दोस्तों मेरा नाम अर्जुन है. मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुनने जेया रहा हू. मेरी उमर अभी 24 साल है, लेकिन ये कहानी 2 साल पहले की है. तो चलिए 2 साल पीछे चलते है.
मेरे पड़ोस के घर में जो फॅमिली रहती थी, उनके साथ हमारी काफ़ी बनती थी. उनकी फॅमिली में मम्मी-डॅडी, और बेटा-बहू रहते थे. उनका बेटा उस वक़्त 30 साल का था, और बहू 26 साल की. अंकल की पापा से बनती थी, और वो पापा को अपना छ्होटा भाई मानते थे. दोनो घर की लॅडीस की भी आपस में अची फ्रेंडशिप थी.
पड़ोसियों की बहू, यानी की मनीषा भाभी मेरी फॅवुरेट भाभी थी. फॅवुरेट मतलब, जैसे हर लड़के की कोई ना कोई भाभी फॅवुरेट होती है, जिसको सोच कर वो मूठ मारता है, और उसको देख कर वो आहें भरता है, वैसी फॅवुरेट.
मनीषा भाभी का रंग गोरा था, और शरीर भरा हुआ था. वो सारी पहनती थी, और उनके ब्लाउस का गले में से थोड़ी क्लीवेज दिखती रहती थी. पीछे से जब उनकी गांद चलते हुए मटकती थी, तो मोहल्ले के लड़कों के लंड खड़े हो जाते थे.
मुझे जब भी किसी काम के लिए उनके घर जाना पड़ता था, तो शाम को मूठ ज़रूर मारता था. मारता कैसे नही, भाभी के दर्शन करके मैं उत्तेजित जो हो जाता था. अभी तक मैने सिर्फ़ मूठ ही मारी थी भाभी को सोच-सोच के. लेकिन मुझे नही पता था की मुझे उनकी चुदाई का भी मौका मिलने वाला था.
एक दिन अचानक से साथ वाले घर में रोने की आवाज़े आने लगी. मम्मी जल्दी से उनके घर गयी, पता लगाने की क्या हुआ था. कुछ देर बाद मम्मी आई तो पता चला पड़ोसियों के बेटे की आक्सिडेंट में डेत हो गयी थी.
राजन भैया से मेरी भी अची बनती थी, तो मुझे भी बहुत दुख हुआ. फिर हम सब उनके घर गये उनको हॉंसला देने. वो लोग बहुत दुखी थे. होते भी क्यूँ ना, जवान बेटा जो मररा था.
उस वक़्त जब मैने भाभी को देखा तो वो बहुत रो रही थी. मुझे गिल्ट फील होने लगा की मैं उनके बारे में कितना ग़लत सोचता था. अगले कुछ दिन सारी रस्में हुई, और मातम चलता रहा.
धीरे-धीरे कुछ महीने बीट गये. अब वो लोग ठीक होने लगे थे. मैने भाभी के बारे में ग़लत सोचना बंद कर दिया था. लेकिन एक दिन कुछ अलग हुआ.
मैं कॉलेज से घर आया तो मम्मी बोली: बेटा तुझे मनीषा बुला रही है. उसको कुछ काम करवाना है घर का. भैसाब और भाभी कहीं गये है, तो तू जाके हेल्प कर दे.
मैं ठीक है बोल के साथ वाले घर चला गया. भाभी ने दरवाज़ा खोला. उनको देख कर मैं तोड़ा हैरान हो गया. आज उन्होने एक निघट्य पहनी हुई थी ब्लॅक कलर की, जिसमे से उनकी काफ़ी क्लीवेज दिख रही थी. वो बहुत सेक्सी लग रही थी, लेकिन फिर भी मैने उनको गंदी नीयत से नही देखा. वो बोली-
भाभी: आ गये तुम. अंदर आ जाओ.
मैं अंदर गया, तो वो मुझे अपने रूम में ले गयी. उन्होने मुझे बैठने को कहा तो मैं बोला-
मैं: भाभी क्या काम है?
भाभी बोली: तू बैठ, मैं अभी आके बताती हू.
मैं: ठीक है.
ये बोल कर वो चली गयी. जाते हुए वो रूम का दरवाज़ा बंद कर गयी. फिर मैं इधर-उधर देखने लगा. कुछ 2 मिनिट में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई तो मैं दरवाज़े की तरफ देखने लगा. फिर जैसे ही दरवाज़ा खुला, मैं देखता ही रह गया.
मनीषा भाभी ब्लॅक कलर की ब्रा-पनटी में दरवाज़े पर खड़ी थी. उनको ऐसे देख कर मेरी सिट्टी-बिट्टी गुल हो गयी. मुझे समझ नही आ रहा था की वो उन कपड़ों में मेरे सामने क्या कर रही थी.
भाभी आयेज बढ़ने लगी और मेरी तरफ आने लगी. वो मेरे बिल्कुल पास आके खड़ी हो गयी. मैं बेड पे बैठा था, और उनके इतने क़रीब आने से मेरा गला सूख रहा था. फिर वो बोली-
भाभी: तुझे आज मुझे प्यार करना है.
मैं: क्या मतलब भाभी?
भाभी: मैने देखा है की तू मुझे किन नज़रों से देखता है. तेरे भैया मुझे छ्चोढ़ गये है, और ये जवानी मुझे मजबूर कर रही है किसी मर्द से रिश्ता बनाने को. तू अगर तू मेरी ज़रूरत पूरी कर दे, तो मैं भी तेरी ज़रूरत पूरी करूँगी. बोल क्या बोलता है?
ये ऑफर ऐसा था, जिसको कोई भी लड़का माना नही कर सकता. मैं अभी कुछ बोला नही था. भाभी ने मेरी चुप्पी को हा समझा, और घुटनो पर बैठ कर मेरी जीन्स खोलने लगी. मैने गांद उठा कर जीन्स खोलने में उनकी हेल्प की.
मेरा लंड खड़ा हो चुका था, जिसको भाभी ने अंडरवेर से आज़ाद किया. लंड बाहर आते ही उन्होने मूह में ले लिया. मेरे मूह से आ निकली और मैं जन्नत में पहुँच गया. अब भाभी मेरा लंड चूसने लगी.
मैं बहुत उत्तेजित हो गया, और मेरा एक मिनिट में ही निकल गया. मेरा माल भाभी के मूह में चला गया, जिसको उन्होने थूक दिया. फिर भाभी बातरूम में गयी, और कुल्ला करके आई. मुझे लगा की जल्दी होने से मेरी इन्सल्ट हो गयी, तो मेरा मूह बन गया था.
जब भाभी बातरूम से आई, तो मेरे चेहरे पर उन्होने अफ़सोस भाँप लिया. फिर वो बोली-
भाभी: चिंता मत कर, पहली बार में ऐसा ही होता है. तेरे भैया तो पहली बार इतनी देर भी नही टिक पाए थे. तू तो फिर भी उनसे ज़्यादा टीका है.
ये सुन कर मुझे तोड़ा हॉंसला मिला. फिर भाभी ने मुझे खड़ा किया, और मुझे हग कर लिया. अब हमारे होंठ बिल्कुल करीब थे. हम दोनो की साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थी. तभी भाभी बोली-
भाभी: जब तू मुझे देखता था, तो तेरी आँखें उपर से लेके नीचे तक मुझे स्कॅन करती थी. आज जब मैं तेरी बाहों में हू, तो क्या तुम कुछ नही करोगे.
मैं: करूँगा ना भाभी.
ये बोल कर मैने भाभी के होंठो से अपने होंठ चिपका दिए, और उनके होंठो को चूसने लगा. भाभी भी मेरा साथ देने लगी. उनके होंठो का रस्स पी कर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. मैं उनके होंठ अपने मूह में खींच-खींच कर चूस रहा था. ऐसा ही कुछ रेस्पॉन्स उनका भी था.
अब मेरे माइंड में वो सारी फॅंटसीस आने लगी, जो भाभी को सोच के मैं इमॅजिन किया करता था. फिर मैं किस करते हुए भाभी की पीठ पर हाथ फेरने लगा.
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. यहाँ तक की कहानी कैसी लगी, औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर फीडबॅक दे.