मेरा नाम अविनाश है और मैं वर्सटाइल गे हू. लॉक्कडोवन् के टाइम मेरी आगे अराउंड 25 थी. जस्ट ग्रॅजुयेशन ख़तम हुई थी, और लॉक्कडोवन् से पहले ही मैने एक कंपनी जाय्न की थी. जॉब की वजह से मुझे शिफ्ट होना पड़ा, तो मैं अपने एक डिस्टेंट रिलेटिव के यहाँ शिफ्ट हो गया.
फिर लॉक्कडोवन् लग गया और मैं वही फस गया. वो रिलेटिव बस मेरे एक डोर के अंकल थे. वो डिवोर्स्ड थे और अपने 2 भक में एक सर्वेंट के साथ रहते थे. मैं पहले भी काई बार उनके घर गया था, पर मैने कभी उनके सर्वेंट को उस नज़र से नही देखा था. गेस इट वाज़ थे लॉक्कडोवन्… कोई लड़के मिल नही रहे थे, तो ई वाज़ गेटिंग रियली हॉर्नी.
मुझे हमेशा अपने से बड़े लड़कों में इंटेरेस्ट था, और वो सर्वेंट मुझसे छ्होटा था, अराउंड 22. शायद इसलिए मेरा ध्यान कभी पहले उसपे गया नही. पर जैसे जैसे लॉक्कडोवन् के दिन बीते, मैने उसे नोटीस करना शुरू किया. हे वाज़ तीस यंग, क्यूट, वेरी फेर आंड स्लिम नेपाली गाइ.
जब अंकल आस-पास नही होते थे, मैं उससे पर्सनल बातें करने लगा. मैने पूछा, “कोई गर्लफ्रेंड है?” उसने कहा, “बिना पैसे के कौन लड़की आती है भैया, सिंगल हू मैं.” लॉक्कडोवन् के दिन बढ़ते गये और मेरी डेस्परेशन भी. जब भी मैं उसे किचन में काम करते देखता, मेरा मॅन करता की पीछे से जेया कर उसे हग कर लू.
मैं सोचता रहता की उसे सिड्यूस कैसे करू. एक रात डिन्नर के बाद जब अंकल सो गये, मुझसे रहा नही गया. मैं अपने कमरे से बाहर निकला, वो कामन बातरूम के पास ही सोता था. मैने देखा वो अपने बेड पर फोन चला रहा था.
मैं बातरूम गया, अपनी चेस्ट शेव की, और बारे बॉडी बाहर आ गया उससे अपनी फ्रेश्ली शेव्ड चेस्ट दिखाते हुए. लाइट्स ओं थी, उसने मेरा शेव्ड चेस्ट देखा और तोड़ा सर्प्राइज़ हो कर स्माइल किया.
मैं उसके पास जेया कर बैठ गया. मैने कहा, “बाल शेव कर लेता हू कभी-कभी, अछा लगता है.” वो बस स्माइल करता रहा. मैं काफ़ी हॉर्नी था तो ज़्यादा सोचा नही, बस बात आयेज बढ़ने के लिए पूछा, “टच करके देखना है? शेव के बाद काफ़ी स्मूद फील होता है.”
उसने स्माइल करके बोला, “नही, ठीक है.” मैने कहा कोई बात नही और मैने उसका हाथ पकड़ा और अपनी चेस्ट और निपल्स पर मूव किया. उसने कोई इंटेरेस्ट नही दिखाया और जैसे ही मैने उसका हाथ छ्चोढा उसने हाथ नीचे कर लिया. फिर वो बोला, “भैया मुझे नींद आ रही है.” उसने लाइट्स ऑफ की और वो सोने लगा ब्लंकेट ओढ़ कर. मैं साद हो कर अपने रूम में चला गया.
पर नींद कहाँ आनी थी? आधे घंटे बाद मैं टाय्लेट के बहाने फिर बाहर आया. वो ब्लंकेट ओढ़ कर सो रहा था. मैं बातरूम के बाहर खड़ा हो कर उसे देखता रहा. थोड़ी बहुत लाइट आ रही थी बाहर से. पता नही मुझे क्या हुआ, मैं फिर उसके पास बैठ गया.
मैने ब्लंकेट के उपर से उसकी थाइस टच की और पूछा, “सो गये क्या? मुझे नींद नही आ रही.” उसने ब्लंकेट से अपना फेस कवर कर लिया और बोला, “मुझे नींद आ रही है.” उसे लग गया था की आज मैं तोड़ा अन्यूषुयल बिहेव कर रहा था.
मैं दो मिनिट वही बैठा रहा. मैने फिर से उसकी थाइस टच की ब्लंकेट के उपर से और कुछ देर पकड़े रखा. मेरा लंड खड़ा हो रहा था, काफ़ी हॉर्नी फील कर रहा था. धीरे से मैने ब्लंकेट को साइड से हटाया और अंदर हाथ डाल कर उसकी नेकेड थाइस को टच किया और फिर मसाज करने लगा (वो शॉर्ट्स पहने था).
उसने कुछ नही कहा. कोई रिक्षन नही. मेरा हाथ उपर जाते-जाते धीरे-धीरे उसके डिक तक गया और मैं उसके लंड को उसके शॉर्ट्स के उपर से सहला रहा था. उसके तरफ से कोई रिक्षन नही था. पता था मुझे वो जगा हुआ था. 2 मिनिट में कोई सो थोड़ी सकता है. वो कुछ नही बोल रहा था आंड ई वाज़ गेटिंग कॉन्फिडेंट.
मैने उसका शॉर्ट्स तोड़ा नीचे किया और उसका डिक बाहर निकाल लिया. वो बिल्कुल रिक्ट नही कर रहा था. उसका लंड खड़ा था. मैने तोड़ा उसका डिक मसाज और फिर अपने मूह में उसका लंड ले लिया.
मैने उसे सक करना शुरू किया और कुछ देर में वो मेरे मूह में कम कर गया. तब भी उसका कोई रिक्षन नही था. उसका निकालने के बाद भी मैं उसे चूस रहा था और अपना लंड हिला रहा था. मेरा निकालने वाला था और मैने वापस उसका लंड पंत के अंदर घुसाया और बातरूम चला गया.
फिर उसका कम अपने मूह में रख के ही जर्क ऑफ किया. बातरूम से निकालने के बाद देखा वो सो रहा था. मैं अपने रूम गया और सो गया.
नेक्स्ट मॉर्निंग मैं काफ़ी शाइ फील कर रहा था. समझ नही आ रहा था उसे फेस कैसे करू. दर्र लग रहा था की कहीं वो सर्वेंट अंकल को कंप्लेन ना कर दे. वो मुझे जगाने के लिए रूम में आया और बोला, “ब्रेकफास्ट रेडी है, अंकल वेट कर रहे है.”
उसका बिहेवियर एक-दूं नॉर्मल था. ब्रेकफास्ट के बाद उसने मुझसे अपने फोन के लिए हेल्प भी माँगी. उसके फोन में कुछ प्राब्लम आ रही थी. ई वाज़ सर्प्राइज़्ड… इतना नॉर्मल रिक्षन, इतना चिल!
अगली रात मुझे बहुत नींद आ रही थी क्यूंकी पिछली रात उससे सिड्यूस करते और उसका लंड चूस्टे काफ़ी लाते हो गया था. इसलिए मैं जल्दी खाना खा कर सो गया. आधी रात को अराउंड 12 बजे मूतने के लिए मेरी नींद खुली और मैं बातरूम गया. जाते वक़्त देखा की वो नौकर अपने बिस्तर पर नही था.
मैने सोचा बाल्कनी में होगा, कॉल पर. मैं बातरूम चला गया और वापस आते टाइम बाल्कनी जेया कर देखा तो वो वहाँ भी नही था. मुझे समझ नही आ रहा था की इतनी रात को वो कहाँ गया. तो मैं अंकल को बताने उनके रूम की तरफ गया.
मैने देखा, अंकल के कमरे का दरवाज़ा हल्का सा खुला था. कोई आवाज़ नही थी. मैने सोचा की अंकल अपने कमरे का दरवाज़ा लॉक करना भूल गये होंगे. मैने सोचा अंकल अगर जागे होंगे तो उनको बतौ की सर्वेंट है नही घर पे.
फिर मैने धीरे से दरवाज़ा खोला. हल्का से दरवाज़ा खोला ही था, मैने तब देखा की वो सर्वेंट मेरे अंकल को मसाज दे रहा था. शायद उस सर्वेंट को आदत नही होगी दरवाज़ा लॉक करने की, क्यूंकी घर पर वैसे उन दोनो के अलावा पहले कोई रहता नही था.
अंकल के रूम की ज़ीरो पवर बल्ब की रोशनी में दिख रहा था की अंकल पुर नंगे थे. लेकिन नौकर ने कपड़े पहने हुए थे. बेड दरवाज़े के ऑपोसिट तरफ था और वो दोनो ऑपोसिट डाइरेक्षन को फेस कर रहे थे, तो उनको नही दिखा की मैं दरवाज़े के बाहर से देख रहा था.
दरवाज़ा वैसे भी हल्का ही खोला था मैने. अंकल के पुर बदन पे तेल लगा था, उनकी गांद पर भी, और वो नौकर उनकी बॅक को मसाज कर रहा था. साइड टेबल पे ऑलिव आयिल रखा हुआ था. मैने चुप-छाप दरवाज़ा बंद किया और अपने रूम में आ गया.
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. एमाइल: कोंट.अभिशर्मा@गमाल.कॉम