टीचर-स्टूडेंट सेक्स स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट-
पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, की बातरूम में माँ को अपने लंड का माल पिलाने के बाद किचन में खाना बनना शुरू हुआ. फिर वहाँ भी मैने उनको लंड चुस्वाया. अब आयेज-
सब्ज़ी रेडी हो चुकी थी. फिर हाथ धो कर मैं बैठ गया डाइनिंग टेबल पे. माँ ने खाना परोसा और हम दोनो खाना शुरू किया. मैं बहुत ही जल्द खाना खा कर उठ गया और हाथ धो दिया. फिर माँ के पास जेया कर देखा तो लास्ट एक रोटी बची थी और मैने उनकी सब्ज़ी खा ली.
माँ (गुस्से से): मदारचोड़, अब मैं ख़ौँगी कैसे?
मैं: मैं खिलता हू ना.
उनके सामने खड़ा हुआ और उनके हाथ से रोटी लेकर एक नीवाला लिया. फिर उनके मूह में डाला, और तुरंत ही मेरे लंड के टोपे को उनके मूह में डाल दिया.
मैं: कैसी लगी सब्ज़ी?
माँ: तो फिर तो सब्ज़ी ही नही बनती अगर तेरा लंड चूसना होता.
मैं: चल पहले खा ले.
वैसे ही रोटी के नीवाला लेके उनके मूह में अपने टोपे को चूसना. ऐसे करते हुए रोटी ख़तम कर दी और फिर हाथ धो कर माँ ने बर्तन धो दिया. मैं जेया कर उनके बेडरूम में मेरे खड़े लंड को हाथ में लिए मसल रहा था. माँ बर्तन धो कर आई और बोली पुर रेडी हो गये हो ना. फिर माँ ने अपने टीवी चालू किया और उनके पेंद्रीवे से एक पॉर्न वीडियो प्ले किया.
मैं: ये क्या, आप तो टीवी पे पॉर्न देखते हो?
माँ: ये तो बहुत पहले से चल रही है.
मैं: मतलब?
माँ: जब मेरे दो औलाद पैदा होके बड़े हुए. उसके बाद से मेरे पति ने कभी छोड़ा नही. और उसके बाद से मैं फोन पे पॉर्न देख के उंगली कर लेती थी. और मॅन में उमीद तो थी कभी तो फिर छोड़ेंगे मेरे पति. लेकिन फिर उनकी मौत हो गयी. मैं तब से और चूड़ी नही थी, और फिर घर पे अकेली मैं टीवी पे ही पॉर्न देख कर उंगली करती थी.
माँ: बेटा-बेटी के आने से टाइम स्पेंट उनके साथ हो जाता था. चाहती तो किसी गैर मर्द से चुड सकती थी. लेकिन काम से फ़ुर्सत मिले तब ना. और फिर देखो गाड़ी खराब हुई और मिले तुम. फिर भी अगर मैं ना फिसली होती और मेरा दूध जेया कर तुम्हारे हाथ में ना जाता, तो आज रात भी उंगली कर लेती.
मैं: इतनी सारी बातें है!
माँ: मैं बहुत कुछ उमीद की थी. मेरे पति को सिड्यूस करके बहुत चुड़ूँगी उनसे. रोज़ पॉर्न देख कर नये-नये तरीके, नये लोगों से चूड़ने की चाहत बढ़ गयी. और इतनी ख्वाहिशे मैं देख ली थी जो कभी पूरी नही हो सकती.
मैं: किस तरह की ख्वाहिश मॅन में रखी हो?
माँ: वो तो वीडियोस में जैसे.
मैं: मतलब?
माँ: ट्रेन में चुदाई करना.
कहीं एक जगह पे फ़ासस कर किसी अंजान आदमी से चूड़ना.
गंगबांग करना. गांद फदवाना. छूट में एक साथ दो लंड लेना. फिर से सुहग्रात मानना. हार्डकोर फक.
मैं: तुम एक टीचर ही हो ना? दिमाग़ में एक पोर्नस्तर की सोच भर के रखी हो. च्चिनाल!
माँ: इसलिए तो बोला ना जो कभी सच नही हो सकता.
मैं: अगर पूरी हो जाए?
माँ: तुम करोगे पूरा?
मैं: क्यूँ हो नही सकता क्या? ये सब तो कर दूँगा पूरी, लेकिन उससे पहले मैं तो तेरी ले लू.
माँ: हा मेरे प्यारे.
मैं: क्यूँ ना एक ख्वाहिश अब पूरी कर डू. सुहग्रात मनाओगी?
माँ: अर्रे वाह, क्या बात कही. मैं तो फिर रेडी होती हू शादी के जोड़े में. तुम जेया कर फूल और सिंदूर लेकर बेड भी सज़ा लेना.
मैं तुरंत कपड़े पहन कर मार्केट गया और कुछ फूल और सिंदूर लेके आते-आते माँ दूध रेडी करके टेबल पे रख दिया और खुद शादी के जोड़े में तैयार हो गयी. फिर मैं जब पहुँचा पहले दोनो ने मिल के बेड की सजावट कर ली और फिर मैं उनके माथे पे सिंदूर लगा के झूठी शादी कर ली. फिर माँ जेया कर बेड पे नयी दुल्हन की तरह बैठ गयी. और मैं बाहर से आके डोर लॉक्ड कर दिया. फिर जेया कर बेड पे बैठ गया.
माँ: जी टेबल पे दूध रखा है.
मैं: उस दूध में क्या रखा है. दूध तो तुम्हारा भी है.
माँ: जी ऐसे क्या बातें कर रहे है?
मैं: अर्रे आप आज से मेरी पत्नी हो मेरे साथ तो बातें क्या हरकतें भी करनी पड़ेगी.
माँ: जी मुझे शरम आ रही है.
मैं उनका हाथ लिया और मेरी पंत की चैन खुलवा कर लंड बाहर निकाला.
माँ: जी आप क्या कर रहे है?
मैं: ये तो मेरी बीवी के लिए गिफ्ट है.
मैं उठा और उनका घूँघट उठा कर उनके ब्लाउस को खोला. फिर उनकी पूरी कपड़े उतार दिए और मैं भी नंगा हो गया.
मैं: देखो अब कितनी अची दिख रही ही.
माँ: आप भी कम नही.
मैं: मुझे क्यूँ देख रहे हो, नीचे वाले को देखो.
माँ को बेड पर लिटा कर माँ का मूह खोला और तोड़ा दूध डाल कर उनके लिप्स को चूसने लगा. उनके मूह से ही मैने कुछ दूध पी लिया. फिर उनके दूध में तोड़ा दूध डाल कर दूध की मालिश करके निपल्स को चूस-चूस कर खाया. माँ को मज़ा आ रहा था.
मैने उनकी नाभि में दूध डाल कर पिया. फिर उनकी छूट को भी दूध से नहला कर उनकी छूट छाती. उसके बाद तोड़ा जो दूध बचा था, उसे हाथ में लेके मेरे लंड को मालिश करके चूसने लगी. इतने मज़े से चूस रही थी की पुर गले तक ले जेया रही थी लंड को.
फिर मैने भी उनके सर को पकड़ा और ज़ोर से उनके मूह में चुदाई करने लगा. फिर मैं कुछ देर के लिए लेट गया. तब वो अपनी गांद को मेरे मूह में रख के बैठ गयी. वो गांद को मेरे मूह में दबाने लगी. फिर उन्हे उठाया मूह के उपर से और फिर लंड पे तेल लगाने बोला.
तेल लगाने के बाद माँ की गांद को पकड़ के उठाया और गांद के च्छेद में लंड सेट किया और डाल दिया. माँ की तो चीख निकल गयी थी. मैने ऐसे ही ज़ोर से 10-15 शॉट्स गांद में मार के लंड निकाल दिया.
माँ बोली: पति देव मैं तुम्हारी पत्नी हू. आराम से तो कर सकते हो?
मैं: आराम से मैं नही करता, वरना मज़ा कैसे आएगा?
फिर उन्हे लिटाया और छूट चाट के और उंगली करके पहले उनको झाड़ा दिया. फिर जब छूट का पानी निकल गया, मैं अपने लंड को छूट में डाल दिया. माँ आ कर उठी. मैं फिर धीरे-धीरे तेज़ी बढ़ाया. माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी. फिर 10 मिनिट बाद मैने उनके छूट से लंड निकाला और उनके मूह में डाल कर चूसाया.
मैने उनके मूह में झाड़ के सारा वीर्या निकाल दिया. वीर्या निगलने के बाद लंड को हिलाते हुए माँ और तोड़ा चूसने लगी.
फिर माँ बोली: पति देव कितना मोटा और बड़ा लंड रखे हो, जानवर के तरह गांद मार दी.
फिर माँ उठी और बातरूम से फ्रेश होके आई. मैं भी फ्रेश हुआ और आ कर उनके बेड पे नंगा सो गया. माँ भी आई और मेरे लिप्स पे किस करके सो गयी.
उनकी अगली ख्वाहिश कैसे पूरी होगी, नेक्स्ट पार्ट में पता चलेगा.