मा की सेक्स स्टोरी अब आयेज-
एक बार घर से किसी रिश्तेदार के यहाँ फंक्षन में जाना था. हम कुछ लोग घर से जाने वाले थे. हमारी इतनी बड़ी फॅमिली है तो कभी ऐसा नही होता की पूरी फॅमिली लॉक लगा कर जाए. मैं रेडी हो कर हॉल में बैठा था. तब मम्मी ने मुझे इशारे से उनके पीछे आने को कहा. वो मुझे उनके बेडरूम में लेकर गयी.
उसके बाद उन्होने कुछ सारी दिखाई और कहा: मैं कों सी पहनु?
मैं उनको एक येल्लो सारी सजेस्ट किया, जो मुझे काफ़ी अछा लगा.
मम्मी ने मुझे स्माइल किया और कहा: मैं भी यही सोच रही थी.
फिर उन्होने बेडरूम लॉक किया. मैं तब तक उनके बेड पर बैठा था. मुझे समझ ही नही आया मम्मी को चेंज करना था तो उन्होने मुझे बाहर क्यूँ नही भेजा.
मम्मी ने मेरे सामने उनकी सारी निकाल दी और वो सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में थी. उनकी भारी हुई छ्चाटी ब्लाउस में कस्स के बँधी थी, और पेटीकोआट में उनकी गांद का उभार सॉफ दिख रहा था. जब उन्होने आयेज से अपने ब्लाउस के हुक्स खोलने हाथ बढ़ाया, वो मेरी तरफ देखी और एक-दूं से रुक गयी. मेरा ध्यान उनके ब्लाउस के उपर ही था. मैने मम्मी की तरफ देखा तो उन्होने अपनी आँखें बड़ी की और मुस्कुराइ.
मैने भी अपनी नज़रें नीचे की और पलट गया. अगले ही पल मम्मी का ब्लाउस मेरे बाजू में पड़ा देखा. मॅन तो कर रहा था पीछे पलट कर देखु, पर मैने ऐसा किया नही. मम्मी ने अपना पेटिकोट भी मेरे बाजू में रखा.
कुछ ही देर बाद मम्मी ने कहा: आराव, ज़रा इधर आना बेटा.
मैने देखा तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गयी. मम्मी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पनटी में थी, और उनका भरा हुआ जिस्म मेरे सामने था. वो पीछे से अपना ब्लाउस का हुक लगाने की कोशिश कर रही थी. लेकिन वो लगा नही.
मम्मी (तोड़ा शरमाते हुए): आराव, ज़रा इसे लगाने में हेल्प करना.
मेरी तो धड़कने तेज़ हो गयी. मम्मी ने जब अपने हाथ आयेज लिए, मुझे उनका पूरा खुला बॅक दिख रहा था, और उनकी ब्रा की स्ट्रॅप उनकी स्किन पर कस्स रही थी.
मैने मम्मी के ब्लाउस के हुक लगाने की कोशिश कर रहा था. पर ब्लाउस इतना टाइट था की वो लग ही नही रहा था.
मैं (ज़ोर लगते हुए): मम्मी, लगता है आपका अब साइज़ बढ़ गया है. ये लग ही नही रहा.
मम्मी (मुस्कुराते हुए): तुझे बहुत समझ आने लगा है.
उसके बाद मम्मी ने आयेज से अपने बूब्स को प्रेस किया, और कहा: अब आचे से खींच कर लगा दे.
मैने ऐसा किया, तब जेया कर बड़ी मुश्किल से मम्मी के ब्लाउस का एक हुक लगा. उसके बाद बाकी सब भी लग गये. जब मम्मी पलटी, तब मुझे उनके ब्लाउस में उनके बूब्स की बड़ी दरार दिखी. ऐसा लग रहा था की आधे से ज़्यादा बूब्स तो ब्लाउस के बाहर निकल रहे थे.
मैं (मम्मी के बूब्स को देखते हुए): मम्मी, आपको साँस भी लेना मुश्किल होने वाला है. कोई और सारी पहन लो.
मम्मी (ज़िद करते हुए): मेरे बेटे ने पसंद किया है तो कुछ भी हो, यही पहँनी है.
फिर वो सारी उठा कर अपने से लपेट कर पहनने लगी. मम्मी जब साँस लेती तो उनके बूब्स पर हर हरकत सॉफ दिख रही थी. शायद उनको साँस लेने में तकलीफ़ भी हो रही होगी. मेरा ध्यान वही था और मम्मी देख कर तोड़ा शर्मा भी रही थी.
मैं (परेशन होते हुए): मम्मी, रात तक घर वापस आने को नही मिलने वाला. सच कह रहा हू, तुम दूसरा ब्लाउस पहन लो, और मॅच नही हो रहा तो सारी बदल लो.
मम्मी ने मेरी बात नही मानी और उन्होने तोड़ा नॉर्मल स्ट्रेच किया तो उनका ब्लाउस शोल्डर से फटत गया. और फिर एक-दो हुक्स टूट गये.
मम्मी ने गुस्से में आ कर अपना ब्लाउस फाड़ कर निकाल दिया. मैं तो देखता ही रह गया, मम्मी मेरे सामने सिर्फ़ वाइट शेल्फ ब्रा में थी. उनके आधे से ज़्यादा बूब्स मेरी आँखों के सामने थे. मम्मी के बूब्स का शेप एक-दूं पर्फेक्ट था. उनका फिगर एक-दूं मस्त लग रहा था.
मैं तो उन्हे देखता ही रह गया और फिर मम्मी ने एक-दूं से अपना पल्लू उठा कर अपने आप को कवर किया. लेकिन सारी शिफ्फॉन का था, तो सारी के अंदर अभी भी कुछ च्छूपा नही था.
मम्मी (हेस्ट हुए, मुझे देख कर शर्मा गयी): तेरी बात सही थी. मेरा सब बढ़ गया है.
मैं (मम्मी की आँखों में देखते हुए): मम्मी, मैने तो आपको पहले ही बोला था. आपको मेरी बात पर यकीन नही था.
मम्मी (मेरी आँखों में देखते हुए, हल्की मुस्कान के साथ): हा बेटा, अब तो मुझे तुम्हारी नज़र पर यकीन हो गया है.
मैं (तोड़ा सा झीजकते हुए): मम्मी, एक बात कहूँ? आप ना, इस लुक में बहुत सुंदर लग रही हो.
उसके बाद मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे बेड पर से खड़ा कर दिया. और मेरे गले में अपनी दोनो बाहें डाल कर मेरी आँखों में देखने लगी. मैने मम्मी की कमर को पकड़ लिया.
मम्मी (मेरी आँखों में गहराई से देखते हुए): बेटा, सच में तुमने मुझे बदल दिया है. तुम नही होते तो मैं कभी अपने आप को पहचान ही नही पाती.
मम्मी ने मुझे टाइट हग किया. मैं भी उनकी पीठ को सहलाने लगा. मम्मी की नंगी पीठ छ्छू कर मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी दौड़ गयी. मेरे लंड में एक झटका सा लगा. मम्मी ने मेरे गालों पर किस करते हुए मेरे कान पर हल्के से काट लिया.
इतने में किसी ने डोर को नॉक किया और पूछा: यामिनी, कितना टाइम लगेगा? सब बाहर तुम्हारा वेट कर रहे है.
मम्मी (तोड़ा संभालते हुए): आई, बस 2 मिनिट.
उसके बाद मम्मी ने मुझे नॉटी स्माइल दिया और अलमारी से एक ब्लॅक ब्लाउस निकाला. मेरी आँखों के सामने ही, पल्लू को हल्का सा गिरा कर उन्होने वो ब्लॅक ब्लाउस पहन लिया. उसके बाद पीछे घूम कर मुझे इशारा किया और मैने उनके हुक्स को लगाया. फिर मैने उनका पल्लू ठीक किया और मम्मी बाहर निकली. उसके कुछ समय बाद मैं भी निकल गया.
पुर फंक्षन के दौरान मैं और मम्मी एक-दूसरे को चोरी-चोरी देख रहे थे. जैसे हम मा-बेटा नही, पर लवर्स हो. हमारी नज़रें मिलती तब मम्मी हल्का शर्मा जाती.
रात को हम लौट रहे थे, तो हम कार में 7-8 लोग थे. मैं और मम्मी आखरी की 3र्ड रो में साथ में बैठे थे. रात के अंधेरे में उनके साथ फॅमिली के बीच ट्रॅवेल करना बहुत एग्ज़ाइटिंग लग रहा था.
मम्मी ने मेरे हाथ पर हल्का दबाव बनाया. इशारा मिलते ही मैं भी मेरा हाथ धीरे से उनके पीछे ले गया और उनकी कमर को सहलाने लगा. मम्मी ने मेरी तरफ देखा और एक नॉटी स्माइल देकर ऐसा ना करने का इशारा किया. पर जब मैने उनकी कमर को हल्के से दबाया, उनकी आँखें धीरे से बाँध हो गयी.
उन्होने मेरे हाथ को ज़ोर से दबा कर ऐसा ना करने को कहा, पर उनकी बॉडी रेस्पॉन्स कर रही थी. मैं फिर भी उनकी नंगी पीठ की गर्मी को छ्छू रहा था. अगले ही पल, मैने उनके हाथ से मेरा हाथ हटा कर, उनके पल्लू के अंदर से उनके नरम पेट को सहलाने लगा. मम्मी ने अपनी आँखें कस्स के बंद कर दी और उनके मूह से एक गरम साँस निकली.
अचानक उन्होने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रखा. मेरा लंड जो पहले से ही झटके ले रहा था, अब पूरी तरह खड़ा हो गया था. मम्मी का हाथ शायद ग़लती से वहाँ लगा था, या शायद उनकी ख्वाइश ने उन्हे वहाँ तक धकेल दिया था.
उन्होने झट से अपना हाथ हटा लिया और मेरे हाथ भी उनके पेट से हटा लिए. फिर उन्होने मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में गहरी साँसें थी, और इशारे से माना किया. उसके बाद भी हम दोनो एक-दूसरे से चिपक कर बैठे रहे.
मम्मी ने धीरे से मेरे कान में फुसफुसते हुए कहा: अपने आप पर कंट्रोल करना सीखो.
मैं समझ गया की मेरा लंड खड़ा हो गया था और पंत के उपर उभार बन गया था, इसलिए मम्मी ने माना किया. मैने भी अपना सर हिला कर इशारे में कहा ठीक है. उसके बाद हम ऐसे ही खामोशी में घर आ गये.
अब मैं और मम्मी तोड़ा और क्लोज़ हो गये थे. मम्मी मेरी हर चीज़ में केर करती थी. अब तो वो मेरे कमरे में आ कर, अनिरुढ़ भाई से मेरे सामने ही कॉल पर बातें करती. दोनो की नॉटी बातें भी अब मुझसे नही च्छूपी थी.
जब मैं अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर उनको लेने जाता तो कभी-कभी बेडरूम का दरवाज़ा तोड़ा खुला रहता था. वो पल मेरे लिए एक अजीब सा तोहफा बन जाते थे. कभी मम्मी को मैं सारी पहनते हुए देख लेता, और कभी तो वो सिर्फ़ निघट्य में होती थी, जिसके अंदर से उनके हर कर्व की हल्की झलक दिखती थी. ये नज़ारे देख कर अंदर से एक गर्मी सी दौड़ जाती थी, आँखों को अछा लगता, पर दिल में एक तेज़ चुभन सी महसूस होती थी.
हर बार जब मैं उन्हे ऐसे देखता, एक गहरी जेलासी मुझे घेर लेती थी. ये सच की मेरी हॉट मम्मी की चुदाई का मज़ा तो मेरा दोस्त ले रहा था. ये ख़याल मेरे दिमाग़ में काँटे की तरह चुभता था. मेरी आँखों के सामने मेरी अपनी मा, और वो भी किसी और के लिए इतनी तैयार, इतनी सेक्सी, ये सब मेरे अंदर कुछ ऐसा जगा रहा था जो मैं पहले कभी महसूस नही किया था.
हर बार की तरह, एक बार मैं मम्मी को अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर छ्चोढ़ कर उनके अपार्टमेंट के गार्डेन में बैठा था. मम्मी को छोड़ने के बाद अनिरुढ़ भाई का मेसेज मिलते ही मैं उनके फ्लॅट पर गया.
मैने डोर बेल बजाई तो अनिरुढ़ भाई ने दरवाज़ा खोला. उनके चेहरे पर आस यूषुयल मम्मी को छोड़ने की खुशी थी. मैने देखा तो उन्होने सिर्फ़ शॉर्ट्स ही पहने थे. अब ये इतना रेग्युलर हो गया था की साला उनको कोई झीजक नही बची थी. उनकी आँखों में वहीं भाव था जो हर बार दिखता था, जैसे वो मेरे सामने अपनी जीत का प्रदर्शन कर रहे हो.
मैं सोफा पर बैठा तो देखा बेडरूम का दरवाज़ा खुला था, और मेरी नज़रें वहीं टिक गयी. मम्मी ने वो डीप वाइन-रेड लेस निघट्य पहनी थी, जो हमने उस दिन अनिरुढ़ भाई ने अपने पसंद से लिया था. वो उस निघट्य में कमाल लग रही थी. पूरी निघट्य शियर लेस की थी, जिसके अंदर से उनका गोरा जिस्म सॉफ झलक रहा था.
उसका नेकलिन इतना डीप था की उनके भरे हुए बूब्स आधे से ज़्यादा बाहर थे. निघट्य इतनी छ्होटी थी की उनकी कोमल जांघें पूरी तरह एक्सपोज़ हो रही थी. उनके बाल खुले थे, और चेहरे पर एक अल्फ़ाज़ बयान ना कर पाने वाली चमक थी.
उन्होने भी मुझे देखा, और उनके होंठो पर एक नॉटी स्माइल फैल गयी. उस स्माइल में शरम नही थी, बल्कि एक इन्वाइट था. मम्मी अनिरुढ़ भाई के पास आ कर सोफा पर बैठ गयी. उनकी निघट्य की हर सिलवट मेरे दिमाग़ में बस चुकी थी.
मम्मी अनिरुढ़ भाई से ऐसे चिपक गयी, जैसे मैं वाहा था ही नही. अनिरुढ़ भाई ने अपना हाथ मम्मी की जाँघ पर रख दिया और सहलाने लगे. लेकिन मम्मी मुझे पूरी तरह इग्नोर करते हुए, उनसे हंस-हंस कर बातें कर रही तीन. उनकी हर हँसी और अनिरुढ़ भाई का हर टच मेरे दिल पर चाकू की तरह चल रहा था.
मैं उठा और उन दोनो को देखते हुए बोला: मम्मी, आप दोनो का हो जाए तो आ जाना. मैं नीचे आपका वेट कर रहा हू.
अनिरुढ़ (मुस्कुराते हुए): आराव, छाई पी कर तो जाओ.
मैं (मम्मी को आँखें दिखाते हुए): मेरा मॅन नही है.
अनिरुढ़ (मम्मी की तरफ देखते हुए, हल्की हँसी के साथ): ठीक है, नीचे वेट कर. यामिनी जी को भेज रहा हू.
मुझे उस पल बेहद गुस्सा आया. ये साला ये दोनो मुझे समझ क्या रहे थे? मेरी मम्मी जो कभी कितनी संस्कारी थी, अब कितनी चुड़क्कड़ हो गयी थी की गैर मर्द से छुड़वाने के बाद भी मुझे स्माइल दे रही थी. ये सोच कर मेरा खून खौल उठा. वो हर बार अनिरुढ़ भाई के पास खुशी से चुड़वति, और अब उन्हे मुझसे कोई शरम नही?
ये सब मेरी मदद से हो रहा था, और अब वो मुझे ये सब दिखा कर और भी अपमानित कर रही थी. अनिरुढ़ भाई भी अब मेरी इतनी रेस्पेक्ट नही करते जितना पहले करते थे. कभी-कभी ऐसा लगता था की मैं एक डल्ला हू और उनकी रंडी लेकर आता हू और चला जाता हू.
मैं नीचे बिके पर बैठा था और मेरे पीछे कुछ ही समय में फटाफट मम्मी मेरे पास आई. मैने देखा मम्मी ने अपनी सारी जल्दी-बाज़ी में पहनी थी. जो हर बार होता है, इतना पर्फेक्ट नही था.
मम्मी (परेशान हो कर): क्या हुआ आराव, क्यूँ इतने गुस्से में है?
मैं (आँखें चुरा कर, आवाज़ में रूखा-पं): कुछ नही हुआ. आप बैठो, आपको घर छ्चोढ़ देता हू.
मम्मी पुर रास्ते मुझसे पूछती रही, क्या हुआ? क्यूँ इतने गुस्से में हो? हर बार उनका सवाल मेरे गुस्से को और बढ़ा रहा था. मैं मम्मी की बातों को इग्नोर करने के लिए स्पीड से बिके भगाया, जैसे मैं उनकी आवाज़ और अपने अंदर के शोर से डोर भागना चाहता था.
मम्मी को घर के बाहर से ही छ्चोढ़ कर मैं सीधा निकल गया. मैं एक तालाब के पास शांत जगह पर चला गया. मेरी नज़र पानी पर थी, पर दिमाग़ में बस वहीं का सीन घूम रहा था. जब मेरे सामने अनिरुढ़ भाई मम्मी की जाँघ को सहला रहे थे, और मम्मी उसको स्माइल दे रही थी.
क्या मैने अनिरुढ़ भाई को घर बुला कर ग़लती तो नही की? ये सवाल मेरे ज़हन में बार-बार आ रहा था. मैने आज से पहले किसी दोस्त को घर का दरवाज़ा नही दिखाया था, और आज वही दोस्त ने मेरी मम्मी की चुदाई करके मुझे ज़लील कर रहा था.
ये सोच कर मेरे दिल में एक गहरा दर्द उठा, और आँखों में पानी भरने लगा. मैं अपनी मा को किसी और के साथ नही देख पा रहा था, ख़ास कर तब जब उनके लिए मेरे अंदर भी फीलिंग्स डेवेलप हो चुकी थी.
पापा का कॉल आया पूछने के लिए, कहाँ है तू? तब समझ आया ये सब सोचने में कब शाम हो गयी, पता ही नही चला. अंधेरे ने मुझे कब घेर लिया, मैं जानता ही नही था.
मैं घर गया, मम्मी को पूरी तरह इग्नोर करके अपने बेडरूम में घुस गया. उनकी आँखों में देखा भी नही, कहीं मेरा गुस्सा या दर्द उन पर ही ना निकल जाए.
रात को करीब 10 बजे, जब सब लोग सो चुके थे, मम्मी धीरे से मेरे बेडरूम में आई.