चुदाई के लिए गयी होटेल के मालिक के पास

अंतवसना कहानी अब आयेज-

मैं ऑटो से उतार कर होटेल के सामने खड़ी हुई. दिल तेज़ धड़क रहा था. अंदर कदम रखा. मेरी नज़र काउंटर पर लाला जी पर पड़ी.

मैं उनके पास गयी और स्माइल के साथ बोली: एक प्लेट समोसा देना.

वो बिना सरर उठाए पैसे लिए और चेंज वापस कर दिया. उन्होने मुझे देखा तक नही था. मैं थोड़ी देर खड़ी रही. जब उन्होने नज़रें उठाई और उनकी आँखें मुझ पर पड़ी, तो उनका हाथ हवा में ही रुक गया. उनके चेहरे पर सर्प्राइज़ और हैरानी सॉफ दिख रही थी. उनकी आँखें बड़ी हो गयी.

लाला की नज़र सीधे मेरी भरपूर बूब्स पर गयी, जो सारी में सॉफ उभर रहे थे. फिर उसकी आँखें मेरी पतली कमर पर ठहरी. उसकी नज़र मेरी गोल गांद पर भी थी. उसका चेहरा तोड़ा लाल हो गया.

मैने भी उनको हल्की सी स्माइल दी. वो शुरू में कुछ बोले नही, अपनी नज़रें इधर-उधर घूमने लगे.

कुछ पल की खामोशी के बाद, जब उन्होने देखा की कोई और नही था, तो उनके चेहरे पर राहत और फिर एक सवाल आया: किसके साथ आए है?

मैं: बस आज तो अकेली आई हू.

मेरी बात सुनते ही उनकी आँखें चमक गयी. उनके चेहरे पर खुशी दिख रही थी. उसके बाद उन्होने मुझे उसी जगह पर बिताया जहाँ मैं सुरेश भैया के साथ बैठी थी. होटेल का वो कॉमपार्टमेंट जहाँ प्राइवसी थी. उन्होने मुझे वहाँ तक छ्चोढा.

जब मैं बैठ गयी, तो उन्होने एक वेटर को इशारा किया और वहाँ से जाने लगे. पर वो मेरे से बात करने का बहाना ढूँढ रहे थे. कुछ ही पलों में वो फिर से मेरे टेबल के पास आ गये.

लाला: क्या चाहिए आपको? समोसा कैसा लगा?

मैं: समोसा तो अछा है. और आप इतने बिज़ी रहते है क्या हमेशा?

लाला: हा, काम तो रहता ही है. पर आप जैसी हसीन कस्टमर के लिए तो टाइम निकल ही जाता है. आप कितनी देर रुकेंगी यहाँ?

मैं: वो तो आप पर डिपेंड करता है लाला जी. जितनी देर आप मुझे कंपनी देंगे, उतनी देर रुक जौंगी.

मेरी बात सुन कर उनके चेहरे पर एक नॉटी स्माइल आ गयी. उनकी बातों में डबल मीनिंग थी. उनकी आँखों में सॉफ इशारा था.

लाला: अछा? तो आपको कंपनी चाहिए? पर मेरी कंपनी, वो तो बहुत ख़ास होती है.

मैं: बहुत ख़ास? क्या ख़ास देती है आपकी कंपनी?

मेरी बात सुन कर लाला की आँखों में चमक और बढ़ गयी. वो तोड़ा और मेरे करीब झुक गये.

लाला: मेरी कंपनी में आपको वो मिलेगा जो कोई और नही दे सकता. पूरी प्राइवसी, पूरा सुख… और ऐसा मज़ा की आप बार-बार आना चाहेंगी.

उनकी नज़रें मेरे डीप क्लीवेज पर ठहर गयी थी. उनकी साँसों की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी.

मैं: ओह हो लाला जी, आप तो बड़े वादे कर रहे है. पर मैं कैसे यकीन करू?

मैने उनको और टीज़ करना चाहा. उनके चेहरे पर बेचैनी सॉफ दिख रही थी. वो होंठो को चाटने लगे.

लाला: यकीन तो आपको करना पड़ेगा. हमारे यहाँ जो एक बार आता है, वो वापस खाली हाथ नही जाता. और आपको तो मैं बिल्कुल भी खाली हाथ नही जाने दूँगा.

उनकी आवाज़ में लालच और बेसब्री थी. वो सॉफ-सॉफ इशारा दे रहे थे.

मैं: भरोसा तो तब होगा, जब कुछ दिखेगा. सिर्फ़ बातों से क्या होता है, लाला जी? कभी-कभी कुछ करके भी दिखना पड़ता है.

मेरी इस बात ने लाला के चेहरे पर जोश भर दिया. उसकी आँखें और चमक उठी, और उसके चेहरे पर ऐसी नॉटी स्माइल आई. वो एक पल के लिए सीधा खड़ा हुआ. उसके बाद उसने गहरी साँस ली और फिर से मेरे करीब झुक गया.

लाला: दिखाने के लिए तो मैं तैयार हू. बस आपकी हा का इंतेज़ार था. तो क्या आप तैयार है, मेरा ख़ास कंपनी देखने के लिए? यहाँ, या कहीं और?

मैने उसकी आँखों में देखा. उसके चेहरे पर बेसब्री सॉफ दिख रही थी, और उसकी नज़रें मेरे होंठो पर थी. एक पल की खामोशी रही.

मैं: मैं आपकी मेहमान हू, अब वो सब आप पर डिपेंड करता हे.

मेरी बात सुन कर लाला के चेहरे पर एक बड़ी, भूखी मुस्कान आ गयी. वो समझ गया था. उसने अपनी आँखें एक पल के लिए बंद की, और फिर मेरे हाथ की तरफ बढ़ा.

उसका हाथ धीरे से मेरे टेबल पर रखे, हाथ की तरफ बढ़ा, और उसने मेरी उंगलियों को हल्की सी छ्छू लिया. एक पल के लिए उसकी नज़रें मेरी नज़रों से मिली.

मैने नज़रें झुका ली और शर्मा गयी. मेरे चेहरे पर लाली आ गयी थी. मेरे अंदर अजीब सी उत्तेजना थी. मेरी साँसें तेज़ हो गयी थी.
मैने अपने आप को तोड़ा और पीछे किया, पर मेरे चेहरे की स्माइल वही थी.

लाला ने मेरी नज़र झुकते ही समझ लिया. उसने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ लिया. उसका हाथ गरम और मज़बूत था. उसने हल्का सा दबाव डाला.

मैने उसकी तरफ देखा नही, बस हल्की सी आँखें उठाई और फिर झुका ली. इस बार मेरी स्माइल और गहरी थी. ये मेरी हा थी. उसने भी मेरी नज़रों का मतलब समझ लिया. वो अपनी कुर्सी से उठा, और मेरा हाथ अब भी उसके हाथ में था.

लाला: तो चलते है? वहाँ आपको मेरी कंपनी का असली मज़ा मिलेगा.

उसने धीरे से मेरे हाथ को खींचा. मेरे जिस्म में करेंट सा दौड़ गया. मैं जानती थी क्या होने वाला था. मैं धीरे से अपनी कुर्सी से उठी. उसने मुझे कॉमपार्टमेंट से बाहर निकाला. मैने धीरे से अपना हाथ वापस खींच लिया और कहा, “कोई देख ना ले.”

लाला ने मेरी बात सुनी और इधर-उधर देखा. उसके चेहरे पर समझदारी और एक नॉटी स्माइल थी. उसने बिना कुछ बोले, मुझे अपने स्टाफ से च्छूपा कर होटेल के अंदर एक तरफ से उपर की सीढ़ियों की तरफ इशारा किया, जो सीधे एसी रूम की तरफ जेया रही थी. हम दोनो धीरे से, बिना किसी की नज़र में आए, उपर की और बढ़ने लगे.

मैं और लाला जी, तेज़ कदमों से सीढ़ियाँ चढ़ने लगे. हर कदम के साथ मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो रही थी. मुझे पता था मैं क्या करने जेया रही थी.

लाला जी मुझसे एक कदम आयेज चल रहे थे. उनकी चाल में एक भरपूर मर्दाना अकड़ थी. सीढ़ियाँ चढ़ते हुए मेरा पल्लू तोड़ा सरक गया, जिससे मेरे उभरे हुए बूब्स का क्लीवेज दिखने लगा. मैने एक पल को सोचा की इसे ठीक कर लू, पर फिर मैने खुद को रोक लिया. लाला जी ने एक बार पीछे मूड कर देखा और मुझे नॉटी स्माइल दिया और मैं शर्मा गयी.

उपर पहुँचते ही, एक गलियारा था जिसमें काई कमरे थे. लाला जी ने एक दरवाज़े के पास जेया कर अपनी जेब से चाबी निकली, और धीरे से दरवाज़ा खोला. कमरा अंदर से तोड़ा अंधेरा था. जैसे ही हम अंदर दाखिल हुए, उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.

कमरा काफ़ी बड़ा था, लेकिन अंधेरे की वजह से सब कुछ सॉफ नही दिख रहा था. लेकिन बहुत ही छ्होटी दीं लाइट जल रही थी. जब लाला जी ने लाइट चालू की तो देखा एक बड़ी सी डबल बेड थी. कमरे में एक धीमी सी, मीठी खुश्बू फैली हुई थी.

लाला जी ने मुझे कमरे के बीच में ला कर खड़ा किया और फिर धीरे से मेरे पीछे आ गये. उन्होने मेरी कमर पर अपना हाथ रखा. उनकी उंगलियों ने मेरे पल्लू को हल्का सा उठाया. उनकी साँसों की गर्मी मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी. मेरे रोंगटे खड़े हो गये.

लाला: तो, तैयार है मेरी कंपनी का असली मज़ा देखने के लिए?

मैने अपनी आँखें बंद कर ली. मैं और एक नये लंड से चूड़ने के लिए मचल रही थी. मैने धीरे से सिर हिलाया. लाला जी ने मेरी सहमति को महसूस किया और उनके हाथो का दबाव मेरी कमर पर बढ़ गया. उन्होने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे कान के पास आ कर फुसफुसाए.

लाला: मैने आपको उस दिन वो अंकल के साथ देखा तब से तुम्हारा दीवाना हो गया हू. आज आपको वो सुख मिलेगा, जो आपने कभी सोचा भी नही होगा. आज मैं आपको अपनी बना लूँगा.

उनकी आवाज़ में एक अधिकार था, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था. उनकी एक उंगली मेरे कंधे से नीचे सरक्ति हुई मेरे ब्लाउस के किनारे तक आ गयी. मेरे जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गयी.

मैने धीरे से अपनी आँखें खोली और पलट कर लाला जी की तरफ देखा. उनके चेहरे पर एक ऐसी शरारत थी, जिसे देख कर मुझे भी मज़ा आ रहा था.

मैं: इतना आसान नही होगा लाला जी. आपको मुझे इंप्रेस करना होगा.

लाला जी ने मेरी बात सुनी और एक पल के लिए हंस पड़े. उनकी हँसी में एक मर्दाना अकड़ था.

लाला: मुझे पता था की आप इतनी आसानी से नही मानेंगी. लेकिन मुझे चुनौती पसंद है. तो बताइए, कैसे रिझौं आपको?
मैने अपनी गर्दन थोड़ी सी झुकाई और अपनी आँखें उनकी तरफ उठा कर देखा.

मैं: अपनी कंपनी का सबसे ख़ास पहलू दिखाइए, लाला जी.

लाला जी ने मेरी बात सुनी और उनकी आँखों में फिर से वो चमक आ गयी. उन्होने धीरे से अपना हाथ मेरी कमर से हटाया और मेरे चेहरे को अपनी हथेली में लिया. उनका स्पर्श नरम और उत्तेजक था.

लाला: मुझे लगता है, अब बातों का समय ख़तम हो गया है. अब कुछ करने का समय है.
वो बिना और कुछ कहे, धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो के करीब लाए. मेरे दिल की धड़कन और तेज़ हो गयी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली और उनका इंतेज़ार करने लगी.

लाला जी के होंठ मेरे होंठो के करीब आए और एक नशीला एहसास मेरे पुर जिस्म में दौड़ गया. उनकी साँसों की गर्मी, उनके पर्फ्यूम की हल्की खुश्बू, सब कुछ मुझे मदहोश कर रहा था. मैने अपनी आँखें बंद कर ली थी और मेरे होंठ उनके स्पर्श का इंतेज़ार कर रहे थे. उन्होने बहुत धीरे से मेरे होंठो को चूसना शुरू किया. ये सिर्फ़ एक किस था, लेकिन इसने मेरे अंदर की सारी दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया.

उनके होंठो का दबाव बढ़ा और हम एक गहरे किस में खो गये. उनका एक हाथ मेरी कमर पर था और दूसरा मेरे गालों पर. मेरे होंठ उनके होंठो का जवाब दे रहे थे. लाला जी मुझे किस करते हुए मेरी सारी के उपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे और दूसरे से मेरी गांद को मसल रहे थे. मैने अपने हाथ उनके कंधों पर रख दिए और उन्हें और कस्स कर अपनी तरफ खींच लिया.

हमारा किस वाइल्ड होता जेया रहा था. लाला जी ने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो से अलग किए और मेरी गर्दन पर अपनी नज़रें टीका दी. उनकी साँसें तेज़ थी और उनकी आँखों में अलग ही चमक थी. उन्होने मेरी गर्दन पर हल्के-हल्के किस देने शुरू किए, जिससे मेरे पुर जिस्म में सिहरन दौड़ गयी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली और इस पल का पूरा मज़ा लेने लगी.

लाला: क्या अब भी आपको लगता है की मैं आपको इंप्रेस नही कर पौँगा?

उनकी इस बात ने मेरे चेहरे पर एक नॉटी स्माइल ला दी. मैने अपनी आँखें खोली और उन्हें देखा.

मैं: अभी तो सिर्फ़ शुरुआत है, लाला जी. असली मज़ा तो अभी बाकी है.

मेरी बात सुन कर लाला जी मुस्कुरा दिए. उन्होने मेरे ब्लाउस के हुक पर अपना हाथ रखा. मुझे समझ आ गया की अब क्या होने वाला था. मेरे दिल की धड़कनें फिर से तेज़ हो गयी.
लाला जी ने धीरे से मेरा पल्लू एक तरफ सरका दिया और मेरे ब्लाउस के हुक्स को खोलना शुरू किया. मेरे जिस्म में एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी, एक उत्तेजना.

जैसे ही उन्होने मेरा ब्लाउस निकाला मैं उनके सामने हाफ कप रेड ब्रा में खड़ी थी. लाला जी की नज़रें मेरे बूब्स पर टिक गयी और उनकी आँखों में वासना सॉफ झलक रही थी.
उन्होने अपनी हथेली से मेरे एक बूब को च्छुआ. उन्होने धीरे से मेरे बूब्स को सहलाना शुरू किया. मैं पूरी तरह से उनके आगोश में डूब चुकी थी.

लाला: आप इतनी खूबसूरत है. मैने आज तक ऐसा फिगर नही देखा. आपका हर बॉडी पार्ट मुझे अपनी तरफ खींच रहा है.

मैं (अपनी सारी का पल्लू ठीक करते हुए, नॉटी स्माइल देते हुए): अछा जी?

मैं धीरे-धीरे उनसे डोर होने लगी. वो मेरे पास आते तो मैं नॉटी अंदाज़ में उनको सिड्यूस करने लगी. मैं उनके सामने रेड सेक्सी ब्रा और सारी में सेक्सी मूव देने लगी.

मुझे उनकी पंत के उपर से लंड का उभार सॉफ दिख रहा था. उनके पंत के उपर बड़ा तंबू बन गया था, जिससे मैं समझ गयी थी की लाला जी का लंड बड़ा होगा. मैं उनके सामने गांद मटकाने लगी और मेरी अदाओं से उनको घायल कर रही थी.

लाला जी ने मुझे उपर से नीचे तक देखा, और उनके चेहरे पर एक बेचैनी सॉफ दिख रही थी. उनकी साँसें तेज़ हो गयी.

लाला: अब और इंतेज़ार नही होता.
उन्होने धीरे से अपने कपड़े उतारना शुरू किया. पहले अपनी शर्ट, फिर अपनी पंत. उनका गरम और मज़बूत जिस्म मेरे सामने आ रहा था. उनकी चौड़ी छ्चाटी, सब कुछ मुझे और उत्तेजित कर रहा था.

और फिर जब उन्होने अपनी
अंडरवेर उतरी, तो उनका बड़ा और मज़बूत लंड मेरे सामने था. वो पूरी तरह से उत्तेजित था.

मैं उसकी तरफ देखती रह गयी, मेरी साँसें रुक सी गयी थी.
लाला जी मेरे करीब आ गये. मेरे अंदर एक अजीब सी कसक थी. मैं बिना देरी किए उनके सामने घुटनो पर बैठ गयी. मेरे हाथो ने उनका लंड थाम लिया. ये एक नया एहसास था, एक अलग गर्मी. मैं उसे हिलने लगी.

जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनके लंड पर फिरी, मुझे एक अजीब सी चुभन महसूस हुई. ये पहले देखे किसी भी लंड से अलग था. उपर का हिस्सा कटा हुआ था, बिल्कुल नंगा. हैरानी से मेरी आँखें बड़ी हो गयी. मैने नज़र उठा कर लाला जी को देखा, उनके चेहरे पर एक नॉटी स्माइल थी.

मैं: लाला जी, आपका लंड ऐसा क्यूँ है? ये कटा हुआ सा क्यों है?

वो मुस्कुरा कर बोले, उनकी आँखों में चमक थी: लगता है आपने पहली बार किसी मुस्लिम का लंड देखा है.

उनकी बात सुन कर मेरे पुर जिस्म में एक झटका सा लगा. उनकी बात सुन कर मेरे अंदर एक अजीब सी आग दौड़ गयी. मैं सोच कर और गरम हो गयी की आज एक मुस्लिम मर्द मुझे छोड़ेगा.

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