सेक्स कहानी अब आयेज-
रोहन: वेलकम तो थे सोसाइटी भाभी जी.
मुझे दर्र लग रहा था. पहला दिन सोसाइटी में, और मुझे मेरे भाई के साथ सेक्स करते किसी ने पकड़ लिया. मैं इस समय तक रोहन से आचे से मिली नही थी. मुझे लगा की बड़ी मुश्किल से ये घर मिला था, ये हाथ से ना चला जाए.
मैं: अर्रे… वो… तुम कौन हो?(पीछे मूड के नील को बोली) अर्रे रुक जेया, दिख नही रहा क्या, आयेज कोई खड़ा है?
रोहन: अर्रे नही-नही, कंटिन्यू करो. मैं तो खाना देने आया था. मम्मी बोली आप लोगों का खाना नीचे ही ले जौ. बाइ थे वे, ई आम रोहन.
नील: रोहन, ये बात रिया को नही बताना.
रोहन: अर्रे, क्या बात कर दी आपने. आप कंटिन्यू करो, 4 बजे तक नीचे कोई नही आने वाला. मैं लिविंग रूम में हू, कोई आएगा तो मैं बता दूँगा.
ऐसा बोलते ही रोहन लिविंग रूम में चला गया. फिर हमने अपने बचे हुए कपड़े भी उतार दिए. नील को बेड में बिताया और मैं उसका लंड चूसने लगी.
नील: अया… ऐसे ही चूस्टे रहो, मज़ा आ रहा है दीदी.
अब मेरे मूह से ‘गवक गवक’ की आवाज़ आ रही थी. पहले की चुदाई और अब कुछ देर तक ब्लोवजोब देने के बाद नील अब झड़ने को आया था. मैने अपने हाथ से उसका लंड ज़ोर-ज़ोर से हिलाया और सारा माल अपने मूह में ले लिया. हमने सॉफ-सफाई की, टाइम देखा तो 2:38 हुए थे. नील थोड़ी देर आराम करना चाह रहा था. मैं उठ के लिविंग रूम में चली गयी. वहाँ रोहन बैठा था.
रोहन: नील जीजू कहाँ है?
मैं: वो आराम कर रहा है.
रोहन: वैसे, भाई से छुड़वा के कैसा लगा?
मैं: यार, तुम बड़े शांति से ये बात पचा ली, मेरे और मेरे भाई के बीच सेक्स की बात.
रोहन: समय आने पर सब पता चल जाएगा.
मैं: अछा जी, ऐसी बात है.
रोहन: वैसे, आपकी और मेरी बहुत जमेगी.
मैं: ऐसा क्यूँ?
रोहन: क्यूंकी हम दोनो मैं कॅरक्टर जो है.
ये सुन के मुझे हँसी आ गयी.
मैं: यार, हम दोनो को सेक्स करते देख तुमने कुछ नही किया. बहुत सारे लोग तो उनको जाय्न करने को बोलते.
रोहन: मैं बहुत सारे लोगों में से नही हू ना. और समय आने पर सब अपने आप हो जाएगा, भाभी जी.
मैं: यार, तुम ‘भाभी जी’ नही बोलो.
रोहन: तो क्या बोलू?
मैं: योउ कॅन कॉल मे मनीषा.
रोहन: ओके मनीषा.
मैं: वैसे, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड वग़ैरा नही है क्या?
रोहन: है ना, सामने वाली बिल्डिंग में रहती है, सोनिया नाम है. और हा, आप सबसे तो मिल चुकी है. दो फॅमिली और है जो आते-जाते रहती है यहाँ.
मैं: कौन-कौन सी?
रोहन: सोनिया, उसकी मम्मी और पापा, और दूसरी मेरी मामी और उनके 3 बच्चे रवि, रेखा आंड रेशमी.
मैं: अछा, ठीक है.
मैं अपना खाना ख़तम करती हू, और काम में लग जाती हू. रोहन भी मेरी हेल्प कर रहा था. नील भी उठता है और वो भी खाना वग़ैरा खा लेता है. 3:45 तक और लोग भी आ जाते है. शाम 7 बजे तक सब काम भी ख़तम हो जाता है. सब थके हुए थे तो खाना ऑर्डर करते है. डिन्नर करके सब लोग अपने-अपने घर चले जाते है.
रात में मैने दीपक के उपर नंगी लेती थी. थकान की वजह से सेक्स का मूड नही था, और हम कड्ड्ल किए हुए थे.
दीपक: बड़ी अची जगह है ना ये. सब ने मिल के एक हफ्ते का काम 1 दिन में निपटा दिया.
मैं: हा, वो तो है. अब सब काम हो गया है तो क्यूँ ना कल-परसों में ही मम्मी जी और बेबी को भी बुला ले.
दीपक: हा, सही कहा. जब से पापा की डेत हुई है, तब से वो अकेली हो चुकी है, और पापा के फोटो को साथ लिए रहती है.
मैं: हा, जब मैने फ्लॅट दिखाया उनको तो उन्होने बोला की ये बार पापा जी को भी दिखा दे. यहाँ आएँगी तो सुमन आंटी और मधु आंटी के साथ रहेंगी तो मॅन लगा रहेगा.
दीपक: सही कहा तुमने.
इतना बोलते ही हम लोगों को भी नींद आ गयी. एक-दो दिन में मेरी सास और बेटा भी आ गये. दीपक अब जॉब में जाते थे, मैने ऑनलाइन रेज़्यूमे सब्मिट किया था. दिन में बोर होने जैसा कुछ था नही. कभी रोहन आ जाता, नही तो प्रिया या रिया तो यहीं रहते. मेरी सास भी सुमन आंटी और मधु आंटी के साथ घुल-मिल रही थी. अनएक्सपेक्टेड्ली, वो रोहन से सबसे ज़्यादा घुली मिली थी.
मेरी सास का नाम नंदिनी है. आगे में बोलो तो 55 साल की है, पर फिगर 34-33-35 है. एक मेरी सास और दूसरी हेमा मालिनी, देख के बता ही नही सकते की ये इतनी आगे की होंगे. मेरा जीवन सही चल रहा था, दिन में एक बार नील के साथ सेक्स कर लेती और रात में दीपक के साथ.
ऐसे करते-करते एक हफ़्ता कैसे बीट गया पता ही नही चला. नील और रिया भी जाने लगे. वैसे, उनका घर भी ज़्यादा डोर नही था. बंटी अंकल ने बोला उनसे की वो लोग भी इस सोसाइटी में ही शिफ्ट हो गये, पर कोई और फ्लॅट खाली नही था.
फिर मैने बोला की हमारा 3बकल है, जब तक फ्लॅट खाली नही होता, वो हमारे साथ रह ले, फिर बाद में शिफ्ट कर लें. नील इस ऑफर को ठुकरा नही पाया. वो दोनो मान गये और अपने घर अपना सामान लेने चले गये, बोले की 1-2 दिन में आएँगे.
बंटी अंकल भी खुश हो गये, बोले की वो अपनी गुड़िया को रोज़-रोज़ देख पाएँगे. फेब का मंत आ गया. रोहन और प्रिया के कॉलेज ओपन हो गये. इस बीच में रवि आंड फॅमिली, सोनिया आंड फॅमिली से भी मिल ली थी. सोनिया आंड म्र्स. मिश्रा बहुत स्वीट और प्यारी लगे मुझे.
रवि की फॅमिली भी कुछ कम नही थी, पर रवि वो कुछ अलग चीज़ था. रोहन ने मुझे उसके बारे में वॉर्न किया था, और सही ही वॉर्न किया था. उसने जब से मुझे देखा था, मेरे पे ट्राइ ही किए जेया रहा था.
हम भी इस सोसाइटी में सेट्ल होने लगे थे. अब ये सफ़र नयी ज़िंदगी का हुमको कहाँ ले जाता है.