मों-सोन सेक्स स्टोरी अब आयेज-
कार अब घर के गाते पर थी. मम्मी के चेहरे पर सॉफ टेन्षन दिख रहा था. उन्होने अपनी तरफ से भरोसा दिलाने की कोशिश की थी, पर घर बहुत लाते से पहुँचे थे तो दोनो को उसकी टेन्षन हो रही थी.
मम्मी (मेरी तरफ देख कर धीरे से): बस, अब नॉर्मल बिहेव करना. जैसे कुछ हुआ ही नही.
मैने सर हिलाया, पर मेरे अंदर भी एक अजीब सी बेचैनी थी. इतनी बड़ी फॅमिली में, सब कुछ च्छुपाना मुश्किल तो था ही. हम कार से उतरे और घर के अंदर चले. जैसा सनडे को होता है, घर में काफ़ी लोग थे. चाची किचन से आती दिखी, और दादी ड्रॉयिंग रूम में बैठी टीवी देख रही थी. और घर के बाकी के लोग भी थे.
चाची (मम्मी को देखते हुए, उनकी आवाज़ में हल्का सा ताना था): आ गयी भाभी? मार्केट में जो काम लेकर गये थे वो ख़तम हो गये?
मम्मी (हल्की नकली मुस्कान के साथ): अर्रे, वो तो काम ही ऐसा है. क्या करें, और आराव के साथ थी, वो भी बोर हो रहा था.
चाची ने मेरी तरफ देखा, उनकी नज़रों में कोई ख़ास एक्सप्रेशन नही था. दादी ने टीवी से नज़रें हटा कर हम दोनो को देखा. उनकी आँखों में एक अजीब सी तीखी नज़र थी.
दादी: हा, तो यामिनी. आज कल बहुत काम निकल रहे है? ऐसे क्या काम लेकर जाती हो की इतना समय लग जाता है? हमारे ज़माने में तो औरतें घर में रहती थी.
दादी के सवाल सीधे थे, और उनकी आवाज़ में भी हल्का सा ताना था. मम्मी के चेहरे का रंग उड़ गया. मैने महसूस किया की मम्मी का हाथ जो मेरे हाथ के पास था, वो हल्का सा काँप रहा था.
मम्मी (तोड़ा घबराते हुए): नही मा जी, बस कुछ ज़रूरी काम थे, वही देख रही थी. और तोड़ा बहुत..
दादी (अपनी नज़र मम्मी पर जमाए हुए): अछा, तो क्या ज़रूरी काम थे, जो इतना टाइम लग जाता है?
दादी के सवाल ने मम्मी को पूरी तरह से घेर लिया था. उनकी आवाज़ में कपकपि आ गयी थी, और उन्हें समझ नही आ रहा था की क्या जवाब दे. उनका चेहरा लाल पद गया.
मैं (दादी की तरफ देखते हुए): दादी आप ना सही कह रही हो? मैने भी मम्मी से यही कहा की ये आपके टेलर को टाइम की वॅल्यू नही है. हर बार धक्के खिलता है. मैने तो आज कंताल कर बोल दिया. इतना टाइम लगाने वाले हो तो मुझे साथ लेकर नही जया करो.
मम्मी (मेरी तरफ नकली गुस्सा दिखा कर): हा, तुझे तो मा के साथ मार्केट जाने में शरम आती है. इसीलिए आज खड़े-खड़े सब ब्लाउस ठीक करवा कर लाई हू.
मम्मी ने इतनी सफाई से मेरी बात को पकड़ा और आयेज बढ़ाया, की सब हैरान रह गये. उनके चेहरे पर अब नकली गुस्सा था, जो उनकी घबराहट को च्छूपा रहा था. दादी ने एक पल के लिए हम दोनो को देखा, उनके चेहरे पर अब भी तोड़ा शक था. पर वो कुछ बोल नही पाई. उनके पास अब कोई सीधा काउंटर अटॅक नही था.
चाची (हल्की मुस्कान के साथ): हा, टेलर तो बहुत नखरे करता है. मैं भी काई बार परेशन हुई हू.
मम्मी ने हल्की सी राहत की साँस ली. मैने भी उन्हें देखा और हल्का सा आँख मारी. मम्मी ने भी हल्का सा मुस्कुराया. कुछ देर बाद दादी ने अपनी नज़रें वापस टीवी पर कर ली. हम दोनो ड्रॉयिंग रूम से निकल कर सीधे अपने कमरे की तरफ चल दिए.
रात को सब के सोने के बाद मम्मी ने मेरे रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और एक लंबी, गहरी साँस ली. उनके कंधे ढीले पद गये थे. उन्होने मेरी तरफ देखा और एक ताकि हुई, पर राहत भारी मुस्कान दी.
मम्मी (हल्की आवाज़ में): बच गये. तूने सब संभाल लिया, आराव. मुझे तो कुछ समझ ही नही आ रहा था.
मैं (मम्मी के पास जाते हुए): मैं था ना मम्मी. मैं कैसे आपको अकेला छ्चोढ़ देता? दादी के सवाल तो ऐसे थे जैसे उन्हें आपको इतने टाइम तक बाहर जाना पसंद ना हो.
मम्मी (अपने माथे पर हाथ रखते हुए): हा, उनकी आँखों में बहुत गुस्सा था. पता नही, कभी-कभी लगता है उन्हें मेरे पर शक हो गया है. ये सब अब और मुश्किल होता जा रहा है. इतनी बड़ी फॅमिली में… (उन्होने सर हिलाया, चिंता सॉफ दिख रही थी).
मैने मम्मी के कंधे पर हाथ रखा. उनका बदन अब भी तोड़ा काँप रहा था.
मैं (मम्मी को गले लगते हुए): टेन्षन मत लो मम्मी. जब तक मैं हू, सब ठीक रहेगा. और हमे तो अब और भी केर्फुल रहना होगा.
मम्मी ने भी मुझे कस्स कर गले लगा लिया. उनके जिस्म की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी, और कार में मिले ब्लोवजोब के बाद की नशा अब भी हमारे बीच मौजूद था. कुछ देर हम ऐसे ही खड़े रहे.
मम्मी (धीरे से, मेरे गले से निकलते हुए): पर ये कब तक चलेगा, आराव? मुझे दर्र लगता है.
मैं (मम्मी को पकड़े हुए ही, उनके कान में धीरे से): मम्मी, आप सही कह रही हो. ये ऐसे नही चलेगा. हम पकड़े जाएँगे.
मम्मी (मेरी तरफ देखते हुए, उनकी आँखों में सवाल था): तो क्या करें, बेटा?
मैं (हल्का सा अलग हो कर, उनका हाथ पकड़े हुए): मम्मी, आपको अनिरुढ़ भाई से अब कम मिलना चाहिए. या फिर, जब मिलना हो तो बहाने ऐसे बनाओ जो घर वालो को अजीब ना लगे. अगर हम बार-बार मार्केट या टेलर का बहाना बनाएँगे, तो शक और बढ़ेगा.
मम्मी (चेहरे पर चिंता थी): कम मिलना? पर अनिरुढ़ जी तो…
मैं (बात काट-ते हुए): मैं जानता हू मम्मी, पर अब सेफ्टी पहले है. अगर आप अनिरुढ़ भाई से थोड़ी दूरी बनाएँगे, तो आप टेन्षन फ्री नॉर्मल रहेंगे और घर वालो को शक भी कम होगा. अभी के लिए तो यही बेस्ट है.
मम्मी ने मेरी बात सुनी, उनका चेहरा सोच में डूब गया. उन्हें शायद ये आइडिया पसंद नही आ रहा था. पर वो मेरी बात की गहराई समझ रही थी.
मम्मी (थोड़ी देर सोच कर, धीमे से): तू सही कह रहा है, आराव. यह सब अब हड्द से ज़्यादा हो गया है. मुझे भी लगता है… तोड़ा संभालना होगा. पर अनिरुढ़ जी को क्या बोलूँगी? उन्हें तो मेरी आदत पद गयी है.
मैं (मम्मी का हाथ दबाते हुए): उन्हें बोल देना की घर में मा जी की तबीयत ठीक नही, या कुछ और ज़रूरी काम आ गया है. और वैसे भी आपने उनको आज अपनी प्राब्लम उनसे शेर तो की थी ना. वक़्त के साथ सब ठीक हो जाएगा. हम सब के लिए यही ठीक है.
मम्मी ने सर हिलाया, उनकी आँखों में अब भी थोड़ी उदासी थी, पर उन्होने मेरी बात मान ली थी.
मेरी बात सुन कर मम्मी ने सर हिलाया, उनकी आँखों में अब भी थोड़ी उदासी थी. पर उन्होने मेरी बात मान ली थी. उन्होने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा और धीरे से सहलाया. उनकी उंगलियों का स्पर्श मेरे चेहरे पर आग लगा रहा था.
मम्मी (धीमी, मदहोश आवाज़ में): तू ही मेरा सब कुछ है, आराव. तू ना होता तो मैं क्या करती?
उन्होने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. ये एक नरम शुरुआत थी, पर जल्द ही किस गहरा होने लगा. मम्मी के होंठ गरम थे और उनकी साँसें मेरी साँसों में घुल गयी थी. मेरी जीभ उनके मूह में घुस गयी और उनकी जीभ से टकराई. हम दोनो एक-दूसरे को पॅशनेट्ली किस कर रहे थे.
किस करते-करते, मेरे हाथ मम्मी की निघट्य पर चलने लगे. उन्होने भी अपने हाथ मेरी त-शर्ट के अंदर डाल दिए. हम दोनो के कपड़े धीरे-धीरे उतरने लगे. मम्मी की सिल्की निघट्य उनके जिस्म से उतार कर नीचे गिर गयी. उनके बड़े बूब्स ब्रा में सॉफ दिख रहे थे, जो तेज़ी से उपर-नीचे हो रहे थे. मैने अपनी त-शर्ट उतार दी और मम्मी की तरफ देखा. हम दोनो अब आधे नंगे एक-दूसरे के सामने थे.
हम फिर से एक-दूसरे में खो गये. मैं उनके नरम होंठो को चूम रहा था, और मम्मी अपने हाथो से मेरे बालों को सहला रही थी. मेरा लंड बॉक्सर में तंबू बन गया था, और मम्मी की नंगी जाँघ से टकरा रहा था, और उसकी गर्मी उन्हें भी महसूस हो रही थी. हम दोनो की साँसें तेज़ हो गयी थी. मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर ली, पूरी तरह से इस पल में डूब चुकी थी.
ऐसा लग रहा था जैसे वक़्त थम गया हो. तभी… मेरे रूम के दरवाज़े पर ज़ोर-ज़ोर से नॉक हुआ. हम दोनो एक पल के लिए हड़बड़ा गये. मम्मी की आँखें खुल गयी, और उनके चेहरे पर फिर से दर्र आ गया. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. नॉक! नॉक! दरवाज़े पर ज़ोर-ज़ोर से नॉक हुआ.
हम दोनो की साँसें अटकी हुई थी. मम्मी ने घबराहट में जल्दी से अपनी निघट्य उठाई और पहनने लगी, उनके हाथ काँप रहे थे. मैने भी झट से अपनी त-शर्ट उठाई और पहन ली, और बॉक्सर को भी ठीक किया. मेरा लंड अभी भी पूरा खड़ा था, जिसे च्छुपाना मुश्किल हो रहा था. मम्मी ने जल्दी-जल्दी अपनी ब्रा को ठीक किया और निघट्य को सही से अड्जस्ट किया.
मम्मी (विस्पर करते हुए, घबराहट में): कौन होगा इतनी रात को?
मैने दरवाज़े की तरफ देखा. नॉक फिर हुआ, इस बार तोड़ा हल्का था पर इमपेशेंट.
मैं (हिम्मत करके, हल्की आवाज़ में): मैं देखता हू. आप तब तक ठीक हो जाओ.
मैने जल्दी से दरवाज़े तक गया, अपने आप को नॉर्मल दिखाने की पूरी कोशिश करते हुए. अंदर से दरवाज़ा खोला.
बाहर पापा खड़े थे. उनके चेहरे पर नींद और थोड़ी फिकर थी. उन्होने मेरी तरफ देखा और फिर अंदर रूम में मम्मी को देखा, जो अब तक पूरी तरह से खुद को अड्जस्ट नही कर पाई थी.
पापा (हल्के सर्प्राइज़ में): आराव? तुम्हारे रूम में यामिनी क्या कर रही है इतनी रात को? सब ठीक है? मैने यामिनी को ढूँढा, कहीं दिखी नही और तुम्हारे रूम में लाइट जाली रही देखी, सोचा शायद यहाँ होगी.
मम्मी का चेहरा सफेद पद गया था. वो पापा की तरफ देख रही थी, समझ नही पा रही थी की क्या कहे. उन्होने जल्दी से अपनी निघट्य को और ठीक किया.
मम्मी (हल्की कपकपि आवाज़ में): जी… वो… बस… आराव को तोड़ा… ठीक नही लग रहा था. इसलिए मैं… उसके पास आ गयी थी.
मम्मी की आवाज़ में सॉफ झूठ और घबराहट थी. पापा ने अपनी भावहेइं सिकोडी और उनका शक और बढ़ गया. उन्होने एक नज़र मम्मी पर डाली, उनकी निघट्य थोड़ी उलझी हुई और बाल बिखरे हुए थे. मम्मी के चेहरे पर पसीना सॉफ दिख रहा था.
पापा (मम्मी की तरफ बढ़ते हुए, उनकी आवाज़ में अब सख्ती थी): ठीक नही लग रहा था? क्या हुआ आराव? और तुम इतनी घबराई हुई क्यूँ हो, यामिनी? कोई बात है क्या?
मम्मी ने पापा की तरफ देखा, उनकी आँखों में अब दर्र सॉफ दिख रहा था. उन्हें समझ नही आ रहा था की क्या बहाना बनाए. वो मेरी तरफ मदद मांगती नज़रों से देख रही थी.
मैं (जल्दी से बीच में आते हुए, पापा और मम्मी के बीच खड़ा हो गया): पापा, वो मैं… मेरा पेट तोड़ा खराब हो गया था. मम्मी ने सुना तो वो आ गयी देखने. अब ठीक हू मैं, इसलिए मम्मी अभी जेया रही थी.
मम्मी ने मेरी बात को पकड़ा और उन्होने सर हिलाया.
मम्मी (तोड़ा राहत भरे अंदाज़ में): हा जी, बस वही. और आप सो रहे थे तो आपको डिस्टर्ब नही किया.
पापा ने एक लंबी साँस ली, उन्हें पूरा यकीन नही हुआ था, पर उनके पास अब कोई सीधा सबूत भी नही था. उन्होने एक बार फिर हम दोनो को देखा.
पापा: ठीक है. अगर ठीक नही लग रहा तो दवाई ले लो, आराव. और यामिनी, तुम भी जेया कर सो जाओ. इतनी रात को जागना ठीक नही.
पापा ने फिर से हम दोनो को घूरा और मूड कर अपने रूम की तरफ चले गये. जैसे ही वो ठीक से मुड़े, हम दोनो ने एक गहरी साँस ली. मम्मी काँप रही थी.
पापा के जाते ही, मम्मी ने जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और पीछे मूड कर मुझे देखा. उनके चेहरे पर अब राहत के साथ-साथ एक गहरा दर्र भी था. वो मेरे पास आई, उनके हाथ अब भी हल्का सा काँप रहे थे.
मम्मी (धीमी, फुसफुसती आवाज़ में): हे भगवान! आज तो मॅर ही जाते. तेरे पापा ने पकड़ लिया होता तो… (उनकी आवाज़ में दर्द था).
मैने उनका हाथ पकड़ा और उसे सहलाया. मम्मी का जिस्म अब भी गरमा-गरम था, और उनकी साँसें तेज़ी से चल रही थी.
मैं: देखा मम्मी? कितना मुश्किल है सब कुछ च्छुपाना. वो तो अछा हुआ मैने टाइम पर बहाना बना दिया. अगर पापा को ज़रा सा भी शक हो गया तो…
मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, उनकी आँखों में आँसू भर आए थे): मैं दर्र गयी थी, आराव. बहुत ज़्यादा दर्र गयी थी. मुझे लगा अब सब ख़तम हो जाएगा.
उन्होने एक पल के लिए मुझे कस्स कर गले लगा लिया, जैसे उन्हें मेरी हिफ़ाज़त की ज़रूरत हो. उनका बदन अब भी तोड़ा ठंडा हो रहा था, घबराहट की वजह से. कुछ देर तक हम ऐसे ही खड़े रहे, एक-दूसरे की धड़कन सुनते हुए.
मम्मी (मुझसे अलग होते हुए, अपनी निघट्य ठीक करते हुए): आराव, हमे अब और ज़्यादा सावधानी बरतनी होगी. जो तूने कहा था, वो बिल्कुल सही है. अनिरुढ़ जी से थोड़ी दूरी बनानी पड़ेगी. ये बहुत रिस्की हो गया है.
उनकी आवाज़ में अब घबराहट कम, पर डिटर्मिनेशन ज़्यादा था. लग रहा था की इस घटना ने उन्हें और भी सीरीयस बना दिया था.
मैं (सर हिलाते हुए): हा मम्मी. अब हमे बहुत सोच समझ कर चलना होगा. अभी तो आप जेया कर आराम करो. मैं भी सोने की कोशिश करता हू.
मम्मी ने एक बार फिर मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में एक अजीब सा मिलाप था, दर्र, राहत और एक नया रिसॉल्व. वो धीरे से मेरे रूम से बाहर निकली, और अपने रूम की तरफ चल दी. मैं दरवाज़ा बंद करके बिस्तर पर लेट गया, पर नींद कहाँ थी? पापा का चेहरा, मम्मी की घबराहट, और हमारे बीच का राज़ सब मेरे दिमाग़ में घूम रहा था.
अब इसके आयेज क्या हुआ ये जानने के लिए तोड़ा इंतेज़ार करे. आपको स्टोरी अची लगी हो तो मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.