मों-सोन सेक्स स्टोरी अब आयेज-
मम्मी ने मुझे फिर से लिप्स किस किया, और ये किस पहले से भी गहरी और जोशीली थी. उनकी जीभ मेरे मूह में घूमने लगी, और हम दोनो एक-दूसरे में खो गये.
मम्मी ने एक नॉटी स्माइल दी और फिर धीरे से मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया. उनका स्पर्श मिलते ही मेरे बॉडी में एक तेज़ करेंट दौड़ गया.
मम्मी (आँखों में शरारत के साथ): देख, तेरी मम्मी तुझे कैसे खुश करती है.
मम्मी (मेरे लंड को हल्के से सहलाया, और फिर उसे चूमते हुए): वाह बेटे, कहाँ च्छूपा कर रखा था इसको? ये तो तेरे पापा और अनिरुढ़ से भी अछा है.
उन्होने मेरे लंड को अपने होंठो तक लाया, और धीरे से उसके सुपारे को अपने होंठो में भर लिया. उनकी गरम साँसें मेरे लंड पर पद रही थी, और उनका नरम स्पर्श मुझे मदहोश कर रहा था. मम्मी ने धीरे-धीरे मेरे लंड को चूसना शुरू किया, उपर से नीचे तक, और फिर वापस उपर. उनकी जीभ की हरकत और उनके मूह की गर्मी मेरे लंड को पागल कर रही थी.
मैं अपनी आँखें बंद करके इस एहसास का पूरा आनंद ले रहा था. मम्मी ने अपने सर को उपर-नीचे करते हुए मेरे लंड को चूस्टे रही, और बीच-बीच में गहरी साँस लेती रही. उनकी मदहोश आ मेरे कानो में गूँज रही थी. मैं उनके बालों में हाथ फेरते हुए, इस खूबसूरत पल में पूरी तरह खो गया. मम्मी ने मेरे लंड को इतनी शिद्दत से चूसा की मैं झड़ने के करीब आ गया. मेरा लंड पूरी तरह से सख़्त और तैयार हो चुका था.
मैं (मदहोश आवाज़ में): बस मम्मी, अब और नही.
मम्मी ने मेरे लंड को मूह से बाहर निकाला, उनके होंठ चमक रहे थे. उन्होने एक नॉटी स्माइल दी, जिसमे जीत और शरारत दोनो थी.
मम्मी (साँस लेते हुए): क्या हुआ मेरे बेटे को? अभी से हार मान गया? तेरी मम्मी ने तो अभी खेल शुरू भी नही किया.
मैं: मम्मी ये मेरा पहली बार है.
मम्मी की ये सुन कर आँखें चमक गयी. उनके होंठो पर एक प्यारी मुस्कान आ गयी, जिसमे ममता और जुनून का अजीब सा मिश्रण था.
मम्मी (प्यार से मेरे गाल सहलाते हुए): कोई बात नही बेटा. आज तेरी मम्मी तुझे सब सीखा देगी.
उन्होने धीरे से मुझे धकेल कर बेड पर लिटा दिया और खुद मेरे उपर से हॅट कर मेरे बगल में आ गयी. एक पल के लिए हम दोनो हास्से. फिर मम्मी ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया, और उसे अपनी छूट के मूह पर रखा.
मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, उनकी आवाज़ में चाहत थी): अब तू कर जो करना है. दिखा दे अपनी मम्मी को, कितना ताक़तवर है मेरा बेटा.
मैने एक गहरी साँस ली और मम्मी के उपर आ गया. उन्होने अपने पैर थोड़े और खोले. मैने अपने लंड को उनकी गरम छूट पर सेट किया. मेरा लंड पहले ही पूरी तरह खड़ा था और अब उसकी नोक उनकी छूट के मूह पर थी.
मम्मी (हल्के से सिसकते हुए): आ… आराव… धीरे से…
मैने एक धक्का लगाया, और मेरा लंड धीरे-धीरे उनकी छूट में समा गया. पहले तोड़ा कसाव महसूस हुआ, पर फिर मम्मी की छूट की गर्मी और नामी ने उसे आराम से अंदर ले लिया. मम्मी के मूह से एक मदहोश सिसकारी निकली, और उन्होने अपने हाथ मेरे पीठ पर कस्स लिए.
मैं उनकी आँखों में देख रहा था. उनकी आँखों में दर्द से ज़्यादा आनंद और विश्वास था. मैने धीरे-धीरे अंदर-बाहर होना शुरू किया. हर धक्के के साथ मम्मी एक गहरी आ भारती थी. उनका शरीर मेरे नीचे तर-तर काँप रहा था. उन्होने अपने कुल्हों को हल्का सा उपर उठा कर मेरा साथ देना शुरू किया.
मम्मी (मदहोश आवाज़ में): आ… आराव… और गहरा… मेरी जान…
मैने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. अब धक्के और तेज़ और गहरे थे. मेरे लंड और उनकी छूट के बीच की रग़ाद से एक तेज़ आग जल रही थी. पूरा कमरा सिसकारियों, आहों, और जिस्मों के टकराने की आवाज़ से भर गया था.
मम्मी अपने होंठो को काट रही थी, उनके चेहरे पर परम आनंद का भाव था. उनका शरीर पूरी तरह पसीने से भीग चुका था, और वो बार-बार मेरा नाम ले रही थी.
मम्मी (आ भरते हुए, साँसें तेज़): आराव… मैं… आ… मैं पागल हो जौंगी… तेज़… और तेज़…
हम दोनो एक जुनून में डूबे हुए थे. हर धक्के के साथ मम्मी की छूट मेरे लंड को कस्स कर पकड़ रही थी, जैसे वो उसे अपने अंदर समा लेना चाहती हो. उनकी गर्मी और नामी ने मुझे मदहोश कर रखा था. मम्मी के होंठो से निकालने वाली सिसकारियाँ मेरे कानो में शहद घोल रही थी. उनका जिस्म अब तेज़ कंपन करने लगा था, जो इस बात का इशारा था की वो अपने चरम पर पहुँचने वाली थी. तभी मम्मी ने एक तेज़ चीख भारी.
मम्मी: आआआअहह! आराव… मैं गयी… गयी…
उनकी छूट अंदर से तेज़ी से सिकुड़ी, और उनका गरम रस्स मेरे लंड पर बाहर तक फैल गया. मैं समझ गया की मम्मी झाड़ चुकी थी, और उनके रस्स की गर्मी ने मुझे भी झड़ने के करीब ला दिया. मैने कुछ और तेज़ और गहरे धक्के लगाए, और फिर मेरा गरम वीरया मम्मी की छूट में भर गया. एक सुकून और थकान का एहसास हुआ. मैं मम्मी के उपर ढेर हो गया, साँसें तेज़ चल रही थी.
कुछ देर तक हम दोनो एक-दूसरे से चिपके रहे, अपनी साँसों को नॉर्मल होने का इंतेज़ार कर रहे थे. मेरा लंड अभी भी उनकी छूट में ही था, पर अब उसकी सख्ती थोड़ी कम हो गयी थी. मैने अपना सर मम्मी की छ्चाटी पर रख दिया.
उन्होने मेरे सिर पर हाथ फेरा और हल्के से मेरे बालों को सहलाने लगी. उनकी धड़कन अब भी तेज़ थी, जो मेरे कानों में सॉफ सुनाई दे रही थी.
मम्मी (प्यार से, तोड़ा हानफते हुए): आराव तू तो मेरी जान निकल देगा. सच में, कभी सोचा नही था मेरा बेटा इतना मर्द बन जाएगा. तूने तो मेरी सारी आग बुझा दी.
मैं (मम्मी को प्यार से देखते हुए, साँस लेते हुए): मम्मी, आपकी चुदाई तो कमाल थी. मेरा लंड तो आपकी छूट में खो ही गया था. ऐसा मज़ा तो मैने सपने में भी नही सोचा था. और आपकी छूट आ, उसने तो मेरे लंड को ऐसे जकड़ा था जैसे मैने उसका नशा उतार दिया हो.
मम्मी (हल्के से हेस्ट हुए, मेरी पीठ सहलाते हुए): चल बदमाश, ज़्यादा मस्का मत लगा. पहली बार में ही इतना धुआँ निकाल दिया. वैसे, तेरे लंड का रस्स बहुत गरम लगा मुझे.
मैं (शरारत से मम्मी के जिस्म पर हाथ फेरते हुए): आपकी छूट का रस्स भी बहुत गरम ह्म, वो महसूस करते हुए ही मैं झाड़ गया. अब आप और भी हसीन दिख रही हो, मम्मी. मुझे तो आपका हर रूप पसंद है, ख़ास कर जब आप चुदाई के बाद इतनी संतुष्ट दिखती हो. मेरा तो मॅन कर रहा है, आपकी और चुदाई करू.
मम्मी (आँखों में शरारत और चाहत लिए): चल बेशरम, अभी तो लंड ठंडा पड़ा है, और तुझे और चुदाई चाहिए?
मैं (मुस्कुराते हुए): आपका नशा ही ऐसा है, मम्मी. एक बार में काम नही बनता. पूरा नशे में डूबना चाहता हू.
मम्मी ने मेरे गाल पर हल्के से थप्पड़ मारा, पर उनके होंठो पर एक खूबसूरत मुस्कान थी. उन्होने धीरे से मेरा लंड अपनी छूट से बाहर निकाला. एक हल्की सी छपक की आवाज़ आई. मेरा लंड अभी भी तोड़ा नुश्क था, पर मम्मी के जिस्म की गर्मी और उनकी नॉटी बातें उसे फिर से जगाने लगी. उन्होने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी.
मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, हल्के से मुस्कुराते हुए): अब देख, तेरी मम्मी कैसे तेरे शेर को फिर से जागती है.
मम्मी ने मेरे लंड के सुपारे को अपने होंठो से चूमा, और फिर धीरे-धीरे उसे अपने मूह में भर लिया. उनकी जीभ की नरम हरकत और उनके मूह की गर्मी ने मेरे लंड को फिर से सख़्त करना शुरू कर दिया. उन्होने आँखें बंद कर ली थी और पूरी लगान से मेरे लंड को चूस रही थी. हर बार जब उनका सर उपर-नीचे होता, एक मदहोश आ उनके गले से निकलती.
मैं उनके बालों में हाथ फेरते हुए, इस खूबसूरत नज़ारे का आनंद ले रहा था. उन्होने मेरे लंड को इतनी शिद्दत से चूसा की कुछ ही देर में वो पूरी तरह से खड़ा हो गया. उन्होने उसे बाहर निकाला, और फिर एक नॉटी स्माइल दी.
मम्मी (साँस लेते हुए): अब तैयार है मेरा बेटा? या और खुश करू?
मैं (उत्तेजित आवाज़ में): मम्मी, आपकी तो बात ही अलग है. मैं तैयार हू.
>मम्मी ने एक तेज़ नज़र मुझ पर डाली और फिर अपने कुल्हों को तोड़ा उपर उठाया.
मम्मी: तो चल, आज तुझे मम्मी की हर पोज़िशन का मज़ा चखाते है.
मम्मी ने करवट ली और फिर अपने घुटनो और हाथो के बाल हो गयी. उनकी गोल गांद का उभार और छूट का च्छेद अब सॉफ मेरे सामने थे. उन्होने एक नॉटी ग्लॅन्स दी.
मम्मी: आजा मेरे शेर. अपनी मम्मी को हर तरफ से खुश कर दे.
मैने उनके पीछे जेया कर घुटनो के बाल बैठ गया. मम्मी की गांद का उभार और छूट की नामी मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी. मैने अपना लंड उनकी छूट पर सेट किया.
मम्मी (आ भरते हुए): आराव… धीरे से डालना…
मैने एक तेज़ धक्का लगाया, और मेरा लंड उनकी छूट में गहराई तक समा गया. मम्मी के मूह से एक तेज़ सिसकारी निकली. उन्होने अपने कुल्हों को तोड़ा पीछे किया, जैसे वो मेरे लंड को पूरी तरह से अंदर लेना चाहती हो. उन्होने अपनी कमर को उपर उठा रखा था, जिससे एंट्री और गहरी हो रही थी.
मैं उनकी कमर पकड़ कर तेज़ धक्के लगाने लगा. मम्मी अपने हाथो और घुटनो के बाल हिल रही थी. हर धक्के के साथ उनकी छूट मेरे लंड को कस्स कर पकड़ती थी. उनके बूब्स का उभार और छूट की गर्मी मुझे परम आनंद दे रही थी.
मम्मी (मदहोश आवाज़ में): आ… आराव… ज़ोर से… और ज़ोर से… अपनी मम्मी को फाड़ दे…
मैं उनकी बालों को पकड़ कर उन्हे अपनी तरफ खींचा और उनकी गर्दन पर किस करने लगा. चुदाई की आवाज़े और सिसकारियाँ पुर कमरे में गूँज रही थी. हम दोनो जोश में थे, एक-दूसरे में खो चुके थे.
कुछ देर डॉगी स्टाइल में चुदाई करने के बाद, मम्मी ने अपनी कमर को धीरे से नीचे किया और करवट ले ली. मेरे सामने सीधे लेट गयी. उन्होने अपने एक पैर को मेरे कमर पर लपेट लिया, जिससे मेरा लंड अभी भी उनकी छूट के अंदर ही था.
मम्मी (हानफते हुए, मेरे होंठो को चूमते हुए): अब ऐसे… आराव… इसका मज़्ज़ा भी अलग है.
मैं उनके जिस्म के करीब आ गया, और हम दोनो आमने-सामने थे. मैं धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा. इस पोज़िशन में घुसने की गहराई थोड़ी कम थी, पर रग़ाद और नज़दीकी का एहसास बहुत ज़्यादा था. मम्मी ने अपने हाथो से मेरी पीठ को सहलाना शुरू किया.
मम्मी (आ भरते हुए): आराव… कितना प्यारा लगता है तू अंदर… बिल्कुल भरा हुआ.
मैने उनके बूब्स को अपने हाथो में दबाया और उन्हे तेज़-तेज़ किस करने लगा. उनकी साँसें फिर से तेज़ हो चुकी थी. उन्होने अपने कुल्हों को हल्के से उपर उठा कर मेरे धक्कों का साथ दिया.
मम्मी: आ… आराव… और तेज़… मेरी जान… मैं फिर से…
हम दोनो फिर से झड़ने के करीब थे. मम्मी ने अपने पैर मेरे कमर पर और कस लिए, और उनका जिस्म एक बार फिर तेज़ कंपन करने लगा.
मम्मी: आआआअहह! आराव…
उनकी छूट ने मेरे लंड को अंदर से कस कर पकड़ लिया. मैं भी अब कंट्रोल नही कर पाया. कुछ और तेज़ धक्के लगाने के बाद, मेरा गरम वीरया मम्मी की छूट के अंदर पूरी तरह से भर गया. मैं उनके जिस्म पर ढेर हो गया, दोनो की साँसें तेज़ चल रही थी.
मम्मी (प्यार से मेरे गाल सहलाते हुए, उनकी आँखों में गहरा सुकून था): आराव, सच में, तूने तो मेरी छूट की आग पूरी तरह बुझा दी. कभी सोचा नही था मेरा बेटा इतना ज़ोर से छोड़ेगा. तेरी चुदाई ने तो मुझे पूरी तरह संतुष्ट कर दिया. तेरा लंड तो मेरी छूट में ऐसे समा गया था जैसे वो उसी के लिए बना हो.
मैं (मम्मी की आँखों में देखते हुए, थोड़ी शरारत और गहरे सुकून के साथ): मम्मी, आप भी तो कमाल हो. आपकी छूट ने तो मेरा लंड ऐसे जकड़ा था की मैं पागल हो गया था. और आपकी आवाज़े… वो तो मेरे कान में अभी भी गूँज रही है. मुझे तो लगा, मैं जन्नत में हू. थॅंक योउ मम्मी मेरे पहले सेक्स को इतना ख़ास बनाने के लिए.
मम्मी सिर्फ़ मुस्कुराइ. उनका गरम जिस्म मेरे जिस्म से लगा हुआ था, और उनकी धड़कन अब धीरे-धीरे नॉर्मल हो रही थी. मैं उनकी पीठ सहला रहा था, और हम दोनो ने कुछ पल इस गहरे सुकून में बिताए.
कुछ देर बाद, मम्मी ने धीरे से आँखें खोली. उन्होने मेरे माथे पर एक प्यार भारी किस दी.
मम्मी (धीमी, संतुष्ट आवाज़ में): अब चल बेटे, फ्रेश हो ले. रात बहुत हो गयी है.
हम दोनो नंगे ही बेड से उतरे और धीरे से बातरूम की तरफ चल दिए. अंदर जेया कर हमने शवर के नीचे एक-दूसरे को सॉफ किया. पानी की बूँदें हमारे शरीर पर गिर रही थी, और हम दोनो एक-दूसरे को प्यार से रग़ाद कर नहा रहे थे. ये भी अपने आप में एक अलग एहसास था, जिसमे नज़दीकी और आत्मिकता थी.
फ्रेश होने के बाद हम दोनो ने अपने कपड़े पहने. मम्मी ने मेरी तरफ देखा और उनके होंठो पर एक प्यारी मुस्कान थी.
मम्मी (मेरे करीब आते हुए): अब चालू मैं?
मैं (मम्मी का हाथ पकड़ कर, उनकी आँखों में देखते हुए): जाना ज़रूरी है? यही पर सो जाओ ना.
मम्मी (मेरे चेहरे को अपने हाथो में लेते हुए, प्यार से): नही बेटे, अभी मैं यहाँ नही रुक सकती (उनकी आवाज़ में थोड़ी सी शरम और ममता थी). देख, हम दोनो ने आज जो किया, वो हमारे बीच का राज़ है. अगर मैं यही रुक गयी, तो सुबह सब को शक हो जाएगा (उन्होने धीरे से मेरा गाल सहलाया). और तू तो समझदार है ना? हमारा रिश्ता अब और भी गहरा हो गया है, पर उसे च्छूपा कर रखना होगा. (उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जिसमे राज़दारी और चाहत दोनो थी) पर मैं तुझसे डोर नही जेया रही हू. जब भी मॅन करेगा, मैं अवँगी.
मम्मी ने मेरे होंठो पर एक लंबा लिप्स किस दिया. ये किस प्यार, शुक्रिया, और आयेज मिलने के वादे का मिश्रण थी. उन्होने धीरे से अपना हाथ मेरे गाल पर रखा, और फिर मूड कर अपने कमरे में चली गयी.
मैं वहीं खड़ा रहा, उन्हे जाते हुए देखता रहा. पूरी रात की यादें मेरे दिमाग़ में घूम रही थी. ये सिर्फ़ चुदाई नही थी, ये एक रिश्ते की नयी शुरुआत थी, जो च्छूपी हुई थी, पर अब गहरी हो चुकी थी.