दीदी के साथ चुदाई की कहानी

सेक्स कहानी अब आयेज से-

मैं अपने रूम से बाहर आया तो देखा एक रूम से आवाज़ आ रही थी. मैने जाके देखा तो वहाँ दोनो दादा जी (हरी लाल, मानी लाल), तीनो दादी (काँटा, शांति और सौंदर्या), तीनो बुआ (निधि, रीता, रूपा) और मेरे चाचा किशोरे नंगे होके सामूहिक चुदाई कर रहे थे.

इट वाज़ लीके बा****ड्स ऑफ हवेली. अब मैं आपको वो सीन डिस्क्राइब करता हू. बड़े दादा जी के उपर निधि बुआ उछाल-उछाल के चुड रही थी. प्लस वो काँटा दादी के साथ किस कर रहे थे. किशोरे अंकल सौंदर्या दादी के और शांति दादी के साथ लगे थे, जब की छ्होटे दादा जी अपनी दोनो बेटियों को पेल रहे थे.

मैं ये सब देख के शॉक में था की ये सब क्या चल रहा था. ये सब देख के मेरा लॉडा खड़ा हो गया. मैने अपना पयज़ामा और शॉर्ट्स नीचे किया और अपना लॉडा हिलने लगा. तभी मेरे पीछे से एक हाथ आया. मेरी लिटरली फॅट के हाथ में आ गयी थी. मैं धीरे से पीछे मुड़ा तो वो प्रिया दीदी थी.

प्रिया: रोहन तू यहाँ क्या कर रहा है?

इतना बोल ही रही थी की उन्होने मेरा लंड बाहर देखा और फिर अंदर चल रहे ऑर्जी देखा फिर बोली.

प्रिया: ये सब क्या चल रहा है?

मैं: मैं तो अभी उठ के आया मुझे क्या पता.

प्रिया: तो ये तेरा यंत्रा बाहर क्यूँ है?

मैं: ये सीन तोड़ा सेक्सी लग रहा था.

प्रिया: सीन से याद आया डिन्नर के बाद क्या कहा सुनी हुई?

मैं: मुझे डिन्नर के लिए क्यूँ नही उठाया?

प्रिया: यार म्र्स मिश्रा ने बोला था की तुझे आराम करने दे, तू तका लग रहा था. एक तो लास्ट सीट में बैठा था.

मैं: अछा. तो ये बता क्या सीन हुआ?

प्रिया: यार मुझे आचे से पता नही. डिन्नर से अन्न-बॅन चल रही थी शायद. फिर मम्मी, निधि बुआ और सौंदर्या दादी में कुछ कहा-सुनी हुई थी.

मैं: क्यूँ आपने डिन्नर नही किया?

प्रिया: नही मैं तेरे साथ में थी. अभी वॉशरूम गयी. वहाँ से आने तक तू गायब.

मैं: इनका ये सब चलता रहेगा. मुझे भूख लगी है. मैं अपने और आपके लिए कुछ बना लेता हू.

फिर मैं और दीदी किचन में आए. वहाँ मैने हमारे लिए मेरी स्टाइल मॅगी बनाई. अब मैल करके मॅगी की रेसिपी नही माँग लेना. हिलने आए हो चुप-छाप स्टोरी पढ़ते-पढ़ते हिलाओ. ओह सॉरी फोर्त वॉल ब्रेक करने के लिए. हम दोनो ने इंसानों की तरह मॅगी खाई.

फिर हम वापस आए तो देखा चुदाई अभी भी चल रही थी. अब मानी लाल की दोनो बेटियों को हरी लाल छोड़ रहे थे. मानी लाल निधि बुआ और सौंदर्या दादी को और काँटा, शांति दादी आपस में लगे थे. किशोरे अंकल वाज़ आउट ऑफ थे ईक्वेशन. पेट की भूख मिट चुकी थी, पर जिस्म की वैसी ही थी. मैं और दीदी ने एक-दूसरे के पयज़ामे के अंदर हाथ डाला था. मैं उनकी छूट सहला रहा था और वो मेरा लंड हिला रही थी.

फिर मैने उनका पयज़ामा नीचे किया और उनकी गांद की दरार में अपना लंड हिलने लगा. मैने फिर दोनो हाथो से उनके बूब्स बाहर निकाले. दीदी और मेरी हाइट लगभग सेम है, तो वो मुझे मूड के किस कर रही थी. उनकी टंग मेरी टंग से खेल रही थी.

तभी मैं तोड़ा पीछे हॅट के अपने एक हाथ से अपना लंड को दीदी की छूट में सेट करता हू और एक बार में ही अपना लंड उनकी छूट में उतार देता हू. दीदी की थोड़ी सी चीख निकलती है, पर अंदर की आवाज़ से वो उतनी सुनाई नही देती. अब मैं दीदी को छोड़ रहा था. हम अंदर की चुदाई का आनंद भी ले रहे और आपस में भी लगे हुए थे. तभी दीदी की नज़र दादा जी के लंड में गयी.

प्रिया: अया रोहन उम्म, वो देख इस उमर में भी दादा जी का कितना बड़ा है.

मैं: अब आपको उनका भी चाहिए क्या?

प्रिया: नही पागल मेरे लिए तो तेरा ही काफ़ी है.

हमारी चुदाई चल रही थी. हुमको लग रहा था की हुमको कोई नही देख रहा. पर ये हमारा एक भ्रम था. क्यूंकी जैसे हम ऑर्जी देख रहे थे, लिषा हुमको देखे हुए थी. ना जाने क्यूँ जब से उसने मुझे देखा हमारी फ्रेंडशिप हुई, वो मेरे को लेके तोड़ा पोज़ेसिव थी.

तभी जब सोनिया मेरे से छिपकती लिषा को गुस्सा आ जाता. लिषा दिखने में बाला की खूबसूरत उसके बूब्स का पूरा कॉलेज दीवाना था. वो हुमको देख रही थी. उसको हवस के साथ-साथ जलन भी हो रही थी.

अब हमने सोचा की क्या पता कोई बाहर ना आ जाए, तो हमने ये कार्यक्रम मेरे रूम में ले जाने का सोचा. फिर हम दोनो मेरे रूम में आ गये. मेरे रूम में आते-आते हमने अपने सारे कपड़े उतार दिए.

अब हम 69 के पोज़ में बेड में लेते हुए थे. मैं दीदी की छूट को चाट रहा था और वो मेरा लंड चूस रही थी. फिर इस चूसने चूसने के बाद वो मेरे उपर चढ़ि और मेरे उपर से उछाल-उछाल के चूड़ने लगी.

उनके बूब्स मेरी आँखों के सामने ज़िज्गले कर रहे थे. मैं वो काम कर रहा था, जो मैं 3 हफ्ते पहले तक करने की सोच भी नही सकता था. दीदी अभी तक 5-7 बार चूड़ी थी, वो भी मेरे से. ई आम नोट टॉकिंग अबौट लेज़्बीयन थिंग हियर.

दीदी कभी उछाल-उछाल के चुड़वति. तो कभी मुझसे लिपट के किस करती. हमने चुदाई 11:45 में स्टार्ट की थी, और ये चुदाई 3-4 बजे तक चली. इसी बीच मैं 2-3 बार झाड़ा. मैने अपना माल उनके फेस और बूब्स में डाला.

दीदी भी 4-5 बार झड़ी. फिर हम दोनो मेरे ही रूम में सो गये. मैं खुश था की मेरे और दीदी के बीच में सब सही चल रहा था. मैं दीदी को किसी के साथ शेर नही कर सकता था. पर मुझे क्या पता था की हमारे बीच एक तीसरा आने वाला था.

अभी भी जब मैं उस बारे में सोचता हू, तो दर्द होता है मुझे. यही ग़लती मुझे जीवन भर याद रहेगी.

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“तो बे कंटिन्यूड…”

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