सेक्स कहानी अब आयेज-
मेरे रूम का डोर ओपन हुआ और उसके बाद मैने कुण्डी लगने की आवाज़ सुनी. मेरा लंड सोच-सोच के हलचल में लगा हुआ था की आज क्या होने वाला था. फिर अचानक मेरी पीठ में एक हाथ आया. मैं पलटा और पीछे देखा. देखते ही मेरे होश उडद से गये.
मेरे सामने मम्मी खड़ी थी. मैं उनके सामने नंगा बेड में था. बीते पिछले दीनो में ऐसा कुछ नही था जो मम्मी ने ना देखा हो, तो मैने अपने आप को नही ढाका. मेरी उनसे बात करने की हिम्मत नही हो रही थी. फिर मैने हिम्मत जुटा के कहा-
मैं: मम्मी, आप यहाँ?
फिर मैं पॉज़ लिया और बोला-
मैं: सॉरी मम्मी, मैने जो आपके साथ किया. मुझे रेशमी ने बताया की रवि और आपके बीच कुछ नही हुआ.
मम्मी मेरी तरफ बढ़ी और मेरे पास आके एक थप्पड़ मारा. और बोली-
मम्मी: मैने जीवन में एक भी मर्द के साथ कुछ नही किया है. और बेटा, एक बात और, कभी भी दूसरे की मर्ज़ी के बिना ये सब नही करना.
मैं: तो आपने मुझे रोका क्यूँ नही?
मम्मी: क्यूंकी मुझे भी अछा लग रहा था. लेकिन इसका मतलब ये नही है की तू सब के साथ ऐसा करे.
मैं अभी तक उनका चेहरा ही देखा था और देखते ही मेरी नज़र शरम से नीचे हो गयी थी. पर जब मम्मी ने ऐसा बोला तो मैं उनकी तरफ दोबारा देखा और नोटीस किया की उन्होने एक ट्रॅन्स्परेंट निघट्य पहनी थी. अंदर उन्होने कुछ नही पहना था. उनके बूब्स और छूट सॉफ-सॉफ दिखाई दे रहे थे. मेरा मूह खुला का खुला रह गया.
मैं: मम्मी, आप ऐसे, पापा-दीदी ने आते हुए नही देखा क्या?
मम्मी: पापा को बुनती अंकल का कॉल आया था, बोल रहे थे कुछ एमर्जेन्सी है. और हा, प्रिया मुझे लिविंग रूम में मिली थी.
मैं: दीदी ने आपको ऐसे देखा, कुछ बोली नही?
मम्मी (मेरे पास आते हुए): सिर्फ़ घूर रही थी, वो जैसे तू घूर रहा है. वो शायद से नहा के आ रही थी, टवल लपेटा था और क्लीवेज दिख रहा था मुझे. थोड़ी बहुत हॉर्नी तो मैं वहाँ भी हो गयी थी.
अब वो मेरे सामने खड़ी थी. वो झुकी, मेरा लंड पकड़ा और बोली: आज तो मुझे वो मज़े दे जो कभी तेरे पापा दिया करते थे.
और मेरे होंठो में अपने होंठ रख के ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी. मैने भी अपने हाथ उनके गाल में रखे, और किस बॅक करने लगा. हम अब “टंग” का भी उसे कर रहे थे. तभी मेरे डोर में नॉकिंग की आवाज़ आई. हमारी किस टूटी, हमने एक-दूसरे को देखा.
मम्मी को लगा क्या पता पापा आ गये, मम्मी को रूम में ना देख के मेरे रूम में आए हो पूछने के लिए. लेकिन मुझे तो पहले से पता था की वो प्रिया दीदी होंगी.
मम्मी: तू शॉर्ट्स पहन और देख डोर में कौन है. मैं डोर के पीछे च्छूप जाती हू.
मैं: ठीक है.
मैने शॉर्ट्स पहने और डोर ओपन किया, मेरा अंदाज़ा सही था. वो दीदी थी और उसी टवल में थी जिसमे मम्मी ने उनको देखा था.
दीदी: मैने बोला था ना की रूम का डोर ओपन करके रहना, बंद क्यूँ था?
फिर वो रूम के अंदर आती है, और अपना टवल गिरा देती है. उनके बूब्स मैने पहले भी देखे हुए थे. पर अभी पूरा नंगा देख के मेरा लंड ऐसा हो गया था की वो शॉर्ट्स फाड़ के बाहर आ सकता था. मम्मी ये सब च्छूप के देख रही थी और शॉक में थी की बेटी नंगी और बेटे का लंड शॉर्ट्स के अंदर पूरा खड़ा.
दीदी: मैं तो पहले ही आ जाती, पर मम्मी लिविंग रूम में थी. पता है, ट्रॅन्स्परेंट निघट्य पहनी थी. मैं तो तुर्न ओं हो गयी थी. मम्मी की बॉडी देख कर मुझे तो बहुत कुछ करने का मॅन हुआ.
मम्मी ये सब सुन रही थी और बाहर निकल के बोली, “वैसे क्या-क्या करते?”
दीदी: मैं ना, मम्मी के बू…
>दीदी पलटी और मम्मी को देख के ज़ोर से चिल्लाई.
दीदी: वो बा… एक सेकेंड, मम्मी, आप भाई के रूम में ऐसी ड्रेस में क्या कर रही हो?
मम्मी: तू बता, तू तेरे भाई के रूम में नंगी क्या कर रही है?
पुर रूम में सन्नाटा छ्छा गया. फिर वो दोनो मेरी तरफ देखने लगे. मैने अपने शॉर्ट्स नीचे कर दिए थे क्यूंकी शॉर्ट्स से मेरे लंड में दर्द होने लग गया था. उन्होने पहले मुझे देखा, फिर मेरे लंड को.
मम्मी: महारथी, कुछ बोलेंगे आप? क्या है ये सब?
दीदी भी मुझे तोड़ा गुस्से की नज़र से देख रही थी. फिर मैने उनको सब बात बताई. सब मतलब पूरी नही, कुछ-कुछ बात मैं खा गया.
मम्मी आंड दीदी: अछा, तो ये बात है.
उन्होने दीदी की तरफ देखा, कुछ सोचते हुए, दीदी के पास गयी और बोली-
मम्मी: प्रिया, तू मेरे साथ चल और रोहन, तू वहीं रुक.
और वो ये बोल के दीदी को उनके साथ लेके चली गयी. मैं सोच रहा था की अब क्या होगा. एग्ज़ाइट्मेंट भी थी और दर्र भी था. टाइम बीट-ता जेया रहा था. आधा घंटा बीट गया. तभी मम्मी का कॉल आया. वो बोली की मैं उनके रूम में आ जौ.
मैं उनके रूम में पहुँचा तो देखा पूरा रूम सज़ा हुआ था. दीदी बेड के बीच में सिर्फ़ चुननी लेके बैठी थी. तभी पीछे से मम्मी ने रूम की कुण्डी लगा दी.
मम्मी: तेरे पापा 2-3 दिन बुनती अंकल के साथ कहीं गये है. और मेरी गुड़िया का फर्स्ट टाइम है तो आचे से होनी चाहिए सब चीज़ें.
दीदी ये सब सुन के शर्मा रही थी. फिर मम्मी ने मेरी तरफ देखा और मुझे इशारे से पर्मिशन दी. मैं सिर्फ़ शॉर्ट्स में था, जो मेरा लंड आधे घंटे में तोड़ा मुरझा गया था. वो भी तंन के खड़ा हो गया था. मैं दीदी के पास बेड में गया और उधर मम्मी ने भी अपनी निघट्य खोली और बेड के पास एक चेर पे बैठ गयी.
मम्मी भी हमारी सुहग्रात देखना चाहती थी. मैने दीदी के सर से चुनरी तोड़ा हटाई और उनका फेस उपर किया. अब हम दोनो एक-दूसरे की आँखों में आँखें डाल के देख रहे थे.
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