बीवी ने पकड़ा साली की चुदाई करते हुए

पिछला भाग पढ़े:- साली का फिगर देख कर जीजा का लंड खड़ा हो गया-३

साली सेक्स स्टोरी अब आगे-

कुमार: “अरे रानी, पूछो मत! मैं किचन में पानी पी ही रहा था की मुझे ऊपर से कुछ गिरने की आवाज़ आयी, और फिर हिरल की दबी हुई चीख सुनाई दी. मैं घबरा कर तुरंत ऊपर भाग.”

मैंने हिरल की तरफ इशारा किया. हिरल भी तुरंत समझ गयी कि क्या करना था. उसने एक हाथ अपने सीने पर रखा और लंबी सांस लेते हुए बोली-

हिरल (नाटक करते हुए): “हां दीदी… वो मैं ऊपर हवा खाने गयी थी क्यूंकि गर्मी लग रही थी. अचानक अंधेरे कोने से ‘खाद-खाद’ की आवाज़ आयी. मुझे लगा कोई चोर छुपा है! मैं तो डर के मारे वहीँ जम गयी थी. अच्छा हुआ जीजू टाइम पर आ गए.”

रानी के चेहरे से शक़ गायब हो गया और चिंता ा गयी. वो जल्दी से हिरल के पास आयी और उसके कंधे पर हाथ रखा.

रानी: “हाय राम! कोई चोर था क्या? तुमने मुझे आवाज़ क्यों नहीं दी?”

कुमार: “अरे नहीं-नहीं, कोई चोर नहीं था. मैंने टॉर्च जला कर पूरी छत चेक की. वो शायद पड़ोस की बिल्ली थी, जिसने गमला गिरा दिया था. अँधेरे में हिरल को लगा कोई आदमी है.”

मैंने हिरल के पसीने से भीगे चेहरे (जो की असल में हमारी मस्ती की वजह से था) की तरफ इशारा करते हुए कहा-

कुमार: “देखो बेचारी, डर के मारे कैसे पसीने-पसीने हो गयी है. चेहरा भी लाल पड़ गया है.”

रानी ने हिरल का चेहरा देखा, जो वाकई में लाल था और सांसें तेज़ थी. उसको बिलकुल यकीन हो गया.

रानी: “ओह हो, मेरी बच्ची डर गयी. कोई बात नहीं, वो बिल्ली ही होगी. चलो अब नीचे आओ, वैसे भी रात बहुत हो गयी है.”

हमने चैन की सांस ली. “बच गए!” रानी ने हिरल को उसके कमरे तक छोड़ा.

रानी: “जाओ, दरवाज़ा अचे से बंद करके सो जाओ. और अकेले छत पर मत जाया करो रात को.”

हिरल ने जाते-जाते मुझे एक ‘विंक’ (आँख मारी) किया और अपने कमरे में घुस गयी.
मैं और रानी वापस अपने बैडरूम में आ गए. रानी बिस्तर पर लेट गयी और मैं भी उसके बगल में लेट गया.

रानी: “अच्छा हुआ आप जाग रहे थे, वरना हिरल तो आज डर के मारे बेहोश ही हो जाती.”

मैं मैं ही मैं मुस्कुरा रहा था.

कुमार (मनन में): “बेहोश तो वो आज वाक़ई हो जाती, पर डर से नहीं, मज़े से!”

रात की थकान (और टेरेस वाले ‘वर्कआउट’) की वजह से मुझे तुरंत नींद आ गयी.

अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो सूरज निकल चुका था. रानी किचन में थी. मैं फ्रेश हो कर डाइनिंग टेबल पर बैठा. थोड़ी देर में हिरल भी अपने कमरे से बाहर आयी.

लेकिन हिरल की चाल (वाकिंग स्टाइल) थोड़ी बदली हुई थी. वो थोड़ा लंगड़ा कर (हलकी तकलीफ के साथ) चल रही थी. कल रात के “गांड वाला धमाके” का असर साफ दिख रहा था.

रानी चाय लेकर आई और हिरल को ऐसे चलते हुए देख लिया.

रानी: “अरे हिरल? तुम ऐसे पैर फैला कर क्यूँ चल रही हो? पैर में मोच आ गयी क्या?”

मेरा दिल फिर से गले में आ गया. हिरल ने मेरी तरफ देखा और फिर रानी की तरफ.

सुबह डाइनिंग टेबल पर:-

जब रानी ने पूछा की हिरल ऐसे लंगडा कर क्यों चल रही है, तो हिरल ने घबरा कर मेरी तरफ देखा. उसकी आँखें कह रही थी, “जीजू, कुछ करो वरना मैं गयी!”

मैं तुरंत बीच में बोल पड़ा.

कुमार: “अरे रानी, तुम्हे बताया था न रात को वो बिल्ली वाली बात? जब हिरल डर कर भागी थी, तो अँधेरे में सीढ़ियों (स्टैर्स) पर इसका पैर मुड़ गया था. मैंने रात को कहा भी था की बरफ लगा लेना, पर शायद दर्द अभी भी है.”

रानी ने मेरी बात मान ली और चिंता जताते हुए बोली-

रानी: “ओह हो! ध्यान रखना चाहिए न हिरल. एक काम करो, आज तुम कोई काम नहीं करेगी. दोपहर को हमारे कमरे में ही आराम करना, वहां एक चालू रहता है.”

हम दोनों ने चैन की सांस ली. प्लान सेट था.

दोपहर का मंज़र (थे रिस्क):-

दोपहर का खाना खाने के बाद, बाहर तेज़ धूप थी. जैसा रानी ने कहा था, हम तीनों एक ही बेडरूम में आराम करने आ गए.

बीएड काफी बड़ा था. रानी एक किनारे पर दीवार की तरफ़ मुंह करके लेट गयी और सो गयी (या हमें लगा वो सो गयी). हिरल दुसरे किनारे पर लेटी थी, और मैं बीच में था.

कमरे में एक की ठंडी हवा और सन्नाटा था. थोड़ी देर बाद, मैंने रानी की तरफ देखा. उसकी सांसें एक लय में चल रही थी. मुझे लगा वो गहरी नींद में थी.

मेरा दिमाग फिर शैतान हो गया. मैंने धीरे से करवट बदली और हिरल की तरफ देखा. हिरल भी जाग रही थी और मुझे ही घूर रही थी. मैंने आँखों ही आँखों में इशारा किया.

हिरल ने पहले तो ना में गर्दन हिलाई और रानी की तरफ इशारा किया. पर मैंने मुस्कुरा कर अपना हाथ बढ़ाया और ब्लैंकेट के नीचे से उसका हाथ पकड़ लिया. हिरल ने मेरा हाथ अपने ‘पपीतों’ पर रख दिया.

बस फिर क्या था, हमारा साइलेंट गेम शुरू हो गया. मैंने धीरे से ब्लैंकेट हटाया. हिरल ने एक ढीली सी मैक्सी पहनी थी. मैंने उसे कमर तक ऊपर कर दिया. उसकी चूत (जिसे मैंने रात को छत पर रगड़ा था) मेरे सामने थी. मैंने बिना कोई आवाज़ किये अपना पजामा नीचे किया. मेरा ‘लुंड’ एक-दम तना हुआ था.

हिरल (फुसफुसाते हुए): “जीजू… पागल मत बनो… दीदी उठ जाएंगी…”

कुमार (इशारे में): “शठ… कुछ नहीं होगा. बस एक बार…”

मैं खिसक कर हिरल के ऊपर आ गया. मैंने अपने दोनों हाथ उसके बगल में टिकाये ताकि बीएड न हिले. रानी अभी भी पीठ करके सो रही थी.

मैंने हिरल की टांगें फैलाए और अपना ‘लुंड’ उसकी ‘छूट’ पर लगाया. रात की वजह से वो अभी भी थोड़ी खुली हुई थी. एक हल्का सा धक्का मारा और ‘लुंड’ फिसलते हुए अंदर चला गया.

हिरल: “मममम…” (उसने ज़ोर से अपने होंठ काट लिए ताकि आवाज़ न निकली).

मैं धीरे-धीरे धक्के लगने लगा. पांच… पांच… हिरल की गीली चुत की आवाज़ आ रही थी, पर एक के शोर में वो दब गयी थी. हम दोनों मस्ती में खो गए. हिरल ने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट ली थी और मुझे अपने करीब खींच रही थी. मुझे लगा अब तो मज़ा ही मज़ा है.
पर हम भूल गए थे कि रानी हमारे बगल में ही थी.

जोश में आ कर मेरी रफ़्तार तेज़ हो गयी. बीएड हल्का सा हिलने लगा. “अह्ह्ह… जीजू… और ज़ोर से…” हिरल कण्ट्रोल खो बैठी और उसके मुँह से सिसकि निकल गयी.

उसी पल, अचानक… रानी, जो पीठ करके सो रही थी. उसने नींद में करवट बदली.

रानी: “हम्म… क्या हुआ…”

रानी घूम कर सीढ़ी हुई और अपनी आँखें खोल दी. और उसके सामने नज़ारा था.

मैं (कुमार) हिरल के ऊपर चढ़ा हुआ था, मेरा ‘केला’ हिरल के अंदर था, और हिरल मेरी पीठ पर हाथ फेरे मज़े ले रही थी. रानी की आँखें फटी की फटी रह गयी. वो सुन्न हो गयी. एक सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया. मैं रुक गया. हिरल की आँखें खुली और उसने रानी को देख लिया.

हिरल: “डी… दीदी…!”

रानी ने गुस्से और सदमे (शॉक) में हमें देखा और चिल्लाई-

रानी: “ये क्या हो रहा है?!”

मैं हड़बड़ा कर हिरल के ऊपर से हटने की कोशिश करने लगा, पर मेरा ‘केला’ अभी भी अंदर ही फसा हुआ था. हम पकडे गए थे… बुरी तरह से पकडे गए थे!

कमरे में एक-दम सन्नाटा छा गया था, बस एक की हुम्म्म की आवाज़ आ रही थी. रानी का गुस्सा सातवें आसमान पर था. उसका चेहरा गुस्से से लाल टमाटर हो चूका था और वो थार-थर कांप रही थी.

मैं (कुमार) हड़बड़ा कर बिस्तर से नीचे उतरा और जल्दी से अपना पजामा ऊपर किया. मैं शर्म से अपनी नज़रें नीचे किये खड़ा था. मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी की रानी की आँखों में देख सकू. हिरल अभी भी बिस्तर पर थी, उसने जल्दी से चादर से अपना बदन ढका. वो बुरी तरह डर गयी थी और रोने लगी थी.

हिरल: “दीदी… वो… मुझे माफ़ कर दो… मैं…”

रानी तेज़ी से हिरल के पास आयी. उसने हिरल की बात पूरी भी नहीं होने दी. “चट्टाअअक!” एक ज़ोरदार थप्पड़ की गूँज पूरे कमरे में सुनाई दी. रानी ने पूरी ताकत से हिरल के गाल पर तमाचा मारा था. हिरल लड़खड़ा कर बिस्तर के कोने पर गिर गयी और अपना गाल पकड़ कर फूट-फूट कर रोने लगी.

रानी (चिल्ला कर): “माफ़ी? कैसी माफ़ी? तुझे शर्म नहीं आयी हिरल? मैंने तुझे अपनी छोटी बहिन समझा, अपनी बेटी की तरह रखा, और तूने मेरे ही पीठ पीछे मेरे पति के साथ…”

रानी का गला भर आया, पर गुस्सा कम नहीं हुआ.

रानी: “तू मेरी बहिन नहीं, मेरे घर की दुष्मन निकली! तूने मेरा घर तोड़ने की कोशिश की है. छिनाल कहीं की!”

हिरल रोते हुए मेरे तरफ देखने लगी, शायद वो उम्मीद कर रही थी की मैं कुछ बोलूंगा. पर मैं बट (स्टेचू) बना खड़ा था. मैं कुछ बोलता तो बात और बिगड़ जाती.

रानी ने उसी वक़्त अपना फ़ोन उठाया और गुस्से में भैया (हिरल और रानी के भाई) को कॉल लगाया.

रानी (फ़ोन पर): “हेलो! भैया, अभी के अभी गाडी लेकर मेरे घर आइए. हां, अभी! हिरल को वापस ले जाइये. इसने जो किया है, मैं इसे एक पल भी अपने घर में नहीं रख सकती. अगर आप नहीं आये, तो मैं इसे धक्के मार कर निकाल दूँगी!”

फ़ोन काटने के बाद, रानी ने हिरल की तरफ उंगली दिखा कर कहा-

रानी: “उठ! और अपना सामान पैक कर. मेरे भाई के आने तक तू इस कमरे से बाहर नहीं निकलेगी. आज के बाद मैं तेरा शकल भी नहीं देखना चाहती. वापस गाओं जा और वहीँ सड़.”

अगला एक घंटा घर में किसी मौत के मातम जैसा सन्नाटा था. हिरल ने रोते-रट अपना बैग पैक किया. वो बार-बार “सॉरी दीदी, सॉरी जीजू” बोल रही थी, पर रानी ने उसकी तरफ देखा तक नहीं.

थोड़ी देर बाद, भैया अपनी गाड़ी लेकर आ गए. उन्हें मामला पूरा समझ नहीं आया था, पर रानी का गुस्सा देख कर वो चुप-चाप हिरल को ले जाने के लिए तैयार हो गए.

हिरल गाड़ी में बैठने से पहले एक आखरी बार पलटी. उसकी आँखें सूज गयी थी. उसने मेरी तरफ देखा. उन आँखों में सवाल था, की मैंने उसे बचाया क्यों नहीं? पर मैंने नज़रें चुरा गया.

गाड़ी स्टार्ट हुई और हिरल हमेशा के लिए वापस गाओं चली गयी. गाड़ी के जाने के बाद, रानी ने दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया और सोफे पर बैठ कर रोने लगी. मैं वहीं खड़ा रह गया, अकेला और गुनेहगार.

हिरल चली गयी थी, पर अपने पीछे वो टूटा हुआ रिश्ता और वो यादें छोड़ गयी थी जो शायद अब कभी नहीं मिटने वाली थी.

कहानी समाप्त.

यह कहानी यहां खत्म होती है. एक गलती ने सब कुछ बदल दिया. अगर आप को ये पसंद आई तो मुझे ज़रूर मेल कीजियेगा
मेरा जीमेल ईद है (प्रेत्तयानगेल३६द@जीमेल.कॉम)

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