीरे-धीरे करके उनकी चूत में मिशनरी पोजीशन में लन्ड डाल कर छोड़ने लगा.
मैं कह रही थी, “मत रुको, और तेज़ करो.” मैं भी जोश में चुदाई तेज़ी से कर रहा था. मां की सिसकियां रूम में गूँज रही थी. फिर माम् को डोगग्य पोज़ में किया. दोनों टांगों को अलग किया और फिर लुंड उनकी चूत में डाल कर छोड़ने लगा. बीच-बीच में उनकी गांड में एक जोर से मार देता तो वो चीख पड़ती.
वो बोलती: आज पूरी चुत में ही समां जा बेटा. तुझे और अंदर महसूस करना चाहती हु.
मैं भी ऐसा पेल रहा था जैसे उनकी चूत मेरे पूरे लुंड को अंदर तक निगल जाये. फिर और कुछ देर डोगग्य पोज़ में छोड़ने के बाद बाथरूम जा कर लुंड पे तेल लगा कर आया. उसके बाद डोगग्य पोज़ में ही उनकी गांड की छेड़ पर थोड़ा ज़ोर लगा कर डाला, तो पूरा तेल से भरा लुंड अंदर चला गया. मैं चीख पड़ी और उनकी आँखों से आंसू आ गए.
वो बोली: कितनी बार बोलू, धीरे डालने की कोशिश करो. पूरा अंदर जाने से दर्द होता है.
फिर लुंड निकाल के धीरे-धीरे करने लगा. फिर ऐसे ही शॉट्स मारते-मारते गाँड के अन्दर मैं झड़ गया और लंड बाहर निकाल के उनके मुँह में फीर डाल कर चुसवाया. उन्होंने चूस के पूरा लुंड साफ़ कर दिया.
फिर दोनों बाथरूम गए. माम् ने मुँह धोया. अपनी चूत और गांड धोये. और फिर मेरे लंड को भी नहला कर हम बाहर निकले और बेड पर जा कर लेट गए.
मां ने पुछा: एक ख्वाहिश तो पूरी हो गयी, और ख्वाहिश कब पूरी करोगे?
मैं बोला: अगली कौन सी पूरी करो.
माम् ने अपनी कौन सी ख्वाहिश मुझे बताई, ये आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. यहाँ तक की कहानी कैसी लगी, ज़रूर फीडबैक देना.