भोली लड़की का पहला सेक्स

दोस्तों मैं कामिनी, अपनी ऑफीस सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. अगर नही पढ़ा है, तो कोई बात नही, अभी पढ़ लीजिए.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा जब मैं नयी-नयी ऑफीस जाय्न की थी, तो मुझे विक्रम सिर को असिस्ट करना था. उनकी पर्सनॅलिटी से इंप्रेस हो कर मैं उनको पसंद करने लगी. फिर एक डील के लिए हम दोनो शिमला गये, और रास्ते में मैने उनको अपने प्यार का इज़हार किया. तभी उन्होने गाड़ी रोकी, और हम किस करने लगे. अब आयेज-

विक्रम सिर मज़े से मेरे होंठ चूस रहे थे. मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी. ये मेरी लाइफ की पहली किस थी, और मैं इसको बड़ा एंजाय कर रही थी. मेरे बॉडी में करेंट उठ रहा था, और वो करेंट मेरी छूट से उठ रहा था. मुझे अपनी छूट पर कुछ ऐसी फीलिंग आ रही थी, जैसी पहले कभी नही आई.

तभी किस करते हुए विक्रम सिर मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगे. इससे मुझे और मज़ा आने लगा. धीरे-धीरे उनका हाथ मेरी लेग्स पर आ गया, और वो जीन्स के उपर से मेरी जांघों को दबाने लगे.

फिर अचानक वो अपना हाथ मेरी लेग्स के बीच में ले गये, और मेरी छूट पर प्रेशर डालने लगे. मैं तो इससे पागल सी हो गयी. मेरे बदन में कपकपि छाने लगी, और मेरी छूट पानी छ्चोढने लगी. मुझे लगा कहीं पानी विक्रम के हाथ पर ना लग जाए, तो मैने उनके हाथ को पीछे कर दिया. ये देख कर सिर बोले-

विक्रम: क्या हुआ कामिनी?

मैं: कुछ नही.

विक्रम: तुम्हे अछा नही लगा?

मैं: नही, ऐसी बात नही है. मुझे बहुत अछा लगा. लेकिन…

विक्रम: लेकिंग क्या?

मैं: वो नीचे गीला हो गया है, तो कहीं आपका हाथ गंदा ना हो जाए.

विक्रम (हेस्ट हुए): अछा, तो तुम्हारा जूस निकला है. लाओ चेक करे.

ये बोल कर वो हाथ फिर से छूट पर ले जाने लगे. लेकिन मैने उनको रोक दिया और बोली-

मैं: नही, शिमला जेया कर करेंगे जो करना है. अभी नही.

विक्रम: ठीक है, जैसा तुम कहो मी लोवे.

फिर हम ऐसे ही रोमॅंटिक बातें करते हुए आयेज बढ़ते गये. मेरी नज़र उनकी पंत में खड़े उनके लंड पर बार-बार जेया रही थी. उसको देख कर मुझे कुछ-कुछ हो रहा था. आज तक मैने किसी आदमी का लंड नही देखा था रिलिटी में. सिर पॉर्न में देखा था. आज मुझे उनका लंड देखने की तलब हो रही थी.

कुछ घंटो बाद हम शिमला पहुँच गये. वहाँ होटेल में पहुँच कर हमने चेक-इन किया. मैं सबसे पहले बातरूम में जाके फ्रेश हुई. मैने पनटी उतरी, तो उस पर मेरी छूट से निकला सफेद पानी लगा हुआ था. फिर मैने अपनी छूट आचे से सॉफ की, और नयी पनटी पहन ली.

उसके बाद मैं बाहर आई, और विक्रम सिर फ्रेश होने चले गये. उनके आने के बाद हम डिन्नर करने रेस्टोरेंट में गये. वहाँ हमने डिन्नर किया. खाना बहुत अछा था. खाने के बाद हम होटेल के गार्डेन में घूमने लगे.

वहाँ पर आइस क्रीम का स्टॉल लगा हुआ था. वहाँ से सिर 2 आइस क्रीम कोन्स लेके आए. दोनो अलग फ्लेवर के थे. हम कोन्स खाने लगे, तो मैने सिर को उनका फ्लेवर टेस्ट करने के लिए कहा. तभी सिर ने कुछ ऐसा किया, जो मैने एक्सपेक्ट नही किया था.

सिर ने अपने मूह में आइस क्रीम ली, और जीभ बाहर निकाल कर मुझे टेस्ट करने को कहा. उनकी इस हरकत ने मुझे उत्तेजित कर दिए. पहले मैने आस-पास देखा की कोई हमे देख तो नही रहा था. फिर मैं आयेज बढ़ी, और उनके मूह में मूह डाल कर उनकी जीभ से आइस क्रीम ले ली.

इसके साथ ही हम दोनो की किस्सिंग शुरू हो गयी. बाहों में बाहें डाल कर हम एक-दूसरे से चिपक गये. हमारे बदन एक-दूसरे के बदन को महसूस कर पा रहे थे. मेरे बूब्स सिर की चेस्ट में डाबब रहे थे. उनके हाथ मेरी पीठ पर फिर रहे थे. और हमारी कामुक किस्सिंग चल रही थी.

वो अपने हाथ धीरे-धीरे मेरी गांद पर ले गये, और मेरे चूतड़ दबा दिए. इससे मेरे मूह से सिसकियाँ निकालने लगी. उन्होने अपना हाथ गांद के सेंटर में लेके जाके गांद के चियर पर दबाव डाला. इससे मैं उपर की तरफ हो गयी, और मुझे बहुत मज़ा आया.

कुछ देर की किस्सिंग ने मुझे पूरी तरह गरम कर दिया. फिर विक्रम ने किस तोड़ी, और मेरी आँखों में देखते हुए बोला-

विक्रम: चले रूम में?

मैं समझ रही थी की आज रूम में जाके क्या होने वाला था. मैं भी इसको लेके बड़ी एग्ज़ाइटेड थी. आज मेरी कुवारि छूट की सील टूटने वाली थी, और मैं जिससे मोहोब्बत करती थी, उसकी होने जेया रही थी.

फिर हम रूम की तरफ चल दिए. रूम में जाके मैं चुप-छाप खड़ी हो गयी, और अपना सर झुका लिया. विक्रम ने दरवाज़ा बंद किया, और मेरे करीब आया. उसने मेरी ठुड्डी पे हाथ रख के मेरे चेहरे को उपर उठाया, और ई लोवे योउ बोला. मैने भी उसको ई लोवे योउ टू बोला.

हमारे होंठ करीब आए, और एक बार फिर से मिल गये. कुछ ही सेकेंड्स में हमारी किस वाइल्ड हो गयी. विक्रम ने फिर मेरे होंठ छ्चोढे, और मेरी गर्दन पर किस करने लगा. उसके होंठो का मेरी गर्दन पर स्पर्श मुझे मदहोश करने लगा. मेरे मूह से आ आ की आवाज़े निकलनी शुरू हो गयी, और मेरी साँसें तेज़ हो गयी.

फिर विक्रम ने मेरी त-शर्ट उपर की. मैने अपनी बाहें उपर की, और उसने मेरी त-शर्ट निकाल दी. अब उपर से मैं सिर्फ़ ब्लॅक ब्रा में थी. विक्रम ने 2 सेकेंड्स तक मेरी नज़र से नज़र मिलाई, और फिर मेरी क्लीवेज चूमने लगा. उसने एक हाथ ब्रा के उपर से मेरे बूब पर रखा, और उसको दबाने लग गया.

मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था. फिर उसने ब्रा नीचे खींच कर बूब बाहर निकाल लिया, और निपल को अपने मूह में लेके चूसने लगा. ये एक अलग ही एहसास था. उसके निपल चूसने से बूब में से करेंट सा निकलता, जो सीधे छूट की तरफ जेया रहा था.

फिर वो मेरे पीछे गया, और ब्रा का हुक निकाल कर उसको मेरे जिस्म से अलग कर दिया. अब मैं उपर से नंगी थी. उसके बाद उसने मुझे खींच कर बेड पर लिटा दिया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. यहाँ तक की कहानी के लिए अपनी फीडबॅक आप औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर दे सकते है.

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