ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है. लिखने में कुछ ग़लती हो तो माफ़ कर दीजिएगा. अब कहानी पर आते है. ये कहानी शुरू होती जब मैने अपनी पहली नौकरी स्टार्ट की थी 3 यियर्ज़ पहले. मतलब जब मैं 24 यियर्ज़ का था.
मैने कभी कुछ ऐसा नही किया था, बस सेक्स वीडियो देख कर मुट्ठी करता था. मुझे नौकरी करते हुए 1 एअर हो गया था. तभी ऑफीस में सरिता आई. उसकी सीट मेरे जस्ट साइड में थी. वो एक शादी-शुदा औरत थी.
उसका रंग गोरा था, और वो दिखने में बहुत अची तो नही, बुत आवरेज दिखती थी. बुत उसकी अदाए सब को पागल बना देती थी. उसके शरीर की बात करू तो वो थोड़ी मोटी थी. उसके बूब्स बड़े-बड़े 36″ के होंगे. उसकी गांद भी बहुत मोटी और गोल-गोल थी. जब वो चलती थी, तो मेरा लंड काम करते-करते ही खड़ा हो जाता था.
अब कहानी पर आते है, की ये शुरू कैसे हुआ. जब वो आई तो बहुत ही फ्रॅंक टाइप की थी. कुछ पूछने या बात करते समय बहुत ही पास खड़ी रहती थी. मुझे तोड़ा अजीब लगता तो मैं डूती बना लेता. क्यूंकी वो मुझसे 8 यियर्ज़ बड़ी थी आंड शादी-शुदा थी. लेकिन उसकी इस नज़दीकी से मेरा भी दिमाग़ दूसरी तरह सोचे लगा.
अब में उसके सूट के उपर से बूब्स और क्लीवेज देखने की कोशिश करता रहता. उसकी साइड से लेग्स देख कर अपना लंड मसल लेता. कभी-कभी वो आ कर बिल्कुल सीट के पास खड़ी हो जाती, तो मेरे हाथ जो आर्म रेस्ट पर होते, मेरी एल्बो, उसके पेट और उसके नीचे वाले एरिया को टच करते. वो बिल्कुल भी पीछे नही होती, बल्कि ऐसे ही खड़ी रहती. मैं भी काम के बहाने माउस को ज़्यादा हिलता, जिससे एल्बो उसके पेट पर फिरा साकु.
यहीं सब बहुत दीनो तक चलता रहा. ना मैने आयेज कुछ किया, ना उसने. एक दिन वो जेया रही थी मेरे पास से. मुझसे पानी गिर गया था फर्श पर, तो वो उस पर फिसल गयी. मैं उसे जाते हुए देख रहा था, तो अपनी चेर उसकी तरफ की हुई थी. इसलिए वो मेरे उपर गिरी.
मैं उसको पकड़ लिया. फिर थोड़ी देर मैने हाथ उसकी कमर पर ही रखे. उसके बाद बाद उसने हाथ हटा दिए, और अपनी सीट पर चुप-छाप बैठ गयी. लेकिन वो बार-बार मेरी तरफ़ देख रही थी.
अगले दिन किसी काम के बहाने वो मेरे साइड में आ कर खड़ी हो गयी. उसकी बॉडी मुझसे टच हो रही थी. उसका पेट मेरे मूह के पास था बिल्कुल. मैने आर्म रेस्ट पर हाथ रखा, और तोड़ा हिलने लगा. उस दिन वो और क्लोज़ हो कर खड़ी हो गयी, बुत ऑफीस था, इसलिए कुछ नही हो पा रहा था.
एक दिन सॅटर्डे था, पर कुछ लोग ही ऑफीस आए थे, क्यूंकी कंपल्सरी नही था. सिर्फ़ जिनके प्रॉजेक्ट की डेडलाइन पास थी, वो आए थे. सभी अपना काम एक-दो घंटे में करके चले गये. सिर्फ़ बचे दो लोग, एक मैं एक वो, आंड गुआर्द आंड पेवं.
गुआर्द तो बाहर गये, पर पेवं अपना सफाई वग़ैरा आंड किचन साइड लगा हुआ था. मैने उसको इशारा किया वॉशरूम की तरफ चलने का. उसने माना कर दिया की सीक्ट्व में दिखेगा. तभी मेरे दिमाग़ में एक ख़याल आया. मेरी सीट के जस्ट पीछे एक रेकॉर्ड रूम है, जिसका एंट्रेन्स पिल्लर की वजह से सीक्ट्व में नही आता. वो इशारा समझ गयी, और इशारे में हा भी कर दी.
पहले मैं अंदर गया, और उसका वेट करने लगा. वो थोड़ी देर बाद आई. उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी. मैने आते ही उसको हग कर लिया, और कुछ देर बस ऐसे ही खड़े रहे. थोड़ी देर बाद मैने अपना हाथ से उसकी गांद को सहलाना शुरू किया.
वो गरम होने लगी. मैने उसको कस्स के पकड़ा और स्मूच करने लगा. वो मज़े लेकर मेरा साथ दे रही थी. ऐसे ही हम एक-दूसरे में खो गये कुछ देर के लिए. फिर मैने उसके बूब्स दबाने शुरू किए. बहुत ही सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स थे उसके, पर कपड़े की वजह से वो फील नही आ रहा था.
मैने उसका सूट तोड़ा उपर किया, और हाथ डाल कर दबाने लगा ब्रा के उपर से ही. फिर मैने उसका सूट तोड़ा और उपर कर दिया. अब उसके बूब्स मेरे सामने थे. मैं उनको जीभ से लीक करने लगा. वो मदहोश हो रही थी, और हाथ से मेरा लंड महसूस कर रही थी, जो तन्ना हुआ खड़ा था 6 इंच का सलामी देने को.
तभी उसने मेरी पंत खोलने की कोशिश की, जिसमे मैने मदद करते हुए पंत खोल दी. मैने उसका नाडा भी ढीला करते हुए उसकी सलवार थोड़ी नीचे कर दी, और अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया. वो मज़े से उसको प्यार कर रही थी. कभी लीक करती, कभी सहलाती. कसम से बहुत मज़ा आ रहा था.
फिर मैने उसको चेर पर बैठने को बोला, और खुद उसकी टाँगों के बीच में आ गया. उसकी पनटी नीचे कर दी, और उसकी छूट चाटने लगा, अपनी जीभ उसके च्छेद में घुसने लगा. वो पागल हो रही थी, और आवाज़ निकाल रही थी. अपनी आवाज़ वो दबा रही थी कोई सुन ना ले.
मैने 5 मिनिट तो उसकी छूट छाती, और फिर उसको कुर्सी के सहारा लेकर उल्टा खड़ा किया, और तोड़ा कुर्सी पर झुका दिया. फिर मैं पीछे से अपना लंड उसकी छूट में डाल कर धक्के मारने लगा. लंड एक बार में अंदर चला गया. वो मज़े लेकर छुड़वा रही थी. मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगता रहा.
थोड़ी देर बाद मैं चेर पर बैठ गया, और उसको गोदी में बिता लिया लोटस पोज़िशन में. वो उछाल-उछाल कर चुड रही थी और आवाज़ निकाल रही थी. मैं उसके बूब्स दबा रहा था, आंड बीच-बीच में किस कर रहा था.
मैं उसको झटके मारता रहा. वो उछाल-उछाल कर मज़े ले रही थी. फिर वो टेबल पर सीधे बैठ गयी, और मैं खड़ा हो कर उसकी चुदाई करने लगा. थोड़ी देर में मैं झाड़ गया, और वो भी आहें लेती हुई झाड़ गयी. दोनो ने कपड़े पहने और बाहर आ गये जल्दी. क्यूंकी कुछ आवाज़ आ रही थी बाहर से, जैसे कोई आवाज़ लगा रहा हो.
जब हम ऑफीस से जाने लगे तब पेवं हमे अलग नज़रों से देख कर मुस्कुरा रहा था.
मैने उससे पूछा: क्या हुआ?
तो बोला: क्या हुआ, मुझे सब पता है. पर चिंता ना करे, मैं किसी को कुछ नही बतौँगा.
इसके बाद मेरे लिए ऑफीस का माहौल ही बदल गया. उसकी अगली चुदाई मैने कैसे उसके घर जा कर की, जो अभी तक कर रहा हू. और कैसे वो मेरे बच्चे की मा बनी, वो कहानी फिर सुनौँगा. मुझे फीडबॅक ज़रूर भेजिएगा.