उधारी के बदले भाभी की चुदाई

हेलो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है. ये सेक्स कहानी मेरे गाओं की है. मुझे गाओं में भाभी अक्सर गुरु राहुल बोलती है. वो क्यूँ बोलती है, वो किसी और कहानी में बतौँगा. ये कहानी है सीमा भाभी की, जिसकी छूट की प्यास बहुत ज़्यादा है.

जबलपुर के पास गाओं में एक रामू (आगे 40) नाम का व्यक्ति रहता था. उसके साथ उसकी वाइफ सीमा (आगे 35 भी) रहती थी, और घर 2 बच्चे भी थे 8 और 9 साल के. रामू को अपने लिए एक नया पक्का घर बनाना था. पक्के घर के लिए उसके पास पैसे नही थे. उसे कोई बॅंक भी लोन नही दे रही थी. उसे घर बनाने के लिए 10 लाख की ज़रूरत थी. गाओं में किसी ने सजेशन दिया की वो बलराज भाई से लोन ले ले. वो पक्का दे देंगे.

बलराज भाई का सीन ही अलग था यार. आगे 52, 6’2” हाइट, मोटा सीना, काली दाढ़ी, और वो हुमेशा कुर्ता और धोती में होते थे. रामू ने बलराज से बात की वो लोन दे दे. बलराज भी मान गया और बोला की वो हर 2 तारीख को किश्त लेने आएगा और रामू को देना होगा. रामू ने हाथ जोड़ के प्रॉमिस किया वो हर 2 तारीख को पैसे दे देगा.

रामू: बलराज भाई, हर 2 तारीख को किश्त पक्का दूँगा, एक पैसा बाकी नही रहेगा.

पहली किश्त के लिए बलराज रामू के घर गया. रामू ने उसका स्वागत किया, और अपनी पहली किश्त दे दी उसे. बलराज ने पहली बार सीमा रामू की पत्नी को देखा था. सीमा एक सावली सी गाओं की औरत थी. नॉर्मल सा बॉडी स्ट्रक्चर था उसका. सीमा ने बलराज को नमस्ते किया. बलराज ने भी उसका रिप्लाइ किया नमस्ते में.

धीरे-धीरे घर पूरी तरह बन गया. बलराज घर आता और अपनी किश्त ले जाता. कभी रामू घर में होता और कभी नही होता. उसके ना रहने पर सीमा पैसे दे देती बलराज को. रामू हुमेशा पैसा रख देते किश्त के लिए और सीमा उसे दे देती.

रामू दिन-रात मज़दूरी करता, पैसे जोड़ता, और 2 तारीख को पैसे दे देता. जब रामू घर में नही होता तो सीमा पैसे दे देती. लेकिन धीरे-धीरे सीमा और बलराज के बीच में नज़दीकी बढ़ रही थी. दोनो में हस्सी मज़ाक होने लगा था.

सीमा और बलराज के बीच में डबल मीनिंग भी बात होने लगी थी. अब जब रामू घर में नही होता, तो बलराज सीमा से मिलने आता. सीमा भी उसे छाई दे देती और बात-चीत होती रहती.

एक दिन रामू को कहीं बाहर जाना था और 2 तारीख भी आने वाली थी. रामू ने सीमा को पुर पैसे दे दिए थे बलराज को देने के लिए. अगले दिन जब बलराज आया तो सीमा ने दरवाज़ा खोला. सीमा ने बलराज को अंदर बुला लिया और छाई दे दी. फिर बात-चीत होने लगी.

फिर धीरे-धीरे बलराज उठा और सीमा के पास गया और उसके होंठो पर किस करने लगा. पहले सीमा ने तोड़ा विरोध किया, फिर धीरे-धीरे बलराज का साथ देने लगी, और वो भी बलराज के होंठो पर किस करने लगी.

काफ़ी देर किस करने के बाद दोनो अलग हुए. दोनो ने एक-दूसरे को स्माइल दी और बलराज अपनी किश्त लेके घर चला गया. रामू दिन में मज़दूरी करता और खेत संभालता और रात को अपने घर आता. दिन में बच्चे भी स्कूल चले जाते थे.

फिर 2 तारीख आई, और रामू ने पैसे अपनी वाइफ सीमा को दे दिए. अगली दोपहर को बलराज घर आया, घर में सीमे के अलावा कोई नही था. रामू तो रात को ही आने वाला और बच्चे भी स्कूल गये थे. बलराज घर के अंदर गया. सीमा ने उसे अंदर बुलाया और थोड़ी बात-चीत होने लगी.

सीमा ने आज खुद कहा: रामू रात को आएगे और बच्चे शाम को. बलराज खुश हो गया और सीमे को अपनी गोदी में उठाया और बेडरूम ले गया. बलराज ने सीमा को जैसे एक पतली सी गुड़िया उठाया हो, दोनो हाथो से उसकी गांद को ज़ोर से दबाते हुए बेडरूम में ले गया.

सीमा की साँसें तेज़ हो चुकी थी, आँखें शर्मा रही थी. लेकिन उसने एक शब्द नही बोला. पुरानी तखत पे बलराज ने सीमा को लिटाया और खुद उसके उपर चढ़ गया.

उसने सीमा के होंठ अपने मूह में ले लिए, ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. सीमा की “म्‍म्मह… म्‍म्मह…” की आवाज़े निकल रही थी. फिर बलराज ने पल्लू एक झटके में नीचे कर दिया. ब्लाउस के उपर से ही बड़े-बड़े सवले दूध दबाने लगा.

सीमा ने खुद ही ब्लाउस के बटन खोल दिए, और उसके दो बड़े-बड़े दूध बाहर आ गये. बलराज ने एक निपल मूह में लेके ज़ोर से चूसा, दाँतों से काटने लगा.

सीमा तड़प उठी, “बलराज जी… हाए… कितने दिन से मॅन कर रहा था…” बलराज ने सारी और पेटिकोट का नाडा खोला, और एक झटके में नीचे कर दिया. अब सारी और पेटिकोट भी अलग हो चुकी थी. अब सीमा ने अपनी पनटी खुद निकाल दी.

सीमा अब पूरी नंगी थी. बलराज ने अपना कुर्ता उतरा, धोती का नाडा खोला और उसने जो बड़ा वाला अंडरवेर पहना हुआ था, जो गाओं में कच्चा भी बोलते है, वो भी निकाल दिया. अब उसका 9 इंच का काला मोटा लॉडा बाहर आ गया. लंड बिल्कुल खड़ा था साँप जैसा, सीमा की आँखें फटी रह गयी.

बलराज ने उसका हाथ पकड़ के अपने लॉड पे रखा, “ले सीमा… आज से ये तेरा हुआ.” सीमा ने शरमाते हुए पकड़ा, उपर-नीचे करने लगी. फिर खुद मूह के पास ले आई, और जीभ से चाटने लगी. बलराज ने सिर दबा के मूह में तोड़ा अंदर डाल दिया. सीमा “ग्लग-ग्लग” करती हुई चूसने लगी. सीमा अब लंड को पूरी तरह चूसने लगी. बलराज का लंड सीमे के गले तक जेया रहा था.

5-7 मिनिट तक मूह छोड़ने के बाद बलराज ने लॉडा निकाला. फिर उसने सीमा की टाँगें चौड़ी की और अपना मूह उसकी छूट पे लगा दिया.

छूट में घने बाल थे, लेकिन पानी इतना था की तपाक रहा था. बलराज ने छूट को चाटना शुरू किया. वो अपनी जीभ अंदर डाल के अंदर-बाहर करने लगा.

सीमा पागल हो गयी, “हाए बलराज जी… ये क्या कर रहे हो…? रामू ने कभी नही किया…” बलराज छूट के दाने को दाँतों से काटने लगा. सीमा की कमर उपर उठ गयी और अपनी छूट को वो बलराज के मूह को दे रही थी.

10 मिनिट तक छूट चाटने के बाद सीमा दो बार झाड़ गयी. उसका पानी बलराज ने पी लिया. फिर बलराज ने सीमा को उल्टा किया और घोड़ी बना दिया. सीमा की बाड़ी सी गांद बलराज के सामने थी. उसने सीमा की गांद के बीच में अपनी जीभ डाल दी और चाटने लगा.

सीमा की चीख निकल गयी, “अर्रे… वहाँ नही… गंदा है…, बलराज ने एक नही सुनी उसने सीमा गांद के च्छेद पे थूक लगाया, और जीभ से चाटने लगा.

सीमा तड़प-ती रही, “हाए… मॅर गयी… ऐसे कोई करता है क्या…?” 8-10 मिनिट तक गांद चाटने के बाद बलराज खड़ा हुआ.

अपना लॉडा सीमा की छूट पे रगड़ा, फिर एक ज़ोर का झटका मारा. छूट इतनी गीली थी की बलराज का लंड एक बार में चला गया. सीमा की चीख पुर कमरे में गूँजी, “मा कसम… फॅट गयी… कितना मोटा है!” बल्लराज ने पीछे से गांद पकड़ के ठोकना शुरू किया. तखत “कच-कच-कच” कर रही थी.

सीमा के दूध लटक के हिल रहे थे. सीमा खुद बोलने लगी, “हा बलराज जी… ज़ोर से… फाड़ दो… आज से मैं तेरी रंडी हू…”

15 मिनिट घोड़ी स्टाइल में छोड़ने के बाद, फिर बलराज ने सीमा को सीधा लिटाया. टाँगें कंधे पे रख के मिशनरी में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा.

सीमा चिल्लाए जा रही थी, “और ज़ोर से……”

फिर बलराज ने सीमा को गोद में उठाया और खड़ा-खड़ा छोड़ने लगा. सीमा के पावं ज़मीन से उपर, दोनो हाथ बलराज के गले में. 10 मिनिट तक गोद में छोड़ने के बाद वापस तखत पे लिटाया. अब बलराज ने फिर से सीमा को लिया और छोड़ने लगा और आख़िर में बलराज ने लॉडा निकाल के सीमा के मूह में डाल दिया.

ज़ोर-ज़ोर से 10-15 धक्के मारे और पूरा माल मूह में उगल दिया. सीमा ने सारा पी लिया, एक बूँद नही गिरी. फिर लॉडा चाट के सॉफ कर दिया. दोनो नंगे ही लेट गये.

सीमा ने बलराज के सीने पे सर रख के बोला, “अब हर 2 तारीख को ऐसे ही किश्त लेना. जो रामू ने पैसे दिए थे बलराज को देने के लिए, सीमा ने उसे अपने पास रख लिया. ऐसे ही अब आए दिन होता. रामू के ना रहने पर बलराज सीमा की चुदाई करता. बदले में वो पैसा भी नही लेता किश्त के. सीमा भी प्यार करने लगी थी बलराज को.

एक बार 2 तारीख को जब बलराज घर आया हुआ था सीमा के पास, उस दिन रामू भी घर जल्दी आने वाला था. ये बात सीमा को पता नही थी. घर के अंदर बलराज सीमा की मस्त चुदाई कर रहा था, और बाहर रामू घर का दरवाज़ा खटखटा रहा था. दोनो चुदाई में इतना खो गये थे, की इन लोगों को बाहर की आवाज़ ही सुनाई नही दे रही थी.

रामू ने बहुत वेट किया. वो घर के इधर-उधर देखने लगा. जब वो बेडरूम की खिड़की के पास गया, तो उसको कुछ आवाज़ सुनाई दी. उसे कुछ अजीब लगा. वो देखने के लिए जगह ढूंदे लगा. उसे एक छ्होटा च्छेद दिखा और खिड़की से उसने अपनी एक आँख बंद करके अंदर देखा.

अंदर देख कर उसके होश उडद गये. बलराज उसकी पत्नी की चुदाई कर रहा था. रामू को कुछ समझ नही आया की वो क्या करे अब. अब वो उदास हो कर अपने घर के दरवाज़े पे चला गया और वेट करने लगा. 1 घंटे के बाद दरवाज़ा खुला. बलराज और सीमा बाहर आ गये, और बाहर रामू को खड़ा देख कर दर्र गये.

बलराज ने रामू से कहा की तू कब आया. रामू ने झूठ कहा की वो अभी-अभी आया. बलराज ने कहा की मैं तो बस अपनी किश्त लेने आया था और किश्त मुझे मिल भी गयी. किश्त के सारे पैसे सीमा अपने पास रखती और बलराज को अपनी छूट से किश्त दे देती. सीमा समझ गयी थी कों सी किश्त की बात कर रहा था बलराज.

अब रामू की सब समझ आ गया की उसकी पीठ पीछे कैसे उसकी पत्नी नंगी हो कर किसी गैर मर्द से अपनी प्यास बुझा रही थी. ऐसे कौई दिन निकल गये. बलराज आता, रामू की वाइफ से छूट की किश्त लेता, और चला जाता. एक रामू ने रास्ते में बलराज से पूछा ही लिया, “मुझे सब पता है तुम किस तरह से किश्त ले रहे हो मेरी पत्नी से.”

बलराज ने कहा, “देख रामू, तेरी पत्नी मेरे से खुश है. मैने कोई ज़बरदस्ती नही की. मैने कोई पैसे नही लिए तेरी बीवी से. अब तू पैसे अपनी पत्नी को देना भी नही. तेरा सब लोन माफ़ कर दूँगा. हर महीने की 2 तारीख को अवँगा तेरे घर.

रामू भी कुछ सोचने के बाद मान गया और अपने घर आ गया. उसने अपनी पत्नी को भी सब बता दिया की उसे सब पता था. सीमा रामू से माफी मागने लगी. उसने रामू से कहा की उसने वो सब पैसों से अपने लिए सोने का हार बना लिया था, और बच्चो के लिए भी नामा कर दिया था.

रामू ने सीमा से कहा: तुम वो सब करो जो करती आ रही हो.

सीमा हैरान थी. रामू ने कहा: मुझे कुछ ज़मीन लेनी थी. क्या तुम वो सब करोगी वो साहूकार के साथ? शायद वो पैसे भी देदे.

सीमा ने हा में जवाब दिया और हासणे लगी. रामू को पता था शायद वो थकान की वजह से सीमा को खुश नही कर पा रहा था. रामू के दिमाग़ में बहुत सारे आइडिया आ गये.

नेक्स्ट स्टोरी में बतौँगा कैसे बलराज ने सीमा की चुदाई की वो भी रामू के सामने, और साहूकार के नीचे सीमा कैसे गयी. वो नेक्स्ट पार्ट में बतौँगा.

और कैसी लगी आपको ये स्टोरी मुझे ज़रूर मैल करे.

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