हॉर्नी बहू और सास की लेज़्बीयन सेक्स स्टोरी

चुदाई की कहानी अब आयेज से-

मेरी ऑफीस लाइफ के बारे में आपको “मदद का हाथ” वाली सेक्स कहानी में टा चलेगा. तो अब कहानी मेरे और सोनिया के कंपनी से वापस आने के बाद की है.

मैने कंपनी में काव्या और सोनिया का सीन देखा था. इससे मैं बहुत गरम हो चुकी थी. एक मॅन तो किया की अंदर जाके उनके साथ मज़े ले लू. फिर मैने सोचा की आज ही कंपनी जाय्न की थी, तो पहले ही दिन ऐसा करके अपने लिए कुछ मुसीबत ना हो जाए.

मेरी छूट बहुत मचल रही थी. मैं तू बस घर पहुँचने का वेट कर रही थी बस. मैं घर पहुँची तो देखा की रिया वहाँ थी नही, और मेरा बेटा सोया हुआ था. इसका मतलब ये था की मेरी सास अभी अपने रूम में अकेली थी.

मैने फटाफट अपने कपड़े चेंज किए और एक ट्रॅन्स्परेंट सी निघट्य पहन ली. सिर्फ़ निघट्य ही पहनी थी. उसके अंदर से मेरे बूब्स और छूट सॉफ-सॉफ दिखाई दे रहे थे. अब मुझसे रहा नही जेया रहा था तो मैं मेरी सास के रूम में चली गयी.

मेरी सास मुझे देख कर हैरान हो गयी थी. लेकिन अब मुझसे रहा नही जेया रहा था.

सास: बेटा ये क्या कर रही हो तुम?

मैं: मा जी, अब मुझसे रहा नही जेया रहा है.

इतना बोलती ही मैं अपनी सास को किस करने लगी. मेरी सास पहले शॉक्ड थी, पर धीरे-धीरे मेरा साथ दे रही थी. मैं मेरी सास को किस कर रही थी. साथ ही में उनकी सारी भी उतार रही थी. वो भी मेरे बूब्स दबा रही थी. यहाँ आके उनका एक नया रूप देखने मिला था. मैने मेरी सास की सारी उतार दी थी. अब वो ब्लाउस और पेटिकोट में आ गयी थी. फिर हमने अपनी किस तोड़ी.

सास (लंबी-लंबी साँस लेते हुए): बेटा मुझे लगा नही था मैं तेरे साथ भी ऐसे मज़े कर पौँगी.

मैं (लंबी-लंबी साँस लेते हुए): अभी तो शुरुआत है.

इतना बोलते ही हम दोनो अपने-अपने बचे हुए कपड़े उतार देते है. उनके बड़े-बड़े बूब्स और वो वाइल्ड छूट मेरा होश खो रहे थे. मैं उनसे लिपट के उनके साथ बेड में आ जाती हू. हमारा बदन एक-दूसरे को स्पर्श कर रहा था. उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे बूब्स से टच हो रहे थे.

मैं उनको जहा-तहाँ किस कर रही थी, और वो भी मुझको किस कर रही थी. मैं कभी उनके बूब्स दबाती तो कभी छूट सहलाती. बहुत मज़ा आ रहा था. वो भी मेरे साथ ऐसा ही कर रही थी. मेरा बेटा ज़्यादा बड़ा नही हुआ था, तो मेरे बूब्स के दूध आता था, तो वही दूध मेरी सास मज़े से पी रही थी.

मैं: आहह मा जी, मेरे बच्चे के हिस्से का दूध पी रहे हो.

सास: मेरा तो आता नही अब, वरना मैं ही पीला देती अपने पोते को.

मैं: मा जी आ सकता है. कल आपने देखा नही दीपक कैसे मुझे छोड़ रहा था आपके बारे में सोच के.

सास: उफफफ्फ़ उम्म्म हा देखा बेटा, देखा मैने.

फिर मैने अपना हाथ आयेज किया और अपनी सास की छूट में डालने लगी. मेरी सास मचल गयी.

सास: अया बेटा, आराम से, उम्म्म मज़ा आ रहा है.

इतना बोलते ही वो मेरे बूब्स ज़ोर से चूसने लगती है.

मैं: उम्म्म मा जी. अभी तो दो उंगली है, जब असली का लंड मिलेगा तब क्या करोगी?

सास: किसका लंड बेटा?

मैं: और किसका, दीपक का. कल तो आप भी मज़े ले रही थी बाहर से.

सास: अया बेटा, ऐसे डाइरेक्ट बेटे से कैसे कर लू?

मैं: अछा तो आपको पहले दूसरा लंड भी चाहिए क्या?

इसमे मेरी सास कुछ नही बोली तो मैने अपना फोन लिया और एक मेसेज किया. फिर हम दोनो उठ के बैठ गये. उसके बाद मैने अपनी छूट को उनकी छूट के उपर रखा और अपने हिप्स उठा-उठा के अपनी छूट को उनकी छूट से रगड़ने लगी. हम दोनो ससिस्सोरिंग कर रहे थे, मतलब जैसे दो कक़ची आपस में लड़ती है, वैसे ही हमारी छूट आपस में लड़ रही थी.

सास: अया उम्म्म, बेटा मुझे तो लगता था की सिर्फ़ एक मर्द ही मज़े दे सकता है. बेटा बहुत मज़ा आ रहा है, उफफफ्फ़.

मैं: हा मा जी, अभी मेरे से मज़े लेलो. मर्द भी बुलाया है आपको मज़े देने के लिए.

इतना बोलते ही मैं अपनी सास को दोबारा से किस करने लगी. मैं अभी अपने आप को भाग्यशाली समझ रही थी की में अपनी सास के साथ मज़े ले रही थी. हम दोनो की छूट बहुत गीली हो चुकी थी. हमारे हिप्स की स्पीड उतनी ही थी. हमारी साँसें आपस में टकरा रही थी. किस करते समय हमारी जीभ आपस में संपर्क कर रही थी.

बीच-बीच में हम आपस में एक-दूसरे हो टाइट हग भी कर रहे थे. हग करते समय हमारे बूब्स आपस में टच करने लगे. आप लोग इमॅजिन करो की दो महिलाओं के बड़े-बड़े बूब्स जब आपस में टच करते है, तो वो दृश्या देखने लायक होता है.

हम दोनो अपने चरमसुख को अनुभव करने वाले थे, तभी मेरे दिमाग़ में ख़याल आया. मैने हमारी लेज़्बीयन चुदाई को तोड़ा विराम दिया और बोली-

मैं: मा जी, मज़ा तो बहुत आ रहा है. और मैने आपकी छूट का स्वाद लेना है.

सास: बेटा ये तेरे ससुर जी किया करते थे. तब से इस छूट का स्वाद किसी ने नही लिया.

मैं: अर्रे मा जी, अब मैं हू ना ना, कोई टेन्षन की बात नही. लेकिन आपको मेरी छूट भी चाटने होगी.

इतना बोलते ही मैने नीचे लेती और अपनी सास को अपने उपर लिया. उनका फेस मेरी छूट पर, और उनकी छूट मेरे मूह के पास थी. हमने एक-दूसरे की छूट का स्वाद लेना शुरू किया. हुमको बहुत मज़ा आ रहा था. हमारी छूट बहुत गीली थी. थोड़ी देर की छूट चटाई में दोनो साथ में झाड़ गये. सास को ऑर्गॅज़म देके बहुत मज़ा आया.

हम दोनो अब झाड़ चुके थे और आपस में लिपट के लेते हुए थे. तभी बाहर से आवाज़ आई, “डार्लिंग तुमने बुलाया और मैं चले आया”. इस आवाज़ के साथ वो मर्द आ गया था जिसको मैने मेसेज किया था.

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