टीचर स्टूडेंट की बातरूम में चुदाई की कहानी

सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, की मैं अपनी पुरानी टीचर से मिला. फिर उसके घर गया, और बातरूम में नहाते हुए सेक्स करने गये. अब आयेज-

माँ हाथ में साबुन लगा कर सॉफ करने के बाद मेरे बदन पे लगा कर मेरे निपल के साथ खेल-खेल के चूस रही थी. फिर नीचे नी डाउन हो कर लंड में साबुन लगा कर बोली-

माँ: छ्होतू कितना शरारत करता है (और एक खींच के मारा भी). इतनी ठंड लग रही है, नहा तो ले पहले.

वो साबुन लगाने के बाद बॉडी स्क्रब्बर ला कर लंड को चिकना करने लग गये.

मैं: ऐसा मत करो माँ, जल रहा है. हाथ से ही कर लीजिए.

माँ: तू भी कर लेना.

मैं: लेकिन मेरे साथ मत करिए.

फिर माँ ने हाथ से लंड सॉफ करते-करते मूह में डाल लिया और चूसने लग गयी. साबुन से भरा लंड माँ के मूह में बिल्कुल सुंदर लग रहा था. फिर मेरे पैर में साबुन लगा कर सॉफ किया और फिर गांद में भी. गांद सॉफ करते-करते माँ ने मेरी गांद के च्छेद में उंगली करना शुरू कर दिया था, तो मुझे कैसे-कैसे लग रही थी. इसलिए मैने उन्हे हटा दिया. फिर शवर ओं करके मुझे नहला दिया.

अब माँ की बारी थी. मैने उनके हाथ में साबुन लगा कर सॉफ किया. फिर उनके दूध पे लगा रहा था. इतने बड़े-बड़े दूध पे साबुन लगा कर सॉफ करने में मज़ा आ रहा था. पूरा दूध को दबा-दबा के सॉफ कर दिया.

फिर मैं उनके बदन पर साबुन लगा कर बॉडी स्क्रब्बर से सॉफ किया. उसके बाद उनकी छूट में भी साबुन लगा कर स्क्रब्बर उनकी छूट में डालने लगा तो माँ बोली-

माँ: इसे लंड पर सेट करके अंदर डालो.

तो मैं स्क्रब्बर को कॉंडम की तरह लंड पर लगाया और छूट में डालने लगा.

माँ बोली: एक बार में खुजली मिट जाएगी अब तो.

स्क्रब्बर के अंदर-बाहर होने के कारण माँ के मूह से सिसकियाँ निकल रही थी. फिर थोड़ी देर बाद छूट के चारों तरफ साबुन लगा कर सॉफ किया. उसके बाद पानी से धो कर चाटने लगा. 5 मिनिट बाद माँ का मूट निकल गयी. तभी मैं फाटाक से उठ गया और खड़ा हो गया.

मैं: सस्यू लगी थी तो बता देते ना.

मैं भी अब लंड में साबुन लगा कर, माँ को नीचे झुका कर उनके मूह में डाल दिया. माँ वही साबुन वाले लंड को चूस्टे-चूस्टे सॉफ कर रही थी, और मैं भी मूट दिया तो माँ ने लंड बाहर निकाल दिया. फिर तोड़ा मूट उनके मूह में गया और मूट से उनका पूरा फेस भीग गया.

माँ: शरारती बच्चे.

मैं: फेस वॉश कर देता हू. वरना सस्यू की स्मेल आएगी रंडी की फेस से.

माँ का फासएवाश मैने हाथ पे डाला, और फिर मेरे लंड पे फासएवाश लेकर उनके मूह में लगाया चारों और. फिर मेरे लंड से ही उनके मूह में फासएवाश को घिस दिया और पानी से फेस धो दिया.

मैं: माँ एक बार वीर्या से मूह धो कर देखिए ना.

माँ: ठीक है, पहले निकाल तो ले.

मैं: पहले बाकी काम ख़तम हो जाए.

माँ को पलताया और उनकी गांद में साबुन लगाया और मेरे लंड में भी. फिर उनकी गांद के च्छेद में लंड डालने से पहले उस साबुन वाले लंड पे दबूर अवला तेल डाल दिया. उसके बाद तोड़ा उपर-नीचे करके उनकी गांद के च्छेद में डाल दिया. तेल के कारण एक-दूं से लंड अंदर घुस गया. माँ चीख पड़ी, और मुझे धक्का देकर लंड बाहर निकाल दिया.

माँ: मदारचोड़ गांद फाड़ देगा क्या?

मैं: सॉरी माँ, वो लंड पे तेल डाल दिया ना, तो फिसल के अंदर चला गया. धीरे से डालता है. फिर गांद पे एक शॉट मार के फिर गांद में डाल दिया. ऐसे ही धीरे-धीरे करके माँ का गांद की च्छेद को बड़ा कर दिया.

माँ: काश तू मेरा बेटा होता, कोई प्राब्लम नही होती. रोज़ सुबह शाम तुझसे चुड जाती. आ आ आ.

मैं: बेटा नही सही, मेरी टीचर है तू. तुझे तेरा ये स्टूडेंट खुस रखेगा (कहते-कहते ही ज़ोर का धक्का गांद में).

माँ: आ बेटे, मेरे पति ने तो गांद में कभी नही डाला. लेकिन तेरबगांद में डालना बहुत अछा लग रहा है. रोज़ गांद में पेलना आ आ आ आ आ आ. रुक, नहाना बहुत हुआ, चल तुझे और क्या करना था जल्दी कर. वरना मैं करती हू. फिर खाना भी बनाना है.

मैं: ठीक है आप ही करो.

माँ मेरे लंड के नीचे बैठी और साबुन लगा दिया लंड पे. फिर ज़ोर से हिलने लगी. थोड़ी देर बाद मेरे दो आँड पे साबुन लगा के दोनो आँड को अपने मूह में लेकर चूसने लगी. तब मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा. मैने माँ को नीचे ही लिटा दिया और उनके मूह पे बैठ के उनके मूह में आँड भर कर चूसाया.

माँ को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था. फिर मुझे तोड़ा उपर उठा के, मेरी गांद में साबुन लगा कर गांद की भी चटाई करने लगी. मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था. फिर माँ उठी और मेरे लंड को ज़ोर से हिलने लगी. 5 मिनिट बाद माँ अपने फेस पे सारा वीर्या गिरवा दिया और कुछ मूह में लेके पी लिया. फेस पे गिरे वीर्या से मैं उनके फेशियल कर दिया. पूरा फेस वीर्या से भरा था.

मैं: मज़ा आया ना?

माँ: इतने दीनो बाद किसी का लंड का स्वाड़ा चखूँगी, मज़ा तो आएगा ना.

फिर शवर ओं करके हम दोनो नहा लिए और टवल से बॉडी पोंछ के बातरूम से निकल गये. बातरूम से निकल कर माँ कपड़े पहन रही थी.

मैं: क्या यार घर में हम दो ही है. फिर भी क्या कपड़े पहन रही हो.

माँ: क्या हुआ?

मैं: नंगी रहो ना.

माँ: ठीक है बाबा.

फिर नंगी ही माँ किचन चली गयी और रोटी बनाने लगी. कुछ देर बाद मैं भी किचन गया. मेरा लंड बैठा हुआ था. मैं जेया कर किचन के प्लॅटफॉर्म में बैठ गया. माँ रोटी को सेकने लगी.

टोटल 8 रोटी बनाने के बाद सब्ज़ी बनाना शुरू किया. सब्ज़ी बनाते वक़्त मैं लंड खड़ा करके प्लॅटफॉर्म पर खड़ा हुआ. फिर माँ के मूह के पास जाके मूह में लंड डाल दिया. सब्ज़ी बन रही थी, और मेरा लंड उनके मूह में अंदर-बाहर हो रहा था.

फिर माँ बोली: रुक जाओ, कितना चुसाओगे?

मैं बोला: पता नही, लेकिन इससे पहले किसी को ऐसा कुछ करने को मॅन नही हुआ. लेकिन आपको हमेशा ही चूसने का मॅन करता है. लगता है जैसे मेरा लंड आपके मूह के लिए बना है.

माँ बोली: हॅट बदमाश!

दोस्तों आज की कहानी यहीं तक. आयेज की कहानी अगले पार्ट में.

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