ही फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी अगली बाप-बेटी सेक्स स्टोरी लेके आई हू. मेरी पहले की स्टोरीस को प्यार देने के लिए थॅंक योउ. जिन रीडर्स ने मेरी पिछली कहानियाँ नही पढ़ी है, वो उनको भी ज़रूर पढ़ ले. चलिए बढ़ते है आज की कहानी की तरफ.
पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं 24 साल की हो गयी हू, और मेरा फिगर 34-29-36 है. मैं पुंजब के लुधियाना शहर में रहती हू, और नौकरी करती हू. मुझे देख कर लड़के और मर्द मेरे दीवाने हो जाते है, और मेरी चुदाई करना चाहते है. लेकिन मैं इतनी आसानी से हाथ नही आती.
ये कहानी रखी वाले दिन की है. सुबा का वक़्त था, और सब तैयार हो चुके थे. सबसे पहले मैने अपने भाई को रखी बाँधी, और उसके बाद बुआ ने पापा को रखी बाँधी. फिर हम सब ने नाश्ता किया, और उसके बाद बुआ चली गयी.
मम्मी को भी अपने भाई, यानी मेरे मामा जी को रखी बाँधने जाना था, तो उन्होने अपना समान पॅक किया और भैया को साथ लेके चली गयी. वो दोनो गाड़ी में गये थे. अब घर पर सिर्फ़ मैं और पापा ही रह गये थे.
क्यूंकी रखी थी, तो पापा के काम पर जाने में अभी टाइम था. मैने येल्लो कलर का शाइनिंग वाला सलवार-कमीज़ पहना था, जो मैने रखी के लिए स्पेशली सिलवाया था. उसकी फिटिंग बहुत अची थी, और उसमे मैं बहुत सेक्सी लग रही थी. मेरा गोरा रंग येल्लो ड्रेस में और भी चमक रहा था.
अभी मम्मी को गये तोड़ा टाइम ही हुआ था, की बातरूम में सस्यू करने गयी. वहाँ जाके मैने सलवार और पनटी नीचे की, और टाय्लेट सीट पर बैठ कर मूतने लगी. फिर मैं उठी, और अपनी सलवार का नाडा बाँधा, और बाहर आने लगी.
बातरूम की सफाई आज आचे से नही हुई थी, और वहाँ फर्श पर पानी था. उसी पानी पर मेरा पैर पड़ा, और मैं फिसल कर नीचे गयी. गिरते हुए मैं ज़ोर से चिल्लाई, और मेरी बॅक में चोट लग गयी.
मेरे चिल्लाने की आवाज़ पापा तक चली गयी, और वो जल्दी से बातरूम के बाहर आके पूछे-
पापा: प्रीथनका क्या हुआ?
मैं: पापा, पैर फिसल गया.
पापा: ठीक तो हो? चोट तो नही लगी?
मैं: पापा उठा नही जेया रहा. बॅक में चोट लगी है.
ये सुन कर पापा बातरूम के अंदर आ गये, और मुझे गोद में उठा कर अपने बेडरूम में ले गये. वहाँ पापा ने मुझे बेड पर लिटाया, और पूछने लगे की मुझे कहाँ चोट लगी थी. मैने उनको हाथ से जगह दबा कर दिखाई. मुझे लोवर बॅक पर झटका लगने से दर्द हो रहा था.
फिर पापा ने अपने ड्रेसिंग के ड्रॉयर से मूव की ट्यूब निकली, और मुझे उल्टी होने को कहा. मैं जैसे-तैसे उल्टी हो गयी. उसके बाद उन्होने मेरा कमेज़ उठाया और पीछे से सलवार थोड़ी नीचे की. मुझे ठीक पनटी के उपर वाली जगह पर दर्द हो रहा था.
पापा ने ने हाथ में मूव ली, और वहाँ हल्के हाथो से मालिश करने लगे. मेरे मूह से आ आ की आवाज़े निकल रही थी. मालिश करते हुए पापा ने मेरी पनटी थोड़ी नीचे की, और मेरे चूतड़ तक हाथ ले गये. फिर वो मेरे चूतड़ पर मालिश करने लगे. मुझे समझ नही आ रहा था, की पापा और नीचे क्यूँ जेया रहे थे.
फिर पापा ने पनटी और नीचे कर दी, और मेरी गांद के आधे चियर तक ले आए. इस पर मैने कहा-
मैं: पापा इतनी नीचे चोट नही लगी. बस उपर-उपर ही है.
पापा: कोई बात नही, दर्द नीचे ना चला जाए, इसलिए वहाँ मालिश कर रहा हू.
ये सुन कर मैं चुप हो गयी. फिर अचानक पापा ने मेरी सलवार और पनटी दोनो साथ में मेरे घुटनो तक नीचे खींच दी, और मेरी गांद को पूरा नंगा कर दिया. इससे पहले मैं कुछ समझ पाती, पापा ने मेरी टाँगों पर बैठ कर मेरे चूतड़ खोले, और उनमे अपना मूह डाल कर मेरी छूट चाटने लगे.
मैं बेचैन हो उठी, और उठने की कोशिश करने लगी. लेकिन पापा मेरी टाँगों पर बैठे थे, तो मैं उठ नही पा रही थी. मैने पापा से कहा-
मैं: पापा ये आप क्या कर रहे है. ये ग़लत है. मैं आपकी बेटी हू.
पापा कुछ नही बोले, और बस चाट-ते रहे. मैं अब कुछ समझ नही पा रही थी की क्या करू. उनके चाटने से मुझे गर्मी चढ़ रही थी. अब औरत हू, कितनी देर तक खुद को कंट्रोल रख पाती? तो मैने मज़ा लेते हुए कामुक आवाज़ में आहें भरनी शुरू कर दी.
पापा समझ गये की अब मैं उनकी रांड़ बनने के लिए तैयार थी. फिर पापा ने मेरी सलवार को पनटी मेरी टाँगों से निकाल दी, और खुद भी पूरी नंगे हो गये. मैं वैसी ही लेती हुई उनके अगले मूव का इंतेज़ार करती रही.
नंगे होके पापा फिर से मेरे उपर आए, और मेरी टाँगें खोल कर अपना लंड पीछे से मेरी छूट पर रगड़ने लगे. मैं आ आ कर रही थी. फिर पापा ने दबाव बनाया, और उनके लंड का टोपा मेरी छूट में घुस गया. मेरे मूह से चीख निकली.
ऐसा नही था की मैने पहले चुदाई नही की थी. लेकिन एक तो चुदाई किए को बहुत वक़्त हो गया था, और दूसरा पापा का लंड बहुत मोटा और सख़्त था. इसलिए दर्द हो रहा था छूट में, और चीखें निकल रही थी.
फिर पापा ने तोड़ा लंड और अंदर डाला, और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे. इससे मुझे मज़ा आने लगा, और मैं आ आ करने लगी. मैं भी गांद उठा कर पापा को सपोर्ट करने लगी.
फिर पापा ने अचानक ज़ोर का धक्का मारा, जिससे उनका पूरा लंड मेरी छूट में चला गया. इस बार मेरी सबसे उँची आवाज़ में चीख निकली. उसके बाद पापा मेरे उपर लेट गये, और मेरी चुदाई करने लगे. कुछ देर के दर्द के बाद मुझे बहुत मज़ा आने लगा.
कुछ देर उसी पोज़िशन में छोड़ने के बाद पापा ने मुझे सीधा किया, और मिशनरी पोज़िशन में मुझे तबाद-तोड़ छोड़ने लगे. मेरे कमीज़ और ब्रा को उपर करके उन्होने मेरे रसीले चुचे बाहर निकाल लिए, और साथ में उनको चूसने लगे. मुझे उनकी चुदाई से बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरी छूट पानी-पानी हो रही थी, जिससे छाप-छाप की आवाज़े आ रही थी.
पापा कभी मेरे होंठ चूस्टे, तो कभी गर्दन चूमते, तो कभी बूब्स चूस्टे. इस दौरान नीचे से धक्के जारी रहते. तकरीबन 20 मिनिट मेरी चुदाई की पापा ने. उसके बाद अपना माल मेरे पेट पर निकाल कर बाहर चले गये. मैं वहीं लेती रही.