प्यासे मा-बेटे की चुदाई की कहानी

मा-बेटा सेक्स कहानी अब आयेज-

रात की घटना के बाद, अगले कुछ दिन घर में सब नॉर्मल दिखाने की कोशिश में बीते. मम्मी और मैं दोनो ही सावधानी बारात रहे थे, पर हमारे बीच की खामोश अंडरस्टॅंडिंग हम दोनो को और करीब ले आई थी. पापा और दादी अभी भी थोड़ी नज़र रखे हुए थे, पर हम दोनो ने अपने चेहरों पर ऐसा मास्क पहन लिया था जैसे कुछ हुआ ही ना हो. पर अंदर ही अंदर, मम्मी की हवस और मेरे लिए उनकी चाहत में कोई कमी नही आई थी.

कुछ दिन ऐसे ही गुज़र गये. मम्मी ने अनिरुढ़ भाई से मुलाक़ात बंद कर दी थी, और घर में भी वो ज़्यादा बाहर जाने का बहाना नही बना रही थी.

माहौल तोड़ा शांत था, पर मेरे और मम्मी के बीच की खामोश आग अब भी जल रही थी. हम दोनो रात को च्छूप-च्छूप कर मिलते थे, और हर मुलाक़ात में हमारी चाहत और बढ़ती जेया रही थी. पर दोनो दर्र के मारे इतना खुल कर मज़े नही लेते थे.

एक बार पापा अपने ऑफीस के काम से बाहर गये थे कुछ दिन के लिए और हमे बहुत अछा मौका मिला था चुदाई करने का. सब के सो जाने के बाद करीब रात को 12 बजे मम्मी मेरे कमरे में आई.

मम्मी (धीमी, उत्तेजित आवाज़ में): आराव, अनिरुढ़ जी को फोन कर ना. बहुत दिन हो गये उनसे बात भी नही हुई.

मैने सर हिलाया, मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा. मुझे पता था की अब कुछ गरम होने वाला है. मम्मी ने कॉल किया और स्पीकर पर डाल दिया.

मम्मी (फोन पर, हल्की मीठी आवाज़ में): हेलो, अनिरुढ़ जी… अर्रे आप… कैसे है?

उनकी आवाज़ में एक नकली नर्माई थी, जो सिर्फ़ मैं समझ सकता था.

अनिरुढ़ भाई (फोन पर, थोड़ी बेचैनी से): यामिनी जी, पिछले कुछ दीनो से आपने कॉंटॅक्ट नही किया, सब ठीक है? और आराव कैसा है? वो भी आज कल मिल नही रहा है.

मम्मी के होंठो पर एक हल्की, नॉटी स्माइल फैल गयी.

मम्मी (अनिरुढ़ भाई से, थोड़ी उदासी दिखाते हुए): जी अनिरुढ़ जी, मैं तो ठीक हू, पर तोड़ा बिज़ी हो गयी थी. घर में मा जी की तबीयत थोड़ी ठीक नही चल रही है, इसलिए ज़्यादा बाहर नही जेया पा रही. और आराव भी… हा, वो भी ठीक है. आज कल घर में ही है.

मम्मी की आवाज़ में एक तरह की चिंता दिख रही थी, जिससे अनिरुढ़ भाई को ये लगे की वो सच में परेशन थी. पर उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे टीज़ कर रही थी.

अनिरुढ़ भाई: ओह, ई सी. मैने सोचा कुछ… ख़ास बात हो गयी है. मुझे तो आपकी बहुत याद आ रही थी, यामिनी जी. वो जो सुकून आपके साथ मिलता है, वो कहीं नही मिलता.

अनिरुढ़ भाई की आवाज़ में सॉफ-सॉफ चाहत और बेचैनी थी. मम्मी ने एक पल के लिए मेरे तरफ देखा, और उनके चेहरे पर अब एक नॉटी स्माइल थी. उनका हाथ धीरे से अपनी सारी के पल्लू पर गया और उसे हल्का सा सरकया, जिससे उनकी क्लीवेज की हल्की झलक दिखी, जैसे वो मुझे टीज़ कर रही हो.

मम्मी (एक गहरी साँस लेते हुए, पर आवाज़ में च्छूपी हुई नॉटी टोने थी): अनिरुढ़ जी, सुकून तो मुझे भी बहुत पसंद है. पर कभी-कभी तो खुद को कंट्रोल करना पड़ता है ना. और वैसे भी, घर में इतनी नज़र रखी जाती है. आप तो समझते है.

मम्मी ने ये बात अनिरुढ़ भाई से कही, पर उनकी नज़र सीधी मेरे तरफ थी, जैसे वो मुझे बता रही हो की अनिरुढ़ भाई उनके लिए अब कितना अनैंपॉर्टेंट है, और वो सब मेरे लिए कर रही है.

अनिरुढ़ भाई (थोड़ी निराशा के साथ): मैं समझता हू, यामिनी जी. पर मैं आपके बिना रह नही पा रहा. क्या हम कभी मिल नही सकते? बहुत दिन हो गये है.

मम्मी ने फोन को तोड़ा और करीब किया, और उनकी आँखों में अब एक गहरा जुनून था. उन्होने हल्के से अपने होंठो को काटा, जैसे अपनी हवस को रोक रही हो.

मम्मी (धीमी, नशीली आवाज़ में): मिलेंगे अनिरुढ़ जी, ज़रूर मिलेंगे. बस तोड़ा साबरा कीजिए. जब मौका मिलेगा, मैं खुद आपको बतौँगी. और तब मैं आपको वो सुकून दूँगी जो आपने कभी सोचा भी नही होगा. तोड़ा वक़्त दीजिए बस.

उन्होने अनिरुढ़ भाई को एक ऐसी उम्मीद दी, जो उन्हें बँधे रखेगी. अनिरुढ़ भाई ने खुशी से कुछ और बातें की, और फिर फोन रख दिया.

जैसे ही फोन कटा, मम्मी ने एक गहरी, कामुक साँस ली. उनकी आँखों में अब वही हवस और नशा सॉफ दिख रहा था जो अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर था. उन्होने बिना किसी आवाज़ के मेरे तरफ देखा.

मैने अपनी आँखें बंद कर ली. मम्मी मेरे करीब आई, उनकी गरम साँसें मेरे चेहरे पर पद रही थी. उन्होने बिना कुछ बोले, धीरे से मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए.

ये किस पहले से ज़्यादा पॅशनेट और डेस्परेट थी. उनके होंठ गरम थे और उनकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस गयी, हर हड्द पार करती हुई. हाथ उनके मेरे चेहरे पर थे, फिर मेरी गर्दन पर और फिर मेरी त-शर्ट के अंदर. उनके जिस्म की गर्मी और उनकी चुदाई की भूख सॉफ महसूस हो रही थी. मम्मी ने मेरी त-शर्ट उतार दी और मेरे नंगे सीने पर अपने नरम हाथ फेरे.

मम्मी (किस के बीच में, साँस लेते हुए): उस अनिरुढ़ जी की आवाज़ से मेरी छूट और गरम हो गयी, आराव. पर उसकी प्यास तो तू ही बुझा सकता है. वो तो बस बहाना है.

उन्होने फिर से मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया. मेरा लंड बॉक्सर में तंन चुका था और मम्मी की नंगी जाँघ से टकरा रहा था.

मम्मी ने मेरे होंठ छ्चोढे, पर उनकी आँखें अब भी जुनून से चमक रही थी. उनका हाथ मेरे बॉक्सर के उपर से मेरे लंड को मसल रहा था. मेरा लंड पूरी तरह से तंन चुका था, और मम्मी का टच उसे और पागल बना रहा था. उन्होने एक नॉटी हँसी दी.

मम्मी (धीमी, नशीली आवाज़ में): अब जब तेरे पापा भी नही है और अनिरुढ़ जी को भी तसल्ली हो गयी है तो क्या इरादा है, मेरे बेटे? आज तो मम्मी को पूरा मज़ा चाहिए. अब कोई दर्र नही.

उनकी आँखों में एक सॉफ इन्विटेशन था, और उनका हाथ अब मेरे बॉक्सर को नीचे करने लगा. मेरे अंदर की सारी बेचैनी अब एक जुनून में बदल चुकी थी. मैने उन्हें अपने करीब खींचा, उनके नरम जिस्म को अपने सीने से चिपका लिया.

मैं (उनके कान में फुसफुसते हुए): आज तो आपको मेरी हर साँस में मज़ा मिलेगा, मम्मी. और मैं आपकी प्यास ऐसे बूझौँगा की आप अनिरुढ़ जी को तो क्या, सब कुछ भूल जाएँगी.

मम्मी ने एक मदहोश आ भारी और मेरे होंठो को फिर से अपने होंठो में भर लिया. किस करते-करते, मेरे हाथ मम्मी की सारी पर चलने लगे. उन्होने भी अपने हाथ मेरी त-शर्ट के अंदर डाल दिए. मम्मी ने अपनी सारी का पल्लू सरकया, उनकी गर्दन और कंधों की नरम स्किन सामने आई.

उन्होने धीरे से अपनी सारी को उतार कर बिस्तर पर गिरा दिया. अब वो सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में थी. उनके भरे हुए बूब्स ब्लाउस में कस्स कर बँधे थे, सॉफ दिख रहे थे.

मैने उनके ब्लाउस के एक-एक बटन को धीरे से खोलना शुरू किया. हर बटन खुलते ही उनकी क्लीवेज और भी गहराई से दिखने लगी. मम्मी की साँसें तेज़ हो रही थी. जब सारे बटन्स खुल गये, तो मम्मी ने ब्लाउस को अपने कंधों से उतार दिया, और वो बिस्तर पर गिर गया. अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोट में थी. उनके बड़े, गोरा रंग के बूब्स ब्रा में फूले हुए थे, और उनके निपल्स ब्रा के फॅब्रिक से उभर रहे थे.

मम्मी ने मेरे बॉक्सर को पकड़ा और एक ही झटके में नीचे खिसका दिया. मेरा खड़ा लंड अब पूरी तरह आज़ाद हो कर उनके फेस के सामने आ गया था, और उसकी गर्मी उन्हें सॉफ महसूस हो रही थी.

मम्मी ने मेरे खड़े लंड को अपने गरम हाथो में लिया. उनकी उंगलियों का स्पर्श ही मेरे पुर जिस्म में एक लेहायर दौड़ा गया. उन्होने एक मदहोश मुस्कान दी और धीरे से मेरे लंड के सुपारे को अपने नरम होंठो में भर लिया. उनकी गरम जीभ ने जैसे ही मेरे लंड को च्छुआ, एक अजीब सा करेंट लगा.

मम्मी ने अपने मूह में मेरे लंड को उपर-नीचे करना शुरू कर दिया, हर बार और गहराई से चूस्टे हुए. उनकी साँसें तेज़ हो रही थी और उनकी हल्की-हल्की सिसकियाँ मेरे कानो में जादू कर रही थी. उनके बूब्स ब्रा में उछाल रहे थे हर बार जब वो नीचे झुकती थी.

मैं अपनी आँखें बंद करके मम्मी के इस कामुक हुनर का आनंद ले रहा था. उन्होने मेरे लंड को इतनी शिद्दत से चूसा की मैं झड़ने के करीब आ गया. मेरा बदन काँप रहा था.

मैं (धीमी, गरमा-गरम आवाज़ में): मम्मी… बस… और नही… मैं झाड़ जौंगा…

मम्मी ने मेरे लंड को अपने मूह से बाहर निकाला, उनके होंठ चमक रहे थे. उन्होने एक नॉटी स्माइल दी और मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में हवस थी.

मम्मी (साँस लेते हुए, हल्के से हंसते हुए): इतनी जल्दी हार मान गया, मेरे बेटे? अभी तो खेल शुरू हुआ है.

मम्मी ने मेरे लंड को छ्चोढ़ कर अपनी ब्रा को धीरे से उतरा. उनके नंगे, भरे हुए बूब्स अब पूरी तरह आज़ाद थे, और मैं उन्हें देख कर और भी उत्तेजित हो गया. उन्होने अपनी पनटी की एलास्टिक को पकड़ा और उसको धीरे-धीरे नीचे खिसका दिया, जिससे उनकी गुलाबी छूट और नंगी जांघें सामने आ गयी. उनकी पनटी भी बिस्तर पर गिर गयी.

अब मम्मी पूरी तरह नंगी थी, और उन्होने मेरे लंड को छ्चोढ़ कर नीचे सरकना शुरू किया. मैं समझ गया था की उनका अगला इरादा क्या था. उन्होने अपनी नंगी जांघों को फैलाया और मेरे सामने अपनी गुलाबी छूट को पेश किया. उनकी छूट के होंठ फूले हुए थे और उनमें से हल्की-हल्की मादक खुश्बू आ रही थी.

मैं बिना किसी देरी के मम्मी की छूट को चाटने लगा. मेरी जीभ उनकी गीली, गरम छूट पर ऐसे चल रही थी जैसे प्यासा पत्थर पर. मम्मी ने एक तेज़ आ भारी और उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में फँस गयी. मैने उनकी छूट के हर हिस्से को छाता, दाने को चूस्टा रहा, और उनकी रसभरी गुफा में अपनी जीभ को गहराई तक ले गया.

मम्मी (मदहोशी में चिल्लाते हुए): अया… आराव… और तेज़… मेरी जान… मेरी छूट को खा जेया.. हा… ऐसे ही… उम्म्म…

उन्होने मेरे सर को और कस्स के अपनी छूट पर दबाया. मैं उनकी छूट का हर बूँद रस्स पी रहा था, और उनकी मदहोश आहें मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. कुछ देर में मम्मी का बदन झटके खाने लगा, और उनकी छूट ने गरम रस्स की बौछार कर दी. उन्होने झाड़ते हुए मुझे कस्स कर पकड़ लिया.

मम्मी के झड़ने के बाद भी, उनकी हवस शांत नही हुई थी. उन्होने मेरे सर को अपनी छूट से हटाया. उनका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था, पर उनकी आँखों में एक नया जुनून था.

मम्मी (साँस लेते हुए): अब मेरी बारी है, आराव. आज मैं तुझसे हर पोज़िशन में चड़वौनगी.

उन्होने मुझे धकेल कर बिस्तर पर लिटाया. खुद मेरे उपर चढ़ गयी. ये कॉवगिरल पोज़िशन थी, पर इसमें मम्मी का कंट्रोल सॉफ दिख रहा था. उन्होने मेरे खड़े लंड को अपनी गीली छूट के मुहाने पर सेट किया और धीरे से नीचे बैठी. मेरा लंड उनकी गरम छूट में सरकता हुआ अंदर चला गया.

मम्मी (एक गहरी आ भरते हुए): आ… आराव… कितना गरम है तेरा लंड…

उन्होने अपनी कमर को धीरे-धीरे गोल घूमना शुरू किया, और फिर तेज़ झटके मारने लगी. उनके बड़े बूब्स तेज़ी से उपर-नीचे हो रहे थे, और मैं उनकी हर हरकत का आनंद ले रहा था.

कुछ देर बाद मम्मी मेरे उपर से हटी और डॉगी स्टाइल में हो गयी. उनकी बड़ी गांद मेरे सामने थी, और उनकी कमर थोड़ी झुकी हुई थी. मैने उनके पीछे से उनकी कमर को पकड़ा और उनकी छूट में अपना लंड डाल दिया. इस पोज़िशन में हर धक्का और भी गहरा लग रहा था, और मम्मी की सिसकियाँ और भी उँची हो गयी थी.

मम्मी (चिल्लाते हुए): और तेज़, आराव… मेरी गांद को और उपर उठा… हा… आह…

मैने उन्हें और कस्स के पकड़ा और तेज़ धक्के मारने लगा. हमारे जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे, और कमरे में चुदाई की आवाज़े गूँज रही थी. ऐसे ही करते करते, मम्मी ने दो-टीन और नयी पोज़िशन्स ट्राइ की. कभी स्पूनिंग पोज़िशन में, जहाँ वो मेरे बगल में लेती और मैने पीछे से उनकी छूट में लंड डाला. कभी चेर पोज़िशन में, जहाँ वो मेरी गोद में बैठी और मेरे लंड पर उछाल रही थी. हर पोज़िशन में मम्मी का जुनून और उत्तेजना बढ़ती जेया रही थी.

अंत में, हम दोनो तक कर बिस्तर पर गिर गये. हमारी साँसें तेज़ चल रही थी, और बदन पसीने से भीगा हुआ था. मम्मी मेरे बगल में लेती हुई थी, उनका चेहरा संतुष्टि से चमक रहा था.

मम्मी (धीमी, संतुष्ट आवाज़ में): सच में, आराव… तेरे जैसा मर्द कोई नही. तूने तो मेरी छूट को सच में शांत कर दिया आज. अब अनिरुढ़ जी क्या, कोई और याद नही आएगा.

मम्मी के इन शब्दों ने मेरे ज़हन में एक नयी सोच डाल दी. ये सुनते ही मेरे दिमाग़ में एक झटका सा लगा. अनिरुढ़ जी तो थे ही, पर क्या इसका मतलब ये था की अनिरुढ़ जी के अलावा भी कोई और था मम्मी की ज़िंदगी में? क्या उन्होने पापा के अलावा भी काई मर्दों से अपने जिस्म की प्यास बुझाई थी? ये सवाल मेरे मॅन में एक-दूं से उभर आए. एक हल्की सी चिंता और क्यूरीयासिटी मेरे दिमाग़ में तेज़ी से घूमने लगी. मेरी आँखों में एक पल के लिए एक अजीब सा कन्फ्यूषन दिखा, मैं मम्मी के चेहरे को गौर से देखने लगा.

मम्मी मेरी आँखों में झाँक रही थी. उन्होने मेरे चेहरे पर हाथ रखा और एक हल्की मुस्कुराहट दी, जैसे वो मेरे सवालों को पहचान गयी हो. पर उन्होने कुछ कहा नही, बस मुझे और करीब खीच लिया. उनका पस्त मेरे लिए एक रहस्या बन गया था, जिसे मैं समझना चाहता था, पर इस पल, उनकी नंगी, संतुष्ट आँखों में सिर्फ़ मुझी के लिए हवस थी. मैने भी उन सवालों को एक तरफ रख कर उस पल की इंटिमेसी में डूब जाने का फैंसला किया.

उन्होने मेरा हाथ पकड़ा, और उसे अपने सीने पर रखा. मैं उन्हें अपने करीब खींचा और उनके माथे पर एक हल्का किस किया. उसके बाद मम्मी मेरे साथ नंगी सो गयी और रात को 4 बजे वो अपने कमरे में चली गयी.

error: Content is protected !!