ये सेक्स कहानी मेरी है जो की सॅकी घटना पे है. ये कहानी वैसे तो हर घर की होती है, पर हर कोई शेर नही करता. मैं जब छ्होटा हुआ करता था, तब की है. मैं जब 19 साल का था, तब हमारे घर में टाय्लेट तो था. पर हम कभी-कभी रात में अगर किसी को पेशाब जाना हो, तो वो घर के बाहर नाली पे जया करता था.
मेरे घर में पापा-मुम्मा, मैं और दादी है. तो हमारे घर में दादी के लिए स्पेशल कमरा है, और हम तीनो एक कमरे में सोते है. पापा बेड पे, मैं और मुम्मा नीचे.
एक दिन रात के करीब 2 बजे मुम्मा ने उठाया और बोली की चल पेशाब करके आते है. मैं जैसे-तैसे करके अपनी नींद को तोड़ के उठ गया. मा मेरे सामने चल रही थी, और में पीछे-पीछे नींद में ही. उन्होने गाते खोला और हम बाहर आ गये.
मा बोली: चल तू कर ले पहले सस्यू.
मैने बोला: ठीक है (और मैं जाके पेशाब कर रहा था).
मुझे बहुत ज़ोर से आई थी तो मैं करके साइड हो गया. फिर मैने मा से बोला-
मे: जाओ कर लो मा.
मा: हा.
जब तक मा गयी थी, तब तक मेरी नींद खुल गयी थी. इसके पहले मैं नज़र-अंदाज़ करता था, और मा को नही देखता था पेशाब करते हुए. लेकिन उस टाइम मैने सोचा चलो एक बार देख लेते है क्यूरीयासिटी की वजह से.
मैने जब देखा तब मा ने इधर-उधर देखा, और अपनी सारी और पेटिकोट पकड़ के नीचे से उपर उठाया. मेरी तो अब पूरी नींद खुल गयी थी. मैने देखा मा की गोरी टाँगें और थाइस थी. और वो जब नीचे बैठी तो हल्का सा गांद की कर्व दिख रहा थी. तब मेरे लंड में तोड़ा तनाव आ गया.
मैं ध्यान से उनके मूतने की आवाज़ सुन रहा था, सुर्र्र्ररर… मेरे कान मंत्रमुग्ध हो गये थे. लग रहा था बस सुनता ही जौ. मा बहुत देर तक पेशाब कर रही थी तो मैं भी एंजाय कर रहा था. फिर जब मा का हो गया, तो वो उठी और अपनी सारी ठीक करके मेरे पास आ गयी और बोली-
मा: चल सो जाते है. कल सुबह कॉलेज जाना है तुझे. चल जल्दी सोने.
मेरी तो धड़कने तेज़ हो रही थी, की मा कितनी खूबसूरत थी, और कितनी गोरी थी. लेकिन तोड़ा गिल्टी भी फील हो रहा था. जब हम अपने रूम में गये, तब मा लेट गयी. मेरी आदत थी की मैं अपनी मा पे हाथ और पैर रख के सोता था. आज फिर मैने अपना हाथ और पैर रखा. लेकिन आज अलग ही कुछ चल रहा था मेरे मॅन में. मैने मा को कस्स के गले लगा लिया. मा बोली-
मा: क्यूँ रे, क्या हुआ आज? बहुत प्यार आ रहा है?
मे: नही तो, मैं तो रोज़ ऐसे ही सोता हू. और तुमसे ऐसे चिपक के सोने में बहुत अछा लगता है.
मा ने मेरे सिर को थपथपाते हुए सुला दिया. अगले दिन सोते हुए मैने सोच लिया था की अगर आज मा ने रात को उठाया, तो आज आचे से देखूँगा और पहले मा को पेशाब करने दूँगा. यहीं सोचते हुए मा आ गयी सोने सब किचन का काम निपटा के. पापा भी आ गये थे बाहर से टहल के.
पापा तक गये थे तो गुड नाइट बोल के सो गये जल्दी बेड पे, जो की सिंगल बेड था. लेकिन उसपे दो लोग सो सके इतनी जगह थी. मा लाइट वग़ैरा बंद करके मेरे पास आके लेट गयी, और मैं हाथ और पैर रख के सो गया. मेरे मॅन में बस यहीं चल रहा था की आज मा को आचे से देखूँगा मतलब उनकी गांद को. और ऐसे ही उनकी बाहों में सो गया. रात को मा ने आवाज़ लगाई और में फटत से जाग गया.
मे: हा मा, बोलो?
मा: चल बाहर.
मे: क्यूँ?
मा: पेशाब करने.
मे: ओक.
हम बाहर आ गये और मा ने मुझसे बोला: चल कर ले तू.
मुझे उनको पहले भेजना था नली पे, तो मैं बोला की-
मे: आप कर लो, अभी प्रेशर नही आया.
मा: ऐसे कैसे? क्या हुआ?
मे: कुछ नही, आप कर लो पहले.
मा: ठीक है.
जब मा जाने लगी नली पे, जो हमारे घर से सट्टी हुई है, मैं भी उनके पीछे जेया रहा था.
मा: क्या हुआ? कहाँ चला?
मे: बस तोड़ा यहीं घर के पास टहल रहा हू.
मा: ठीक है.
अब मेरी सिचुयेशन ऐसी थी की मैं घर के सामने टहल रहा था, और मा नली के पास आगाय थी. उनकी पीठ मेरे सामने थी. अब मा झुक गयी और अपना सारी और पेटिकोट उठाया कमर तक.
मैं पीछे से देखा की मों की मोटी और गोरी गांद बाहर निकली हुई थी, और इतनी गोरी थी जैसे दूध हो. जब वो नीचे बैठ रही थी, तो थोड़ी गांद खुलने की वजह से उनकी गांद का च्छेद दिखा, बुत बहुत हल्का सा दिखा.
फिर जब मा बैठ गयी, तो उनकी पूरी गांद फैल गयी थी. ऐसा लग रहा था जैसे तरबूज़ हो बड़े-बड़े. उनकी ये हालत देख के मेरा मूड हो रहा था.
तभी मा बोली: आजा इधर साइड में, इधर कर ले तू.
मेरी गांद ही फटत गयी थी. मैने सोचा अगर इनके बाजू में बैठा, तो मेरी नज़र इंपे जाएगी. और अगर इन्होने देखते हुए देख लिया तो बहुत बुरा होगा.
मैं बोला: नही मा आप कर लो.
मा: आजा.
मैं अब उनकी बात ताल नही सकता था, और मैं उनकी साइड जाके, खड़ा होके अपनी ज़िप खोल रहा था. तभी देखा की मा ने अपना सिर च्छुपाया था सारी से. शायद अपने बेटे से शर्मा रही हो इस हालत में. की तभी मों की सस्यू की धार की आवाज़ आई. मेरे कान मंतरा-मुग्धा होने लगे.
मेरे लंड में तनाव आ गया. मैने अपना लंड निकाल के मूतने की कोशिश की, बुत तनाव की वजह से नही हो रहा था. तब तक मा का पेशाब करना हो गया और खड़ी हो गयी. वो तोड़ा पीछे हॅट गयी और बोली-
मा: क्या हुआ हरषु, कर ना?
मे: हा मा.
अब धीरे से मेरा भी पेशाब निकल गया, और मैं भी मूतने लगा. मेरा जब हो गया तब देखा की मा सड़क के ऑपोसिट वाली नली पे मूतने को खड़ी हो गयी थी.
तब ऐसा लगा शायद मा को शक हुआ की मैं पीछे से देख रहा था. इसलिए वो मुझे यहाँ पेशाब करने को बोल के पीछे जाके मूट रही थी. तब तो मैने भी कुछ ज़्यादा नही देखा, क्यूंकी मा उठ रही थी, और सारी नीचे आ रही थी.
जब मा ने मेरी तरफ देखा तो मैं भी उनको देख रहा था. मैं गाते के पास आया और मा भी. शायद मा को लगा होगा की मैने उन्हे उस साइड मूट-ते हुए नही देखा.
जब हम सोने के लिए लेट गये, तब मैं मा के उपर हाथ और पैर रख के सो रहा था. लेकिन मेरे मॅन में आज बहुत सवाल उठ रहे थे, की मा को मुझे पे शक तो नही हुआ होगा? और अगर हुआ भी होगा तो उन्होने दांता क्यूँ नही? इन्ही सब सवालों को सोचते हुए मैं सो गया.
आयेज की कहानी में बतौँगा की कैसे मैने मा पापा को सेक्स करते देखा, और तब मैने मों के बूब्स को कैसे टच किया.