चुदाई की कहानी अब आयेज से-
मेरा मॅन तोड़ा साद था, क्यूंकी मुझे रेखा की खुल के चुदाई करनी थी. उसे नंगा देखना था, और जाम के छूट और गांद मारनी थी. मुझे कोई मौका नही मिल रहा था. रेखा ने मेरे साद फेस को देखते हुए कहा-
रेखा: अर्रे क्या हुआ आपको? क्यूँ उदास दिख रहे हो? अभी तो शांत किया आपको, क्या बात है बताओ?
मैं (तोड़ा साद वर्ड्स में): कुछ नही हुआ.
रेखा माल में मेरा हाथ पकड़ कर ज़बरदस्ती साइड में लेके गयी, और अपने बेटे को वहीं रुकने को बोला. क्यूंकी वो भी मुझसे खुल के बात करना चाहती थी. साइड में लेके मुझसे बोली-
रेखा: क्या मैं आपकी कुछ नही लगती हू? आप मुझसे अपने दिल की बात नही करोगे क्या? प्लीज़ बताओ ना, मैं सब करूँगी?
मैं: यार, कल से तुझे अंधेरे में छोड़ रहा हू. मुझे तुझे खुल के प्यार करना है. तू जानती है ना मैं कितना प्यार करता हू तुझसे?
रेखा: हा, तो करो ना. मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हू. आपके लिए कुछ भी कर लूँगी. आप अनिल की वजह से खुल के प्यार नही कर पा रहे हो.
रेखा: मैं इसमे क्या हेल्प कर सकती हू? बस इतना ही कह सकती हू, आप जैसा बोलॉगे मैं वैसा करूँगी. आप मुझे कही डोर ले जाओ.
इतने में उसका बेटा हमारे पास आ गया और बोला-
अनिल: मम्मी क्या हुआ? चलो ना घूमने.
रेखा (गुस्से में): तुझे बोला ना वहाँ खड़ा रह. हम कुछ ज़रूरी बात कर रहे है. चल जेया वहाँ और खड़ा रह.
अनिल चला गया. मैने उसका गुस्सा पहली बार देखा और कहा-
मैं: क्यूँ बच्चे पर गुस्सा कर रही है? उसकी क्या ग़लती है?
रेखा: मुझे सिर्फ़ आपसे मतलब है. उसकी वजह से मैं आपको खुश नही कर पा रही हू. आप मेरे खुशी के लिए इतना कुछ करते हो.
मैं: चल कोई बात नही. मैं कुछ प्लान बनता हू.
हम साथ में चलने लगे. रेखा ने खुद से मेरा हाथ पकड़ा और साथ चलने लगी. अनिल भी साथ में आयेज-आयेज चल रहा था. मैं मौसी को वहाँ एक ज्यूयलरी शॉप पर ले गया. तो वो बोली-
रेखा: यहाँ क्यूँ? मुझे कुछ नही लेना है.
मैं: मैं तुझे कुछ गिफ्ट देना चाहता हू. माना मत कर, चल.
रेखा (आँख में आँसू लाते हुए): आप कितना प्यार और इज़्ज़त दे रहे हो. मुझे खुश रखने के लिए सब करते हो. मैं ही आपको खुश नही कर पा रही हू.
मैं: चुप हो जेया. अनिल देख लेगा.
वो फिर ठीक हुई, और हम शॉप में गये. मैने उसके एएरिंग और पैरों के लिए पायल ली. उसने कहा-
रेखा: ये सब शादी शुदा पहनती है. मैं विधवा हू, आपको पता है ना.
मैं: क्यूँ, तू मेरे बीवी नही है?
रेखा (खुश होके): लेकिन ये सब मैं सिर्फ़ आपके सामने पहनुँगी.
उसने वो सब ले लिया. उसके बाद मैने सोचा इसके लिए आज ब्रा पेंटी भी लेते है. मैं लेडी गारमेंट्स की शॉप में ले गया. अनिल को पास की आइस्क्रीम शॉप पर चॉक्लेट खिलाने बैठा दिया. वो बोली-
रेखा (शरमाते हुए): आप क्या कर रहे हो? अब क्या लेना है?
मैं: तेरे लिए ब्रा पनटी.
रेखा: बहुत बदमाश हो आप. रहने दो ना, मेरे पास है.
मैं उसे ज़बरदस्ती कमर में हाथ डाल के ले गया, और हल्का कमर नोच लिया. उसके मूह से आह निकल गया. उसने भी प्यार से मेरे पेट पर मारा. हेस्ट हुए चलने लगी. शॉप पर लड़के ने आचे-आचे ब्रा पेंटी दिखाए.
रेखा मौसी ने कॉटन की सिंपल ब्रा पनटी पसंद की. मैने वो साइड में हटा दी. वो हल्के से शरमाते हुए हासणे लगी. मैने मौसी के लिए एक नेट ब्लॅक ब्रा पनटी और एक रेड ब्रा पनटी, जिसमे छूट की तरफ गुलाब बना हुआ था.
रेखा उसे देख कर बहुत शरमाने लगी. मैने वही पॅक करवाए. उसके बाद मैने मौसी की कमर में हाथ डाला, और गांद को छूटे हुए साथ में बाहर निकला. मौसी मुझे माना नही कर रही थी. वो फुल मज़े ले रही थी.
फिर हम वहाँ से बाहर निकले. अनिल को बिके पर आयेज किया, और मौसी को पीछे बिताया. इस बार मैने उसे जैसे मैं बैठा था, वैसे बैठने को कहा. वो बिना बोले बैठ गयी. उसने अपने दोनो हाथ मेरी कमर से पकड़ लिए, और उसके बूब्स मेरे बॅक पर दबने लगे.
फिर हम जाईपुर में 3 से 4 बेस्ट जगह पर घूमे. रेखा और अनिल बहुत खुश थे. रेखा हर जगह पर मुझसे चिपक के चल रही थी. उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी. मैने उससे पूछा-
मैं: क्या बात है मेरी जान. तू आज बहुत खुश नज़र आ रही है. मेरा हाथ एक पल के लिए भी नही छ्चोढ़ रही. अब तुझे अनिल का दर्र नही है.
रेखा: मुझे किसी का दर्र नही है. आप जो साथ हो. खुशी की वजह सिर्फ़ आप हो. आपने इतनी खुशी दी है मुझे मैं कैसे बतौ.
इतना कह के उसने वहीं मुझे गले से लगा लिया. उसकी आँख में आँसू थे. मैने भी उसे गले से चिपका लिया. 4 मिनिट तक ऐसे ही रहे. अनिल वहाँ घूम रहा था तो उसका ध्यान यहाँ नही था. फिर मैने उसका चेहरा पकड़ा और उसके लिप्स पर धीरे से किस किया. उसने भी मुझे चूमा और बोली-
रेखा: वादा करो कभी मुझसे डोर नही जाओगे. मैं आपके बिना अब नही रह पौँगी. आपके आने से मुझे सब कुछ मिल गया. प्लीज़ मुझे छ्चोढ़ के मत जाना, वरना मैं जी नही पौँगी.
मैं: मेरी जान, तेरे जैसे खूबसूरत पारी को कैसे छ्चोढ़ डू? तुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करूँगा.
रेखा: सुनो, मुझे आपसे एक बात कहनी है. अभी मौका है, इसलिए कह देती हू.
रेखा: मुझे आपके लिए करवा चौथ रखना है.
मैं: क्या ज़रूरत है, ऐसे ही ठीक है ना. तू मुझसे प्यार करती है, इतना बहुत है.
रेखा: प्यार है इसलिए व्रत करूँगी. सिर्फ़ आपके लिए, प्लीज़ मुझे मत रोको आप. मेरा हक़ है पूरा आप पर.
मैं: ठीक है मेरी मा.
रेखा: अब मा नही, रेखा बोला करो आप.
वो इतना बोल के हासणे लगी. मेरा एक हाथ उसकी मोटी गांद पर था. जिसे छूटे ही लंड खड़ा हो जाता है. मैने गांद दबाते हुए कहा-
मैं: साली रंडी, तेरी ये गांद मेरा लोड्ा गरम कर देती है. तेरी गांद मारने का मॅन कर रहा है.
रेखा: उहह बाबा, धीरे दब्ाओ ना. कोई देख लेगा. सब आपका है, आपको मारनी है मार लेना गांद मेरी.
मैं: तूने पहले गांद में लंड लिया है?
रेखा: नही जी, आपके मौसा कहाँ कर पाते थे सब.
मैं:तो इसकी सील मुझे तोड़नी है. तुझे जी भर के छोड़ना है.
रेखा: मैं भी आपसे ही चूड़ना चाहती हू. आप ना बहुत ज़ोर से करते हो. प्लीज़ गांद में आराम से करना. आपका ये मोटा सा मेरी जान निकाल देगा.
मैं: मुझे अब तुझे छोड़ने का मॅन कर रहा है. मेरा मॅन नही भरा है तुझे कल छोड़ के. तुझे खुल के छोड़ना है.
रेखा: मैं भी अब आपको अपना सब देना चाहती हू. पर कैसे होगा सब? घर पर हमे अंधेरे में ही करना होगा.
मैं: मेरे पास एक प्लान है. आज मैं तुझे छोड़ के ही रहूँगा.
रेखा (हेस्ट हुए): अब क्या सोचा है आपके शैतानी दिमाग़ ने?
मैं: आज हम होटेल में रूम लेंगे. वहीं तेरी चुदाई करूँगा.
रेखा: और घर पर क्या कहेंगे?
मैं: मैं कह दूँगा अभी कॉल करके, मेरे दोस्त की बर्तडे पार्टी में है हम सब.
रेखा: वाह मेरे पातिदेव. क्या दिमाग़ पाया है. दीदी मान जाएगी ना, देख लो आप.
मैने उसी वक़्त मा को फोन किया. अभी शाम के 5 बाज रहे थे. मैने मा को सब कह दिया. हम कल सुबह तक आएँगे. मा तोड़ा नाराज़ हुई, मैने जैसे-तैसे माना लिया. मौसी भी खुश हो रही थी. मैने उसे आँख मारी.
रेखा: अब आप रात भर मुझे सोने नही दोगे. देखो कम करना आप. कल मेरा व्रत भी है.
मैं: तू चुप रह साली. आज तुझे जी भर छोड़ूँगा. मेरे लिए से नही सकती क्या?
रेखा: आपके लिए सब कर सकती हू. आप मेरे हो और मैं आपकी.
फिर मैं और अनिल, रेखा वहाँ से होटेल में गये. और मुझे उसके बेटे की वजह से 2 रूम लेने पड़े. हम रूम में गये. अनिल को मैने कहा-
मैं: अनिल, तुझे आज रात यहीं रहना है. कमरे से बाहर मत जाना. बाहर होटेल में मेरे दोस्त की पार्टी है, मौसी और मैं वहीं बिज़ी रहेंगे, ओक? चल, मैं तुझे खाना खिला देता हू.
अनिल: मुझे दर्र लगा तो?
मैने मौसी का फोन उसे दे दिया. और सब कुछ समझा दिया. मुझसे अब रहा नही जेया रहा था. मुझे मौसी को छोड़ना था. रेखा ने भी बेटे को समझाया.
रेखा: अनिल तू कहीं जाना मत. वरना कोई तुझे पकड़ के ले जाएगा. यहाँ सब कुछ है, टीवी देखना, मोबाइल ग़मे खेलना, ओक?
अनिल मान गया. मैने उसे खाना खिलाया और हमने भी खाया. इन सब में कब 7 बाज गये पता नही चला. मैने अनिल को कमरे में छ्चोढ़ दिया. फिर बाहर लॉक करके के अपने पास रखी. अनिल को चॉक्लेट और पानी सब कुछ सेट करके आया.
रेखा की कमर पकड़ कर, उसे अपने वाले रूम में ले गया. रूम में जाते ही मैने कहा-
मैं: आज तेरी जाम के चुदाई होगी. इसी रूम में खुल के छोड़ूँगा.
रेखा: वो आपकी पंत में देख कर पता चल रहा है. आज आप मेरी हालत खराब करोगे. आपके चेहरे की उदासी भी आज चली जाएगी.
रेखा: प्लीज़ बेबी, आप तोड़ा आराम से करना.
अभी नेक्स्ट पार्ट में कहानी मिलेगी. मुझे अपना फीडबॅक ज़रूर दे. मेरे मैल ईद गम0288580@गमाल.कॉम है.
थॅंक्स ड्के.