घर में बहनो का डर्टी लेज़्बीयन सेक्स

वेलकम बॅक फ्रेंड्स. पिछले पार्ट में आपने जाना कैसे रिमी लेज़्बीयन सेक्स में अपनी बड़ी बेहन से भी आयेज निकल गयी और कैसे एक डेरिंग करते वक़्त मम्मी ने पकड़ लिया. अब आगे….

रिमी: वो ये ड्रेस बहुत ढीला है. बार-बार नीचे आ रहा है.

मम्मी: तो ऐसी ड्रेस पहनती क्यूँ हो, जो संभलता नही? जेया चेंज कर ले.

रिमी: ओक मम्मी.

हम बाल-बाल बच गये और मूह च्छूपा के हासणे लगे. मम्मी को लगा वो चली गयी. पर उसकी ये बोल्डनेस से मैं गरम हो गयी और उसे खींच के अपने पास ले आई. कोयिन्सिडेंटली मुझे नही मालूम था ऐसा वक़्त आ जाएगा. मौका छ्चोढना नही चाहती थी. तो मैने रिमी के कान में कहा-

सीमी: रिमी, टाय्लेट.

उसकी आँखों में चमक आ गयी और मुझे लेके बाहर जाने लगी. मैने ठीक उस दिन की तरह उसे कहा जो उसने कहा था.

सीमी: यहीं पे.

रिमी: पर आवाज़ आएगी नही?

सीमी: खाना बनाने का इतना आवाज़ है किचन में, की सस्यू की आवाज़ पता नही चलेगा.

वो तो हमेशा से रेडी थी डेर्स के लिए. वो एक-दूं से मेरे सामने बैठ गयी घुटनो पे. मैने स्कर्ट पहना था, तो और भी आसान हो गया. रिमी मेरी स्कर्ट के नीचे घुस गयी. स्कर्ट के उपर से ना दिखने के कारण पानी यहाँ-वहाँ गिर सकता था. इसलिए मैने स्कर्ट उसके मूह से हटा दिया.

वो सच में काफ़ी डोर थी. मैं उसे सामने लाती तो मम्मी से पीठ टकरा जाती. तो मैने उसे पीछे जाने इशारा किया और मैं आयेज चली गयी ठीक उसके मूह के उपर.

देर ना करते हुए एक-दूं से मूतने लगी और पूरा पानी सीधे उसके मूह में गिरने लगा. मूह में जाते ही पानी घूनटने लगी. दो घूँट के बाद उसने मूह नीचे कर लिया क्यूंकी उसका मूह भर गया था. मैने रोक दिया और इशारे से पूछा सब ठीक है. टेस्ट अछा है या नही करना? उसने पहले सारा घोआंत लिया, तोड़ा साँस लिया और मुस्कुराने लगी और कहा वापस से करने.

मैं खुश हो गयी. अबकी बार शुरू होते साथ ही मूह भरने नही दिया, सारा घोंटने लगी और बिना एक बूँद गिराए सारा पी गयी. पर वो यहाँ नही रुकी. वो मेरी छूट को पागलों की तरह चूसने लगी. मैं भी पागल होने लगी और कुछ देर में झाड़ गयी. हमेशा की तरह रिमी ने मेरा पानी पी लिया.

पति नही आज उसे क्या हुआ. उठते ही उसने मेरे टॉप और ब्रा उठा दिए और मेरे लेफ्ट बूब को कस्स के पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी. पहली बार मुझे दर्द हो रहा था, पर बहुत मज़ा आ रहा था. दोनो बूब्स चूसने के बाद उसने पहली बार ऐसी बात बोली, की मैं डांग रह गयी.

उसने कान में कहा: रिमी, चल नंगी हो.

मैं ऐसे ही गरम थी. ऐसी बात सुन के मेरा मॅन किया उसकी गुलाम बन जौ. टॉप और ब्रा वैसे ही उपर थी, बाकी रिमी ने तंन के उतार दिया और मैने स्कर्ट उतार दी. उसने मुझे देखा और अपनी भी टॉप और शॉर्ट्स खोल दिया. फिर वो मुझे पकड़ के सोफा तक खींच ले गयी और लेट गयी. मैं भी जोश में उसकी छूट की और जेया रही थी की उसने मुझे बालों से पकड़ कर छूट में तूस दिया.

मैं वैसे ही उसकी छूट चाट-ती रही और कुछ देर में वो झाड़ गयी. इस बार उसका बहुत सारा पानी निकला. मुझे भी निगलने में टाइम लगा क्यूंकी उसने मुझे बालों से पकड़ रखा था.

मैं: वाउ. ये तो बड़ा वाइल्ड हो गया. फिर तूने क्या किया?

सीमी: उससे भीख माँगी.

मैं: मतलब?

सीमी: हम दोनो तक के पास-पास लेट गये सोफे पर. रिमी मायूस थी.

सीमी: रिमी आज तुझे क्या हो गया था?

रिमी: दीदी ई आम सॉरी, आज कुछ ज़्यादा कर दिया मैने. वैसे बात नही करनी चाहिए थी, और फिर आपके बाल भी पकड़ के खींचे.

सीमी: अर्रे इट’स ओक. मुझे बिल्कुल भी बुरा नही लगा. बुरा लगता तो तेरी बात मान के कपड़े उतरती? विस्वास कर बहुत मज़ा आया. मुझे ऐसे डर्टी सेक्स बहुत पसंद है. तू मेरे साथ ऐसा ही किया कर ना. मैं तेरी गुलाम बनने को तैयार हू.

रिमी: अर्रे दीदी ये क्या बोल रही हो? नही-नही, ऐसा मत बोलो. मैं आपसे छ्होटी हू.

सीमी: अर्रे सच में रिमी, प्लीज़ ना. तू मुझे मेरे बालों से पकड़ के खेरनच, मेरी गांद पे ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ मार, मेरे मूह पे थूक, मेरी छूट में हाथ डाल, मुझे दर्द दे. मुझे अपनी कुटिया बना के रख ना. मुझे अछा लगेगा.

रिमी: दीदी नही. ये सब नही होगा मेरे से. प्लीज़.

वो ना तो बोल रही थी, पर हल्की सी स्माइल दे रही थी. कहीं ना कहीं उसे ये सब बातें पसंद आ रही थी.

सीमी: देख तुझे सही नही लग रहा तो फोर्स नही करूँगी. पर मेरी बात याद रखना. कभी भी मॅन किया तो बिना पूछे इस तरह से गंदी हरकत करना. मैं बिल्कुल भी माइंड नही करूँगी. और वैसे भी तू अपना सस्यू पिलाती है ना. तो ये सब तो बहुत छ्होटी से चीज़ है.

रिमी: ठीक है दीदी, मैं सोचूँगी. पर हा एक बात है. मुझे आपकी गंदी-गंदी फॅंटेसी बहुत पसंद है. और कुछ गंदा आइडिया दो ना. होगा तो मैं करूँगी.

सीमी: सोचती हू. पर मुझे लगता है तू ही अछा आइडिया निकल पाएगी. चल आज से ये तेरा ज़िम्मा. कुछ भी गंदी फॅंटेसी सोच के बता.

वो खुश हो गयी.

रिचा: वाह रे कुटिया, तेरी बेहन तो बहुत आयेज निकल गयी. पर फिर मानी?

सीमी: और क्या? कुछ टाइम लगा बुत मानी. एक दिन मैं सोफे पे थी तो वो आई मेरे पास बैठ गयी. कुछ बोलना चाहती थी पर बोल नही पा रही थी. मैने ही उससे पूछा.

सीमी: क्या हुआ?

उसने बहुत देर लगा के कान में हल्के से कहा-

रिमी: छूट चातेगी कुटिया?

मैं खुश हो गयी. मैने उसका हाथ पकड़ा और कहा-

सीमी: जी मालकिन.

वो शर्मा गयी. फिर मैने उसे उठाया, खुद घुटनो पर बैठी और उसकी शॉर्ट उतार दी. वहीं लिविंग रूम के बीच मैं उसकी छूट चाटने लगी. रिमी भी गरम हो गयी और उसने फिर मुझे बालों से पकड़ लिया और मेरे मूह को अपनी छूट में रगड़ने लगी.

मैं समझ गयी और चाटना बंद कर दिया. मैं चाहती थी वो अपनी मर्ज़ी से करे. वो मेरे मूह को अपनी छूट में रगड़ने लगी. ये मेरी लिए भी नया एक्सपीरियेन्स था. ऐसा करते हुए वो ज़ोरो से अया उूुउउ एयेए डीडीिइ करके मोन करने लगी. वो मेरे चेहरे का हर कोना अपनी छूट में रग़ाद चुकी थी.

आख़िर में उसने ज़ोर से चीखा: आअहह डीडीिईई.

और वो मेरे मूह पर झड़ने लगी. मैने भी मूह नही खोला और सारा पानी मूह पे गिरने दिया. 7-8 बार पिचकारी जैसे पानी गिरने के बाद वो सोफे पे गिर पड़ी. आज वो बहुत झड़ी थी. उसकी साँसें चढ़ि हुई थी. उसने आँखें खोली तो देखा मेरा पूरा मूह उसके पानी से भर गया था और गले से त-शर्ट के अंदर जेया रहा था.

रिमी: दीदी सोरर…

मैने उसे फिरसे रोका: मैने कहा ना सॉरी नही बोलना. ई लव्ड इट. मैं यही तो बोल रही थी. कर ना जो करना है.

इस बार उसे देख के लगा अब उसने फाइनली ये सब सोचना छ्चोढ़ दिया था. वो तुरंत उठी और मुझे टांट हुआ बातरूम ले गयी और मुझे नीचे बैठने को कहा. मैं बिल्कुल आचे बच्चे की तरह उसको मान गयी और ज़मीन पे बैठ गयी. मेरी पंत भीग रही थी, बुत मुझे कोई परवाह नही थी. फिर वो अपनी छूट मेरे मूह के करीब ले आई. वो सस्यू पिलाने वाली थी.

सीमी: रिमी ये बाहर भी कर सकते है.

इतना कहते रिमी ने हल्के थप्पड़ मार दिया. मेरा दिमाग़ हिल गया. पहली बार किसी ने मुझे थप्पड़ मारा था, लेकिन मुझे रत्ती भर भी गुस्सा नही आया. मैं उतला खुस हुई. मैने मूह खोला पर उसने मेरा मूह बंद कर दिया. मुझे खेल समझ नही आ रहा था पर मैने कुछ नही बोला.

वो मेरे और करीब आई और मेरा मूह पकड़ के कहा-

रिमी: आज तेरे पे मूतुँगी और तू मेरे सस्यू से नहाएगी.

वाउ, अब समझी. मुझे पता था वो कुछ ना कुछ आइडिया निकलेगी. वो मूतने लगी और मैं चुप-छाप बैठी रही. उसका छूट से निकला गरम पानी पहली बार मेरे मूह पर गिर रहा था, और मुझे भी गरम कर रहा था. चेहरे पे कुछ देर मूतने के बाद वो थोड़ी नीचे आई छ्चाटी के पास करने लगी और मेरी त-शर्ट भीगने लगी.

मैं उसका गरम पानी पुर बदन पर फील करना चाहती थी तो तुरंत त-शर्ट निकाल के फेंक दी और पीछे झुक गयी. वो मूट-ती रही और मैं नहाने जैसा अपना बदन रगड़ने लगी. फिर उसने आखरी बार मूह पे गिराया. उस टाइम मैं मूह खोल के सारा पी गयी. फाइनली उसका ख़तम हो गया. हम दोनो ने एक-दूसरे किस किया और नहा के बाहर आ गये.

मई: मा कसम तुम लोग तो ग़ज़ब हॉट हो यार. अछा मैं सोच रही थी तुम लोग आंटी को क्यूँ नही पता लेती? तो उनसे च्छूप के नंगे नही रहना पड़ेगा.

सीमी: पाटने की क्या ज़रूरत. वो तो ऐसे भी रहते है.

मैं: हा बुत पीछे ना. मैं सामने फ्रीली रहने को बोल रही हू.

सीमी: मैं सामने ही बोल रही हू. हम आज मम्मी के सामने ही नंगे रहते है.

सृजीता: मतलब मम्मी ने पकड़ लिया. और कुछ बोली नही?

सीमी: सच बोलू तो हमारा कोई प्लान नही था मम्मी को बताने का. एक दिन ऐसे ही सब अचानक हो गया और रिमी के चालाकी के कारण आज ऐसा हो पाया.

रिचा: उस्ताद रिमी. कैसे किया?

सीमी: वो जैसा मैने बताया मम्मी जब टीवी के सामने होती है तो हम नंगे घर में घूमते है. वहीं एक दिन करने जेया रहे थे. रिमी ऑलरेडी कपड़े उतार चुकी थी और मैं उतारने वाली थी की मम्मी अचानक से उठ के किचन में जेया रही थी. तभी उनकी नज़र पद गयी.

मम्मी (गुस्से में): रिमी ये क्या कर है तू?

मेरी गांद फटत गयी. सोचा अब तो खेल ख़तम. पर वही रिमी ने चालाकी दिखाई.

रिमी ने कैसे संभाला जानने के लए अगला पार्ट ज़रूर पढ़िए.

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