बहन ने भड़काई भाई की वासना की आग

हेलो फ्रेंड्स, मैं रॉनी फिर से हाज़िर हू एक नयी इन्सेस्ट स्टोरी के लिए. असल में इसे पार्ट 2 कहे तो ज़्यादा बेटर होगा क्यूंकी जैसा की मैने पिछली स्टोरी में बताया था की रूमा दी की 2 कहानियाँ है. ये दूसरी वाली है जो रूमा दी के खुद के साथ हुई. जो नही जानते वो “सीमी-रिमी की गंदी लोवे स्टोरी” पढ़ ले. तो छाईए शुरू करते है.

हेलो दोस्तों. मैं रूमा घोष कोलकाता से. मैने कहा था सीमी की कहानी के बाद मैं अपनी स्टोरी शेर करूँगी. तो मैं फाइनली शेर कर रही हू.

मेरी आगे अभी 24 की है और हाइट 5’6″. साथ में मेरे मम्मी-पापा और एक छ्होटा भाई है आशु, जो मेरे से 5 साल छ्होटा और हाइट 5 फीट है. मेरा करेंट्ली फिगर 38द-36-38 है. पहले मैं ऐसी नही थी. मैं बचपन से थोड़ी सी हेल्ती रही हू. मोटी नही, बुत भरा-भरा सा गोरा शरीर है. मेरे तब 32″ के ब्रेस्ट्स थे. आब्वियस्ली 38″ मेरे भाई ने किया है.

पापा मेरे बिल्डर है. मेरी मम्मी हाउसवाइफ है. वो गोरी और गोल-मटोल है, पर सेक्सी दिखती है. अपने टाइम पे पटाखा थी. ऐसे घर पे निघट्य या सारी पहनती है, पर मॉडर्न कपड़े जैसे त-शर्ट जीन्स या फ्रॉक स्कर्ट भी पहनती है बाहर. उनका फिगर 38-36-38 है. टीनेजर्स से लेके अंकल्स तक सब मम्मी को लाइन मारते है. मैने अक्सर देखा है टीनेजर्स को उनका क्लीवेज देखते हुए, जब मम्मी झुकती है. मुझे बड़ी हस्सी आती है.

खैर मैं अपने पे आती हू. मैं मम्मी जितनी गोरी नही, पर फेर रंग है. जैसे की पहले बताया हेल्ती हू मोटी नही. हमारी फॅमिली थोड़ी ओपन माइंडेड है. छ्होटे कपड़ों के मामले में मुझे थोड़ी आज़ादी है. जैसे त-शर्ट, माइक्रो टॉप, मिनी स्कर्ट, हाफ पंत, शॉर्ट्स पहनने की छ्छूट है. ज़्यादा नही, पर तोड़ा सा क्लीवेज दिखता है तो चलता है.

कभी-कभार घर पे ब्रा नही पहनती और ये मम्मी को पता है. बस कभी-कभार सावधान रहने को कहती थी, क्यूंकी भाई बड़ा हो रहा था, और कपड़ों के उपर से निपल्स दिखते थे. उसकी नज़र पड़ी तो बुरा असर पड़ेगा. पर मम्मी को क्या पता मैं खुद ही एक दिन भाई से अपना सील तुद्वौनगी.

भाई मेरा छ्होटा है पर बड़ों की तरह ज़िम्मेदारी अभी से लेना शुरू कर दिया है. समान लाना, एलेक्ट्रिसिटी बिल्स पे करना सब सीखने लगा है. स्मार्ट हो गया है कम उमर मे. कभी-कभार मुझे भी दाँत देता है और सच में उसके बाद मेरी हिम्मत नही होती बोलने की.

पर मुझे ये बात उसकी पसंद है. वो बोल्ड और डॉमैनेटिंग हो रहा है, जिसका मुझे बाद में फ़ायदा होने वाला था. अब कहानी पे आते है. हम लोगों दीघा से लॉट आए. सीमी-रिमी की कहानी मेरा दिमाग़ ऐसा खराब कर दिया था, की घर लौट-ते ही मेरी नज़र भाई को ढूँढने लगी.

पता चला वो नहाने गया था. ये सुनते ही उसका नंगा बदन मेरी आँखों के सामने घूमने लगा. फिर मेरी छूट में खुजली होने लगी. मुझे गर्मी लगने लगी. मम्मी ने ठंडा पानी दिया. मैं पानी पी ही रही थी की भाई रूम में टवल पहने आ गया.

मेरे गले में ऑलमोस्ट पानी अटक गया. भाई के बदद पे पानी की बूंदे चमक रही थी. मैं पहली बार अपने भाई को इस नज़र से देख रही थी. मुझे शरम आने लगी और मैने नज़र नीचे कर ली.

आशु: अर्रे दीदी तुम कब आई?

मैने नज़र नीचे करके ही कहा: बस आधा घंटा हुआ.

आशु: बहुत मज़े किए तुम लोगों ने?

मुझे वो सारी बातें याद आ गयी: हा मज़ा तो बहुत आया. तू कॉलेज नही गया अभी तक?

आशु: क्या दीदी, भूल गयी क्या आज सॅटर्डे है. दो दिन अभी फुल घर पे ही हू.

मेरे हाथ काँपने लगे, और मैं बोली: अछा हा, ठीक है.

मम्मी किचन से चिल्लाई: रूमा नहा के आ, नाश्ता लगा देती हू.

मैं वहाँ रह ही नही पा रही थी. ये मौका देख के मैं वहाँ से भाग के बातरूम में घुस गयी. मेरी साँसें चढ़ि हुई थी. मैं तो पागल होने लगी थी. मेरा पूरा बदन गरम हो गया था. फिर मैने अपने आपको संभाला. मैने अपना त-शर्ट और जीन्स उतार दिए. हमारे बातरूम में एक आईना है सिर से पावं तक देखने के लिए.

मैं जब ब्रा पनटी में थी तो मेरी नज़र आईने पर पड़ी. मैने ब्लॅक ब्रा और पनटी पहना था, जिससे मेरा बदन और गोरा लग रहा था. मैं अपने आपको चारों और से देखने लगी. जैसा मैने पहले भी कहा था की मैं थोड़ी हेल्ती हू, तो तोड़ा सा मेरा पेट निकला है.

मेरी बगल के आस पास थोड़ी सी चर्बी है. मैं अपना पेट दबा के देखने लगी और अचानक से ख़याल आने लगा की अगर मैं आशु के सामने ऐसे जौ तो क्या मुझे वो पसंद करेगा? मोटी समझ कर हासेगा तो नही?

फिर मैने सोचा और अपनी ब्रा खोल दी. मेरे नन्हे 32″ के बूब्स बाहर आ गये. मैने कुछ देर अपने बूब्स को निहारा. फिर पकड़ के तोड़ा मसल के देखने लगी. फिर सोचने लगी मेरी बॉडी के हिसाब से मेरे बूब्स बहुत छ्होटे है. क्या भाई को ये पसंद आएँगे?

फिर मैने पनटी भी उतार दी और नंगी अपने को देखने लगी. मेरा पिछवाड़ा बहुत गोरा और बड़ा है. ये तो ज़रूर पसंद होगा. बुत मैं तो चाहती हू वो मेरे बूब्स से छूट सब का दीवाना हो. ये सब सोच ही रही थी की बाहर से भाई ने ज़ोर से नॉक किया-

आशु: दीदी टवल लेलो.

मैं बहुत ज़ोर से दर्र गयी. कुछ बोल ही नही पाई.

आशु ने फिर से नॉक किया: दीदी टवल लेलो.

मुझे समझ नही आ रही थी कैसे रिक्ट करू. मैं पूरी नंगी खड़ी थी अंदर और सारे कपड़े भीग चुके थे. फिर भी काँपते हुए गले से कहा: हा रुक जेया, लेती हू.

बोल तो दिया पर लू कैसे? फिर सोचा क्या आज ही बॉडी दिखा डू उसे? नही कुछ उल्टा हो गया तो? पर ऐसा मौका शायद नही मिले. इसी में फ़ससी थी की भाई ने फिर से नॉक किया. मैं बिल्कुल हड़बड़ा गयी और दरवाज़े की कुण्डी खोली और हल्के से दरवाज़ा हटाया.

आशु: आप क्या कर रही थी इतनी देर? ये लो.

उसने टवल बढ़ाया और मैने काँपते हुए एक हाथ बाहर निकाला. फिर टवल लेके दरवाज़ा बंद कर दिया. मैं घबरा गयी थी. फिर धीरे-धीरे शांत हुई. मुझे लगा की मैने ग़लती कर दी. शीत अछा मौका था. मैं अपने को कोसने लगी. थोड़ी तो अपनी बॉडी दिखा ही सकती थी. किस बात की शरम आ रही थी? इतनी खुजली का क्या फ़ायदा जब इतनी शरम आती है?

मैं नहा के बाहर निकली. फिर नाश्ता किया और सारा दिन गुज़ारा. रात में मैं बेड पे दिन में जो हुआ उसके बारे में सोच रही थी. मुझे अब भी गुस्सा आ रहा था अपने पे. फिर मैं पता नही कब सो गयी.

सूबा उठी तो आज पता नही कैसे, पर मॅन में बिल्कुल दर्र नही था. तान लिया था की तोड़ा-तोड़ा ही सही, पर मैं भाई को अपना बदन दिखौँगी ही.

नहाने का टाइम हुआ. आशु वापस आया. कल की तरह मैं घबराई नही और उससे कुछ देर बात किया. हलकी उसका भीगा बदन देख के अब भी गरम हो रही थी, पर मैने नज़र नही हटाई. फिर मैं नहाने गयी, टॉप और पंत उतारी, पर ब्रा पनटी रहने दिया. फिर मैने वेट किया. और ठीक कुछ देर में भाई फिर से टवल लेके आया.

आशु: दीदी टवल, फिर से भूल गयी?

आज मैं घबराई नही और दरवाज़ा खोला और आधी बॉडी अंदर रख के सिर्फ़ लेफ्ट पोर्षन दिखाते हुए टवल लिया. पर कुछ नही हुआ. वो टवल पकड़ा के चला गया. मैं मायूस रह गयी. फिर मैने सोचा कुछ दिन ऐसे करते है. धीरे-धीरे मैं ज़्यादा बाहर अवँगी. कभी तो उसपे असर होगा.

अगले दिन भी ऐसा ही किया. मैं आधा पोर्षन बाहर रख के उससे टवल लेती, और वो देख के चला जाता. फिर कुछ दीनो बाद तोड़ा और बाहर आने लगी. एक दिन तो मैने नोटीस किया उसने एक बार उपर से नीचे देखा. बुत फिर चला गया. कभी-कभी मैं उससे बात भी करती थी, ताकि तोड़ा और टाइम मिले दिखाने.

हफ्ते भर बाद फाइनली मैने टवल लेने के लिए पूरा दरवाज़ा खोल दिया और ब्रा पनटी में बाहर आ गयी. आज भाई एक-दूं से हिल गया. उसकी आँखें बड़ी हो गयी और गाल शरम से लाल हो गये. मैने ये नोटीस किया. फिर अंजान बन के टवल लेके घूम गयी.

मैने दरवाज़ा खुला रखा और पोंछने लगी. मैने सामने आईने में देखा की भाई मुझे उपर से नीचे देख रहा था. मेरी धड़कने बढ़ गयी. समझ नही आ रहा था क्या करू. फिर मैने अपने को शांत किया, क्यूंकी उस दिन की तरह मौका गावन्ा नही चाहती थी.

मैने अपना काम जारी रखा और उसे देखने दिया. उसका रिक्षन देख मुझे बहुत खुशी हुई. अब असर होने लगा. मैं भी निडर होने लगी थी और सोचा आज इसके सामने ब्रा भी खोल देते है. पर इससे पहले मैं हाथ पीछे ले गयी ब्रा का क्लिप खोलने, वो चला गया. थोड़ी देर के लिए मिस हो गया. पर ठीक है, आज काफ़ी अछा काम हुआ.

इधर मम्मी को ये ना शक हो की मैं रोज़ टवल क्यूँ भूल रही थी, मैने भाई को समझा दिया-

मैं: भाई एक काम करना, अब से जब मैं बोलू तू मुझे टवल देना.

आशु: क्यूँ दीदी, अंदर रखने की जगह है तो.

मई: नही वो शॅमपू वगेरा भी करती हू, तो गिर जाता है कभी-कभी और गीला हो जाता है. इससे अछा जब नहाना हो जाए मुझे दे जाना.

आशु: ओक दीदी.

कुछ दिन ब्रा पनटी दिखाने का खेल चला, और इसके हमे आदत हो गयी. मैं भी अब कॉन्फिडेंट होने लगी. अब से मैं दरवाज़ा खोल के उसके सामने ही बाहर आ जाती और टवल ले लेती. मैं पूरी भीगी हुई होती तो मेरे बाल मेरे बदन पे चिपके होते. इससे मैं और भी हॉट लगती. आशु मुझे और भी घूर के देखता. मुझे हस्सी आती पर मैं नॉर्मल बातें करती उससे.

फिर मैने सोचा की अब और देर तक भाई के सामने ऐसे रहा जाए और एक प्लान किया. नहाने के बाद मैं ड्रेस पहन के रूम में आती थी. पर अब जब मम्मी किचन में बिज़ी हो, तो सिर्फ़ नयी ब्रा पनटी पहनने ही रूम में आ जाती थी. ऐसे तो भाई ने मुझे ऐसे देख ही लिया था, पर अब सारा दिन उसके सामने ब्रा पनटी में घूमने लगी.

वो च्छूप-च्छूप के मुझे देखता रहता. कभी मेरी गोरी जांघों को, कभी बूब्स को. मैं भी जान-बूझ के उसके सामने झुकती थी. इतने में मैने नोटीस किया आशु का लंड खड़ा था. मेरे मॅन में लड्डू फूटने लगे. मेरी धड़कने फिर तेज़ हो गयी. अब मेरी नज़र बार-बार वहाँ जेया रही थी. आशु की नज़र पड़ी, तो वो शर्मा गया और पंत ठीक करने लगा पीछे घूम के.

ऐसा हर रोज़ का होने लगा. मैं जब तक रूम में रहती, ब्रा पनटी में ही रहती. या तो नीचे शॉर्ट्स उपर ब्रा. साथ ही हर रोज़ आशु का खड़ा लंड देखने मिलता, जिससे मेरी भी छूट से पानी आने लगता. पता नही कब ये मेरे अंदर जाएगा. मुझसे और रहा नही जेया रहा था, इसलिए मैने प्लान आयेज बढ़ाया.

error: Content is protected !!