पति के मॅनेजर का लंड चूसा

दोस्तों मैं अंजलि अपनी ऑफीस सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. अगर अभी तक नही पढ़ा है, तो उसको ज़रूर पढ़ ले.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मेरे पति अब मेरी तरफ ध्यान नही देते थे. फिर एक दिन उन्होने ऑफीस पार्टी का बोला, तो मैं बहुत आचे से तैयार हुई. पार्टी पर उनका एक मॅनेजर रजत मुझ पर लाइन मारने लगा.

वहाँ मेरे पति भी लीना नाम की लड़की से बात कर रहे थे, और फिर अचानक से गायब हो गये. अब आयेज बढ़ते है.

रजत के कहने पर मैं एक रूम के बाहर खड़ी हुई, और अंदर देखा. अंदर का नज़ारा देख कर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गयी.

अंदर मेरे पति और वो लड़की लीना आपस में सेक्स कर रहे थे. मेरे पति ने लीना को टेबल पर बिताया हुआ था, और उसके होंठ चूस रहे थे. साथ में वो उसके बूब्स दबा रहे थे. लीना मदहोशी वाली आहें भर रही थी.

ये सब देख के मुझे बहुत दुख हुआ. यानी की मेरे पति मुझे चीट कर रहे थे. तभी मेरे पति नीचे बैठ गये. उन्होने लीना की ड्रेस में हाथ डाले, और उसकी पनटी निकाल कर साइड में फेंक दी. लीना ने भी अपनी ड्रेस उपर कर ली, जिससे उसकी छूट नंगी हो गयी.

फिर मेरे पति छूट को देखते ही उस पर मूह लगा कर उसको चूसने लगे. ये देख कर मैं हैरान थी. आज तक मेरे पति ने मेरी छूट कभी नही चूसी थी. मैं समझ चुकी थी की अब मेरा पति सिर्फ़ नाम के लिए मेरा था.

पहले मुझे लगा मैं उनको रोकू. लेकिन फिर सोचा की रोक कर भी क्या कर लूँगी. मेरी आँखों में आँसू थे. अब मुझसे और नही देखा जेया रहा था, तो मैं वहाँ से वापस पार्टी में आ गयी. रजत भी मेरे पीछे-पीछे आ गया.

मैं साइड में जाके एक चेर पर बैठ गया. रजत मेरी साइड वाली चेर पर आ कर बैठ गया. मुझे रोते देख वो बोला-

रजत: कोई बात नही मेडम. ऐसा हो जाता है.

ये बोल कर उसने मेरे हाथ पे हाथ रख दिया. मैने उसके हाथ को झटक कर पीछे कर दिया. फिर वो उठा और जाने लगा. उसी वक़्त मेरे दिमाग़ में आया की मेरा पति मुझे धोखा दे कर सेक्स का मज़ा ले रहा था. और मैं इतने वक़्त से सेक्स के लिए तड़प रही थी.

मैने खुद से कहा: अंजलि अगर तुम्हारा पति हरंखोर है, तो तुम सती-सावित्री बन कर क्या कर लॉगी. अब तुमने सब देख ही लिया है, तो तुम भी मज़े करो. तुम भी किसी और के लंड से अपनी छूट की प्यास बुझाओ.

तभी मैं खड़ी हुई, और रजत के पीछे गयी. वो मैं गाते के पास पहुँच चुका था. मैने उसको पीछे से आवाज़ दी. वो मूड कर मेरी तरफ देखने लगा. मैने उसको बोला-

मैं: तुम मेरे साथ सेक्स करना चाहते हो ना?

रजत: हमारी ऐसी किस्मत कहाँ मेडम?

मैं: मैं तैयार हू, चलो कहाँ चलना है?

ये सुन कर वो खुश हो गया. उसने कहा-

रजत: चलिए चलते है.

वो पार्किंग की तरफ चल पड़ा, और मैं उसके पीछे जाने लगी. हम उसकी गाड़ी में जाके बैठ गये. फिर उसने पूछा-

रजत: मेडम आप शुवर हो ना. बाद में मुकर तो नही जाओगे?

मैं: नही.

रजत ने उसी वक़्त अपनी पंत और अंडरवेर नीचे किए, और उसका लंड बाहर निकाल लिया. उसका लंड मेरे पति के लंड से बड़ा था. मैं हैरान हो गयी उसका लंड देख कर. बहुत देर बाद मैने लंड देखा था. फिर वो बोला-

रजत: चूसो इसको अंजलि.

मैं हमेशा सोचती थी, की अपने पति का लंड चूसूंगई. लेकिन उन्होने कभी चूसने नही दिया. लेकिन आज वो मौका मुझे मिल रहा था. मैं उसने लंड की तरफ झुकी, और उसको हाथ में ले लिए. उसका लंड फुफ्कारे मार रहा था.

फिर मैने उसके लंड पर जीभ फिराई. मुझे नमकीन सा स्वाद आने लगा, और मेरी छूट में वाइब्रेशन होने लगी. अब मैने उसके लंड को चाटना शुरू कर दिया. वो आ आ करने लगा.

धीरे-धीरे चाट-ते हुए मैने उसके पुर लंड को गीला कर दिया. फिर वो बोला-

रजत: जानेमन इसको मूह में लेके चूसो भी.

फिर मैने अपना मूह खोला, और उसके लंड को मूह में ले लिया. उसके मूह से लंबी ह निकली. उसका लंड पूरा गरम था, और तन्ना हुआ था. मैं अब उसके लंड को चूसने लग पड़ी.

जब मैं उसके लंड को चूसने लगी, तो उसने अपना एक हाथ मेरे सर पर, और दूसरा हाथ मेरी पीठ पर रख दिया. एक हाथ से वो मेरे बाल ठीक कर रहा था, और दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रहा था.

धीरे-धीरे पीठ पर रखे अपने हाथ को वो मेरी गांद पर ले गया, और मेरे चूतड़ सहलाने लगा. आज बहुत देर बाद किसी ने मेरी गांद पर हाथ रखा था. इससे मैं और उत्तेजित हो गयी, और और ज़्यादा जोश से लंड चूसने लगी. वो मेरे चूतड़ को बार-बार दबा रहा था.

फिर अचानक से उसने मेरे सर को अपने लंड पर दबा दिया. इससे उसका लंड मेरे गले तक चला गया, और मुझे साँस लेने में दिक्कत होने लगी. मैं अपना हाथ उसकी जाँघ पर मारने लगी, और तड़पने लगी. तब उसने अपना हाथ मेरे सर से हटाया.

उसके ऐसा करने से मुझे तकलीफ़ तो हुई, लेकिन एक अलग ही तरह का मज़ा भी आया. मैं फिर से उसका लंड चूसने लगी. वो भी बीच-बीच में मेरे सर को अपने लंड पर दबाता. हर बार मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगता.

फिर वो अपने दूसरे हाथ को मेरे बूब्स पर लेके आया, और ब्लाउस के उपर से मेरे बूब्स को दबाने लगा. मुझे बहुत मज़ा आने लगा. उसके बाद उसने फिर से मेरे सर को अपने लंड पर दबाया. तभी मुझे अपने मूह में उसका माल निकलता हुआ महसूस हुआ.

मैं अपना मूह उसके लंड से हटाने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसने नही हटाने दिया. वो बोला-

रजत: पी लो इसको जानेमन.

मैं फिर उसके रस्स को पीने लगी. वैसे भी कोई ऑप्षन नही थी. उसके रस्स का स्वाद मीठा-मीठा था, और वो काफ़ी क्वांटिटी में निकला था. जब मैने उसका सारा रस्स पी लिया, तो उसने मेरे सर को छ्चोढा. तब मैने उसके लंड को अपने मूह से बाहर निकाला, और सीधी होके अपना मूह पोंछने लगी. वो मेरी तरफ स्माइल करते हुए देखा और बोला-

रजत: आज तो बहुत मज़ा आने वाला है.

ये बोल कर उसने गाड़ी स्टार्ट की.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. फीडबॅक औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर दीजिए.

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