मों सेक्स स्टोरी अब आयेज से-
कार अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट से निकल चुकी थी. मम्मी का हाथ अब भी मेरी जाँघ पर था, मेरे लंड के बिल्कुल करीब. उनकी उंगलियाँ धीरे से मेरी जीन्स को मसल रही थी, जैसे वो मेरे अंदर की बेचैनी को बढ़ा रही हो. हर गुज़रते पल के साथ, कार के अंदर का माहौल और गरम हो रहा था. मैं उनकी आँखों में देख रहा था, जहाँ हवस और एक नया कंट्रोल सॉफ दिख रहा था. उनकी एक नॉटी हँसी के बाद, एक पल का सन्नाटा च्छा गया.
मम्मी (मेरी तरफ देखते हुए): तो, क्या सोच रहा है, आराव? अनिरुढ़ जी के साथ वक़्त बिताया तो तुझे बुरा लग रहा है?
मैने उनकी तरफ देखा, उनकी बातों में च्छूपी शरारत को समझते हुए.
मैं: आप ही बताइए मम्मी, आपने अनिरुढ़ भाई को कुछ नया सिखाया या खुद कुछ नया सीख कर आई है?
मम्मी (एक नॉटी स्माइल के साथ, उनका हाथ अब मेरी जाँघ पर उपर की तरफ बढ़ रहा था): सिखाया तो बहुत कुछ है, बेटा. पर कुछ चीज़ें तो बस महसूस करने वाली होती है, बताने वाली नही. जैसे… ये (उन्होने मेरी जाँघ को हल्का सा दबाया, और उनका हाथ मेरे लंड की तरफ और बढ़ गया).
मेरा सारा ध्यान रास्ते की तरफ था. पर दिमाग़ अब मम्मी के हाथ पर था. उनका टच मेरे पुर जिस्म में एक अजीब सा करेंट दौड़ा रहा था. मेरी साँसें तेज़ हो गयी थी.
मैं (धीरे से कहा): आप तो बड़ी नॉटी हो गयी है मम्मी.
मम्मी (हंस दी): नॉटी तो मैं हमेशा से थी, आराव. बस अब तू समझने लगा है. तुझे पता है, अनिरुढ़ जी बहुत बेचैन हो जाते है. उन्हे कंट्रोल करना कितना मुश्किल होता है.
मैं: सच में? या आप उन्हे कंट्रोल करना चाहती ही नही है? (मैने उन्हे सीधा पोक किया)
मम्मी (उनकी हँसी और तेज़ हो गयी): तू तो बहुत तेज़ हो गया है. शायद मैं भी तोड़ा कंट्रोल खोना चाहती हू. कभी-कभी… अछा लगता है.
उनका हाथ अब मेरे लंड के बिल्कुल उपर ठहरा हुआ था, और उनकी उंगलियाँ उसकी शेप को हल्का सा महसूस कर रही थी. ये एक नया दाव था. मम्मी अनिरुढ़ भाई से अपनी चुदाई के बाद, सीधा मेरे सामने अपनी हवस को खुल कर दिखा रही थी. उनका हर शब्द, हर टच मुझे और भी पागल कर रहा था.
मम्मी (मेरी आँखों में गहरी नज़र डालते हुए): आराव, तुझे पता है, जब अनिरुढ़ जी फ्लॅट पर तुम मुझे छ्चोढ़ कर चले जाते थे, तो मुझे बुरा लगता था. पर आज तुम वही थे तो मैं बार-बार तुम्हारे बारे में सोच रही थी… और तुम बाहर ही हो सोच कर और नॉटी हो गयी.
उन्होने अपना हाथ मेरी जाँघ पर और उपर किया, मेरे लंड को हल्का सा दबाया. मेरा शरीर एक झटके से काँप गया. मम्मी ने सीधा मेरे लंड पर हाथ रख कर ये बात कही थी. मेरी आँखें बड़ी हो गयी थी.
मैं: मम्मी, आप… आप क्या कह रही है? (मेरी आवाज़ में हिचकिचाहट थी, पर अंदर से मैं और उत्तेजित हो रहा था)
मम्मी (एक नॉटी स्माइल के साथ, उन्होने अपनी उंगलियों से मेरे लंड को जीन्स के उपर से हल्का सा मसला): सच कह रही हू, आराव. अनिरुढ़ जी तो बस ठीक है. पर तेरे जैसा जुनून, तेरे जैसी गर्मी… वो तो बस तेरे में है. मेरी छूट को तो बस तू ही शांत कर सकता है.
उनका हाथ अब मेरे लंड पर पूरी तरह से जाम गया था, और वो उसे धीरे-धीरे सहला रही थी. उनकी आवाज़ में एक ऐसी आग थी, जो मुझे पूरी तरह से जला रही थी.
कार अब घर की तरफ बढ़ रही थी, पर उसके अंदर का माहौल एक अलग ही दुनिया में बदल चुका था. मम्मी का हाथ अब मेरे लंड पर था, जीन्स के उपर से ही. उनकी उंगलियाँ धीरे से उसे सहला रही थी, और उनका हर स्पर्श मेरे अंदर की आग को और भड़का रहा था. मम्मी ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में शरारत और चाहत सॉफ दिख रही थी.
मम्मी (मेरी तरफ झुकते हुए, उनकी साँसें मेरे चेहरे पर पद रही थी): बेटा, कब से तुम्हारा लंड अकड़ गया है. मैं इसको शांत कर देती हू.
मेरी आँखें बड़ी हो गयी. मम्मी ने खुल कर बात की थी, और उनका ये बोल्ड स्टेप मुझे शॉक कर रहा था, पर उससे ज़्यादा उत्तेजित.
मैं (मेरी आवाज़ में हिचकिचाहट थी): मम्मी… कार में? कोई देख लेगा तो?
मम्मी (उनकी हँसी और तेज़ हो गयी, एक-दूं नॉटी): अर्रे मेरे शेर, मम्मी है ना. मैं सब देख लूँगी. और फिर, अनिरुढ़ जी के फ्लॅट पर जो हुआ, उसके बाद तो मैं और भी बेशरम हो गयी हू. तुझे सज़ा देनी है ना?
उनका हाथ अब और तेज़ हो गया था, मेरे लंड को जीन्स के उपर से ही मसल रहा था. मुझे पता था की अब कोई रोक नही सकता था. मैने धीरे-धीरे कार की स्पीड कम की और एक सुनसान जगह देखी.
सनडे का दिन था, और मैने एक स्कूल के पास कार पार्क कर दी. वहाँ कोई नही आने वाला था, और प्राइवसी भी अची थी. मैने कार को साइड में पार्क किया, बिल्कुल च्छूपा कर. मैने हल्के से दरवाज़ा लॉक किया और फिर मम्मी की तरफ पलट गया.
मम्मी (मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए): अब बता, क्या करना है?
मैने बिना कुछ बोले, अपनी सीट को तोड़ा पीछे किया, जिससे उनके लिए स्पेस बन सके. मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और धीरे से मेरे करीब आई. उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपनी सारी के अंदर ले गयी, जहाँ उनका पेटिकोट था. मेरा हाथ उनकी नंगी जाँघ पर पड़ा, जो बहुत नरम और गरम थी.
मम्मी ने धीरे से मेरी जीन्स का बटन खोला, और फिर ज़िप नीचे की. मेरा लंड, जो अब तक जीन्स के अंदर क़ैद था, अब आज़ाद हो कर बाहर निकल आया. मम्मी ने उसे अपने हाथ में लिया, और उसकी गर्मी को महसूस किया. उन्होने एक मदहोश आ भारी.
मम्मी (धीमी, गरम आवाज़ में): मेरे बेटे का लंड तो बहुत बड़ा हो गया है.
उन्होने मेरे लंड को अपने होंठो तक लाया और धीरे से उसके सुपारे को अपने होंठो में भर लिया. उनकी गरम साँसें मेरे लंड पर पद रही थी, और उनका नरम स्पर्श मुझे मदहोश कर रहा था. मम्मी ने धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसना शुरू किया, उपर से नीचे तक, और फिर वापस उपर. उनकी जीभ की हरकत और उनके मूह की गर्मी मेरे लंड को पागल कर रही थी.
मैं अपनी आँखें बंद करके इस एहसास का पूरा आनंद ले रहा था. कार के अंदर की खामोशी में, मम्मी के चूसने की आवाज़ और उनकी मदहोश आहें मेरे कानो में शहद घोल रही थी.
उन्होने अपने सर को उपर-नीचे करते हुए मेरे लंड को चूस्टे रही, और बीच-बीच में गहरी साँस लेती रही. मैं उनके बालों में हाथ फेरते हुए, इस खूबसूरत पल में पूरी तरह खो गया.
मम्मी ने मेरे लंड को इतनी शिद्दत से चूसा की मैं झड़ने के करीब आ गया. मेरा लंड पूरी तरह से सख़्त और तैयार हो चुका था.
मैं (मदहोश आवाज़ में): बस मम्मी… अब और नही… मैं झड़ने वाला हू…
मम्मी ने मेरे लंड को मूह से बाहर निकाला, उनके होंठ चमक रहे थे. उन्होने एक नॉटी स्माइल दी, जिसमे जीत की शरारत दोनो थी. उन्होने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में जुनून और चाहत सॉफ दिख रही थी.
मम्मी (साँस लेते हुए): क्या हुआ मेरे बेटे को? अभी से हार मान गया?
मुझे पता था की मम्मी अब मुझे और तड़पाना चाहती थी. उन्होने एक बार फिर मेरे लंड को अपने मूह में लिया और तेज़ से चूसना शुरू किया. अबकी बार, वो और भी वाइल्ड हो गयी थी. उनकी जीभ मेरे लंड पर ऐसे चल रही थी जैसे वो उसे निगल जाएँगी. मैं कंट्रोल नही कर पा रहा था.
मम्मी (मूह में लंड लिए हुए, धीमी आवाज़ में): अया… आराव… झाड़ जा… मम्मी के मूह में झाड़ जेया…
उनकी आवाज़ ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया. मैने अपने कुल्हों को तोड़ा उपर उठाया, और कुछ ही पल में, मेरा गरम वीरया मम्मी के मूह में भर गया. मम्मी ने उस रस्स को पूरा पी लिया, और फिर मेरे लंड को मूह से बाहर निकाला. उनके होंठ चमकते हुए थे.
मम्मी (हल्की सी हँसी के साथ): बहुत गरम रस्स है तेरे लंड का, आराव. मेरी प्यास और बढ़ा दी तूने.
हम दोनो कुछ देर तक ऐसे ही बैठे रहे, साँसें तेज़ चल रही थी. मम्मी ने मेरे लंड को सॉफ किया और फिर मेरी जीन्स की ज़िप बंद कर दी. मैने कार स्टार्ट की और घर की तरफ चल दिए.
कार अब फिर से नॉर्मल चल रही थी, पर मेरे और मम्मी के बीच का रिश्ता अब और भी गहरा और खुल कर सामने आ चुका था. मम्मी ने मुझे कार में ब्लोवजोब देकर एक नया लेवेल पार कर लिया था. मुझे पता था की अब उनके और मेरे रिश्ते की कोई हड्द नही थी.
मैं (धीरे से, रोड पर देखते हुए): मम्मी घर का माहौल सब ठीक हे ना?
मम्मी (उन्होने हल्की सी हँसी दी): चिंता मत कर, मेरे शेर. तेरी मम्मी है ना. जो कुछ भी हुआ है, वो बस हम दोनो के बीच का राज़ है. और वैसे भी, इतनी बड़ी फॅमिली में तोड़ा बहुत चलता रहता है. हमे अपनी दुनिया में रहना है.
उनकी बात सुन कर मुझे थोड़ी तसल्ली हुई, पर पूरा टेन्षन अभी भी नही गया था. मेरी नज़र बार-बार मम्मी की तरफ जेया रही थी. वो अब काफ़ी रिलॅक्स्ड लग रही थी, उनके चेहरे पर एक अजीब सा चमक थी.
मैं: पर आपने अनिरुढ़ भाई से कहा की चाची और दादी आप पर नज़र रखते है. किसी को तोड़ा भी हमारे इस कांड के बारे में पता चला तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.
मम्मी (उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और उसे हल्का सा दबाया): अर्रे, डरपोक कहीं के. तू इतना कुछ कर देता है, और अब दर्र रहा है? तूने मेरी छूट की प्यास बुझाई है, मैने तेरे लंड को शांत किया है, और अब दर्र रहा है?
उनकी बातें सुन कर मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी. मम्मी मुझे अभी भी उकसा रही थी, पर उनकी आवाज़ में एक अजीब सा विश्वास था.
मम्मी (मेरी तरफ घूम कर): टेन्षन मत ले. मैं सब संभाल लूँगी. मैं घर जेया कर ऐसा बिहेव करूँगी जैसे कुछ हुआ ही नही. थोड़ी देर रेस्ट करूँगी, और फिर सब नॉर्मल. वैसे भी, अनिरुढ़ जी के फ्लॅट पर जाना तो अब आम हो गयी है. अब उनसे कभी-कभी मिलना अछा लगता है, और उनसे एक-दूं से मिलना बंद कर दूँगी तो उनको शक होगा.
उनकी बात सुन कर मुझे थोड़ी राहत मिली. मम्मी ने जैसे मेरे सारे दर्र को एक पल में डोर कर दिया था. कार अब घर के करीब पहुँच रही थी. जैसे ही कार घर के करीब पहुँचने लगी, मम्मी के चेहरे पर हल्का सा टेन्षन आ गया. उनकी पहले वाली नॉटी स्माइल अब थोड़ी फीकी पद गयी थी. उन्होने अपना हाथ मेरी जाँघ से हटा लिया और सीधे बैठ गयी.
मैं (मैने उनकी तरफ देखा, समझ गया था की वो अभी भी कुछ सोच रही है): मम्मी, घर का माहौल सब ठीक होगा ना? कोई कुछ नोटीस तो नही करेगा?
मम्मी (उनकी आवाज़ में अब थोड़ी सी फिकर थी): देख आराव, वैसे तो सब ठीक है, पर कभी कभी तेरी चाची और दादी..(उन्होने एक लंबी साँस ली, जिससे उनकी छ्चाटी उपर-नीचे हुई).
मैं (मैने उनकी तरफ देखा, समझ गया था की वो किस बारे में बात कर रही थी): क्या हुआ मम्मी? कोई सवाल करते है क्या?
मम्मी (उन्होने धीरे से सर हिलाया, उनकी नज़र कार के बाहर थी): हा, करते है. कभी-कभी ऐसे सवाल पूच लेती है की जवाब देना मुश्किल हो जाता है. जैसे, यामिनी, आज कल बहुत ज़्यादा बेज़ार जाने लगी हो? क्या लेने जाती हो जो इतनी देर लगा देती हो?
उनकी आवाज़ में अब सॉफ-सॉफ घबराहट दिख रही थी. उन्होने अपने होंठो को काटा, जैसे कुछ सोच रही हो.
मम्मी (तोड़ा रुक कर, उन्होने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में अब दर्र था): मैं उन्हे हमेशा काम का बहाना बना देती हू, पर उनकी आँखों में शक सॉफ दिखता है. दादी तो कभी-कभी अजीब तरीके से देखती है, जैसे उन्हे सब पता हो. मुझसे तो अब उनके सामने ठीक से आँख मिलाई भी नही जाती.
उनका टेन्षन मुझ तक भी पहुँच रहा था. इतनी बड़ी फॅमिली में, हर चीज़ च्छुपाना कितना मुश्किल होता है, ये मैं समझ सकता था. कार अब घर के गाते पर थी.