लेज़्बीयन सेक्स के बाद आंटी सेक्स की कहानी

सेक्स स्टोरी अब आयेज-

हमारे घर में सुमन आंटी थी, तो हम खुल के सब कुछ नही कर पाते थे. अब जब हुमको करना होता था, तब एक इंसान सुमन आंटी को डिसट्रॅक्ट करता और बाकी दो मज़े करते.

ऐसा करते-करते सॅटर्डे आ गया. मैं और दीदी कॉलेज से आए. दीदी ने मुझसे बोला की वो मम्मी के साथ करना चाहती थी, और तब तक मैं सुमन आंटी को बातों में उलझोउ. मैं आंटी के पास गया. अब एक पॅटर्न सा हो गया था, तो आंटी को तोड़ा शक सा हुआ. फिर उनको पहले दिन की बात याद आई.

सुमन: अर्रे रोहन बेटा, मधु और प्रिया कहाँ है?

मैं: शायद वो अपने-अपने रूम में रेस्ट कर रहे होंगे.

सुमन: झूठ मत बोल. उस दिन भी झूठ बोल रहा था.

मैं: अर्रे नही, मैं वो बा…

सुमन: अर्रे ये सब छ्चोढ़. तेरे को वो सब देख के अछा लगा ना? मैने नोटीस किया था.

मैं: क्या?

सुमन: तेरे शॉर्ट्स में जो था.

मैं: अछा, आपने देखा. कैसा लगा?

सुमन (शरमाते हुए): ये सब छ्चोढ़, लिव शो देखेगा? अभी वो कर रहे होंगे.

इतना बोल के वो मेरा हाथ पकड़ी और मुझे मम्मी के रूम के बाहर ले गयी. वहाँ कोई नही था. फिर दीदी के रूम के बाहर ले गयी, वहाँ भी कोई नही था. सुमन आंटी अब सोचने लगी की वो आख़िर गये तो गये कहाँ.

फिर हम लिविंग रूम में आए. सुमन आंटी को लगा की उनका शक बेबुनियाद था. वो हार मान चुकी थी, तभी एक आशा की किरण दिखाई दी. वो किरण मेरे रूम से आ रही थी. मेरे रूम का डोर ओपन था. आंटी मुझे वहाँ लेके गयी और जो उन्होने सोचा था, वही चल रहा था.

दृश्या मॅन मो लेने वाला था. मम्मी और दीदी नागन अवस्था में एक-दूसरे के सामने. दोनो के बाल बिखरे हुए, एक-दूसरे के बूब्स में हाथ रखे हुए, एक-दूसरे के रसीले होंठो को किस करते हुए चूस रहे थे.

उन दोनो के अपने-अपने पैर एक-दूसरे के उपर ऐसे लपेटे हुए थे की ऐसा लग रहा था, दो कैंचियाँ आपस में रखी हो. हिप्स के मूव्मेंट से जब दोनो की छूट रगड़ती तो लगता की दो कैंचियाँ आपस में लड़ रही हो. आधुनिक चुदाई की भाषा में इससे ससिस्सोरिंग कहा गया है. अंदर से सॉफ्ट मोन्स की आवाज़ भी आ रही थी.

मैं ये सब देखते ही रह गया. आंटी भी खो सी गयी थी. मैने सोचा की मौका सही था और मैने भी हात्ोड़ा मार दिया. मैं सुमन आंटी का हाथ लिया और उसको अंडरवेर के अंदर डाल दिया. सुमन आंटी भी चौंक गयी. वो भी बहुत समय से चूड़ी नही थी. वो मेरी तरफ देखी जेया रही थी और सबकॉन्षियस्ली मेरे लंड को हिलाए जेया रही थी. फिर मैने अपना पंत और शॉर्ट्स नीचे कर दिए. वो मेरे कान के पास आई और बोली,

सुमन (तेज़ साँस लेते हुए): बेटा, इतना बड़ा लंड तो तेरे अंकल का भी नही है. आज तेरी आंटी की प्यास बुझा दे.

मैं: ठीक है, पर यहाँ नही, आपके रूम में.

सुमन: ठीक है, मैं अपने रूम में जाती हू, तू 5 मिनिट्स में आ जाना. घर का दरवाज़ा ओपन रखूँगी.

मैने वैसा ही किया. 5 मिनिट्स के बाद मैं सुमन आंटी के घर चला गया. मैने देखा, सुमन आंटी नागन अवस्था में अपने बेड पर बैठी थी. जैसे दुल्हन अपने पति का सुहग्रात में वेट करती है, वैसे वो मेरा वेट कर रही थी. बस फराक इतना था, दुल्हन अपने शादी वाले जोड़े में होती है और आंटी निर्वस्त्र थी.

लेकिन चुदाई दोनो की होने वाली होती है. इस सुहग्रात का मज़ा लेने के लिए मम्मी और दीदी भी पीछे से आ गये थे. अब टॉप फ्लोर में रहने का फ़ायदा, कोई उपर तक नही आता था तो वो दोनो जैसे मज़े ले रहे थे, वैसे ही आ गये. दरवाज़े के पास आके देखने लगे.

सुमन आंटी निर्वस्त्र थी, पर मंगलसूत्रा और चूड़ियाँ नही उतरी थी. मैं उनके पास गया, अपने कपड़े उतारे और किस करने लगा. आंटी मेरा प्रॉपर साथ दे रही थी. जिन आंटी ने मुझे अपनी गोद में खिलाया था, आज वो मेरी गोद में खेलने जेया रही थी.

उन्होने मेरा लंड पकड़ा और चूसने लगी. वो भी मम्मी जैसे प्रो थी. लेकिन अब मम्मी के साथ करते-करते मुझे आदत हो गयी थी. अब मैं उनका मूह प्रॉपर छोड़ने लगा और दोनो हाथो से उनके बूब्स दबा रहा था.

उनके मूह से स्लर्प-स्लर्प, गवक-गवक की आवाज़ आ रही थी. जब उनका मूह तोड़ा सा दूकने लगा, तो उन्होने मेरा लंड अपने मूह से निकाल लिया. वो पूरा लेट गयी. मैने अपना लंड लिया और उनकी छूट में सेट कर दिया. छोड़ने जेया ही रहा था की मेरा फोन बाज गया. मैने देखा, वो पापा का फोन था. मैने कॉल पिक किया.

मैं: हेलो हा पापा.

पापा: यार तुम लोगों को भी यहाँ आना पड़ेगा.

मैं: क्यूँ पापा?

पापा: सुन, तेरी मम्मी कहाँ है? एक काम कर, तू एक बार फोन मम्मी को देना.

मैं: अर्रे वो यहीं है, रूको, मैं देता हू.

मैने मम्मी की तरफ इशारा किया, वो बाहर से अंदर आई और पापा की बात सुन्न रही थी और ठीक है ठीक है बोले जेया रही थी. फिर कॉल कट कर दिया. तभी बाहर डोर पर नॉक हुई. हम सब दर्र गये. सब के सब नंगे पड़े हुए थे. तभी मैने अपने कपड़े पहने और डोर ओपन करने चला गया.

मेरे मॅन में मुन्ना भैया फ्रॉम मिर्ज़ापुर वाला डाइलॉग चल रहा था, साला कोई ढंग से छोड़ने भी नही देता. मैं बाहर गया तो देखा सूट में एक आदमी खड़ा था.

अननोन मान: सिर, आप रोहन है ना?

मैं: हा.

अननोन मान: आपको और आपकी फॅमिली को पिक करने भेजा है मुझे. गाड़ी सोसाइटी के बाहर खड़ी है.

तब तक मम्मी, सुमन आंटी और दीदी भी बाहर आ गये थे. तीनो ने सुमन आंटी की साड़ियाँ पहनी थी. दीदी तोड़ा सा अनकंफर्टबल फील कर रही थी. मैने मम्मी से पूछा की क्या चल रहा था. तभी मम्मी ने मुझे वो सारी बात बताई जो मैं आपको पिछले पार्ट में बता चुका हू. मतलब की पापा साइड की फॅमिली का इंट्रोडक्षन.

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