दोस्तों मेरा नाम सोनल है. मैं एक अनसॅटिस्फाइड हाउसवाइफ हू. मेरी आगे 45 साल है, और मैं जबलपुर की रहने वाली हू. मैं दिखने में काफ़ी सेक्सी हू. रंग मेरा गोरा है, और शरीर मेरा भरा हुआ है. मेरा फिगर 38-36-40 है. मैं घर में ज़्यादातर नाइटीस पहनती हू, और बाहर सारी पहनती हू.
मेरी फॅमिली में मैं, मेरे पति, और मेरा एक बेटा है, जो कॉलेज में पड़ता है. मेरे पति अपने मा-बाप के एक लौटे बेटे है. उनकी टीन बहने है, और तीनो शादी-शुदा है. मेरे सास-ससुर गाओं में रहते है, और कभी-कभी हमारे घर रहने आते है.
मेरे पति पिछले 10 साल से इटली में जॉब करते है, इसलिए घर से बाहर ही रहते है. वो साल में 2 बार एक महीने के लिए घर पर आते है. अब आप समझ लीजिए की पिछले 10 साल से कैसे मैं अपनी छूट में उंगली कर-कर के उसको ठंडा रखती हू. लेकिन फिर एक दिन मैने अपने बेटे का लंड देखा, और उसकी हमेशा-हमेशा के लिए गुलाम बन गयी.
हुआ यू, की एक दिन रात में अचानक से मेरी नींद खुली. मैने टाइम देखा तो 2 बाज रहे रहे थे. मुझे पानी की प्यास लगी, तो मैं किचन में पानी पीने चली गयी. वहाँ से पानी पी कर मैं अपने रूम की तरफ चल दी.
जैसे ही मैं रूम के दरवाज़े से अंदर जाने लगी, मुझे अपने बेटे के कमरे से कुछ आवाज़े आती हुई सुनाई देने लगी. मेरे बेटे का कमरा मेरे कमरे के ऑपोसिट साइड पर है, और बीच में हॉल है. मैं धीरे से अपने बेटे के कमरे के बाहर जाके खड़ी हो गयी. उसके रूम का दरवाज़ा अंदर से बंद नही था.
मैने तोड़ा सा दरवाज़ा खोला, और अंदर झाँकने लगी. अंदर जो मैने देखा, उसको देख कर मैं पूरी तरह से हैरान हो गयी. मेरा बेटा अंदर पूरा नंगा बिस्तर पर घुटनो के बाल बैठा हुआ हुआ था. उसका लंड उसके हाथ में था, और वो उसको ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था. बेटे के सामने लॅपटॉप पर सेक्स वीडियो चल रही थी, जिसको देख कर वो पुर जोश में मूठ मार रहा था.
अपने बेटे का विशाल मोटा लंड देख कर मेरे मूह में पानी आ गया. मेरे अंदर की औरत ने लंड माँगना शुरू कर दिया. मैने सोचा की बाप तो छोड़ता नही, तो क्यूँ ना बेटे को सिड्यूस करके अपनी छूट की प्यास बुझवा लू. वैसे भी तो वो अपना वीर्या वेस्ट ही कर रहा था मूठ मार-मार के. ये सोच कर मैने बेटे से चूड़ने का फैंसला किया.
लेकिन तभी मेरे बेटे के मूह से कुछ ऐसे शब्द निकले, जिन्होने मुझे हैरान कर दिया. मेरा बेटा बोला-
बेटा: आ मा, आहह ज़ोर से चूसो मेरे लंड को मा. बहुत मज़ा आता है तुम्हारी लेने में मा. तुम्हारी छूट बहुत ही गरम है मा, और गांद बहुत ही टाइट. तुम्हारा जिस्म चूसने में मुझे जन्नत मिल जाती है. आओ मा, अपने बेटे से चूड़ो.
ये सुन कर मैं समझ गयी की मेरा बेटा भी मुझे, यानी की अपनी मा को छोड़ने के सपने देख रहा था. अब मैने सोचा की बेटे से चूड़ने का फैंसला तो मैने ले ही लिया था, तो क्यूँ ना अभी चुड लू? क्यूंकी बेटा अभी पूरा गरम था, और मेरा नाम लेके मूठ भी मार रहा है. अगर मैं इसी वक़्त अंदर जाती, तो उसको रंगे हाथ पकड़ लेती, और वो कुछ बोल भी नही पाता.
ये सोच कर मैने धीरे से दरवाज़ा खोला, और बेटे के पीछे जाके खड़ी हो गयी. मेरा बेटा अपनी सुध-बुध खो कर अपना लंड हिलने में मगन था. फिर मैने उसको पीछे से आवाज़ लगाई-
मैं: बेटा, अपनी मा को छोड़ना चाहते हो?
मेरी आवाज़ सुन कर मेरे बेटे की गांद फटत गयी. उसने पीछे मूड कर देखा, और मुझे खड़ी देख कर वो जल्दी से चादर से खुद को धक लिया. फिर वो बोला-
बेटा: मम्मी, आप यहाँ क्या कर रहे हो?
मैं: ये मेरा घर है. मैं कहीं भी, कभी भी जेया सकती हू. पहले तू मेरे सवाल का जवाब दे.
बेटा: नही मम्मी, ऐसी तो कोई बात नही है.
मैं: तो फिर लंड हिलाते हुए मेरा नाम क्यूँ ले रहा है?
बेटा: वो तो मम्मी वैसे ही. इससे थोड़ी फीलिंग ज़्यादा आती है.
मैं: सोच अगर मेरा नाम लेने से फीलिंग ज़्यादा आती है, तो मेरी लेने से कितना मज़ा आएगा.
मेरा बेटा मेरी बात को समझ नही पाया, और वैसे ही कन्फ्यूज़ हो कर मेरी तरफ देखता रहा. फिर मैने अपनी निघट्य उतार दी, और उसके सामने पूरी नंगी हो गयी. मुझे ऐसे देख कर उसकी आँखें बाहर आने वाली हो गयी. फिर मैने बेटे के लंड से चादर उठाई, और उसको हाथ में लेके हिलने लगी.
उसके बाद मैने लंड को मूह में ले लिया. इससे बेटे के मूह से आ निकल गयी. अब मैं अपने बेटे को लंड को मज़े से चूसने लगी. मेरा बेटा भी समझ चुका था की अब हम दोनो के बीच क्या होने वाला था, तो वो मेरे चूतड़ दबाने लगा.
कुछ देर में मैने अपने बेटे के लंड को थूक से चिकना कर दिया. फिर मैने लंड मूह से बाहर निकाला, और हम दोनो स्मूच करने लगे. मैं उसकी गोद में बैठी थी, और स्मूच करते हुए वो मेरे चुचे दबा रहा था.
फिर उसने मुझे सीधी लिटाया, और मेरी टाँगें खोल कर मेरी छूट चाटने लगा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. आज तक उसके बाप ने भी कभी मेरी छूट नही छाती थी. कुछ देर छूट चाटने के बाद वो मेरी टाँगों के बीच आया, और मेरी छूट पर अपना लंड सेट किया.
फिर मेरे बेटे ने ज़ोर का धक्का मार कर अपना पूरा लंड छूट में घुसा दिया. मेरी चीख निकल गयी. इतने वक़्त से ना चूड़ने की वजह से मेरी छूट टाइट हो चुकी थी, और इतना मोटा लंड जाने से उसमे दर्द होने लगा.
मेरे बेटे ने अपनी मा के दर्द की परवाह नही की, और तबाद-तोड़ चुदाई शुरू कर दी. पहले-पहले तो मुझे दर्द होता रहा, लेकिन थोड़ी देर में छूट ने पानी छ्चोढना शुरू कर दिया. अब मुझे चूड़ने में बहुत मज़ा आने लगा. मैं अपने बेटे को अपनी आगोश में ले रही थी.
मेरा बेटा मेरे होंठ और चुचे चूस रहा था, और नीचे से धक्के मारे जेया रहा था. कुछ देर में मेरे बेटे ने मुझे घोड़ी बनाया, और पीछे से मेरी चुदाई करने लगा. चुदाई का जो मज़ा आज मुझे मेरे बेटे से मिल रहा था, उतना कभी अपने पति से नही मिला था.
कुछ देर बाद जब बेटा झड़ने वाला हुआ, तो मैने उसको अपने अंदर ही झाड़वा लिया. मुझे बहुत सुकून मिला. फिर हम दोनो ऐसे ही नंगे लेट गये, और हमारा कभी ना ख़तम होने वाला चुदाई का रिश्ता शुरू हो गया.